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  <title>MU Darpan - Stay Updated with News, Blogs and Web Story</title>
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  <updated>2026-06-09T13:46:52Z</updated>
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    <title>मणिपुर विश्वविद्यालय में लोकतक फुमदी बायोमास को हरित ऊर्जा में बदलने पर राष्ट्रीय परियोजना की बैठक</title>
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    <author>
      <name>Naorem Mohen</name>
    </author>
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    <updated>2026-06-09T13:46:52Z</updated>
    <content type="html">&lt;p class="isSelectedEnd"&gt;&lt;strong&gt;&lt;img src="https://www.mudarpan.in/view/june-2026/consultative-meeting-for-phumdi-at-mu.jpg"&gt;&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;
&lt;p class="isSelectedEnd"&gt;&lt;strong&gt;इंफाल, 8 जून 2026।&lt;/strong&gt; पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय (MoEFCC), भारत सरकार द्वारा प्रायोजित परियोजना &lt;strong&gt;&amp;ldquo;मणिपुर में आजीविका संवर्धन हेतु लोकतक झील की फुमदी बायोमास का हरित ऊर्जा, बायोचार और विनेगर में सतत रूपांतरण&amp;rdquo;&lt;/strong&gt; के तहत पहली परामर्श बैठक सोमवार को मणिपुर विश्वविद्यालय, कंचीपुर में आयोजित की गई।&lt;/p&gt;
&lt;p class="isSelectedEnd"&gt;इस परियोजना का समन्वयन मणिपुर विश्वविद्यालय के वनस्पति विज्ञान विभाग के प्रोफेसर क्षे. लाल बिहारी द्वारा किया जा रहा है। परियोजना का उद्देश्य लोकतक झील में मौजूद फुमदी (तैरते जैविक द्वीपों) के वैज्ञानिक प्रबंधन के साथ-साथ उन्हें उपयोगी उत्पादों में परिवर्तित कर स्थानीय समुदायों के लिए सतत आजीविका के अवसर विकसित करना है।&lt;/p&gt;
&lt;p class="isSelectedEnd"&gt;कार्यक्रम में मणिपुर विश्वविद्यालय की कार्यवाहक कुलपति प्रो. सुमित्रा फंजौबम ने संरक्षक के रूप में भाग लिया। बिष्णुपुर जिले की उपायुक्त स्मृति पूजा एलांगबम (आईएएस) मुख्य अतिथि तथा लोकतक विकास प्राधिकरण के निदेशक एच. बालकृष्ण सिंह (एमसीएस) विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित रहे।&lt;/p&gt;
&lt;p class="isSelectedEnd"&gt;बैठक में जीवन विज्ञान संकाय के अधिष्ठाता प्रो. एन. मोहिलाल मेइतेई, विश्वविद्यालय के कुलसचिव प्रो. एम. प्रेमजीत सिंह, विश्वविद्यालय अभियंता, परियोजना अधिकारी, सह-अन्वेषक, कार्यान्वयन सहयोगी संस्थाओं के प्रतिनिधि तथा परियोजना कर्मियों ने भाग लिया।&lt;/p&gt;
&lt;p class="isSelectedEnd"&gt;परामर्श बैठक के दौरान पायलट परियोजना के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए विभिन्न रणनीतियों पर विस्तृत चर्चा की गई। प्रतिभागियों ने लोकतक झील के पारिस्थितिक संरक्षण के साथ-साथ फुमदी बायोमास के उत्पादक उपयोग के माध्यम से आजीविका सृजन को बढ़ावा देने के उपायों पर विचार-विमर्श किया। चर्चा में परिपत्र अर्थव्यवस्था (Circular Economy) की अवधारणा को परियोजना के केंद्र में रखने पर बल दिया गया।&lt;/p&gt;
&lt;p class="isSelectedEnd"&gt;परियोजना सलाहकार प्रो. बी.के. तिवारी सहित अन्य विशेषज्ञों और हितधारकों ने भी अपने सुझाव प्रस्तुत किए। वक्ताओं ने इस बात पर जोर दिया कि पर्यावरणीय चुनौतियों से निपटने और सतत विकास को बढ़ावा देने के लिए शैक्षणिक संस्थानों, सरकारी एजेंसियों तथा स्थानीय समुदायों के बीच सहयोग अत्यंत आवश्यक है।&lt;/p&gt;
&lt;p class="isSelectedEnd"&gt;यह परियोजना एक बहु-संस्थागत साझेदारी के तहत संचालित की जा रही है, जिसमें मणिपुर विश्वविद्यालय, राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान (NIT) नागालैंड, लोकतक विकास प्राधिकरण, कांगलेई एनवायरनमेंट एंड लाइवलीहुड फाउंडेशन तथा सोसाइटी फॉर ईको-रेस्टोरेशन एंड लाइवलीहुड शामिल हैं।&lt;/p&gt;
&lt;p class="isSelectedEnd"&gt;परियोजना के प्रधान अन्वेषक (PI) प्रो. क्षे. लाल बिहारी सिंघा हैं। सह-प्रधान अन्वेषकों में मणिपुर विश्वविद्यालय के पर्यावरण विज्ञान विभाग के डॉ. के. खेलचंद्र सिंह, एनआईटी नागालैंड के यांत्रिक अभियांत्रिकी विभाग के डॉ. थ. जैक्सन सिंह तथा आईसीएआर, इंफाल के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. टी. बसंता सिंह शामिल हैं। यह टीम पर्यावरण विज्ञान, इंजीनियरिंग, कृषि और सामुदायिक आजीविका विकास जैसे विविध क्षेत्रों की विशेषज्ञता को एक मंच पर ला रही है।&lt;/p&gt;
&lt;p&gt;परियोजना से यह उम्मीद की जा रही है कि लोकतक झील के प्रबंधन में चुनौती मानी जाने वाली फुमदी को हरित ऊर्जा, बायोचार और बायो-विनेगर जैसे मूल्यवान उत्पादों में परिवर्तित कर पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ राज्य के सामाजिक और आर्थिक विकास में भी महत्वपूर्ण योगदान दिया जा सकेगा।&lt;/p&gt;</content>
    <summary type="html">&lt;p&gt;मणिपुर विश्वविद्यालय में लोकतक झील की फुमदी बायोमास को हरित ऊर्जा, बायोचार और बायो-विनेगर में बदलने संबंधी MoEFCC समर्थित परियोजना की पहली परामर्श बैठक आयोजित हुई। विशेषज्ञों ने सतत आजीविका और पर्यावरण संरक्षण पर चर्चा की।&lt;/p&gt;&lt;br/&gt;&lt;img src="https://www.mudarpan.in/view/june-2026/consultative-meeting-for-phumdi-at-mu.jpg"/&gt;</summary>
  </entry>
  <entry>
    <title>विश्व पर्यावरण दिवस 2026: मणिपुर विश्वविद्यालय में ‘मिशन लाइफ’ के तहत वृक्षारोपण और जागरूकता कार्यक्रम आयोजित</title>
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      <name>Naorem Mohen</name>
    </author>
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    <updated>2026-06-06T04:25:35Z</updated>
    <content type="html">&lt;p&gt;&lt;img src="https://www.mudarpan.in/view/june-2026/ek-ped-maa-ke-naam-in-mu-2026.jpg"&gt;&amp;nbsp;&lt;/p&gt;
&lt;p data-start="969" data-end="1313"&gt;&lt;strong data-start="969" data-end="991"&gt;इंफाल, 5 जून 2026:&lt;/strong&gt; मणिपुर विश्वविद्यालय के पर्यावरण विज्ञान विभाग और राष्ट्रीय सेवा योजना (NSS) सेल ने शुक्रवार को विश्व पर्यावरण दिवस 2026 के अवसर पर &amp;ldquo;मिशन लाइफ: लाइफस्टाइल फॉर एनवायरमेंट&amp;rdquo; थीम के तहत एक विशेष कार्यक्रम का आयोजन किया। यह कार्यक्रम सुबह 9 बजे विश्वविद्यालय परिसर के मानव विज्ञान (Anthropology) विभाग के पीछे आयोजित किया गया।&lt;/p&gt;
&lt;p data-start="1315" data-end="1604"&gt;कार्यक्रम का आयोजन भारत सरकार के युवा कार्यक्रम एवं खेल मंत्रालय तथा पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के मार्गदर्शन में किया गया। इसका उद्देश्य छात्रों और समाज के विभिन्न वर्गों में पर्यावरणीय जिम्मेदारी की भावना विकसित करना तथा सतत एवं पर्यावरण-अनुकूल जीवनशैली को बढ़ावा देना था।&lt;/p&gt;
&lt;p data-start="1606" data-end="1786"&gt;इस कार्यक्रम का नेतृत्व पर्यावरण विज्ञान विभाग के विभागाध्यक्ष &lt;strong data-start="1669" data-end="1696"&gt;प्रो. आर. एस. खोइयांगबम&lt;/strong&gt; और मणिपुर विश्वविद्यालय NSS सेल के कार्यक्रम समन्वयक &lt;strong data-start="1750" data-end="1777"&gt;प्रो. लैश्रम संतोष सिंह&lt;/strong&gt; ने किया।&lt;/p&gt;
&lt;p data-start="1788" data-end="2089"&gt;कार्यक्रम में मणिपुर विश्वविद्यालय की कार्यवाहक कुलपति &lt;strong data-start="1843" data-end="1868"&gt;प्रो. सुमित्रा फंजौबम&lt;/strong&gt;, कुलसचिव &lt;strong data-start="1878" data-end="1905"&gt;प्रो. एम. प्रेमजीत सिंह&lt;/strong&gt;, वित्त अधिकारी &lt;strong data-start="1921" data-end="1956"&gt;प्रो. लैश्रम राजेंद्रकुमार सिंह&lt;/strong&gt;, परीक्षा नियंत्रक &lt;strong data-start="1975" data-end="1998"&gt;टी. शांतिकुमार सिंह&lt;/strong&gt; तथा विश्वविद्यालय अभियंता &lt;strong data-start="2025" data-end="2048"&gt;ईआर. एन. थोइबा सिंह&lt;/strong&gt; गणमान्य अतिथियों के रूप में उपस्थित रहे।&lt;/p&gt;
&lt;p data-start="2091" data-end="2414"&gt;स्वागत भाषण देते हुए प्रो. लैश्रम संतोष सिंह ने विश्व पर्यावरण दिवस के महत्व पर प्रकाश डाला और कहा कि पर्यावरण संरक्षण केवल सरकारों की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि प्रत्येक नागरिक का नैतिक दायित्व है। उन्होंने युवाओं से प्रकृति के प्रति संवेदनशील बनने और पर्यावरणीय चुनौतियों से निपटने में सक्रिय भूमिका निभाने का आह्वान किया।&lt;/p&gt;
&lt;p data-start="2416" data-end="2807"&gt;अपने संबोधन में कार्यवाहक कुलपति प्रो. सुमित्रा फंजौबम ने विश्व पर्यावरण दिवस की प्रासंगिकता पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने कहा कि &amp;ldquo;मिशन लाइफ&amp;rdquo; पहल युवाओं को पर्यावरण संरक्षण के लिए प्रेरित करने का एक महत्वपूर्ण माध्यम है। उन्होंने विद्यार्थियों और स्वयंसेवकों से पर्यावरण-अनुकूल जीवनशैली अपनाने तथा आने वाली पीढ़ियों के लिए स्वच्छ और हरित वातावरण सुनिश्चित करने में योगदान देने की अपील की।&lt;/p&gt;
&lt;h2 data-section-id="19dso3c" data-start="2809" data-end="2861"&gt;&amp;lsquo;एक पेड़ मां के नाम&amp;rsquo; अभियान के तहत हुआ वृक्षारोपण&lt;/h2&gt;
&lt;p data-start="2863" data-end="3046"&gt;कार्यक्रम के अंतर्गत पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय द्वारा चलाए जा रहे &lt;strong data-start="2945" data-end="2969"&gt;&amp;lsquo;एक पेड़ मां के नाम&amp;rsquo;&lt;/strong&gt; अभियान के समर्थन में विश्वविद्यालय परिसर में वृक्षारोपण अभियान भी चलाया गया।&lt;/p&gt;
&lt;p data-start="3048" data-end="3356"&gt;इस दौरान मंचासीन अतिथियों, विभिन्न विभागों के अध्यक्षों, शिक्षकों, NSS कार्यक्रम अधिकारियों, स्वयंसेवकों तथा विद्यार्थियों ने पौधारोपण कर पर्यावरण संरक्षण के प्रति अपनी प्रतिबद्धता व्यक्त की। प्रतिभागियों ने हरित एवं स्वच्छ भविष्य के निर्माण के लिए अधिक से अधिक पेड़ लगाने और उनकी देखभाल करने का संकल्प लिया।&lt;/p&gt;
&lt;p data-start="3358" data-end="3557"&gt;कार्यक्रम में बड़ी संख्या में विद्यार्थियों और NSS स्वयंसेवकों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। आयोजन के दौरान पर्यावरण संरक्षण, जैव विविधता के महत्व तथा सतत विकास से जुड़े विभिन्न विषयों पर भी चर्चा की गई।&lt;/p&gt;
&lt;p data-start="3559" data-end="3862"&gt;समापन अवसर पर पर्यावरण विज्ञान विभाग के विभागाध्यक्ष प्रो. आर. एस. खोइयांगबम ने धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत किया। उन्होंने कार्यक्रम को सफल बनाने में योगदान देने वाले सभी प्रतिभागियों, स्वयंसेवकों और अधिकारियों का आभार व्यक्त किया तथा सभी से अपने दैनिक जीवन में पर्यावरण-अनुकूल व्यवहार अपनाने का आग्रह किया।&lt;/p&gt;
&lt;p data-start="3864" data-end="4091" data-is-last-node="" data-is-only-node=""&gt;कार्यक्रम के अंत में प्रतिभागियों को हल्का जलपान भी परोसा गया। यह आयोजन पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूकता बढ़ाने और समाज में हरित जीवनशैली को प्रोत्साहित करने की दिशा में मणिपुर विश्वविद्यालय का एक महत्वपूर्ण प्रयास साबित हुआ।&lt;/p&gt;</content>
    <summary type="html">&lt;p&gt;विश्व पर्यावरण दिवस 2026 पर मणिपुर विश्वविद्यालय के पर्यावरण विज्ञान विभाग और NSS सेल ने ‘मिशन लाइफ: लाइफस्टाइल फॉर एनवायरमेंट’ थीम के तहत वृक्षारोपण एवं जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया। छात्रों और स्वयंसेवकों ने पर्यावरण संरक्षण का संकल्प लिया।&lt;/p&gt;&lt;br/&gt;&lt;img src="https://www.mudarpan.in/view/june-2026/wed-by-nss.jpg"/&gt;</summary>
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    <title>मणिपुर विश्वविद्यालय ने मनाया 46वां स्थापना एवं सम्मान दिवस, शिक्षकों और कर्मचारियों को किया सम्मानित</title>
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      <name>Naorem Mohen</name>
    </author>
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    <updated>2026-06-06T04:06:32Z</updated>
    <content type="html">&lt;p&gt;&lt;img src="https://www.mudarpan.in/view/june-2026/fecilitating-the-teachers-during-foundation-day-cum-commendation-day-of-mu.jpg"&gt;&amp;nbsp;&lt;/p&gt;
&lt;p data-start="985" data-end="1446"&gt;&lt;strong data-start="985" data-end="1007"&gt;इंफाल, 5 जून 2026:&lt;/strong&gt; मणिपुर विश्वविद्यालय ने शुक्रवार को अपने 46वें स्थापना-सह-सम्&amp;zwj;मान दिवस (Foundation-cum-Commendation Day) का आयोजन विश्वविद्यालय के कोर्ट हॉल में गरिमामय एवं उत्साहपूर्ण वातावरण में किया। यह समारोह विश्वविद्यालय की चार दशक से अधिक की शैक्षणिक यात्रा, संस्थागत उपलब्धियों और समाज के प्रति उसके योगदान का उत्सव था। इस अवसर पर शिक्षकों एवं कर्मचारियों को शिक्षा, शोध, नवाचार, पेटेंट और संस्थान के प्रति उत्कृष्ट सेवा के लिए सम्मानित किया गया।&lt;/p&gt;
&lt;p data-start="1448" data-end="1828"&gt;मणिपुर विश्वविद्यालय की स्थापना 5 जून 1980 को मणिपुर विश्वविद्यालय अधिनियम, 1980 के अंतर्गत मात्र 10 स्नातकोत्तर विभागों के साथ हुई थी। समय के साथ यह पूर्वोत्तर भारत के प्रमुख उच्च शिक्षण संस्थानों में से एक बनकर उभरा है। 13 अक्टूबर 2005 को इसे केंद्रीय विश्वविद्यालय का दर्जा प्राप्त हुआ। वर्तमान में विश्वविद्यालय में 9 स्कूल ऑफ स्टडीज, 47 विभाग, 7 केंद्र और 10 सेल कार्यरत हैं।&lt;/p&gt;
&lt;p data-start="1830" data-end="2066"&gt;शैक्षणिक सत्र 2025-26 में विश्वविद्यालय में 6,453 विद्यार्थियों ने प्रवेश लिया है तथा इसके अधीन 129 संबद्ध महाविद्यालय संचालित हो रहे हैं। विश्वविद्यालय को NAAC द्वारा B+ ग्रेड प्राप्त है और यह NIRF रैंकिंग के 101-150 बैंड में शामिल है।&lt;/p&gt;
&lt;p data-start="2068" data-end="2290"&gt;कार्यक्रम में कुलपति &lt;strong data-start="2089" data-end="2114"&gt;प्रो. सुमित्रा फंजौबम&lt;/strong&gt; मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहीं, जबकि कुलसचिव &lt;strong data-start="2165" data-end="2192"&gt;प्रो. एम. प्रेमजीत सिंह&lt;/strong&gt; विशिष्ट अतिथि थे। समारोह की अध्यक्षता स्कूल ऑफ इंजीनियरिंग के डीन &lt;strong data-start="2259" data-end="2283"&gt;प्रो. एन. बसंता सिंह&lt;/strong&gt; ने की।&lt;/p&gt;
&lt;p data-start="2068" data-end="2290"&gt;&lt;img src="https://www.mudarpan.in/view/june-2026/mu-foundation-day.jpg"&gt;&lt;/p&gt;
&lt;p data-start="2292" data-end="2592"&gt;अपने संबोधन में कुलपति प्रो. सुमित्रा फंजौबम ने कहा कि विश्वविद्यालय की उपलब्धियां शिक्षकों, प्रशासनिक अधिकारियों और सहायक कर्मचारियों के सामूहिक प्रयासों का परिणाम हैं। उन्होंने कहा कि विभिन्न चुनौतियों के बावजूद विश्वविद्यालय ने विद्यार्थियों के समग्र विकास और संस्थागत प्रगति को सुनिश्चित किया है।&lt;/p&gt;
&lt;p data-start="2594" data-end="2953"&gt;उन्होंने परीक्षा अनुभाग की सराहना करते हुए कहा कि परीक्षाओं का आयोजन शैक्षणिक कैलेंडर के अनुरूप सफलतापूर्वक किया गया। साथ ही वित्त एवं शैक्षणिक अनुभागों के सुचारु संचालन तथा विभागाध्यक्षों द्वारा शैक्षणिक नियमों के प्रभावी क्रियान्वयन की भी प्रशंसा की। उन्होंने विश्वविद्यालय समुदाय से उत्कृष्टता और सतत विकास की दिशा में मिलकर कार्य करते रहने का आह्वान किया।&lt;/p&gt;
&lt;p data-start="2955" data-end="3294"&gt;कुलसचिव प्रो. एम. प्रेमजीत सिंह ने विश्वविद्यालय प्रशासन, शिक्षकों, कर्मचारियों और विद्यार्थियों को बधाई देते हुए कहा कि विश्वविद्यालय की प्रगति प्रशासन, शिक्षकों और विद्यार्थियों के समर्पण, त्याग और कठिन परिश्रम पर आधारित है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि इसी प्रतिबद्धता के साथ विश्वविद्यालय भविष्य में और भी ऊंचाइयों को प्राप्त करेगा।&lt;/p&gt;
&lt;p data-start="3296" data-end="3795"&gt;कार्यक्रम का स्वागत एवं मुख्य भाषण आंतरिक गुणवत्ता आश्वासन प्रकोष्ठ (IQAC) के निदेशक &lt;strong data-start="3381" data-end="3406"&gt;प्रो. ए. राजमणि सिंघा&lt;/strong&gt; ने दिया। उन्होंने विश्वविद्यालय की स्थापना से लेकर वर्तमान तक की विकास यात्रा और प्रमुख उपलब्धियों पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि शोध, प्रकाशन, नवाचार और पेटेंट किसी भी विश्वविद्यालय की राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय पहचान को मजबूत बनाते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि NAAC और NIRF जैसी रैंकिंग महत्वपूर्ण हैं, लेकिन किसी विश्वविद्यालय की वास्तविक शक्ति उसके शोध और ज्ञान सृजन में निहित होती है।&lt;/p&gt;
&lt;p data-start="3797" data-end="4036"&gt;अध्यक्षीय संबोधन में प्रो. एन. बसंता सिंह ने शोध, नवाचार और शैक्षणिक उत्कृष्टता के लिए सम्मानित शिक्षकों को बधाई दी। साथ ही सेवानिवृत्त शिक्षकों और कर्मचारियों की दीर्घकालीन सेवाओं को स्मरण करते हुए उनके स्वस्थ एवं सुखद भविष्य की कामना की।&lt;/p&gt;
&lt;p data-start="4038" data-end="4162"&gt;कार्यक्रम का समापन विश्वविद्यालय के वरिष्ठ सहायक कुलसचिव (फैकल्टी) &lt;strong data-start="4105" data-end="4119"&gt;अनिसुल आलम&lt;/strong&gt; द्वारा प्रस्तुत धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ।&lt;/p&gt;
&lt;h2 data-section-id="j0ss7m" data-start="4164" data-end="4185"&gt;स्मारिका का विमोचन&lt;/h2&gt;
&lt;p data-start="4187" data-end="4417"&gt;समारोह के दौरान जनसंपर्क अधिकारी (PRO) कार्यालय द्वारा प्रकाशित एक स्मारिका का भी औपचारिक विमोचन किया गया। इस स्मारिका में विश्वविद्यालय की प्रमुख उपलब्धियों, महत्वपूर्ण मील के पत्थरों और शैक्षणिक प्रगति का विस्तृत विवरण शामिल है।&lt;/p&gt;
&lt;p data-start="4419" data-end="4893"&gt;स्मारिका में उल्लेख किया गया है कि विश्वविद्यालय ने शैक्षणिक सत्र 2021-22 से राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 को अपनाने वाले अग्रणी संस्थानों में स्थान प्राप्त किया। लगभग 80 प्रतिशत विद्यार्थियों को Academic Bank of Credits (ABC) ढांचे के अंतर्गत पंजीकृत किया गया है। इसके अतिरिक्त चार वर्षीय स्नातक कार्यक्रम (FYUP) के सफल कार्यान्वयन, विभागीय उपलब्धियों, संकाय सदस्यों की सफलताओं, विद्यार्थियों की उपलब्धियों तथा विभिन्न शोध एवं नवाचार परियोजनाओं का भी उल्लेख किया गया है।&lt;/p&gt;
&lt;h2 data-section-id="4ldpan" data-start="4895" data-end="4962"&gt;राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सम्मानित शिक्षकों का अभिनंदन&lt;/h2&gt;
&lt;p data-start="4964" data-end="5140"&gt;समारोह का एक प्रमुख आकर्षण उन शिक्षकों का सम्मान था जिन्हें वर्ष 2024-25 के दौरान राज्य, राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रतिष्ठित पुरस्कार, सम्मान और फेलोशिप प्राप्त हुईं।&lt;/p&gt;
&lt;p data-start="5142" data-end="5174"&gt;सम्मानित शिक्षकों में शामिल हैं:&lt;/p&gt;
&lt;ul data-start="5176" data-end="5935"&gt;
&lt;li data-section-id="1x7siv9" data-start="5176" data-end="5295"&gt;डॉ. रमेशोरी युमनाम (प्राणी विज्ञान विभाग) &amp;ndash; Congress of Zoology Medal 2024 एवं Young Scientist Gold Medal Award 2025।&lt;/li&gt;
&lt;li data-section-id="z0vpos" data-start="5296" data-end="5451"&gt;प्रो. डॉ. लैश्रम संतोष सिंह (शारीरिक शिक्षा एवं खेल विज्ञान विभाग) &amp;ndash; Peace and Sports Award 2025 तथा International Imminence Award in Physical Education।&lt;/li&gt;
&lt;li data-section-id="z9wall" data-start="5452" data-end="5579"&gt;प्रो. डॉ. के. लाल बिहारी सिंघा (वनस्पति विज्ञान विभाग) &amp;ndash; ESDA India Fellow तथा Lifetime Achievement Earth Saviour Award 2024।&lt;/li&gt;
&lt;li data-section-id="1pmfqx0" data-start="5580" data-end="5741"&gt;डॉ. पुखरामबाम लीलाबती देवी (नृत्य एवं संगीत विभाग) &amp;ndash; मणिपुर राज्य कला अकादमी युवा प्रतिभा पुरस्कार तथा प्रसार भारती द्वारा टॉप ग्रेड कलाकार के रूप में मान्यता।&lt;/li&gt;
&lt;li data-section-id="1v5mz1u" data-start="5742" data-end="5837"&gt;डॉ. सलाम हिमिका देवी (प्राणी विज्ञान विभाग) &amp;ndash; Excellence in Global Skill Training Award 2025।&lt;/li&gt;
&lt;li data-section-id="jcftyy" data-start="5838" data-end="5935"&gt;प्रो. डॉ. केथेल्लाकपम सनातोम्बी (जैव प्रौद्योगिकी विभाग) &amp;ndash; Women Leadership in STEM Award 2024।&lt;/li&gt;
&lt;/ul&gt;
&lt;h2 data-section-id="1v787u" data-start="5937" data-end="5976"&gt;पेटेंट और नवाचारों को भी मिला सम्मान&lt;/h2&gt;
&lt;p data-start="5978" data-end="6071"&gt;वर्ष 2024-25 के दौरान प्रकाशित अथवा स्वीकृत पेटेंटों के लिए कई शिक्षकों को सम्मानित किया गया।&lt;/p&gt;
&lt;p data-start="6073" data-end="6093"&gt;इनमें प्रमुख रूप से:&lt;/p&gt;
&lt;ul data-start="6095" data-end="6572"&gt;
&lt;li data-section-id="1tgsch5" data-start="6095" data-end="6209"&gt;प्रो. डॉ. लिसाम शंजुकुमार सिंह एवं डॉ. थांगजम डेविस सिंह &amp;ndash; कैंसर रोधी संरचना (Anticancer Composition) पर पेटेंट।&lt;/li&gt;
&lt;li data-section-id="61y061" data-start="6210" data-end="6346"&gt;प्रो. डॉ. के. लाल बिहारी सिंघा &amp;ndash; कृषि अवशेषों से बायोचार एवं सिरका उत्पादन तथा बांस एवं लकड़ी आधारित पायरोलिसिस मशीन संबंधी दो पेटेंट।&lt;/li&gt;
&lt;li data-section-id="1mctb6q" data-start="6347" data-end="6429"&gt;प्रो. डॉ. लैश्रम संतोष सिंह &amp;ndash; Neuromuscular Monitoring and Stimulating Headband।&lt;/li&gt;
&lt;li data-section-id="1fspozy" data-start="6430" data-end="6512"&gt;डॉ. टी. दीपमांजुरी देवी &amp;ndash; Histological Hard Tissue Bordering and Sealing System।&lt;/li&gt;
&lt;li data-section-id="1s10d6h" data-start="6513" data-end="6572"&gt;डॉ. सैकत मुखर्जी &amp;ndash; PCR एवं Gel Electrophoresis Apparatus।&lt;/li&gt;
&lt;/ul&gt;
&lt;h2 data-section-id="8gzgri" data-start="6574" data-end="6610"&gt;सेवानिवृत्त कर्मचारियों का सम्मान&lt;/h2&gt;
&lt;p data-start="6612" data-end="6745"&gt;कार्यक्रम के दौरान विश्वविद्यालय की दीर्घकालीन सेवा देने वाले सेवानिवृत्त शिक्षकों और गैर-शिक्षण कर्मचारियों को भी सम्मानित किया गया।&lt;/p&gt;
&lt;p data-start="6747" data-end="6937"&gt;सम्मानित सेवानिवृत्त शिक्षकों में प्रोफेसर सोइबाम इमोबा सिंह (भाषाविज्ञान विभाग), डॉ. थ. तंगकेश्वर सिंह (कंप्यूटर विज्ञान विभाग) तथा प्रोफेसर कोईजाम शांतिबाला देवी (मणिपुरी विभाग) शामिल रहे।&lt;/p&gt;
&lt;p data-start="6939" data-end="7126"&gt;इसके अतिरिक्त प्रशासनिक अधिकारियों, चपरासियों और सफाई कर्मचारियों सहित 12 सेवानिवृत्त गैर-शिक्षण कर्मचारियों को भी विश्वविद्यालय की प्रगति में उनके अमूल्य योगदान के लिए सम्मानित किया गया।&lt;/p&gt;
&lt;p data-start="7128" data-end="7467" data-is-last-node="" data-is-only-node=""&gt;46वां स्थापना-सह-सम्&amp;zwj;मान दिवस समारोह गर्व, उपलब्धियों और भविष्य के प्रति आशावाद के साथ संपन्न हुआ। इस अवसर पर मणिपुर विश्वविद्यालय ने शिक्षा, शोध, नवाचार और राष्ट्र निर्माण के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को दोहराते हुए उन व्यक्तियों के योगदान को सम्मानित किया, जिन्होंने संस्थान की गौरवशाली विरासत को सशक्त बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।&lt;/p&gt;</content>
    <summary type="html">&lt;p&gt;मणिपुर विश्वविद्यालय ने अपना 46वां स्थापना एवं सम्मान दिवस समारोह भव्य रूप से मनाया। कार्यक्रम में शिक्षकों, शोधकर्ताओं और सेवानिवृत्त कर्मचारियों को सम्मानित किया गया तथा विश्वविद्यालय की उपलब्धियों को रेखांकित किया गया।&lt;/p&gt;&lt;br/&gt;&lt;img src="https://www.mudarpan.in/view/june-2026/fecilitating-the-teachers-during-foundation-day-cum-commendation-day-of-mu.jpg"/&gt;</summary>
  </entry>
  <entry>
    <title>मणिपुर विश्वविद्यालय में स्वच्छता अभियान और सिंगल-यूज़ प्लास्टिक के खिलाफ जागरूकता रैली</title>
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      <name>Naorem Mohen</name>
    </author>
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    <updated>2026-06-04T16:40:35Z</updated>
    <content type="html">&lt;p&gt;&lt;img src="https://www.mudarpan.in/view/june-2026/mission-cleanliness.jpg"&gt;&amp;nbsp;&lt;/p&gt;
&lt;p class="isSelectedEnd"&gt;&lt;strong&gt;इम्फाल, 4 जून:&lt;/strong&gt; विश्व पर्यावरण दिवस 2026 के उपलक्ष्य में मणिपुर विश्वविद्यालय के पर्यावरण विज्ञान विभाग और राष्ट्रीय सेवा योजना (NSS) प्रकोष्ठ ने गुरुवार सुबह विश्वविद्यालय परिसर में बड़े पैमाने पर स्वच्छता अभियान तथा &amp;ldquo;नो टू सिंगल-यूज़ प्लास्टिक&amp;rdquo; जागरूकता कार्यक्रम का सफल आयोजन किया। कार्यक्रम का आयोजन &amp;ldquo;मिशन लाइफ (Lifestyle for Environment)&amp;rdquo; थीम के अंतर्गत विश्वविद्यालय के ट्रैफिक प्वाइंट, कंचीपुर में सुबह 7:30 बजे किया गया।&lt;/p&gt;
&lt;p class="isSelectedEnd"&gt;यह अभियान भारत सरकार के युवा कार्यक्रम एवं खेल मंत्रालय तथा पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के मार्गदर्शन में आयोजित किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य छात्रों और समुदाय के बीच पर्यावरणीय जिम्मेदारी को बढ़ावा देना तथा सतत जीवनशैली अपनाने के प्रति जागरूकता फैलाना था।&lt;/p&gt;
&lt;p class="isSelectedEnd"&gt;अभियान का नेतृत्व मणिपुर विश्वविद्यालय के NSS प्रकोष्ठ के कार्यक्रम समन्वयक प्रो. लैश्रम संतोष सिंह तथा पर्यावरण विज्ञान विभाग के अध्यक्ष प्रो. आर. एस. खोइयांगबाम ने किया। कार्यक्रम के सफल आयोजन में NSS कार्यक्रम अधिकारियों डॉ. एच. सुरज सिंह, डॉ. ख. हेराचंद्र सिंह, डॉ. टी. दीपमांजुरी देवी, डॉ. दलीप सिंह सहित पर्यावरण विज्ञान विभाग के कई शिक्षकों ने सक्रिय सहयोग दिया।&lt;/p&gt;
&lt;p class="isSelectedEnd"&gt;कार्यक्रम में लगभग 200 NSS स्वयंसेवकों, विद्यार्थियों और शिक्षकों ने भाग लिया। प्रतिभागियों ने पर्यावरण संरक्षण और सतत विकास के प्रति अपनी प्रतिबद्धता प्रदर्शित करते हुए स्वच्छता एवं प्लास्टिक मुक्त जीवनशैली को बढ़ावा देने का संकल्प लिया।&lt;/p&gt;
&lt;p class="isSelectedEnd"&gt;सभा को संबोधित करते हुए प्रो. लैश्रम संतोष सिंह ने स्वच्छता के महत्व पर जोर देते हुए सिंगल-यूज़ प्लास्टिक के उपयोग को कम करने की आवश्यकता बताई। उन्होंने सभी से &amp;ldquo;वन नेशन, वन मिशन: एंड प्लास्टिक पॉल्यूशन&amp;rdquo; अभियान का समर्थन करने और मिशन लाइफ के उद्देश्यों को अपने दैनिक जीवन में अपनाने का आह्वान किया।&lt;/p&gt;
&lt;p class="isSelectedEnd"&gt;&lt;img src="https://www.mudarpan.in/view/june-2026/cleanliness-drive-in-mu.jpg"&gt;&lt;/p&gt;
&lt;p class="isSelectedEnd"&gt;इस अवसर पर विश्वविद्यालय परिसर में एक विशाल जागरूकता रैली भी निकाली गई। रैली में शामिल विद्यार्थियों और स्वयंसेवकों ने पर्यावरण संरक्षण तथा प्लास्टिक मुक्त जीवनशैली से जुड़े संदेशों वाले पोस्टर और तख्तियां लेकर लोगों को जागरूक किया। रैली के दौरान पर्यावरण सुरक्षा और स्वच्छता के समर्थन में विभिन्न नारे लगाए गए।&lt;/p&gt;
&lt;p class="isSelectedEnd"&gt;रैली के पश्चात विश्वविद्यालय परिसर के विभिन्न हिस्सों में व्यापक स्वच्छता अभियान चलाया गया। प्रतिभागियों ने परिसर की साफ-सफाई कर स्वच्छ, हरित और टिकाऊ वातावरण के निर्माण का संदेश दिया।&lt;/p&gt;
&lt;p class="isSelectedEnd"&gt;अपने अध्यक्षीय संबोधन में प्रो. आर. एस. खोइयांगबाम ने स्वयंसेवकों की सक्रिय भागीदारी की सराहना की और उन्हें पर्यावरण के प्रति जिम्मेदार व्यवहार को अपनी दैनिक दिनचर्या का हिस्सा बनाने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि पर्यावरण संरक्षण केवल एक दिन का अभियान नहीं, बल्कि निरंतर चलने वाली सामाजिक जिम्मेदारी है।&lt;/p&gt;
&lt;p&gt;कार्यक्रम का समापन धन्यवाद ज्ञापन और अल्पाहार के साथ हुआ। आयोजकों के अनुसार इस अभियान ने पर्यावरण जागरूकता बढ़ाने, सामुदायिक सहभागिता को मजबूत करने और प्लास्टिक प्रदूषण मुक्त भविष्य की दिशा में सकारात्मक संदेश देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।&lt;/p&gt;</content>
    <summary type="html">&lt;p&gt;विश्व पर्यावरण दिवस 2026 के अवसर पर मणिपुर विश्वविद्यालय में बड़े पैमाने पर स्वच्छता अभियान और ‘नो टू सिंगल-यूज़ प्लास्टिक’ अभियान आयोजित किया गया। 200 से अधिक NSS स्वयंसेवकों और छात्रों ने भाग लिया।&lt;/p&gt;&lt;br/&gt;&lt;img src="https://www.mudarpan.in/view/june-2026/mission-cleanliness.jpg"/&gt;</summary>
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  <entry>
    <title>AIU राष्ट्रीय महिला छात्र संसद में मणिपुर विश्वविद्यालय प्रथम रनर-अप, छात्रा को मिला बेस्ट प्रेसिडेंट अवॉर्ड</title>
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      <name>Naorem Mohen</name>
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    <updated>2026-06-03T15:48:55Z</updated>
    <content type="html">&lt;p&gt;&lt;img src="https://www.mudarpan.in/view/june-2026/mu-wins-in-women-parliament.jpg"&gt;&amp;nbsp;&lt;/p&gt;
&lt;p class="isSelectedEnd"&gt;&lt;strong&gt;भिवानी/इम्फाल, 6 अप्रैल:&lt;/strong&gt; मणिपुर विश्वविद्यालय ने 4वीं एसोसिएशन ऑफ इंडियन यूनिवर्सिटीज़ (AIU) राष्ट्रीय महिला छात्र संसद 2025-26 में शानदार प्रदर्शन करते हुए प्रथम रनर-अप का स्थान प्राप्त किया। यह प्रतिष्ठित राष्ट्रीय आयोजन 3 से 5 अप्रैल 2026 तक हरियाणा स्थित चौधरी बंसीलाल विश्वविद्यालय में आयोजित किया गया, जिसमें देशभर के 22 विश्वविद्यालयों ने भाग लिया।&lt;/p&gt;
&lt;p class="isSelectedEnd"&gt;प्रतियोगिता में Association of Indian Universities के मंच पर मणिपुर विश्वविद्यालय की टीम ने प्रारंभिक, क्वार्टर फाइनल और सेमीफाइनल चरणों में उत्कृष्ट प्रदर्शन करते हुए फाइनल में प्रवेश किया और राष्ट्रीय स्तर पर अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया।&lt;/p&gt;
&lt;p class="isSelectedEnd"&gt;इस वर्ष की छात्र संसद का विषय &lt;strong&gt;&amp;ldquo;विकसित भारत 2047 : महिलाओं की भूमिका&amp;rdquo;&lt;/strong&gt; था। प्रतियोगिता में Lovely Professional University विजेता रही, जबकि मेजबान Chaudhary Bansi Lal University और Jiwaji University क्रमशः द्वितीय और तृतीय रनर-अप रहे।&lt;/p&gt;
&lt;p class="isSelectedEnd"&gt;मणिपुर विश्वविद्यालय के लिए सबसे बड़ी उपलब्धि रसायन विज्ञान विभाग की छात्रा लेप्सोपथी कसार की रही, जिन्हें संसदीय कार्यवाही के उत्कृष्ट संचालन और प्रभावशाली नेतृत्व क्षमता के लिए &lt;strong&gt;&amp;ldquo;बेस्ट प्रेसिडेंट अवॉर्ड&amp;rdquo;&lt;/strong&gt; से सम्मानित किया गया। उनके प्रदर्शन की प्रतिभागियों और निर्णायकों ने समान रूप से सराहना की।&lt;/p&gt;
&lt;p class="isSelectedEnd"&gt;मणिपुर विश्वविद्यालय की टीम में स्कूल ऑफ अर्थ एंड एटमॉस्फेरिक साइंसेज (SEAS) की जेसी थियम, रसायन विज्ञान विभाग की लेप्सोपथी कसार और राजनीति विज्ञान विभाग की नाओरेम चेल्सिया शामिल थीं। तीनों छात्राओं ने विभिन्न चरणों में प्रभावशाली तर्क, नेतृत्व क्षमता और संसदीय प्रक्रियाओं की समझ का प्रदर्शन किया।&lt;/p&gt;
&lt;p class="isSelectedEnd"&gt;टीम का मार्गदर्शन पृथ्वी विज्ञान विभाग की डॉ. ख. राधापियारी देवी ने टीम मैनेजर के रूप में किया। छात्राओं का चयन छात्र कल्याण अधिष्ठाता कार्यालय द्वारा आयोजित ओपन ऑडिशन के माध्यम से किया गया था।&lt;/p&gt;
&lt;p class="isSelectedEnd"&gt;चयन समिति में छात्र कल्याण अधिष्ठाता प्रो. च. इबोहल सिंह, सांस्कृतिक समन्वयक डॉ. खुमुकचाम रॉबिन्द्रो सिंह, पूर्व सांस्कृतिक समन्वयक डॉ. राजकुमार सुरेश सिंह तथा डॉ. ख. राधापियारी देवी शामिल थे।&lt;/p&gt;
&lt;p class="isSelectedEnd"&gt;सांस्कृतिक समन्वयक डॉ. खुमुकचाम रॉबिन्द्रो सिंह ने इस उपलब्धि को विश्वविद्यालय के लिए एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर बताते हुए कहा कि यह सफलता संवाद, नेतृत्व और नीति-निर्माण जैसे मंचों पर महिला छात्राओं की बढ़ती रुचि, क्षमता और आत्मविश्वास को दर्शाती है।&lt;/p&gt;
&lt;p class="isSelectedEnd"&gt;उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय स्तर पर प्राप्त यह सम्मान अन्य छात्राओं को भी नेतृत्व विकास, सार्वजनिक संवाद और लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं में सक्रिय भागीदारी के लिए प्रेरित करेगा।&lt;/p&gt;
&lt;p class="isSelectedEnd"&gt;विश्वविद्यालय प्रशासन ने इस उपलब्धि पर छात्राओं, मार्गदर्शकों और चयन समिति को बधाई देते हुए विश्वास व्यक्त किया कि भविष्य में और अधिक छात्र राष्ट्रीय मंचों पर विश्वविद्यालय का प्रतिनिधित्व करेंगे तथा नेतृत्व, आत्मविश्वास और रचनात्मक बहस की संस्कृति को आगे बढ़ाएंगे।&lt;/p&gt;
&lt;p&gt;AIU राष्ट्रीय महिला छात्र संसद में प्रथम रनर-अप का स्थान हासिल करना मणिपुर विश्वविद्यालय की छात्राओं की प्रतिभा, परिश्रम और नेतृत्व क्षमता का प्रमाण है तथा यह उपलब्धि विश्वविद्यालय के शैक्षणिक और सह-पाठ्यक्रमीय उत्कृष्टता के इतिहास में एक महत्वपूर्ण अध्याय के रूप में दर्ज की जाएगी।&lt;/p&gt;</content>
    <summary type="html">&lt;p&gt;मणिपुर विश्वविद्यालय ने AIU राष्ट्रीय महिला छात्र संसद 2025-26 में प्रथम रनर-अप का स्थान हासिल किया। रसायन विज्ञान विभाग की छात्रा लेप्सोपथी कसार को संसदीय कार्यवाही के उत्कृष्ट संचालन के लिए बेस्ट प्रेसिडेंट अवॉर्ड से सम्मानित किया गया।&lt;/p&gt;&lt;br/&gt;&lt;img src="https://www.mudarpan.in/view/june-2026/mu-wins-in-women-parliament.jpg"/&gt;</summary>
  </entry>
  <entry>
    <title>मणिपुर विश्वविद्यालय में महिला आरक्षण विधेयक पर विशेष कार्यक्रम, महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने पर जोर</title>
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    <updated>2026-06-03T15:32:39Z</updated>
    <content type="html">&lt;p&gt;&lt;img src="https://www.mudarpan.in/view/june-2026/nari-shakti.jpg"&gt;&amp;nbsp;&lt;/p&gt;
&lt;p class="isSelectedEnd"&gt;&lt;strong&gt;इम्फाल, 15 अप्रैल:&lt;/strong&gt; मणिपुर विश्वविद्यालय में बुधवार को महिला आरक्षण विधेयक 2023 (नारी शक्ति वंदन अधिनियम) के कार्यान्वयन पर एक विशेष कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य महिलाओं के सशक्तिकरण, लैंगिक समानता तथा राजनीति, शिक्षा, प्रशासन और राष्ट्र निर्माण में महिलाओं की भागीदारी को बढ़ावा देने के महत्व पर विचार-विमर्श करना था।&lt;/p&gt;
&lt;p class="isSelectedEnd"&gt;यह कार्यक्रम कुलपति सचिवालय के कोर्ट हॉल में आयोजित किया गया, जिसमें विश्वविद्यालय के शिक्षकों, अधिकारियों और कर्मचारियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।&lt;/p&gt;
&lt;p class="isSelectedEnd"&gt;कार्यक्रम के दौरान मणिपुर विश्वविद्यालय की कार्यवाहक कुलपति प्रो. सुमित्रा फंजौबम ने उपस्थित प्रतिभागियों को संविधान की प्रस्तावना, लैंगिक समानता और महिला सशक्तिकरण से संबंधित शपथ दिलाई। उन्होंने महिलाओं को समान अवसर प्रदान करने और समाज के सभी क्षेत्रों में उनकी प्रभावी भागीदारी सुनिश्चित करने की आवश्यकता पर बल दिया।&lt;/p&gt;
&lt;p class="isSelectedEnd"&gt;कार्यक्रम में मुख्य वक्ता के रूप में मणिपुर विश्वविद्यालय के विधि विभागाध्यक्ष प्रो. वाई. प्रेमानंद सिंह ने महिला सशक्तिकरण और समावेशी विकास में महिलाओं की भूमिका पर विस्तृत विचार प्रस्तुत किए। उन्होंने कहा कि विकसित भारत 2047 के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए महिलाओं की सक्रिय भागीदारी और नेतृत्व अत्यंत आवश्यक है।&lt;/p&gt;
&lt;p class="isSelectedEnd"&gt;प्रो. प्रेमानंद सिंह ने कहा कि विश्वविद्यालय सामाजिक परिवर्तन और जागरूकता के महत्वपूर्ण केंद्र होते हैं। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए सीटों का आरक्षण उनके सार्थक प्रतिनिधित्व और निर्णय-निर्माण प्रक्रियाओं में प्रभावी भागीदारी सुनिश्चित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।&lt;/p&gt;
&lt;p class="isSelectedEnd"&gt;उन्होंने कहा कि महिलाओं की बढ़ती राजनीतिक भागीदारी न केवल लोकतंत्र को मजबूत करेगी, बल्कि समाज के विभिन्न वर्गों की आवश्यकताओं और आकांक्षाओं को भी बेहतर ढंग से प्रतिनिधित्व प्रदान करेगी।&lt;/p&gt;
&lt;p class="isSelectedEnd"&gt;कार्यक्रम में विश्वविद्यालय के कई वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे, जिनमें स्कूल ऑफ एजुकेशन की डीन प्रो. प्रेमलता मैसनाम, स्कूल ऑफ ह्यूमैनिटीज की डीन प्रो. तोइजाम ताम्फा देवी तथा कार्यवाहक कुलसचिव श्री टी. शांतिकुमार सिंह प्रमुख रूप से शामिल थे।&lt;/p&gt;
&lt;p class="isSelectedEnd"&gt;कार्यक्रम के दौरान शिक्षकों और कर्मचारियों ने महिलाओं के अधिकारों, समान अवसरों और नेतृत्व क्षमता को बढ़ावा देने के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई। प्रतिभागियों ने यह भी संकल्प लिया कि वे विश्वविद्यालय परिसर और समाज में समावेशी एवं समान प्रतिनिधित्व को प्रोत्साहित करने के लिए निरंतर प्रयास करेंगे।&lt;/p&gt;
&lt;p class="isSelectedEnd"&gt;मणिपुर विश्वविद्यालय द्वारा आयोजित यह कार्यक्रम महिला आरक्षण विधेयक के महत्व को समझने और महिलाओं को राष्ट्र निर्माण की मुख्यधारा में अधिक प्रभावी रूप से शामिल करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल के रूप में देखा जा रहा है। विश्वविद्यालय प्रशासन ने कहा कि वह भविष्य में भी लैंगिक समानता और समावेशी विकास से जुड़े ऐसे कार्यक्रमों का आयोजन करता रहेगा।&lt;/p&gt;
&lt;p&gt;यह आयोजन महिलाओं की नेतृत्व क्षमता, राजनीतिक प्रतिनिधित्व और सामाजिक भागीदारी को बढ़ावा देने के प्रति मणिपुर विश्वविद्यालय की प्रतिबद्धता का प्रतीक माना जा रहा है।&lt;/p&gt;</content>
    <summary type="html">&lt;p&gt;मणिपुर विश्वविद्यालय में महिला आरक्षण विधेयक 2023 (नारी शक्ति वंदन अधिनियम) के कार्यान्वयन पर विशेष कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में महिलाओं के सशक्तिकरण, लैंगिक समानता और राजनीति सहित विभिन्न क्षेत्रों में उनकी भागीदारी बढ़ाने पर चर्चा हुई।&lt;/p&gt;&lt;br/&gt;&lt;img src="https://www.mudarpan.in/view/june-2026/nari-shakti.jpg"/&gt;</summary>
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  <entry>
    <title>मणिपुर विश्वविद्यालय में मीडिया आर्काइव एवं अनुसंधान केंद्र (MARC) का शुभारंभ, पूर्वोत्तर की सांस्कृतिक विरासत के</title>
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    <author>
      <name>Naorem Mohen</name>
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    <updated>2026-06-03T15:14:06Z</updated>
    <content type="html">&lt;p&gt;&lt;img src="https://www.mudarpan.in/view/june-2026/media-archives.jpg"&gt;&amp;nbsp;&lt;/p&gt;
&lt;p class="isSelectedEnd"&gt;&lt;strong&gt;इम्फाल, 30 अप्रैल:&lt;/strong&gt; मणिपुर विश्वविद्यालय ने गुरुवार को मीडिया आर्काइव एवं अनुसंधान केंद्र (Media Archive and Research Centre - MARC) की स्थापना कर पूर्वोत्तर भारत की समृद्ध ऑडियो-विजुअल सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण और दस्तावेजीकरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया। यह केंद्र मणिपुर और पूरे पूर्वोत्तर क्षेत्र की सांस्कृतिक, ऐतिहासिक और सामाजिक धरोहर को संरक्षित करने तथा शोध को बढ़ावा देने के उद्देश्य से स्थापित किया गया है।&lt;/p&gt;
&lt;p class="isSelectedEnd"&gt;केंद्र का औपचारिक उद्घाटन विश्वविद्यालय के जनसंचार एवं पत्रकारिता विभाग के सेमिनार हॉल में आयोजित समारोह में किया गया। MARC को एक ऐसे मंच के रूप में विकसित किया जा रहा है जो क्षेत्र की ऑडियो-विजुअल सांस्कृतिक अभिव्यक्तियों को संरक्षित करने के साथ-साथ ऐतिहासिक और सामाजिक महत्व की सामग्रियों का महत्वपूर्ण भंडार बनेगा। इसमें पारंपरिक जीवन-पद्धतियों से लेकर समकालीन सामाजिक कथाओं तक विविध सामग्री संग्रहित की जाएगी।&lt;/p&gt;
&lt;p class="isSelectedEnd"&gt;कार्यक्रम में मणिपुर विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. एन. लोकेन्द्र सिंह मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। स्कूल ऑफ सोशल साइंसेज की डीन प्रो. मेमचा लोइतोंगबम सम्मानित अतिथि थीं, जबकि एमएसएफडीएस के सचिव सुंजू बचस्पति मयूम विशेष अतिथि के रूप में शामिल हुए। कार्यक्रम की अध्यक्षता जनसंचार एवं पत्रकारिता विभागाध्यक्ष डॉ. नोंगमैथेम रोहिंकांता सिंह ने की।&lt;/p&gt;
&lt;p class="isSelectedEnd"&gt;MARC की अवधारणा चार प्रमुख स्तंभों &amp;mdash; &lt;strong&gt;पहचान (Identity), स्वरूप (Form), अनुसंधान (Research) और समावेशन (Inclusion)&lt;/strong&gt; &amp;mdash; पर आधारित है। केंद्र का उद्देश्य क्षेत्र की भाषाई, सांस्कृतिक और सामाजिक पहचान को संरक्षित करना तथा मीडिया के क्षेत्र में तकनीकी और कलात्मक उपलब्धियों को प्रोत्साहित करना है।&lt;/p&gt;
&lt;p class="isSelectedEnd"&gt;केंद्र सक्रिय रूप से ऑडियो-विजुअल कृतियों, फिल्मों, वृत्तचित्रों, रिकॉर्डिंग्स और उनसे संबंधित दस्तावेजों का संग्रह और संरक्षण करेगा। विशेष रूप से यह पूर्वोत्तर भारत के लोगों के विविध जीवन अनुभवों, परंपराओं, संघर्षों और सामाजिक परिवर्तनों को दर्ज करने पर ध्यान केंद्रित करेगा।&lt;/p&gt;
&lt;p class="isSelectedEnd"&gt;MARC केवल अभिलेखों के संग्रह तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इतिहास, समाजशास्त्र, मानव विज्ञान, मीडिया अध्ययन और सांस्कृतिक अध्ययन जैसे विभिन्न विषयों में शोधकर्ताओं के लिए एक महत्वपूर्ण अकादमिक संसाधन केंद्र के रूप में कार्य करेगा। इसका एक प्रमुख उद्देश्य पूर्वोत्तर भारत के स्वदेशी समुदायों और कम प्रतिनिधित्व वाले समूहों की आवाज़ों को मुख्यधारा के अकादमिक विमर्श में स्थान दिलाना भी है।&lt;/p&gt;
&lt;p class="isSelectedEnd"&gt;इस पहल के पीछे प्रमुख प्रेरक शक्ति जनसंचार एवं पत्रकारिता विभाग के अतिथि संकाय सदस्य डॉ. जॉनसन राजकुमार हैं, जिन्हें MARC का विशेषज्ञ और प्रमाणित अभिलेखागार विशेषज्ञ (Certified Archivist) नियुक्त किया गया है। फिल्म संरक्षण और अभिलेखीकरण के क्षेत्र में उनकी विशेषज्ञता केंद्र की संग्रहण रणनीति, संरक्षण मानकों और शोध दिशा को मजबूत आधार प्रदान करेगी।&lt;/p&gt;
&lt;p class="isSelectedEnd"&gt;विश्वविद्यालय प्रशासन का मानना है कि MARC की स्थापना पूर्वोत्तर भारत की जीवंत मीडिया और सांस्कृतिक विरासत के व्यवस्थित दस्तावेजीकरण, संरक्षण और अकादमिक अध्ययन की दिशा में एक ऐतिहासिक पहल है। यह केंद्र आने वाले वर्षों में शोधकर्ताओं, छात्रों, मीडिया पेशेवरों और सांस्कृतिक कार्यकर्ताओं के लिए एक महत्वपूर्ण संसाधन केंद्र के रूप में विकसित होगा।&lt;/p&gt;
&lt;p&gt;MARC के शुभारंभ के साथ मणिपुर विश्वविद्यालय ने न केवल क्षेत्रीय इतिहास और संस्कृति को संरक्षित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाया है, बल्कि भविष्य की पीढ़ियों के लिए पूर्वोत्तर भारत की बहुआयामी पहचान और विरासत को सुरक्षित रखने की प्रतिबद्धता भी प्रदर्शित की है।&lt;/p&gt;</content>
    <summary type="html">&lt;p&gt;मणिपुर विश्वविद्यालय ने मीडिया आर्काइव एवं अनुसंधान केंद्र (MARC) की स्थापना की। यह केंद्र मणिपुर और पूर्वोत्तर भारत की समृद्ध ऑडियो-विजुअल सांस्कृतिक विरासत, इतिहास और स्वदेशी समुदायों की आवाज़ों के संरक्षण, दस्तावेजीकरण और शोध को बढ़ावा देगा।&lt;/p&gt;&lt;br/&gt;&lt;img src="https://www.mudarpan.in/view/june-2026/media-archives.jpg"/&gt;</summary>
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    <title>मणिपुर विश्वविद्यालय NSS सेल ने लॉन्च किया पूर्वोत्तर का पहला NSS न्यूज़लेटर</title>
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      <name>Naorem Mohen</name>
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    <updated>2026-06-03T15:04:51Z</updated>
    <content type="html">&lt;p&gt;&lt;img src="https://www.mudarpan.in/view/june-2026/nss-newsletter.jpg"&gt;&amp;nbsp;&lt;/p&gt;
&lt;p class="isSelectedEnd"&gt;&lt;strong&gt;इम्फाल, 5 मई:&lt;/strong&gt; मणिपुर विश्वविद्यालय के राष्ट्रीय सेवा योजना (NSS) सेल ने मंगलवार को अपने प्रथम NSS न्यूज़लेटर (वॉल्यूम-1, अंक-1 : मार्च&amp;ndash;अप्रैल 2026) का औपचारिक विमोचन किया। यह कार्यक्रम सुबह 11:30 बजे कुलपति कार्यालय में आयोजित किया गया, जहां मणिपुर विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. एन. लोकेन्द्र सिंह ने न्यूज़लेटर का लोकार्पण किया।&lt;/p&gt;
&lt;p class="isSelectedEnd"&gt;NSS सेल के अनुसार यह न्यूज़लेटर मणिपुर और पूरे पूर्वोत्तर भारत में अपनी तरह का पहला प्रकाशन है, जिसका उद्देश्य NSS गतिविधियों, उपलब्धियों और सामाजिक प्रभाव को व्यवस्थित रूप से दस्तावेज़ित करना तथा स्वयंसेवकों और कार्यक्रम अधिकारियों के बीच बेहतर संवाद स्थापित करना है।&lt;/p&gt;
&lt;p class="isSelectedEnd"&gt;कार्यक्रम के मुख्य अतिथि कुलपति प्रो. एन. लोकेन्द्र सिंह ने NSS सेल की इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि यह प्रकाशन विश्वविद्यालय और संबद्ध महाविद्यालयों में NSS गतिविधियों को नई ऊर्जा और दिशा प्रदान करेगा। उन्होंने कार्यक्रम समन्वयक प्रो. लैश्रम संतोष सिंह तथा सभी कार्यक्रम अधिकारियों के समर्पित प्रयासों की प्रशंसा करते हुए विश्वास जताया कि यह न्यूज़लेटर स्वयंसेवकों को प्रेरित करने और उत्कृष्ट कार्यों को पहचान दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।&lt;/p&gt;
&lt;p class="isSelectedEnd"&gt;उन्होंने कहा कि यह प्रकाशन NSS इकाइयों के बीच सहयोग, अनुभवों के आदान-प्रदान और श्रेष्ठ कार्यप्रणालियों को साझा करने का एक प्रभावी मंच बनेगा। साथ ही यह युवाओं में सामाजिक सेवा और नेतृत्व की भावना को और अधिक मजबूत करेगा।&lt;/p&gt;
&lt;p class="isSelectedEnd"&gt;कार्यक्रम की अध्यक्षता NSS सेल के कार्यक्रम समन्वयक प्रो. एल. संतोष सिंह ने की। उन्होंने इस पहल को &amp;ldquo;एक ऐतिहासिक और अग्रणी कदम&amp;rdquo; बताते हुए कहा कि न्यूज़लेटर को मासिक प्रकाशन के रूप में विकसित करने की योजना है। यह मंच NSS गतिविधियों के दस्तावेजीकरण, संस्थागत आत्ममूल्यांकन, जवाबदेही और रचनात्मक चिंतन को बढ़ावा देगा।&lt;/p&gt;
&lt;p class="isSelectedEnd"&gt;उन्होंने कहा कि प्रकाशन में NSS की गतिविधियों, उपलब्धियों और समाज पर उनके प्रभाव को प्रमुखता से स्थान दिया जाएगा। साथ ही यह राष्ट्रीय सेवा योजना के उद्देश्यों, भावी लक्ष्यों और दूरदर्शी दिशा को भी प्रतिबिंबित करेगा।&lt;/p&gt;
&lt;p class="isSelectedEnd"&gt;प्रो. संतोष सिंह ने बताया कि न्यूज़लेटर का उद्देश्य विभिन्न NSS इकाइयों के बीच बेहतर संपर्क स्थापित करना तथा सेवा, नेतृत्व और सामाजिक उत्तरदायित्व के साझा मूल्यों को प्रोत्साहित करना है। प्रथम अंक में मार्च और अप्रैल 2026 के दौरान NSS स्वयंसेवकों और कार्यक्रम अधिकारियों द्वारा संचालित गतिविधियों, विशेष उपलब्धियों तथा विभिन्न कार्यक्रमों की विस्तृत रिपोर्ट प्रकाशित की गई है।&lt;/p&gt;
&lt;p class="isSelectedEnd"&gt;कार्यक्रम के दौरान NSS कार्यक्रम समन्वयक और कार्यक्रम अधिकारियों ने कुलपति प्रो. एन. लोकेन्द्र सिंह को सम्मान स्वरूप पारंपरिक लेंगजान फी तथा स्मृति-चिह्न भेंट किया।&lt;/p&gt;
&lt;p class="isSelectedEnd"&gt;इस अवसर पर NSS कार्यक्रम अधिकारी डॉ. ख. हेराचंद्र सिंह (यूनिट-I), डॉ. एन. सुरज सिंह (यूनिट-III), डॉ. दलिप सिंह (यूनिट-IV), डॉ. टी. दीपमंजुरी देवी (यूनिट-II) सहित विभिन्न संबद्ध महाविद्यालयों के कार्यक्रम अधिकारी और NSS प्रतिनिधि उपस्थित रहे।&lt;/p&gt;
&lt;p&gt;मणिपुर विश्वविद्यालय NSS सेल की यह पहल न केवल विश्वविद्यालय समुदाय के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है, बल्कि पूर्वोत्तर भारत में NSS गतिविधियों के दस्तावेजीकरण और प्रसार की दिशा में भी एक नई शुरुआत मानी जा रही है।&lt;/p&gt;</content>
    <summary type="html">&lt;p&gt;मणिपुर विश्वविद्यालय के NSS सेल ने अपने पहले NSS न्यूज़लेटर का विमोचन किया। पूर्वोत्तर भारत में अपनी तरह का पहला यह प्रकाशन NSS गतिविधियों, उपलब्धियों और सामाजिक योगदान को दस्तावेज़ित करने का महत्वपूर्ण मंच बनेगा।&lt;/p&gt;&lt;br/&gt;&lt;img src="https://www.mudarpan.in/view/june-2026/nss-newsletter.jpg"/&gt;</summary>
  </entry>
  <entry>
    <title>मणिपुर विश्वविद्यालय में लाइव जर्मप्लाज्म रिसोर्स सेंटर का शुभारंभ, जलीय जैव विविधता संरक्षण को मिलेगा बढ़ावा</title>
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    <author>
      <name>Naorem Mohen</name>
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    <updated>2026-06-03T14:55:26Z</updated>
    <content type="html">&lt;p&gt;&lt;img src="https://www.mudarpan.in/view/june-2026/live-germplasm.jpg"&gt;&amp;nbsp;&lt;/p&gt;
&lt;p class="isSelectedEnd"&gt;&lt;strong&gt;इम्फाल, 6 मई:&lt;/strong&gt; मणिपुर विश्वविद्यालय के प्राणी विज्ञान विभाग ने भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) के राष्ट्रीय मत्स्य आनुवंशिक संसाधन ब्यूरो (NBFGR), लखनऊ के सहयोग से मणिपुर में लाइव जर्मप्लाज्म रिसोर्स सेंटर के स्थापना कार्यक्रम का आयोजन किया। कार्यक्रम बुधवार सुबह विश्वविद्यालय परिसर के पश्चिमी क्षेत्र स्थित माहसीर हैचरी के निकट आयोजित किया गया।&lt;/p&gt;
&lt;p class="isSelectedEnd"&gt;इस पहल का समन्वयन मणिपुर विश्वविद्यालय के प्राणी विज्ञान विभाग की सहायक प्रोफेसर डॉ. रमेशोरी युमनाम ने किया, जो लाइव जर्मप्लाज्म रिसोर्स सेंटर परियोजना की समन्वयक भी हैं। कार्यक्रम में मणिपुर विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. नाओरेम लोकेन्द्र सिंह मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे।&lt;/p&gt;
&lt;p class="isSelectedEnd"&gt;लाइव जर्मप्लाज्म रिसोर्स सेंटर का उद्देश्य मणिपुर और पूर्वोत्तर भारत के जलीय आनुवंशिक संसाधनों के संरक्षण, विकास और वैज्ञानिक प्रबंधन को सुदृढ़ करना है। विशेष रूप से यह केंद्र क्षेत्र की स्थानिक (Endemic) और स्वदेशी मछली प्रजातियों के संरक्षण तथा संवर्धन पर ध्यान केंद्रित करेगा।&lt;/p&gt;
&lt;p class="isSelectedEnd"&gt;अपने संबोधन में कुलपति प्रो. नाओरेम लोकेन्द्र सिंह ने कहा कि मणिपुर झीलों और जल निकायों से समृद्ध प्रदेश है, जहां मत्स्य पालन की एक लंबी परंपरा रही है। उन्होंने कहा कि राज्य के लोगों के पास मत्स्य पालन से जुड़ा समृद्ध पारंपरिक ज्ञान और अनुभव मौजूद है, जिसने इस क्षेत्र को लंबे समय से जीवंत बनाए रखा है।&lt;/p&gt;
&lt;p class="isSelectedEnd"&gt;उन्होंने कहा, &amp;ldquo;मणिपुर जैव विविधता के दृष्टिकोण से अत्यंत समृद्ध क्षेत्र है और यहां अनेक प्रकार की स्वदेशी मछली प्रजातियां पाई जाती हैं। ऐसे में लाइव जर्मप्लाज्म रिसोर्स सेंटर की स्थापना हमारी जलीय जैव विविधता के संरक्षण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। यह पहल न केवल दुर्लभ और स्वदेशी प्रजातियों के संरक्षण में सहायक होगी, बल्कि मत्स्य क्षेत्र के विकास को भी गति देगी, जिससे राज्य की अर्थव्यवस्था और समग्र विकास को मजबूती मिलेगी।&amp;rdquo;&lt;/p&gt;
&lt;p class="isSelectedEnd"&gt;उन्होंने यह भी कहा कि भविष्य में यह केंद्र शोध, प्रशिक्षण और वैज्ञानिक सहयोग का एक महत्वपूर्ण मंच बनेगा, जिससे जलीय संसाधनों के सतत उपयोग और संरक्षण के नए अवसर विकसित होंगे।&lt;/p&gt;
&lt;p class="isSelectedEnd"&gt;यह केंद्र जैव विविधता संरक्षण, सतत मत्स्य पालन (Sustainable Aquaculture), उन्नत अनुसंधान तथा जलीय संसाधन प्रबंधन में क्षमता निर्माण को बढ़ावा देने के उद्देश्य से स्थापित किया गया है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह पहल पूर्वोत्तर भारत की समृद्ध जलीय जैव विविधता को संरक्षित करने के साथ-साथ वैज्ञानिक अनुसंधान और स्थानीय समुदायों की आजीविका को भी सशक्त बनाएगी।&lt;/p&gt;
&lt;p&gt;मणिपुर विश्वविद्यालय और ICAR-NBFGR के बीच यह सहयोग जलीय आनुवंशिक संसाधनों के संरक्षण और वैज्ञानिक प्रबंधन के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है। इससे न केवल शोध गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा, बल्कि राज्य और क्षेत्र में मत्स्य क्षेत्र के दीर्घकालिक विकास का मार्ग भी प्रशस्त होगा।&lt;/p&gt;</content>
    <summary type="html">&lt;p&gt;मणिपुर विश्वविद्यालय और ICAR-राष्ट्रीय मत्स्य आनुवंशिक संसाधन ब्यूरो, लखनऊ के सहयोग से लाइव जर्मप्लाज्म रिसोर्स सेंटर का शुभारंभ किया गया। यह केंद्र पूर्वोत्तर क्षेत्र की स्वदेशी मछली प्रजातियों के संरक्षण, अनुसंधान और सतत मत्स्य पालन को बढ़ावा देगा।&lt;/p&gt;&lt;br/&gt;&lt;img src="https://www.mudarpan.in/view/june-2026/live-germplasm.jpg"/&gt;</summary>
  </entry>
  <entry>
    <title>मणिपुर विश्वविद्यालय में राष्ट्रीय संगोष्ठी का शुभारंभ, खाद्य सुरक्षा के लिए पौध स्वास्थ्य प्रबंधन पर जोर</title>
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    <author>
      <name>Naorem Mohen</name>
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    <updated>2026-06-03T14:38:27Z</updated>
    <content type="html">&lt;p&gt;&lt;img src="https://www.mudarpan.in/view/june-2026/plant-health-seminar.jpg"&gt;&amp;nbsp;&lt;/p&gt;
&lt;p class="isSelectedEnd"&gt;&lt;strong&gt;इम्फाल, 12 मई:&lt;/strong&gt; मणिपुर विश्वविद्यालय के लाइफ साइंसेज (वनस्पति विज्ञान) विभाग द्वारा अंतरराष्ट्रीय पौध स्वास्थ्य दिवस के उपलक्ष्य में &amp;ldquo;प्लांट हेल्थ मैनेजमेंट फॉर फूड सिक्योरिटी&amp;rdquo; विषय पर दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी के प्रथम दिवस का सफल आयोजन किया गया। हाइब्रिड मोड में आयोजित इस संगोष्ठी का मुख्य विषय &amp;ldquo;खाद्य सुरक्षा के लिए पौध जैव-सुरक्षा&amp;rdquo; रहा, जिसमें राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने में पौध स्वास्थ्य की महत्वपूर्ण भूमिका पर व्यापक चर्चा की गई।&lt;/p&gt;
&lt;p class="isSelectedEnd"&gt;संगोष्ठी के उद्घाटन सत्र में मणिपुर विश्वविद्यालय की कार्यवाहक कुलपति प्रो. सुमित्रा फंजौबम मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहीं। सम्मानित अतिथियों में मणिपुर विश्वविद्यालय के स्कूल ऑफ लाइफ साइंसेज के डीन प्रो. एन. मोहिलाल मेइती, गौहाटी विश्वविद्यालय के विज्ञान संकाय के डीन प्रो. कुमानंद तयुंग तथा मणिपुर विश्वविद्यालय के प्राणी विज्ञान विभागाध्यक्ष प्रो. क्ष. बिरला सिंह शामिल थे।&lt;/p&gt;
&lt;p class="isSelectedEnd"&gt;कार्यक्रम की अध्यक्षता लाइफ साइंसेज (वनस्पति विज्ञान) विभागाध्यक्ष प्रो. कननबाला सारंगथेम ने की। डॉ. हेकहम एवलिन और प्रो. एस. सुरेशकुमार सिंह ने आयोजन सचिव के रूप में कार्यक्रम के संचालन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।&lt;/p&gt;
&lt;p class="isSelectedEnd"&gt;मुख्य व्याख्यान गौहाटी विश्वविद्यालय के प्रो. कुमानंद तयुंग द्वारा प्रस्तुत किया गया। इसके अतिरिक्त केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय (CAU) के प्रो. एन. इबोयाइमा सिंह, मणिपुर विश्वविद्यालय के डॉ. वाई. प्रेमानंद सिंह तथा भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) के डॉ. टी. बसंता ने आमंत्रित वक्ताओं के रूप में अपने विचार साझा किए।&lt;/p&gt;
&lt;p class="isSelectedEnd"&gt;संगोष्ठी में पौध स्वास्थ्य और खाद्य सुरक्षा से जुड़े अनेक महत्वपूर्ण विषयों पर विचार-विमर्श किया गया। इनमें सूक्ष्मजीव विविधता और पौध स्वास्थ्य प्रबंधन, जैविक एवं अजैविक तनाव प्रबंधन, जैव उर्वरक और जैव कीटनाशक, प्राकृतिक खेती प्रणाली, सतत विकास, खाद्य, औषधि एवं उद्योग के लिए जैव विविधता का मूल्यांकन और उपयोग, पौध एवं सूक्ष्मजीव आधारित उद्यमिता, बौद्धिक संपदा अधिकार (IPR) से जुड़े मुद्दे, वैज्ञानिक कृषि पद्धतियां, सरकारी पहल तथा खाद्य सुरक्षा में कम उपयोग की जाने वाली फसलों और सब्जियों की भूमिका जैसे विषय शामिल रहे।&lt;/p&gt;
&lt;p class="isSelectedEnd"&gt;संगोष्ठी में 90 से अधिक प्रतिभागी भाग ले रहे हैं, जिनमें शिक्षक, शोधार्थी और स्नातकोत्तर छात्र शामिल हैं। प्रतिभागी केवल मणिपुर ही नहीं, बल्कि असम, बिहार और उत्तर प्रदेश सहित विभिन्न राज्यों से भी पहुंचे हैं। कार्यक्रम के दौरान प्रतिभागियों ने अपने शोध निष्कर्ष प्रस्तुत किए और विशेषज्ञों के साथ विचारों का आदान-प्रदान किया।&lt;/p&gt;
&lt;p class="isSelectedEnd"&gt;संगोष्ठी का समापन समारोह 13 मई को आयोजित किया जाएगा, जिसमें मणिपुर विश्वविद्यालय के स्कूल ऑफ लाइफ साइंसेज के डीन प्रो. एन. मोहिलाल मेइती, वित्त अधिकारी प्रो. एल. राजेंद्रकुमार सिंह तथा विभागाध्यक्ष प्रो. कननबाला सारंगथेम विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित रहेंगे।&lt;/p&gt;
&lt;p&gt;आयोजकों के अनुसार संगोष्ठी का निष्कर्ष देश की खाद्य सुरक्षा को सुदृढ़ बनाने के लिए एकीकृत, वैज्ञानिक और सतत पौध स्वास्थ्य प्रबंधन रणनीतियों को अपनाने की आवश्यकता पर बल देगा। विशेषज्ञों का मानना है कि पौध जैव-सुरक्षा और टिकाऊ कृषि पद्धतियां भविष्य की खाद्य चुनौतियों का समाधान प्रदान करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी।&lt;/p&gt;</content>
    <summary type="html">&lt;p&gt;मणिपुर विश्वविद्यालय के लाइफ साइंसेज (वनस्पति विज्ञान) विभाग ने अंतरराष्ट्रीय पौध स्वास्थ्य दिवस के अवसर पर “प्लांट हेल्थ मैनेजमेंट फॉर फूड सिक्योरिटी” विषय पर दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन किया। विशेषज्ञों ने पौध जैव-सुरक्षा और खाद्य सुरक्षा के संबंध पर विस्तार से चर्चा की।&lt;/p&gt;&lt;br/&gt;&lt;img src="https://www.mudarpan.in/view/june-2026/plant-health-seminar.jpg"/&gt;</summary>
  </entry>
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    <title>मणिपुर विश्वविद्यालय में अंतरराष्ट्रीय परिवार दिवस मनाया गया, परिवार संस्था की चुनौतियों पर हुई चर्चा</title>
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    <updated>2026-06-03T14:28:02Z</updated>
    <content type="html">&lt;p&gt;&lt;img src="https://www.mudarpan.in/view/june-2026/international-family-day.jpg"&gt;&amp;nbsp;&lt;/p&gt;
&lt;p class="isSelectedEnd"&gt;&lt;strong&gt;इम्फाल, 15 मई:&lt;/strong&gt; मणिपुर विश्वविद्यालय के समाजशास्त्र विभाग द्वारा गुरुवार को विभागीय परिसर में अंतरराष्ट्रीय परिवार दिवस (International Day of Families) मनाया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य तेजी से बदलते सामाजिक परिवेश, बढ़ते व्यक्तिवाद और परिवार की बदलती संरचनाओं के बीच परिवार संस्था के महत्व को रेखांकित करना था।&lt;/p&gt;
&lt;p class="isSelectedEnd"&gt;कार्यक्रम की शुरुआत विश्वविद्यालय गीत के साथ हुई, जिसके बाद अतिथियों का पारंपरिक लेंगयान भेंट कर स्वागत किया गया। समारोह की अध्यक्षता समाजशास्त्र विभागाध्यक्ष प्रो. एम. लिली ने की, जबकि मणिपुर विश्वविद्यालय के स्कूल ऑफ सोशल साइंसेज की डीन प्रो. एल. मेमचा मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहीं।&lt;/p&gt;
&lt;p class="isSelectedEnd"&gt;अपने संबोधन में प्रो. एल. मेमचा ने परिवार की स्थायी और महत्वपूर्ण भूमिका पर प्रकाश डालते हुए कहा, &lt;strong&gt;&amp;ldquo;घर वहीं है जहाँ परिवार है।&amp;rdquo;&lt;/strong&gt; उन्होंने कहा कि बदलते समय में भी परिवार समाज की सबसे महत्वपूर्ण इकाई बना हुआ है और सामाजिक मूल्यों के संरक्षण में इसकी केंद्रीय भूमिका है।&lt;/p&gt;
&lt;p class="isSelectedEnd"&gt;अध्यक्षीय भाषण में प्रो. एम. लिली ने समकालीन सामाजिक चुनौतियों के संदर्भ में पारिवारिक संबंधों को मजबूत बनाने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि सामाजिक परिवर्तन के इस दौर में परिवारों के भीतर संवाद, सहयोग और जिम्मेदारी की भावना को और सुदृढ़ करने की जरूरत है।&lt;/p&gt;
&lt;p class="isSelectedEnd"&gt;कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण &amp;ldquo;&lt;strong&gt;परिवार संस्था की कमजोर होती नींव और बच्चों का धूमिल भविष्य&lt;/strong&gt;&amp;rdquo; विषय पर आयोजित विशेष व्याख्यान था, जिसे मणिपुर विश्वविद्यालय के मानव विज्ञान विभागाध्यक्ष प्रो. हाओबिजाम वोकेंद्र सिंह ने प्रस्तुत किया।&lt;/p&gt;
&lt;p class="isSelectedEnd"&gt;अपने व्याख्यान में प्रो. वोकेंद्र सिंह ने परिवार की अवधारणा के ऐतिहासिक विकास और विश्वभर में प्रचलित विभिन्न पारिवारिक संरचनाओं का विश्लेषण किया। उन्होंने कहा कि मानव व्यवहार को आकार देने में जैविक कारकों से अधिक संस्कृति की भूमिका होती है और दुनिया के विभिन्न समाजों में बच्चों के पालन-पोषण की परंपराएं इसका प्रमाण हैं।&lt;/p&gt;
&lt;p class="isSelectedEnd"&gt;उन्होंने परिवार को राष्ट्र निर्माण की आधारशिला बताते हुए कहा कि परिवार ही नागरिकता, नैतिक मूल्यों और सामाजिक जिम्मेदारियों का पहला विद्यालय है। उन्होंने वैश्विक आंकड़ों का हवाला देते हुए आय असमानता, विवाह की बढ़ती आयु, बढ़ती तलाक दर और बदलती पारिवारिक संरचनाओं के बच्चों के विकास पर पड़ने वाले प्रभावों की चर्चा की।&lt;/p&gt;
&lt;p class="isSelectedEnd"&gt;प्रो. वोकेंद्र सिंह ने अस्थिर पारिवारिक वातावरण में पले-बढ़े बच्चों पर पड़ने वाले सामाजिक और मनोवैज्ञानिक प्रभावों का भी विश्लेषण किया। उन्होंने परिवार से जुड़े मूल्यों, जिम्मेदारियों और सामाजिक प्रतिबद्धताओं को संरक्षित रखने के लिए सामूहिक प्रयासों की आवश्यकता पर जोर दिया।&lt;/p&gt;
&lt;p class="isSelectedEnd"&gt;कार्यक्रम में विश्वविद्यालय के विभिन्न विभागों के शिक्षक, शोधार्थी, छात्र-छात्राएं तथा आमंत्रित अतिथि बड़ी संख्या में उपस्थित रहे। कार्यक्रम का समापन धन्यवाद ज्ञापन, सामूहिक छायाचित्र और अल्पाहार के साथ हुआ।&lt;/p&gt;
&lt;p&gt;समाजशास्त्र विभाग द्वारा आयोजित यह कार्यक्रम परिवार संस्था की बदलती चुनौतियों और समकालीन समाज में उसकी प्रासंगिकता पर गंभीर चिंतन का महत्वपूर्ण मंच साबित हुआ।&lt;/p&gt;</content>
    <summary type="html">&lt;p&gt;मणिपुर विश्वविद्यालय के समाजशास्त्र विभाग ने अंतरराष्ट्रीय परिवार दिवस 2026 मनाया। कार्यक्रम में परिवार संस्था के महत्व, बदलती सामाजिक संरचनाओं और बच्चों के भविष्य पर विशेषज्ञों ने विचार साझा किए।&lt;/p&gt;&lt;br/&gt;&lt;img src="https://www.mudarpan.in/view/june-2026/international-family-day.jpg"/&gt;</summary>
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    <title>मणिपुर विश्वविद्यालय में तीन दिवसीय क्वांटम कंप्यूटिंग कार्यशाला का शुभारंभ, IIT खड़गपुर का तकनीकी सहयोग</title>
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      <name>Naorem Mohen</name>
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    <updated>2026-06-03T04:31:57Z</updated>
    <content type="html">&lt;p&gt;&lt;img src="https://www.mudarpan.in/view/june-2026/quantum-computing.jpg"&gt;&amp;nbsp;&lt;/p&gt;
&lt;p class="isSelectedEnd"&gt;&lt;strong&gt;इम्फाल, 27 मई:&lt;/strong&gt; मणिपुर विश्वविद्यालय के कंप्यूटर विज्ञान विभाग द्वारा राष्ट्रीय सुपरकंप्यूटिंग मिशन (NSM) के सहयोग तथा भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (IIT) खड़गपुर के तकनीकी समर्थन से आयोजित तीन दिवसीय क्वांटम कंप्यूटिंग कार्यशाला का बुधवार को सफलतापूर्वक शुभारंभ हुआ। कार्यशाला का उद्देश्य छात्रों, शोधार्थियों और शिक्षकों को क्वांटम प्रौद्योगिकी के उभरते क्षेत्र से परिचित कराना तथा इस क्षेत्र में क्षमता निर्माण को बढ़ावा देना है।&lt;/p&gt;
&lt;p class="isSelectedEnd"&gt;कार्यक्रम के उद्घाटन सत्र में स्वागत भाषण एवं मुख्य वक्तव्य देते हुए कार्यशाला समन्वयक तथा कंप्यूटर विज्ञान विभाग के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. खुमुकचाम रॉबिन्द्रो सिंह ने वर्तमान तकनीकी परिदृश्य में क्वांटम कंप्यूटिंग की परिवर्तनकारी भूमिका पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि क्वांटम कंप्यूटिंग आज की सबसे क्रांतिकारी तकनीकों में से एक बनकर उभरी है, जो कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), क्रिप्टोग्राफी, स्वास्थ्य सेवा, वैज्ञानिक अनुसंधान, अनुकूलन (Optimization) और मटेरियल साइंस जैसे क्षेत्रों में व्यापक बदलाव लाने की क्षमता रखती है।&lt;/p&gt;
&lt;p class="isSelectedEnd"&gt;डॉ. रॉबिन्द्रो सिंह ने कहा कि छात्रों, शोधार्थियों और शिक्षकों के बीच इन उभरती हुई क्वांटम तकनीकों के प्रति जागरूकता बढ़ाना और उन्हें अकादमिक रूप से तैयार करना समय की महत्वपूर्ण आवश्यकता है। उन्होंने कार्यशाला की सफलता में योगदान देने वाले प्रो. सोनजॉय मजूमदार, प्रो. सब्यसाची मिश्रा, कार्यक्रम समन्वयक प्रो. सोमनाथ रॉय तथा राष्ट्रीय सुपरकंप्यूटिंग मिशन से वित्तीय सहायता उपलब्ध कराने में सहयोग देने वाले आशीष कुवेलकर के प्रति आभार व्यक्त किया।&lt;/p&gt;
&lt;p class="isSelectedEnd"&gt;कंप्यूटर विज्ञान विभाग के विभागाध्यक्ष डाल्टन मेइती थौनाओजम ने अपने संबोधन में आधुनिक विज्ञान और प्रौद्योगिकी में क्वांटम कंप्यूटिंग के बढ़ते महत्व पर चर्चा की। उन्होंने छात्रों और शोधार्थियों से उभरते हुए अनुसंधान क्षेत्रों में सक्रिय भागीदारी करने का आह्वान किया तथा क्वांटम प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में बहु-विषयक सहयोग को मजबूत करने की आवश्यकता पर बल दिया।&lt;/p&gt;
&lt;p class="isSelectedEnd"&gt;कार्यशाला के संसाधन व्यक्तियों प्रो. सोनजॉय मजूमदार और प्रो. सब्यसाची मिश्रा ने क्वांटम कंप्यूटिंग की संभावनाओं और इसके व्यापक अनुप्रयोगों पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने बताया कि यह तकनीक उन जटिल संगणनात्मक समस्याओं का समाधान करने में सक्षम है जिन्हें पारंपरिक कंप्यूटरों के माध्यम से हल करना अत्यंत कठिन या लगभग असंभव है। उन्होंने इसे भविष्य के वैज्ञानिक नवाचार और तकनीकी विकास का प्रमुख आधार बताया।&lt;/p&gt;
&lt;p class="isSelectedEnd"&gt;उद्घाटन सत्र में विश्वविद्यालय के शिक्षकों, शोधार्थियों, छात्रों तथा विभिन्न प्रशासनिक अधिकारियों ने भाग लिया। आयोजकों ने कार्यशाला के सफल आयोजन के लिए विश्वविद्यालय प्रशासन, विशेष रूप से कुलपति, कुलसचिव तथा स्कूल ऑफ मैथमेटिकल एंड फिजिकल साइंसेज के डीन के निरंतर सहयोग और प्रोत्साहन के प्रति आभार व्यक्त किया।&lt;/p&gt;
&lt;p&gt;तीन दिवसीय यह कार्यशाला आगामी दो दिनों तक तकनीकी सत्रों, विशेषज्ञ व्याख्यानों और व्यावहारिक प्रशिक्षण कार्यक्रमों के साथ जारी रहेगी। आयोजकों के अनुसार प्रतिभागियों को क्वांटम कंप्यूटिंग की मूलभूत अवधारणाओं से लेकर इसके आधुनिक अनुप्रयोगों तक की जानकारी प्रदान की जाएगी, जिससे इस अत्याधुनिक क्षेत्र में अनुसंधान और नवाचार को बढ़ावा मिल सके।&lt;/p&gt;</content>
    <summary type="html">&lt;p&gt;मणिपुर विश्वविद्यालय के कंप्यूटर विज्ञान विभाग द्वारा राष्ट्रीय सुपरकंप्यूटिंग मिशन और IIT खड़गपुर के सहयोग से तीन दिवसीय क्वांटम कंप्यूटिंग कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यशाला में क्वांटम तकनीक, एआई, क्रिप्टोग्राफी और वैज्ञानिक अनुसंधान में इसके अनुप्रयोगों पर चर्चा हुई।&lt;/p&gt;&lt;br/&gt;&lt;img src="https://www.mudarpan.in/view/june-2026/quantum-computing.jpg"/&gt;</summary>
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    <title>राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से मिलीं मणिपुर विश्वविद्यालय की शोधार्थी संजू अकोइजम, 3000 रुपये से खड़ा किया 3 करोड़ का उद्यम</title>
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      <name>Naorem Mohen</name>
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    <id>https://www.mudarpan.in/news/manipur-university-phd-scholar-sanju-akoijam-meets-president-droupadi-murmu</id>
    <updated>2026-06-03T04:07:12Z</updated>
    <content type="html">&lt;p&gt;&lt;img src="https://www.mudarpan.in/view/june-2026/sanju-akoijam.jpg"&gt;&amp;nbsp;&lt;/p&gt;
&lt;p data-start="990" data-end="1313"&gt;मणिपुर विश्वविद्यालय की पीएचडी शोधार्थी और युवा उद्यमी &lt;span class="hover:entity-accent entity-underline inline cursor-pointer align-baseline"&gt;&lt;span class="whitespace-normal"&gt;Droupadi Murmu&lt;/span&gt;&lt;/span&gt; से मिलने का दुर्लभ अवसर प्राप्त करने वाली संजू अकोइजम इन दिनों चर्चा में हैं। 19 मई 2026 को राष्ट्रपति भवन में आयोजित एक विशेष कार्यक्रम में देशभर से आमंत्रित कारीगरों और बुनकरों के बीच उन्हें सम्मानित किया गया।&lt;/p&gt;
&lt;p data-start="1315" data-end="1692"&gt;कार्यक्रम के दौरान राष्ट्रपति भवन में आमंत्रित सभी कारीगरों को पश्मीना शॉल भेंट कर सम्मानित किया गया। उन्हें राष्ट्रपति आवास का गाइडेड टूर कराया गया तथा दोपहर भोज भी आयोजित किया गया। इस अवसर को जीवन का प्रेरणादायक अनुभव बताते हुए संजू अकोइजम ने कहा कि इससे स्वदेशी हस्तशिल्पों के संरक्षण, संवर्धन और उनके माध्यम से स्थायी आजीविका सृजन के प्रति उनकी प्रतिबद्धता और मजबूत हुई है।&lt;/p&gt;
&lt;p data-start="1694" data-end="2056"&gt;विशेष बात यह रही कि पूर्वोत्तर भारत से आमंत्रित प्रमुख कारीगरों और बुनकरों के समूह में संजू अकोइजम मणिपुर की एकमात्र महिला प्रतिनिधि थीं। इससे पहले गणतंत्र दिवस 2026 के अवसर पर आयोजित राष्ट्रपति के &amp;lsquo;एट होम&amp;rsquo; समारोह में भी उन्होंने कूना (कौना घास) शिल्प और पारंपरिक हस्तनिर्मित उत्पादों के माध्यम से पूर्वोत्तर भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत का प्रदर्शन किया था।&lt;/p&gt;
&lt;h2 data-section-id="17j5iwx" data-start="2058" data-end="2089"&gt;वाइस चांसलर ने किया सम्मानित&lt;/h2&gt;
&lt;p data-start="2091" data-end="2431"&gt;&lt;a href="https://www.manipuruniv.ac.in/"&gt;मणिपुर विश्वविद्यालय&lt;/a&gt; के वाइस चांसलर (इन-चार्ज) प्रो. गंगा प्रसाद प्रसैन ने अपने कार्यालय में आयोजित एक सम्मान समारोह में संजू अकोइजम को सम्मानित किया। उन्होंने कहा कि संजू की उपलब्धियां न केवल विश्वविद्यालय बल्कि पूरे मणिपुर के लिए गौरव का विषय हैं। उनकी सफलता युवाओं को नवाचार, शोध और उद्यमिता की दिशा में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करती है।&lt;/p&gt;
&lt;p data-start="2433" data-end="2646"&gt;प्रो. प्रसैन ने संजू की मेंटर प्रो. हंजाबम इश्वोरचंद्र शर्मा के योगदान की भी सराहना करते हुए कहा कि विश्वविद्यालय अकादमिक उत्कृष्टता, पारंपरिक ज्ञान, नवाचार और उद्यमिता के बीच मजबूत सेतु बनाने के लिए प्रतिबद्ध है।&lt;/p&gt;
&lt;h2 data-section-id="1gamki7" data-start="2648" data-end="2700"&gt;3000 रुपये से शुरू होकर 3 करोड़ तक पहुंचा कारोबार&lt;/h2&gt;
&lt;p data-start="2702" data-end="2946"&gt;इम्फाल पूर्व जिले के सिंजामेई मखा ओइनाम थिंगेल की निवासी संजू अकोइजम &amp;lsquo;एच.आई. स्टोर, इम्फाल&amp;rsquo; की संस्थापक हैं। उनका ऑनलाइन उद्यम कूना घास से बने हस्तनिर्मित उत्पादों, सूखे फूलों की सजावट और पूर्वोत्तर भारत के पारंपरिक उपहारों के लिए जाना जाता है।&lt;/p&gt;
&lt;p data-start="2948" data-end="3242"&gt;सिर्फ 3000 रुपये की शुरुआती पूंजी से शुरू किया गया यह व्यवसाय आज लगभग 3 करोड़ रुपये के अनुमानित टर्नओवर तक पहुंच चुका है। उनकी इस उपलब्धि को देखते हुए उत्तरी पूर्वी परिषद (NEC) की NEEDP योजना के तहत उन्हें शीर्ष 20 प्रदर्शनकर्ताओं में शामिल किया गया और 7 लाख रुपये का अनुदान भी प्रदान किया गया।&lt;/p&gt;
&lt;h2 data-section-id="rcmbik" data-start="3244" data-end="3280"&gt;मेंटर्स और संस्थाओं का जताया आभार&lt;/h2&gt;
&lt;p data-start="3282" data-end="3537"&gt;संजू अकोइजम ने अपनी सफलता का श्रेय अपने दोनों मेंटर्स प्रो. हंजाबम इश्वोरचंद्र शर्मा और डॉ. सोरोखैबाम केशोरजित सिंह को दिया। उन्होंने कहा कि दोनों शिक्षकों ने उनके पारंपरिक शिल्प ज्ञान को एक सफल और टिकाऊ व्यवसाय मॉडल में बदलने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।&lt;/p&gt;
&lt;p data-start="3539" data-end="3809"&gt;उन्होंने डीओएनईआर मंत्रालय के अंतर्गत कार्यरत &lt;span class="hover:entity-accent entity-underline inline cursor-pointer align-baseline"&gt;&lt;span class="whitespace-normal"&gt;North Eastern Handicrafts and Handlooms Development Corporation&lt;/span&gt;&lt;/span&gt; का भी आभार व्यक्त किया। उनके अनुसार संस्था द्वारा उपलब्ध कराए गए बाजार संपर्क, मार्गदर्शन और निरंतर सहयोग ने उनके उद्यम को छोटी शुरुआत से राष्ट्रीय पहचान तक पहुंचाने में अहम योगदान दिया।&lt;/p&gt;
&lt;p data-start="3811" data-end="4056" data-is-last-node="" data-is-only-node=""&gt;संजू अकोइजम की यह यात्रा दर्शाती है कि पारंपरिक ज्ञान, नवाचार, शोध और दृढ़ संकल्प के माध्यम से स्थानीय संसाधनों को वैश्विक अवसरों में बदला जा सकता है। उनकी सफलता मणिपुर और पूरे पूर्वोत्तर भारत के युवाओं के लिए एक प्रेरणादायक उदाहरण बनकर उभरी है।&lt;/p&gt;</content>
    <summary type="html">&lt;p&gt;मणिपुर विश्वविद्यालय की पीएचडी शोधार्थी और युवा उद्यमी संजू अकोइजम को राष्ट्रपति भवन में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से मिलने का सम्मान मिला। 3000 रुपये से शुरू किया गया उनका कूना शिल्प आधारित व्यवसाय आज 3 करोड़ रुपये के अनुमानित टर्नओवर तक पहुंच चुका है।&lt;/p&gt;&lt;br/&gt;&lt;img src="https://www.mudarpan.in/view/june-2026/sanju-akoijam.jpg"/&gt;</summary>
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