इम्फाल, 27 मई: मणिपुर विश्वविद्यालय के कंप्यूटर विज्ञान विभाग द्वारा राष्ट्रीय सुपरकंप्यूटिंग मिशन (NSM) के सहयोग तथा भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (IIT) खड़गपुर के तकनीकी समर्थन से आयोजित तीन दिवसीय क्वांटम कंप्यूटिंग कार्यशाला का बुधवार को सफलतापूर्वक शुभारंभ हुआ। कार्यशाला का उद्देश्य छात्रों, शोधार्थियों और शिक्षकों को क्वांटम प्रौद्योगिकी के उभरते क्षेत्र से परिचित कराना तथा इस क्षेत्र में क्षमता निर्माण को बढ़ावा देना है।
कार्यक्रम के उद्घाटन सत्र में स्वागत भाषण एवं मुख्य वक्तव्य देते हुए कार्यशाला समन्वयक तथा कंप्यूटर विज्ञान विभाग के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. खुमुकचाम रॉबिन्द्रो सिंह ने वर्तमान तकनीकी परिदृश्य में क्वांटम कंप्यूटिंग की परिवर्तनकारी भूमिका पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि क्वांटम कंप्यूटिंग आज की सबसे क्रांतिकारी तकनीकों में से एक बनकर उभरी है, जो कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), क्रिप्टोग्राफी, स्वास्थ्य सेवा, वैज्ञानिक अनुसंधान, अनुकूलन (Optimization) और मटेरियल साइंस जैसे क्षेत्रों में व्यापक बदलाव लाने की क्षमता रखती है।
डॉ. रॉबिन्द्रो सिंह ने कहा कि छात्रों, शोधार्थियों और शिक्षकों के बीच इन उभरती हुई क्वांटम तकनीकों के प्रति जागरूकता बढ़ाना और उन्हें अकादमिक रूप से तैयार करना समय की महत्वपूर्ण आवश्यकता है। उन्होंने कार्यशाला की सफलता में योगदान देने वाले प्रो. सोनजॉय मजूमदार, प्रो. सब्यसाची मिश्रा, कार्यक्रम समन्वयक प्रो. सोमनाथ रॉय तथा राष्ट्रीय सुपरकंप्यूटिंग मिशन से वित्तीय सहायता उपलब्ध कराने में सहयोग देने वाले आशीष कुवेलकर के प्रति आभार व्यक्त किया।
कंप्यूटर विज्ञान विभाग के विभागाध्यक्ष डाल्टन मेइती थौनाओजम ने अपने संबोधन में आधुनिक विज्ञान और प्रौद्योगिकी में क्वांटम कंप्यूटिंग के बढ़ते महत्व पर चर्चा की। उन्होंने छात्रों और शोधार्थियों से उभरते हुए अनुसंधान क्षेत्रों में सक्रिय भागीदारी करने का आह्वान किया तथा क्वांटम प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में बहु-विषयक सहयोग को मजबूत करने की आवश्यकता पर बल दिया।
कार्यशाला के संसाधन व्यक्तियों प्रो. सोनजॉय मजूमदार और प्रो. सब्यसाची मिश्रा ने क्वांटम कंप्यूटिंग की संभावनाओं और इसके व्यापक अनुप्रयोगों पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने बताया कि यह तकनीक उन जटिल संगणनात्मक समस्याओं का समाधान करने में सक्षम है जिन्हें पारंपरिक कंप्यूटरों के माध्यम से हल करना अत्यंत कठिन या लगभग असंभव है। उन्होंने इसे भविष्य के वैज्ञानिक नवाचार और तकनीकी विकास का प्रमुख आधार बताया।
उद्घाटन सत्र में विश्वविद्यालय के शिक्षकों, शोधार्थियों, छात्रों तथा विभिन्न प्रशासनिक अधिकारियों ने भाग लिया। आयोजकों ने कार्यशाला के सफल आयोजन के लिए विश्वविद्यालय प्रशासन, विशेष रूप से कुलपति, कुलसचिव तथा स्कूल ऑफ मैथमेटिकल एंड फिजिकल साइंसेज के डीन के निरंतर सहयोग और प्रोत्साहन के प्रति आभार व्यक्त किया।
तीन दिवसीय यह कार्यशाला आगामी दो दिनों तक तकनीकी सत्रों, विशेषज्ञ व्याख्यानों और व्यावहारिक प्रशिक्षण कार्यक्रमों के साथ जारी रहेगी। आयोजकों के अनुसार प्रतिभागियों को क्वांटम कंप्यूटिंग की मूलभूत अवधारणाओं से लेकर इसके आधुनिक अनुप्रयोगों तक की जानकारी प्रदान की जाएगी, जिससे इस अत्याधुनिक क्षेत्र में अनुसंधान और नवाचार को बढ़ावा मिल सके।