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मणिपुर विश्वविद्यालय में AI, रिसर्च कमर्शियलाइजेशन और इनोवेशन पर अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञों का व्याख्यान

मणिपुर विश्वविद्यालय के मणिपुर इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (MIT) में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), बौद्धिक संपदा, रिसर्च कमर्शियलाइजेशन और इनोवेशन इकोसिस्टम पर अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञों ने व्याख्यान दिया।

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इम्फाल, 4 अगस्त 2026: मणिपुर विश्वविद्यालय के मणिपुर इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (MIT) के कंप्यूटर साइंस एवं इंजीनियरिंग विभाग ने मंगलवार को विश्वविद्यालय के कोर्ट हॉल में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), इनोवेशन, बौद्धिक संपदा (IP), टेक्नोलॉजी ट्रांसफर और रिसर्च कमर्शियलाइजेशन विषय पर व्याख्यान एवं संवाद कार्यक्रम का आयोजन किया।

कार्यक्रम में मणिपुर विश्वविद्यालय के कार्यवाहक कुलपति प्रो. आर.के. हेमाकुमार सिंह, स्कूल ऑफ इंजीनियरिंग के डीन प्रो. एन. बसंता सिंह, MIT के प्राचार्य प्रो. थ. सुरेश सिंह, संकाय सदस्य, शोधार्थी और बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे।

कार्यक्रम के मुख्य वक्ता जापान के मुसाशिनो विश्वविद्यालय के डेटा साइंस विभाग के प्रोफेसर विराच सोर्नलेर्टलमवानिच तथा यूनाइटेड किंगडम स्थित IP2Impact Ltd. के निदेशक मैरेम्बम शांजॉय सिंह थे।

अपने संबोधन में प्रो. विराच ने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस मानव बुद्धिमत्ता का विकल्प नहीं बल्कि उसका सहयोगी उपकरण है। उन्होंने कहा कि जनरेटिव AI तेजी से जानकारी और विचार प्रस्तुत कर सकता है, लेकिन गुणवत्तापूर्ण शोध के लिए मानवीय तर्क, आलोचनात्मक सोच, प्रयोग और प्रमाण आधारित सत्यापन अनिवार्य हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि AI से प्राप्त निष्कर्षों का उपयोग करने से पहले उनका सावधानीपूर्वक विश्लेषण और सत्यापन किया जाना चाहिए।

 

उन्होंने नोबेल पुरस्कार विजेता डेनियल काह्नमैन के "सिस्टम-1" और "सिस्टम-2" सोच के सिद्धांत का उल्लेख करते हुए बताया कि जटिल समस्याओं के समाधान के लिए शोधकर्ताओं को विश्लेषणात्मक और गहन सोच अपनानी होगी।

प्रो. विराच ने AI शिक्षा के लिए MUDS/MIDS कार्यक्रम के तीन प्रमुख स्तंभ—AI क्रिएशन एंड एप्लिकेशंस, AI एल्गोरिद्म डिज़ाइन और सोशल इनोवेशन—की भी जानकारी दी। उन्होंने कहा कि यह मॉडल छात्रों को केवल AI इंजीनियरिंग और डेटा साइंस तक सीमित नहीं रखेगा, बल्कि स्वास्थ्य, कृषि, प्रशासन, उद्योग और अन्य क्षेत्रों में नवाचार के लिए भी तैयार करेगा।

रिसर्च कमर्शियलाइजेशन पर बोलते हुए मैरेम्बम शांजॉय सिंह ने कहा कि विश्वविद्यालयों में होने वाले शोध को उत्पाद, तकनीक और उद्योग से जोड़कर समाज और अर्थव्यवस्था के लिए उपयोगी बनाया जाना चाहिए। उन्होंने बताया कि यूनाइटेड किंगडम के प्रमुख विश्वविद्यालयों ने बौद्धिक संपदा प्रबंधन, टेक्नोलॉजी ट्रांसफर और स्टार्टअप विकास के लिए मजबूत संस्थागत व्यवस्था विकसित की है।

उन्होंने कहा कि शोध के व्यावसायीकरण के लिए नई कंपनियां बनाना ही एकमात्र विकल्प नहीं है। शोध परिणामों को उचित बौद्धिक संपदा समझौतों के माध्यम से मौजूदा उद्योगों को लाइसेंस देकर भी आर्थिक लाभ प्राप्त किया जा सकता है। इससे शोधकर्ताओं और विश्वविद्यालयों दोनों के लिए अतिरिक्त आय के अवसर पैदा होते हैं।

शांजॉय सिंह ने विश्वविद्यालयों में टेक्नोलॉजी ट्रांसफर ऑफिस, कानूनी एवं व्यावसायिक विशेषज्ञता, पारदर्शी प्रशासनिक व्यवस्था और नवाचार को प्रोत्साहित करने वाली नीतियों की आवश्यकता पर भी बल दिया। उन्होंने सुझाव दिया कि विश्वविद्यालय पारंपरिक डिग्री पाठ्यक्रमों के साथ-साथ अल्पकालिक व्यावसायिक प्रशिक्षण कार्यक्रम भी शुरू कर उद्योगों के साथ सहयोग बढ़ा सकते हैं।

उन्होंने यह भी कहा कि छोटे राज्यों के विश्वविद्यालय भी स्थानीय आवश्यकताओं के अनुरूप रणनीति अपनाकर और वैश्विक सर्वोत्तम प्रथाओं को लागू कर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नवाचार के केंद्र बन सकते हैं।

संवाद सत्र में शिक्षकों, शोधार्थियों और विद्यार्थियों ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, नेचुरल लैंग्वेज प्रोसेसिंग (NLP), बौद्धिक संपदा, स्टार्टअप इकोसिस्टम, इनोवेशन मैनेजमेंट और रिसर्च कमर्शियलाइजेशन से जुड़े विभिन्न विषयों पर विशेषज्ञों से विस्तृत चर्चा की।

कार्यक्रम का उद्देश्य प्रतिभागियों को AI, नवाचार और विश्वविद्यालय-उद्योग सहयोग से जुड़ी वैश्विक सर्वोत्तम प्रथाओं से परिचित कराना तथा उच्च शिक्षा संस्थानों में शोध, उद्यमिता और ज्ञान हस्तांतरण की संस्कृति को मजबूत करना था।

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Naorem Mohen

Editor, MU Darpan

Naorem Mohen is the Editor of MU Darpan. He covers news and updates on workshops, seminars, training programmes, academic and cultural events, research activities, and the achievements of students, faculty members, and alumni of Manipur University. His work focuses on highlighting developments in higher education, research, innovation, and the accomplishments of the university community.

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मू-दर्पण (MUDARPAN.IN) | मणिपुर विश्वविद्यालय की शैक्षणिक एवं शोध गतिविधियों का हिंदी अभिलेखागारमणिपुर विश्वविद्यालय की शैक्षणिक, शोध एवं संस्थागत गतिविधियों का एक समर्पित हिंदी डिजिटल अभिलेखागार है, जो विश्वविद्यालय में आयोजित अकादमिक कार्यक्रमों, सम्मेलनों, संगोष्ठियों, कार्यशालाओं और महत्वपूर्ण आयोजनों का प्रामाणिक दस्तावेजीकरण प्रस्तुत करता है।

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