इंफाल, 15 सितंबर 2026: मणिपुर इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (MIT), मणिपुर यूनिवर्सिटी ने Institution’s Innovation Council, Manipur Institute of Technology (IIC-MIT) के सहयोग से सोमवार को राष्ट्रीय इंजीनियर्स दिवस 2026 मनाया। कार्यक्रम का आयोजन 15 सितंबर को दोपहर 3 बजे MIT, मणिपुर यूनिवर्सिटी परिसर में किया गया।
राष्ट्रीय इंजीनियर्स दिवस हर वर्ष 15 सितंबर को महान भारतीय इंजीनियर और राजनेता सर मोक्षगुंडम विश्वेश्वरैया की जयंती के अवसर पर मनाया जाता है। इस वर्ष के समारोह की थीम “Smart Engineering for a Sustainable Future through Innovation and Digitalization” रही।
कार्यक्रम में फैकल्टी सदस्यों, विद्यार्थियों और संस्थान के सदस्यों ने भाग लिया। समारोह का उद्देश्य राष्ट्र निर्माण में इंजीनियरों के योगदान को रेखांकित करने के साथ-साथ उभरती सामाजिक चुनौतियों के समाधान में नवाचार, डिजिटल तकनीक और सतत इंजीनियरिंग समाधानों के महत्व पर चर्चा करना था।
प्रो. बसंता सिंह, डीन, स्कूल ऑफ इंजीनियरिंग, मणिपुर यूनिवर्सिटी ने कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में शिरकत की। वहीं प्रो. थ. सुरेश सिंह, प्रिंसिपल, मणिपुर इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी ने समारोह की अध्यक्षता की।
तकनीकी कौशल के साथ इनोवेशन जरूरी
अपने संबोधन में मुख्य अतिथि प्रो. बसंता सिंह ने तकनीकी नवाचार, सतत विकास और बहुविषयक दृष्टिकोण के माध्यम से समाज को बदलने में इंजीनियरों की बदलती भूमिका पर प्रकाश डाला।
उन्होंने कहा कि इंजीनियरिंग विद्यार्थियों के लिए मजबूत तकनीकी दक्षता के साथ-साथ रचनात्मकता, समस्या समाधान की क्षमता और नवाचार उन्मुख सोच विकसित करना भी आवश्यक है।
उन्होंने विद्यार्थियों को बदलती तकनीकी जरूरतों और सामाजिक चुनौतियों को समझते हुए अपने ज्ञान एवं कौशल का उपयोग करने पर जोर दिया।
उभरती तकनीकों के प्रभावी इस्तेमाल पर जोर
कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए MIT के प्रिंसिपल प्रो. थ. सुरेश सिंह ने कहा कि इंजीनियरिंग संस्थानों की जिम्मेदारी है कि वे विद्यार्थियों को समकालीन चुनौतियों से निपटने के लिए शोध, नवाचार और उभरती तकनीकों के प्रभावी उपयोग के लिए तैयार करें।
उन्होंने विद्यार्थियों को इनोवेशन और उद्यमिता गतिविधियों में सक्रिय रूप से भाग लेने तथा क्षेत्र और देश के तकनीकी विकास में योगदान देने के लिए प्रोत्साहित किया।
राष्ट्रीय इंजीनियर्स दिवस समारोह में डिजिटलाइजेशन, स्मार्ट तकनीक और सतत इंजीनियरिंग के महत्व पर भी विशेष जोर दिया गया। वक्ताओं ने इन क्षेत्रों को एक मजबूत, पर्यावरण के प्रति जिम्मेदार और भविष्य के लिए तैयार समाज के निर्माण से जोड़कर देखा।
सर एम. विश्वेश्वरैया की विरासत को किया याद
कार्यक्रम ने विद्यार्थियों और फैकल्टी सदस्यों को सर एम. विश्वेश्वरैया की विरासत और राष्ट्र निर्माण में इंजीनियरिंग उत्कृष्टता की निरंतर प्रासंगिकता पर विचार करने का अवसर दिया।
समारोह के दौरान इंजीनियरिंग के क्षेत्र में नवाचार और तकनीकी विकास के महत्व पर चर्चा की गई तथा विद्यार्थियों को समाज की जरूरतों के अनुरूप समाधान विकसित करने के लिए प्रेरित किया गया।
कार्यक्रम का समापन मणिपुर इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी, मणिपुर यूनिवर्सिटी की ओर से विद्यार्थियों और फैकल्टी के बीच नवाचार, शोध, डिजिटल परिवर्तन तथा सतत इंजीनियरिंग पद्धतियों को बढ़ावा देने की प्रतिबद्धता के साथ हुआ।
समारोह में ऐसे इंजीनियर तैयार करने की दिशा में निरंतर प्रयास करने पर जोर दिया गया, जो तकनीकी ज्ञान और नवाचार के माध्यम से समाज और राष्ट्र के विकास में सार्थक योगदान दे सकें।