इंफाल, 2 अगस्त 2026: मणिपुर विश्वविद्यालय के पुस्तकालय एवं सूचना विज्ञान विभाग में रविवार को "पूर्वोत्तर भारत में पुस्तकालय सेवाओं को बढ़ावा देने में राष्ट्रीय पुस्तकालय मिशन की भूमिका" विषय पर एक पैनल चर्चा आयोजित की गई। कार्यक्रम में विभाग के शिक्षक, छात्र तथा मणिपुर और अरुणाचल प्रदेश के सार्वजनिक पुस्तकालयों के कर्मियों ने भाग लिया।
पैनल में प्रो. च. इबोहल सिंह, विभागाध्यक्ष, पुस्तकालय एवं सूचना विज्ञान विभाग, मणिपुर विश्वविद्यालय; डॉ. गौतम कुमार शर्मा, उप-पुस्तकालयाध्यक्ष, तेजपुर विश्वविद्यालय; तथा दीपांजन चटर्जी, राष्ट्रीय पुस्तकालय मिशन, संस्कृति मंत्रालय, भारत सरकार शामिल थे।
चर्चा के दौरान विशेषज्ञों ने कहा कि पूर्वोत्तर राज्यों में सार्वजनिक पुस्तकालयों को मजबूत बनाने के लिए राजा राममोहन राय लाइब्रेरी फाउंडेशन (RRRLF), राष्ट्रीय पुस्तकालय मिशन, शैक्षणिक संस्थानों और राज्य सरकारों के बीच बेहतर समन्वय आवश्यक है।
विशेषज्ञों ने बताया कि राजा राममोहन राय लाइब्रेरी फाउंडेशन विभिन्न विकास योजनाओं के तहत पूर्वोत्तर भारत के सार्वजनिक पुस्तकालयों को 90:10 वित्तीय सहायता मॉडल के आधार पर अनुदान उपलब्ध कराता है। मणिपुर में इन प्रस्तावों की समीक्षा राज्य पुस्तकालय योजना समिति द्वारा की जाती है, जिसकी अध्यक्षता राज्य के कला एवं संस्कृति आयुक्त करते हैं।
दीपांजन चटर्जी ने कहा कि राष्ट्रीय पुस्तकालय मिशन का उद्देश्य सार्वजनिक पुस्तकालयों का आधुनिकीकरण, तकनीकी उन्नयन, डिजिटल सेवाओं का विस्तार, क्षमता निर्माण और जन-जागरूकता कार्यक्रमों को बढ़ावा देना है। उन्होंने बताया कि मिशन के तहत राज्य केंद्रीय पुस्तकालय, इंफाल को 2.23 करोड़ रुपये तथा सेनापति जिला पुस्तकालय को 87 लाख रुपये की सहायता प्रदान की गई है। इस राशि का उपयोग आधारभूत संरचना, तकनीकी उन्नयन, पुस्तकालय संसाधनों की खरीद, दिव्यांगजनों के लिए सुविधाओं और सामुदायिक कार्यक्रमों के विकास में किया गया है।
पैनल ने इस बात पर भी जोर दिया कि आधुनिक सार्वजनिक पुस्तकालयों को स्वचालन, डिजिटल पहुंच, पठन संस्कृति और सामुदायिक सहभागिता जैसी सेवाओं पर अधिक ध्यान देना होगा। साथ ही, केंद्र सरकार द्वारा उपलब्ध कराई गई वित्तीय सहायता और आधारभूत सुविधाओं का पूरा लाभ तभी मिल सकेगा, जब पर्याप्त प्रशिक्षित मानव संसाधन और संस्थागत सहयोग उपलब्ध हो।
डॉ. गौतम कुमार शर्मा ने कहा कि सीमित लागत में भी सार्वजनिक पुस्तकालयों का आधुनिकीकरण संभव है। उन्होंने बताया कि यदि किसी पुस्तकालय में भवन, पुस्तकें और बिजली की सुविधा उपलब्ध है, तो ओपन-सोर्स KOHA इंटीग्रेटेड लाइब्रेरी मैनेजमेंट सिस्टम के माध्यम से लगभग 2 से 3 लाख रुपये की लागत में उसे स्वचालित बनाया जा सकता है। उन्होंने राज्य में पहले एक पायलट परियोजना शुरू करने और उसके बाद इसे अन्य पुस्तकालयों तक विस्तारित करने का सुझाव दिया।
प्रो. च. इबोहल सिंह ने मणिपुर के पुस्तकालय आंदोलन के इतिहास पर प्रकाश डालते हुए कहा कि भारत में सार्वजनिक पुस्तकालय आंदोलन वर्ष 1907 में शुरू हुआ, जबकि तत्कालीन मणिपुर रियासत में इसकी शुरुआत वर्ष 1927 में हुई थी। उन्होंने कहा कि मणिपुर पब्लिक लाइब्रेरी एक्ट, 1988 के लंबित प्रावधानों को प्रभावी ढंग से लागू करने से राज्य की सार्वजनिक पुस्तकालय व्यवस्था और अधिक मजबूत होगी।
अपने समापन संबोधन में, जो कि मणिपुर लाइब्रेरी एसोसिएशन के अध्यक्ष भी हैं, प्रो. इबोहल सिंह ने सुझाव दिया कि राज्य सरकार मणिपुर विश्वविद्यालय के पुस्तकालय एवं सूचना विज्ञान विभाग के स्नातक और स्नातकोत्तर छात्रों को स्टाइपेंड आधारित लाइब्रेरी इंटर्न के रूप में नियुक्त करने पर विचार करे। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार और मणिपुर विश्वविद्यालय के बीच समझौता ज्ञापन (MoU) के माध्यम से ऐसा कार्यक्रम शुरू किया जा सकता है, जिससे युवाओं को व्यावहारिक अनुभव मिलेगा और सार्वजनिक पुस्तकालयों में लंबित तकनीकी कार्यों को भी गति मिलेगी।
कार्यक्रम के अंत में सभी विशेषज्ञों ने इस बात पर सहमति व्यक्त की कि भारत सरकार, पूर्वोत्तर राज्यों की सरकारों, शैक्षणिक संस्थानों और पुस्तकालय पेशेवरों के बीच निरंतर सहयोग से सार्वजनिक पुस्तकालयों का मजबूत नेटवर्क विकसित किया जा सकता है। इससे शिक्षा, शोध, पठन संस्कृति, आजीवन सीखने, ज्ञान के प्रसार तथा पूर्वोत्तर भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण को नई गति मिलेगी।