इंफाल, 31 जुलाई 2026: मणिपुर विश्वविद्यालय के पुस्तकालय एवं सूचना विज्ञान विभाग द्वारा सार्वजनिक पुस्तकालय कर्मियों के लिए राष्ट्रीय पुस्तकालय मिशन (National Mission on Libraries) के तहत पांच दिवसीय क्षमता निर्माण कार्यक्रम का शुभारंभ विश्वविद्यालय के कोर्ट हॉल में किया गया। इस कार्यक्रम को संस्कृति मंत्रालय, भारत सरकार के अधीन राजा राममोहन राय लाइब्रेरी फाउंडेशन द्वारा प्रायोजित किया गया है।
कार्यक्रम के उद्घाटन समारोह में मणिपुर विश्वविद्यालय की कार्यवाहक कुलपति प्रो. सुमित्रा फांजौबम मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहीं। दीपांजन चटर्जी, वित्त सलाहकार (FA), राष्ट्रीय पुस्तकालय मिशन, संस्कृति मंत्रालय, भारत सरकार ने विशेष अतिथि के रूप में भाग लिया। कार्यक्रम की अध्यक्षता पुस्तकालय एवं सूचना विज्ञान विभाग के अध्यक्ष प्रो. च. इबोहल सिंह ने की, जबकि एल. प्रमोद सिंह, मुख्य पुस्तकालयाध्यक्ष, राज्य केंद्रीय पुस्तकालय, इंफाल, विशिष्ट अतिथि रहे।
अपने संबोधन में प्रो. सुमित्रा फांजौबम ने कहा कि पुस्तकालय केवल पुस्तकों के संग्रह का स्थान नहीं, बल्कि ज्ञान, शिक्षा, अनुसंधान और आजीवन सीखने के महत्वपूर्ण केंद्र हैं। उन्होंने कहा कि डिजिटल युग में पुस्तकालयों की भूमिका लगातार बढ़ रही है और आधुनिक पुस्तकालयों के लिए प्रशिक्षित, तकनीकी रूप से दक्ष तथा उपयोगकर्ता-केंद्रित सेवाएं प्रदान करने वाले पुस्तकालय कर्मियों की आवश्यकता है।
विशेष अतिथि दीपांजन चटर्जी ने बताया कि राष्ट्रीय पुस्तकालय मिशन की स्थापना वर्ष 2012 में राष्ट्रीय ज्ञान आयोग की सिफारिश पर की गई थी और इसका क्रियान्वयन वर्ष 2014 से शुरू हुआ। उन्होंने कहा कि मणिपुर विश्वविद्यालय में आयोजित यह प्रशिक्षण कार्यक्रम मिशन के तहत देश का 57वां क्षमता निर्माण कार्यक्रम है। अब तक देशभर में 2,500 से अधिक सार्वजनिक पुस्तकालय कर्मियों को इस मिशन के माध्यम से प्रशिक्षित किया जा चुका है।
उन्होंने बताया कि प्रशिक्षण के दौरान प्रतिभागियों को KOHA के माध्यम से लाइब्रेरी ऑटोमेशन, सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी (ICT), दिव्यांगजनों के लिए पुस्तकालय सेवाएं, Google Sites के जरिए पुस्तकालय वेबसाइट निर्माण तथा सोशल मीडिया के प्रभावी उपयोग जैसे आधुनिक विषयों पर प्रशिक्षण दिया जाएगा।
दीपांजन चटर्जी ने यह भी जानकारी दी कि राष्ट्रीय पुस्तकालय मिशन के मॉडल लाइब्रेरी घटक के तहत राज्य केंद्रीय पुस्तकालय, इंफाल को 2.23 करोड़ रुपये तथा सेनापति जिला पुस्तकालय को 87 लाख रुपये की वित्तीय सहायता प्रदान की गई है।
अध्यक्षीय संबोधन में प्रो. च. इबोहल सिंह ने कहा कि मणिपुर विश्वविद्यालय पहली बार इस राष्ट्रीय प्रशिक्षण कार्यक्रम की मेजबानी कर रहा है। उन्होंने बताया कि सार्वजनिक पुस्तकालय कानून लागू करने वाले राज्यों में मणिपुर देश का छठा राज्य था, लेकिन पिछले तीन दशकों से इसका प्रभावी क्रियान्वयन नहीं हो पाया है। उन्होंने विशेष रूप से गैर-सरकारी संगठनों (NGO) द्वारा संचालित पुस्तकालयों के प्रतिनिधियों से प्रशिक्षण के दौरान अर्जित ज्ञान का उपयोग पुस्तकालय सेवाओं को बेहतर बनाने में करने का आग्रह किया।
मुख्य पुस्तकालयाध्यक्ष एल. प्रमोद सिंह ने मणिपुर में सार्वजनिक पुस्तकालय आंदोलन के इतिहास पर प्रकाश डालते हुए बताया कि राज्य में वर्तमान में सरकारी पुस्तकालयों के साथ-साथ 101 गैर-सरकारी सार्वजनिक पुस्तकालय भी संचालित हो रहे हैं।
पांच दिवसीय इस प्रशिक्षण कार्यक्रम में मणिपुर और अरुणाचल प्रदेश के पुस्तकालयाध्यक्ष, छात्र, विशेषज्ञ और विभिन्न हितधारक भाग ले रहे हैं। कार्यक्रम का उद्देश्य सार्वजनिक पुस्तकालयों को आधुनिक, समावेशी और तकनीक-सक्षम ज्ञान केंद्र के रूप में विकसित करना तथा सभी वर्गों के नागरिकों तक गुणवत्तापूर्ण पुस्तकालय सेवाएं पहुंचाना है।