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मणिपुर यूनिवर्सिटी में स्टॉकिंग, साइबर सुरक्षा और शिकायत तंत्र पर जागरूकता कार्यक्रम

मणिपुर यूनिवर्सिटी में NCW और MSCW ने स्टॉकिंग, साइबरस्टॉकिंग, महिला सुरक्षा, कानूनी अधिकार और शिकायत दर्ज करने के तरीकों पर जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया।

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इंफाल, 28 अगस्त 2026: मणिपुर यूनिवर्सिटी के वीसी कोर्ट हॉल में शुक्रवार को “स्टॉकिंग” विषय पर एक दिवसीय जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। इसमें स्टॉकिंग के चेतावनी संकेत, सुरक्षा उपाय, सहायता, कानून, अधिकार और शिकायत दर्ज करने के तंत्र पर विशेष सत्र आयोजित किए गए।

कार्यक्रम का आयोजन राष्ट्रीय महिला आयोग (NCW) ने मणिपुर राज्य महिला आयोग (MSCW) के सहयोग से किया। कार्यक्रम में कानून प्रवर्तन, साइबर अपराध, कानून, मनोविज्ञान और महिला अधिकारों के विशेषज्ञों ने विश्वविद्यालय के विद्यार्थियों को स्टॉकिंग के विभिन्न रूपों, इसके मनोवैज्ञानिक एवं सामाजिक प्रभावों, साइबरस्टॉकिंग, बचाव के उपायों तथा उपलब्ध कानूनी और संस्थागत शिकायत एवं समाधान तंत्र की जानकारी दी।

सुरक्षित और सहयोगी कैंपस पर जोर

मणिपुर यूनिवर्सिटी के कार्यवाहक कुलपति प्रो. आर.के. हेमकुमार सिंह ने कार्यक्रम को विश्वविद्यालय तक पहुंचाने के लिए राष्ट्रीय महिला आयोग और मणिपुर राज्य महिला आयोग की सराहना की।

उन्होंने कहा कि मणिपुर यूनिवर्सिटी लगातार विद्यार्थियों के लिए सुरक्षित और संरक्षित कैंपस वातावरण उपलब्ध कराने का प्रयास कर रहा है। उन्होंने कहा कि इस तरह के जागरूकता कार्यक्रम कैंपस को और अधिक सुरक्षित एवं सहयोगी बनाने में योगदान देंगे।

कुलपति ने उत्पीड़न या स्टॉकिंग जैसी परिस्थितियों का सामना करने वाले विद्यार्थियों के लिए जागरूकता, जिम्मेदार व्यवहार और उपलब्ध शिकायत एवं सहायता तंत्र की जानकारी के महत्व पर जोर दिया।

स्टॉकिंग के खतरे को पहचानना जरूरी

मणिपुर राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष थ. तिनिंगफाम मोंसांग ने कहा कि स्टॉकिंग और उसके परिणामों के बारे में अधिक जागरूकता की आवश्यकता को देखते हुए कार्यक्रम आयोजित किया गया है।

उन्होंने कहा कि जागरूकता की कमी के कारण पीड़ित व्यक्ति कई बार स्टॉकिंग को पहचान नहीं पाता या जिस व्यवहार का वह सामना कर रहा है, उसकी गंभीरता को नहीं समझ पाता।

उन्होंने कहा कि स्टॉकिंग पीड़ित व्यक्ति में डर और असुरक्षा पैदा कर सकती है तथा उसकी आवाजाही और रोजमर्रा की गतिविधियों में भागीदारी को प्रभावित कर सकती है। ऐसे कार्यक्रमों के माध्यम से विशेष रूप से लड़कियों और महिलाओं को चेतावनी संकेत पहचानने, उचित सावधानी बरतने और स्थिति को गंभीर रूप लेने से रोकने के लिए सक्षम बनाने का प्रयास किया जा रहा है।

साइबरस्टॉकिंग और डिजिटल सबूत पर विशेष जानकारी

मणिपुर राज्य महिला आयोग की सदस्य सचिव एवं मणिपुर की अतिरिक्त निदेशक (IPR) डब्ल्यू. फजातोंबी देवी (MCS) ने स्वागत एवं मुख्य संबोधन में कहा कि कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य विद्यार्थियों, विशेषकर युवा महिलाओं में जागरूकता पैदा करना है। उन्होंने यह भी कहा कि पुरुष भी स्टॉकिंग के शिकार हो सकते हैं।

उन्होंने कहा कि समाज में स्टॉकिंग को हमेशा एक सामान्य घटना के रूप में नहीं पहचाना जाता, लेकिन इससे पीड़ितों में काफी डर, तनाव और असहजता पैदा हो सकती है। उन्होंने स्टॉकिंग को कानूनी, सुरक्षा, साइबर और मनोवैज्ञानिक दृष्टिकोण से समझने की जरूरत पर जोर दिया, ताकि युवा ऐसे व्यवहार को पहचान सकें, अपनी सुरक्षा कर सकें और उचित सहायता प्राप्त कर सकें।

पहले तकनीकी सत्र में साइबर क्राइम के पुलिस अधीक्षक जॉन निंगोम्बम ने “साइबरस्टॉकिंग के विभिन्न रूपों और शिकायत निवारण तंत्र को समझना” विषय पर जानकारी दी।

उन्होंने कहा कि तेजी से बढ़ती ऑनलाइन कनेक्टिविटी के दौर में साइबरस्टॉकिंग एक महत्वपूर्ण चिंता बन गई है। कई बार पीड़ित व्यक्ति तुरंत यह पहचान नहीं पाता कि वह साइबरस्टॉकिंग का सामना कर रहा है।

उन्होंने बताया कि किसी व्यक्ति द्वारा संपर्क को अवांछित बताए जाने के बावजूद लगातार और बार-बार ऑनलाइन संपर्क करना, जिसमें लगातार संदेश भेजना भी शामिल है, साइबरस्टॉकिंग की स्थिति हो सकती है।

SP जॉन ने शिकायत दर्ज कराने से पहले डिजिटल साक्ष्यों को सुरक्षित रखने के महत्व पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि संदेश, स्क्रीनशॉट और अन्य संबंधित डिजिटल रिकॉर्ड को सुरक्षित रखना चाहिए, क्योंकि साइबर अपराध अधिकारियों के समक्ष शिकायत दर्ज करते समय ये महत्वपूर्ण साक्ष्य हो सकते हैं।

स्टॉकिंग के मनोवैज्ञानिक प्रभाव पर चर्चा

मणिपुर यूनिवर्सिटी के स्कूल ऑफ ह्यूमन एंड एनवायरनमेंटल साइंसेज के डीन प्रो. एम.सी. अरुणकुमार ने “स्टॉकिंग का मनोवैज्ञानिक प्रभाव” विषय पर बात की।

उन्होंने स्टॉकिंग से जुड़े मनोवैज्ञानिक कारकों और व्यवहार तथा पारस्परिक संकेतों को सही तरीके से समझने के महत्व पर चर्चा की। उन्होंने बताया कि कुछ परिस्थितियों में ambivalent attachment और cognitive distortions स्टॉकिंग के पीछे प्रेरक कारक बन सकते हैं। ऐसी स्थिति में व्यक्ति मित्रता, सामान्य सामाजिक व्यवहार या अन्य संकेतों को रोमांटिक रुचि के संकेत के रूप में गलत समझ सकता है।

उन्होंने स्टॉकिंग से जुड़े विभिन्न व्यवहारिक पैटर्न, जिनमें rejected stalkers, incompetent suitors और resentful stalkers शामिल हैं, पर भी चर्चा की।

प्रो. अरुणकुमार ने कहा कि अस्वीकृति के बाद लगातार किसी व्यक्ति पर ध्यान देना प्रेम या स्नेह नहीं समझा जाना चाहिए। भावनात्मक परिपक्वता, स्पष्ट संवाद और अस्वीकृति को सम्मानपूर्वक स्वीकार करने की क्षमता महत्वपूर्ण है, ताकि पारस्परिक गलतफहमियां स्टॉकिंग के व्यवहार में न बदलें।

उन्होंने सामान्य संयोगवश होने वाली मुलाकातों और लगातार अवांछित व्यवहार के बीच अंतर समझने तथा किसी स्पष्ट पैटर्न के सामने आने पर सतर्क रहने की जरूरत पर भी जोर दिया।

Zero FIR और शिकायत दर्ज करने के तरीकों की जानकारी

दूसरे तकनीकी सत्र में 1st Battalion Manipur Rifles की कमांडिंग ऑफिसर खोइसनाम सरमा, IPS ने “रिपोर्टिंग और शिकायत तंत्र विषय पर जानकारी दी।

उन्होंने शारीरिक और ऑनलाइन दोनों प्रकार की स्टॉकिंग के मामलों में उपलब्ध शिकायत तंत्र के बारे में बताया। उन्होंने कहा कि पीड़ित संबंधित पुलिस थाने में शिकायत दर्ज करा सकते हैं।

उन्होंने Zero FIR के प्रावधान की भी जानकारी दी, जिसके तहत पीड़ित क्षेत्राधिकार की परवाह किए बिना किसी भी पुलिस थाने में संपर्क कर सकता है। बाद में मामले को संबंधित क्षेत्र के पुलिस थाने में स्थानांतरित किया जा सकता है।

उन्होंने राष्ट्रीय महिला आयोग के माध्यम से उपलब्ध शिकायत और सहायता तंत्र का भी उल्लेख किया और कहा कि पीड़ितों को यह जानकारी होनी चाहिए कि सहायता के लिए कहां और कैसे संपर्क करना है, ताकि शिकायत प्रक्रिया को लेकर अनिश्चितता के कारण वे चुप न रहें।

कानून और महिला अधिकारों पर चर्चा

अधिवक्ता राजकिशोर थियाम ने “स्टॉकिंग, महिला सुरक्षा: कानून, अधिकार और रोकथाम” विषय पर प्रतिभागियों को संबोधित किया। उन्होंने स्टॉकिंग और महिला सुरक्षा के कानूनी, अधिकार-आधारित और निवारक पहलुओं पर जानकारी दी।

तकनीकी सत्रों के बाद संवाद सत्र आयोजित किए गए, जिसमें विद्यार्थियों को विशेषज्ञों से सीधे सवाल पूछने और स्टॉकिंग, साइबर सुरक्षा, रोकथाम तथा शिकायत तंत्र से संबंधित अपनी शंकाओं का समाधान प्राप्त करने का अवसर मिला।

विश्वविद्यालय के दो शिक्षकों ने किया समन्वय

कार्यक्रम का मणिपुर यूनिवर्सिटी की ओर से समन्वय समाजशास्त्र विभाग की सहायक प्रोफेसर डॉ. ताखेल्लम्बम दीपामंजुरी देवी और मानवशास्त्र विभाग के सहायक प्रोफेसर डॉ. हुइद्रोम सूरज सिंह ने किया।

कार्यक्रम का समापन डॉ. ताखेल्लम्बम दीपामंजुरी देवी के धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ।

कार्यक्रम के माध्यम से विद्यार्थियों को स्टॉकिंग के विभिन्न रूपों की पहचान, साइबर सुरक्षा, उपलब्ध कानूनी अधिकारों और शिकायत दर्ज करने के तंत्र के बारे में व्यावहारिक जानकारी देने के साथ-साथ सुरक्षित और जागरूक कैंपस वातावरण को बढ़ावा देने पर जोर दिया गया।

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Naorem Mohen

Editor, MU Darpan

Naorem Mohen is the Editor of MU Darpan. He covers news and updates on workshops, seminars, training programmes, academic and cultural events, research activities, and the achievements of students, faculty members, and alumni of Manipur University. His work focuses on highlighting developments in higher education, research, innovation, and the accomplishments of the university community.

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मू-दर्पण (MUDARPAN.IN) | मणिपुर विश्वविद्यालय की शैक्षणिक एवं शोध गतिविधियों का हिंदी अभिलेखागारमणिपुर विश्वविद्यालय की शैक्षणिक, शोध एवं संस्थागत गतिविधियों का एक समर्पित हिंदी डिजिटल अभिलेखागार है, जो विश्वविद्यालय में आयोजित अकादमिक कार्यक्रमों, सम्मेलनों, संगोष्ठियों, कार्यशालाओं और महत्वपूर्ण आयोजनों का प्रामाणिक दस्तावेजीकरण प्रस्तुत करता है।

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