इंफाल, 17 सितंबर 2026: मणिपुर यूनिवर्सिटी के डीन ऑफ स्टूडेंट्स वेलफेयर कार्यालय ने गुरुवार को यूनिवर्सिटी ऑडिटोरियम में “Free and Fair MUSU Elections” विषय पर एक दिवसीय जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया। कार्यक्रम का उद्देश्य आगामी मणिपुर यूनिवर्सिटी स्टूडेंट्स यूनियन (MUSU) चुनाव से पहले विद्यार्थियों के बीच जागरूक भागीदारी, चुनावी अनुशासन और स्वस्थ लोकतांत्रिक संस्कृति को बढ़ावा देना था।
कार्यक्रम में विश्वविद्यालय के शिक्षकों, विशेषज्ञों, अधिकारियों और विद्यार्थियों ने हिस्सा लिया। वक्ताओं ने स्वतंत्र एवं निष्पक्ष चुनाव, गुप्त मतदान, चुनावी आचार संहिता, उम्मीदवारों एवं मतदाताओं की जिम्मेदारी तथा लोकतांत्रिक प्रक्रिया से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर चर्चा की।
शांतिपूर्ण और पारदर्शी चुनाव पर जोर
मणिपुर यूनिवर्सिटी के डीन ऑफ स्टूडेंट्स वेलफेयर प्रो. च. इबोहल सिंह ने स्वागत एवं मुख्य वक्तव्य दिया। उन्होंने कहा कि स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव लोकतांत्रिक व्यवस्था तथा चुनाव सुधारों से जुड़ी चर्चाओं का महत्वपूर्ण हिस्सा रहे हैं।
उन्होंने कहा कि मणिपुर यूनिवर्सिटी स्टूडेंट्स यूनियन के पुनर्गठन के बाद यह आवश्यक है कि विश्वविद्यालय समुदाय इस बात पर गंभीरता से विचार करे कि छात्र संघ के चुनाव शांतिपूर्ण, पारदर्शी और व्यवस्थित तरीके से कैसे आयोजित किए जाएं।
प्रो. इबोहल ने कहा कि वैध रूप से निर्वाचित छात्र संघ विश्वविद्यालय के विकास और विद्यार्थियों की चिंताओं के प्रतिनिधित्व में भूमिका निभा सकता है। उन्होंने उम्मीदवारों और उनके समर्थकों से व्यक्तिगत आरोपों, डराने-धमकाने और अनावश्यक खर्च से बचते हुए शांतिपूर्ण तरीके से प्रचार करने की अपील की।
उन्होंने परिसर के विभिन्न स्थानों पर लगाए गए अनधिकृत प्रचार सामग्री का भी उल्लेख किया और बताया कि संबंधित लोगों को 48 घंटे के भीतर ऐसी सामग्री हटाने तथा विश्वविद्यालय परिसर की स्वच्छता बनाए रखने के लिए नोटिस जारी किया गया है।
धनबल और बाहरी हस्तक्षेप से बचने की अपील
मणिपुर स्टेट ह्यूमन राइट्स कमीशन के पूर्व अध्यक्ष और वरिष्ठ अधिवक्ता खैदेम मणि सिंह ने चुनाव को लोकतंत्र का महत्वपूर्ण घटक बताया। उन्होंने भारत की फर्स्ट-पास्ट-द-पोस्ट चुनाव प्रणाली और आनुपातिक प्रतिनिधित्व की चर्चा करते हुए कहा कि चुनाव सुधारों पर लंबे समय से बहस होती रही है।
उन्होंने स्वतंत्र एवं निष्पक्ष चुनाव को संविधान के अनुच्छेद 19 के तहत प्राप्त अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और संघ या यूनियन बनाने की स्वतंत्रता जैसे अधिकारों से भी जोड़ा। उनके अनुसार, छात्र चुनाव युवाओं को लोकतांत्रिक भागीदारी और सूचित निर्णय लेने की प्रक्रिया को समझने का अवसर देते हैं।
खैदेम मणि सिंह ने विश्वविद्यालय चुनावों में धनबल, बाहुबल और राजनीतिक दलों या उनके छात्र संगठनों के अप्रत्यक्ष हस्तक्षेप से बचने की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि छात्र संगठनों का ध्यान विद्यार्थियों और विश्वविद्यालय से जुड़े मुद्दों पर होना चाहिए।
छात्र चुनाव को लोकतंत्र की पहली पाठशाला बताया
समाजशास्त्री डॉ. धनबीर लैश्रम ने विश्वविद्यालय चुनाव को “लोकतंत्र की पहली पाठशाला” बताया। उन्होंने कहा कि सुशासन की शुरुआत परिसर से होनी चाहिए, क्योंकि वर्तमान विद्यार्थियों में से कुछ भविष्य में राज्य या राष्ट्रीय स्तर पर राजनीतिक एवं सार्वजनिक भूमिकाओं में आ सकते हैं।
उन्होंने स्पष्ट चुनाव नियम, सभी उम्मीदवारों के लिए समान अवसर, प्रतिभागियों में आत्म-अनुशासन तथा मतपत्र की गोपनीयता और गरिमा बनाए रखने की आवश्यकता पर जोर दिया।
डॉ. धनबीर ने कहा कि विद्यार्थियों को वैध चुनावी प्रक्रिया के माध्यम से आने वाले परिणाम को स्वीकार करना चाहिए। उन्होंने मतदाताओं से उम्मीदवारों का आकलन उनके ईमानदारी, चरित्र, मुद्दों और भूमि के इतिहास संबंधी ज्ञान, प्रशासनिक क्षमता तथा संविधान एवं कानून की समझ जैसे पहलुओं के आधार पर करने की अपील की।
गुप्त मतदान और मॉडल कोड ऑफ कंडक्ट पर जोर
मणिपुर यूनिवर्सिटी के लॉ विभाग के प्रमुख डॉ. युमनाम प्रेमानंद सिंह ने कहा कि स्वतंत्र चुनाव में मतदाताओं के सामने वास्तविक विकल्प होना चाहिए, जबकि निष्पक्ष चुनाव में समानता और पक्षपात से मुक्त प्रक्रिया सुनिश्चित होनी चाहिए।
उन्होंने गुप्त मतदान, स्पष्ट Model Code of Conduct और मणिपुर यूनिवर्सिटी स्टूडेंट्स यूनियन के संविधान का कड़ाई से पालन करने की आवश्यकता पर जोर दिया।
उन्होंने कहा कि उम्मीदवारों की पृष्ठभूमि, अकादमिक उपस्थिति और अनुशासनात्मक रिकॉर्ड की उचित जांच होनी चाहिए। उन्होंने अत्यधिक चुनावी खर्च से मुक्त प्रक्रिया की आवश्यकता बताते हुए कहा कि मणिपुर यूनिवर्सिटी ऐसा चुनावी मॉडल विकसित कर सकती है, जिससे संबद्ध कॉलेजों और अन्य शिक्षण संस्थानों को भी सीख मिल सके।
चुनाव को लोकतंत्र की प्रयोगशाला बताया
स्कूल ऑफ ह्यूमन एंड एनवायरनमेंटल साइंसेज की डीन प्रो. एम.सी. अरुणकुमार ने कहा कि चुनाव में स्वतंत्रता का अर्थ है कि मतदाता बिना बाहरी दबाव के अपनी इच्छा और समझ के अनुसार मतदान कर सके।
उन्होंने कहा कि मतदाताओं को केवल व्यक्तियों के बीच ही नहीं, बल्कि विचारों, मूल्यों और कार्यक्रमों के बीच भी विकल्प मिलना चाहिए। उन्होंने निष्पक्षता को व्यक्तिगत उम्मीदवार के हितों के बजाय सामूहिक कल्याण और न्याय के दृष्टिकोण से देखने की आवश्यकता बताई।
प्रो. अरुणकुमार ने उम्मीदवारों, मतदाताओं और प्रचारकों से मणिपुर यूनिवर्सिटी, छात्र समुदाय और समाज के हित को प्राथमिकता देने की अपील की। उन्होंने MUSU के इतिहास और उसके पुनरुद्धार का उल्लेख करते हुए छात्र समुदाय की आवाज के लिए प्रभावी मंच की आवश्यकता पर भी प्रकाश डाला।
राजनीति विज्ञान विभाग की प्रमुख प्रो. खेलिना गुरुमायुम ने MUSU चुनाव को “लोकतंत्र की प्रयोगशाला” बताया, जहां विद्यार्थी चुनाव लड़ने, मतदान करने, प्रचार करने, बहस करने, दूसरों को अपने विचारों के लिए समझाने और चुनावी परिणामों को स्वीकार करने की प्रक्रिया सीखते हैं।
उन्होंने कहा कि चुनाव केवल प्रतिनिधियों के चयन तक सीमित नहीं हैं, बल्कि लोकतांत्रिक जिम्मेदारी से भी जुड़े हैं। स्वतंत्र चुनाव में मतदाताओं को भय, दबाव, जबरदस्ती या डराने-धमकाने के बिना अपनी पसंद व्यक्त करने का अवसर मिलना चाहिए, जबकि निष्पक्ष चुनाव में सभी उम्मीदवारों और मतदाताओं के लिए समान नियम लागू होने चाहिए।
प्रो. खेलिना ने उम्मीदवारों से चुनाव को सत्ता के संघर्ष के बजाय विचारों की प्रतिस्पर्धा बनाए रखने की अपील की। उन्होंने विद्यार्थियों के कल्याण, मानसिक स्वास्थ्य, लैंगिक समानता और कैंपस के सुधार जैसे मुद्दों पर स्पष्ट एवं व्यावहारिक प्रस्ताव रखने पर जोर दिया।
उन्होंने कहा कि चुनावी प्रतिद्वंद्वी को दुश्मन नहीं माना जाना चाहिए और राजनीतिक प्रतिस्पर्धा को व्यक्तिगत शत्रुता में नहीं बदलना चाहिए। उन्होंने अभद्र भाषा और हिंसा से बचते हुए चुनाव प्रचार करने तथा चुनाव हारने की स्थिति में परिणाम को स्वीकार करने को भी नेतृत्व का हिस्सा बताया।
प्रो. खेलिना ने विश्वविद्यालय समुदाय से ऐसी चुनाव प्रक्रिया सुनिश्चित करने की अपील की जिसमें विचारों और तर्कों को महत्व मिले। उन्होंने कहा कि स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव केवल मतदान के दिन से निर्धारित नहीं होता, बल्कि पूरी चुनाव प्रक्रिया में प्रत्येक प्रतिभागी के आचरण से इसकी नींव तैयार होती है।
अनुशासित और जिम्मेदार चुनाव में भागीदारी की अपील
प्रो. प्रेमलता मैसनाम ने भी कार्यक्रम को संबोधित किया और MUSU चुनाव को अनुशासित, पारदर्शी और जिम्मेदार तरीके से आयोजित करने के महत्व पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों की सार्थक भागीदारी लोकतांत्रिक मूल्यों, अकादमिक विकास और विश्वविद्यालय में रचनात्मक वातावरण को मजबूत करने में योगदान दे सकती है।
कार्यक्रम के अध्यक्ष मंडल में प्रो. प्रेमलता मैसनाम, डीन, स्कूल ऑफ एजुकेशन; प्रो. कननबाला सारंगथेम, डीन, स्कूल ऑफ एग्रीकल्चरल साइंसेज; प्रो. तोइजाम ताम्फा देवी, डीन, स्कूल ऑफ ह्यूमैनिटीज; प्रो. आर.के. लोनीबाला, डीन, स्कूल ऑफ मैथमेटिकल एंड फिजिकल साइंसेज; प्रो. एन. बसंता सिंह, डीन, स्कूल ऑफ इंजीनियरिंग; प्रो. एन. राजेन सिंह, प्रॉक्टर; प्रो. लैश्राम राजेंद्रकुमार सिंह, फाइनेंस ऑफिसर; और प्रो. च. इबोहल सिंह, डीन ऑफ स्टूडेंट्स वेलफेयर शामिल थे।
कार्यक्रम का समापन आमंत्रित विशेषज्ञों, अध्यक्ष मंडल के सदस्यों और विद्यार्थियों के बीच आयोजित संवादात्मक सत्र के बाद हुआ। डॉ. हुइद्रोम सूरज सिंह ने धन्यवाद ज्ञापन किया।