इम्फाल, 30 अप्रैल: मणिपुर विश्वविद्यालय ने गुरुवार को मीडिया आर्काइव एवं अनुसंधान केंद्र (Media Archive and Research Centre - MARC) की स्थापना कर पूर्वोत्तर भारत की समृद्ध ऑडियो-विजुअल सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण और दस्तावेजीकरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया। यह केंद्र मणिपुर और पूरे पूर्वोत्तर क्षेत्र की सांस्कृतिक, ऐतिहासिक और सामाजिक धरोहर को संरक्षित करने तथा शोध को बढ़ावा देने के उद्देश्य से स्थापित किया गया है।
केंद्र का औपचारिक उद्घाटन विश्वविद्यालय के जनसंचार एवं पत्रकारिता विभाग के सेमिनार हॉल में आयोजित समारोह में किया गया। MARC को एक ऐसे मंच के रूप में विकसित किया जा रहा है जो क्षेत्र की ऑडियो-विजुअल सांस्कृतिक अभिव्यक्तियों को संरक्षित करने के साथ-साथ ऐतिहासिक और सामाजिक महत्व की सामग्रियों का महत्वपूर्ण भंडार बनेगा। इसमें पारंपरिक जीवन-पद्धतियों से लेकर समकालीन सामाजिक कथाओं तक विविध सामग्री संग्रहित की जाएगी।
कार्यक्रम में मणिपुर विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. एन. लोकेन्द्र सिंह मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। स्कूल ऑफ सोशल साइंसेज की डीन प्रो. मेमचा लोइतोंगबम सम्मानित अतिथि थीं, जबकि एमएसएफडीएस के सचिव सुंजू बचस्पति मयूम विशेष अतिथि के रूप में शामिल हुए। कार्यक्रम की अध्यक्षता जनसंचार एवं पत्रकारिता विभागाध्यक्ष डॉ. नोंगमैथेम रोहिंकांता सिंह ने की।
MARC की अवधारणा चार प्रमुख स्तंभों — पहचान (Identity), स्वरूप (Form), अनुसंधान (Research) और समावेशन (Inclusion) — पर आधारित है। केंद्र का उद्देश्य क्षेत्र की भाषाई, सांस्कृतिक और सामाजिक पहचान को संरक्षित करना तथा मीडिया के क्षेत्र में तकनीकी और कलात्मक उपलब्धियों को प्रोत्साहित करना है।
केंद्र सक्रिय रूप से ऑडियो-विजुअल कृतियों, फिल्मों, वृत्तचित्रों, रिकॉर्डिंग्स और उनसे संबंधित दस्तावेजों का संग्रह और संरक्षण करेगा। विशेष रूप से यह पूर्वोत्तर भारत के लोगों के विविध जीवन अनुभवों, परंपराओं, संघर्षों और सामाजिक परिवर्तनों को दर्ज करने पर ध्यान केंद्रित करेगा।
MARC केवल अभिलेखों के संग्रह तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इतिहास, समाजशास्त्र, मानव विज्ञान, मीडिया अध्ययन और सांस्कृतिक अध्ययन जैसे विभिन्न विषयों में शोधकर्ताओं के लिए एक महत्वपूर्ण अकादमिक संसाधन केंद्र के रूप में कार्य करेगा। इसका एक प्रमुख उद्देश्य पूर्वोत्तर भारत के स्वदेशी समुदायों और कम प्रतिनिधित्व वाले समूहों की आवाज़ों को मुख्यधारा के अकादमिक विमर्श में स्थान दिलाना भी है।
इस पहल के पीछे प्रमुख प्रेरक शक्ति जनसंचार एवं पत्रकारिता विभाग के अतिथि संकाय सदस्य डॉ. जॉनसन राजकुमार हैं, जिन्हें MARC का विशेषज्ञ और प्रमाणित अभिलेखागार विशेषज्ञ (Certified Archivist) नियुक्त किया गया है। फिल्म संरक्षण और अभिलेखीकरण के क्षेत्र में उनकी विशेषज्ञता केंद्र की संग्रहण रणनीति, संरक्षण मानकों और शोध दिशा को मजबूत आधार प्रदान करेगी।
विश्वविद्यालय प्रशासन का मानना है कि MARC की स्थापना पूर्वोत्तर भारत की जीवंत मीडिया और सांस्कृतिक विरासत के व्यवस्थित दस्तावेजीकरण, संरक्षण और अकादमिक अध्ययन की दिशा में एक ऐतिहासिक पहल है। यह केंद्र आने वाले वर्षों में शोधकर्ताओं, छात्रों, मीडिया पेशेवरों और सांस्कृतिक कार्यकर्ताओं के लिए एक महत्वपूर्ण संसाधन केंद्र के रूप में विकसित होगा।
MARC के शुभारंभ के साथ मणिपुर विश्वविद्यालय ने न केवल क्षेत्रीय इतिहास और संस्कृति को संरक्षित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाया है, बल्कि भविष्य की पीढ़ियों के लिए पूर्वोत्तर भारत की बहुआयामी पहचान और विरासत को सुरक्षित रखने की प्रतिबद्धता भी प्रदर्शित की है।