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    <title><![CDATA[Breaking News, Top Headlines & Live Updates | MU Darpan]]></title>
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    <description><![CDATA[Get the latest breaking news, trending stories, and real-time updates from India and around the world. Powered by MU Darpan for trusted journalism.]]></description>
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      <title>Breaking News, Top Headlines &amp; Live Updates | MU Darpan</title>
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      <title><![CDATA[मणिपुर यूनिवर्सिटी में स्टॉकिंग, साइबर सुरक्षा और शिकायत तंत्र पर जागरूकता कार्यक्रम]]></title>
      <description><![CDATA[<a href="https://www.mudarpan.in/news/manipur-university-stalking-cyber-safety-reporting-awareness-programme"><img alt="मणिपुर यूनिवर्सिटी में स्टॉकिंग, साइबर सुरक्षा और शिकायत तंत्र पर जागरूकता कार्यक्रम" border="0" src="https://www.mudarpan.in/view/aug-2026/manipur-university-hosts-one-day-awareness-programme-on-stalking-cyber-safety-and-reporting-mechanisms.jpg"></a><p>मणिपुर यूनिवर्सिटी में NCW और MSCW ने स्टॉकिंग, साइबरस्टॉकिंग, महिला सुरक्षा, कानूनी अधिकार और शिकायत दर्ज करने के तरीकों पर जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया।</p>]]></description>
      <link><![CDATA[https://www.mudarpan.in/news/manipur-university-stalking-cyber-safety-reporting-awareness-programme]]></link>
      <pubDate>Mon, 31 Aug 2026 06:28:37 GMT</pubDate>
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      <dc:creator><![CDATA[Naorem Mohen]]></dc:creator>
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<p class="isSelectedEnd"><strong>इंफाल, 28 अगस्त 2026:</strong> मणिपुर यूनिवर्सिटी के वीसी कोर्ट हॉल में शुक्रवार को <strong>&ldquo;स्टॉकिंग&rdquo;</strong> विषय पर एक दिवसीय जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। इसमें स्टॉकिंग के चेतावनी संकेत, सुरक्षा उपाय, सहायता, कानून, अधिकार और शिकायत दर्ज करने के तंत्र पर विशेष सत्र आयोजित किए गए।</p>
<p class="isSelectedEnd">कार्यक्रम का आयोजन <strong>राष्ट्रीय महिला आयोग (NCW)</strong> ने <strong>मणिपुर राज्य महिला आयोग (MSCW)</strong> के सहयोग से किया। कार्यक्रम में कानून प्रवर्तन, साइबर अपराध, कानून, मनोविज्ञान और महिला अधिकारों के विशेषज्ञों ने विश्वविद्यालय के विद्यार्थियों को स्टॉकिंग के विभिन्न रूपों, इसके मनोवैज्ञानिक एवं सामाजिक प्रभावों, साइबरस्टॉकिंग, बचाव के उपायों तथा उपलब्ध कानूनी और संस्थागत शिकायत एवं समाधान तंत्र की जानकारी दी।</p>
<h3>सुरक्षित और सहयोगी कैंपस पर जोर</h3>
<p class="isSelectedEnd">मणिपुर यूनिवर्सिटी के कार्यवाहक कुलपति <strong>प्रो. आर.के. हेमकुमार सिंह</strong> ने कार्यक्रम को विश्वविद्यालय तक पहुंचाने के लिए राष्ट्रीय महिला आयोग और मणिपुर राज्य महिला आयोग की सराहना की।</p>
<p class="isSelectedEnd">उन्होंने कहा कि मणिपुर यूनिवर्सिटी लगातार विद्यार्थियों के लिए सुरक्षित और संरक्षित कैंपस वातावरण उपलब्ध कराने का प्रयास कर रहा है। उन्होंने कहा कि इस तरह के जागरूकता कार्यक्रम कैंपस को और अधिक सुरक्षित एवं सहयोगी बनाने में योगदान देंगे।</p>
<p class="isSelectedEnd">कुलपति ने उत्पीड़न या स्टॉकिंग जैसी परिस्थितियों का सामना करने वाले विद्यार्थियों के लिए <strong>जागरूकता, जिम्मेदार व्यवहार और उपलब्ध शिकायत एवं सहायता तंत्र की जानकारी</strong> के महत्व पर जोर दिया।</p>
<h3>स्टॉकिंग के खतरे को पहचानना जरूरी</h3>
<p class="isSelectedEnd">मणिपुर राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष <strong>थ. तिनिंगफाम मोंसांग</strong> ने कहा कि स्टॉकिंग और उसके परिणामों के बारे में अधिक जागरूकता की आवश्यकता को देखते हुए कार्यक्रम आयोजित किया गया है।</p>
<p class="isSelectedEnd">उन्होंने कहा कि जागरूकता की कमी के कारण पीड़ित व्यक्ति कई बार स्टॉकिंग को पहचान नहीं पाता या जिस व्यवहार का वह सामना कर रहा है, उसकी गंभीरता को नहीं समझ पाता।</p>
<p class="isSelectedEnd">उन्होंने कहा कि स्टॉकिंग पीड़ित व्यक्ति में डर और असुरक्षा पैदा कर सकती है तथा उसकी आवाजाही और रोजमर्रा की गतिविधियों में भागीदारी को प्रभावित कर सकती है। ऐसे कार्यक्रमों के माध्यम से विशेष रूप से लड़कियों और महिलाओं को चेतावनी संकेत पहचानने, उचित सावधानी बरतने और स्थिति को गंभीर रूप लेने से रोकने के लिए सक्षम बनाने का प्रयास किया जा रहा है।</p>
<h3>साइबरस्टॉकिंग और डिजिटल सबूत पर विशेष जानकारी</h3>
<p class="isSelectedEnd">मणिपुर राज्य महिला आयोग की सदस्य सचिव एवं मणिपुर की अतिरिक्त निदेशक (IPR) <strong>डब्ल्यू. फजातोंबी देवी (MCS)</strong> ने स्वागत एवं मुख्य संबोधन में कहा कि कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य विद्यार्थियों, विशेषकर युवा महिलाओं में जागरूकता पैदा करना है। उन्होंने यह भी कहा कि पुरुष भी स्टॉकिंग के शिकार हो सकते हैं।</p>
<p class="isSelectedEnd">उन्होंने कहा कि समाज में स्टॉकिंग को हमेशा एक सामान्य घटना के रूप में नहीं पहचाना जाता, लेकिन इससे पीड़ितों में काफी डर, तनाव और असहजता पैदा हो सकती है। उन्होंने स्टॉकिंग को कानूनी, सुरक्षा, साइबर और मनोवैज्ञानिक दृष्टिकोण से समझने की जरूरत पर जोर दिया, ताकि युवा ऐसे व्यवहार को पहचान सकें, अपनी सुरक्षा कर सकें और उचित सहायता प्राप्त कर सकें।</p>
<p class="isSelectedEnd">पहले तकनीकी सत्र में <strong>साइबर क्राइम के पुलिस अधीक्षक जॉन निंगोम्बम</strong> ने <strong>&ldquo;साइबरस्टॉकिंग के विभिन्न रूपों और शिकायत निवारण तंत्र को समझना&rdquo;</strong> विषय पर जानकारी दी।</p>
<p class="isSelectedEnd">उन्होंने कहा कि तेजी से बढ़ती ऑनलाइन कनेक्टिविटी के दौर में साइबरस्टॉकिंग एक महत्वपूर्ण चिंता बन गई है। कई बार पीड़ित व्यक्ति तुरंत यह पहचान नहीं पाता कि वह साइबरस्टॉकिंग का सामना कर रहा है।</p>
<p class="isSelectedEnd">उन्होंने बताया कि किसी व्यक्ति द्वारा संपर्क को अवांछित बताए जाने के बावजूद लगातार और बार-बार ऑनलाइन संपर्क करना, जिसमें लगातार संदेश भेजना भी शामिल है, साइबरस्टॉकिंग की स्थिति हो सकती है।</p>
<p class="isSelectedEnd">SP जॉन ने शिकायत दर्ज कराने से पहले <strong>डिजिटल साक्ष्यों को सुरक्षित रखने</strong> के महत्व पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि संदेश, स्क्रीनशॉट और अन्य संबंधित डिजिटल रिकॉर्ड को सुरक्षित रखना चाहिए, क्योंकि साइबर अपराध अधिकारियों के समक्ष शिकायत दर्ज करते समय ये महत्वपूर्ण साक्ष्य हो सकते हैं।</p>
<h3>स्टॉकिंग के मनोवैज्ञानिक प्रभाव पर चर्चा</h3>
<p class="isSelectedEnd">मणिपुर यूनिवर्सिटी के स्कूल ऑफ ह्यूमन एंड एनवायरनमेंटल साइंसेज के डीन <strong>प्रो. एम.सी. अरुणकुमार</strong> ने <strong>&ldquo;स्टॉकिंग का मनोवैज्ञानिक प्रभाव&rdquo;</strong> विषय पर बात की।</p>
<p class="isSelectedEnd">उन्होंने स्टॉकिंग से जुड़े मनोवैज्ञानिक कारकों और व्यवहार तथा पारस्परिक संकेतों को सही तरीके से समझने के महत्व पर चर्चा की। उन्होंने बताया कि कुछ परिस्थितियों में <strong>ambivalent attachment</strong> और <strong>cognitive distortions</strong> स्टॉकिंग के पीछे प्रेरक कारक बन सकते हैं। ऐसी स्थिति में व्यक्ति मित्रता, सामान्य सामाजिक व्यवहार या अन्य संकेतों को रोमांटिक रुचि के संकेत के रूप में गलत समझ सकता है।</p>
<p class="isSelectedEnd">उन्होंने स्टॉकिंग से जुड़े विभिन्न व्यवहारिक पैटर्न, जिनमें <strong>rejected stalkers, incompetent suitors और resentful stalkers</strong> शामिल हैं, पर भी चर्चा की।</p>
<p class="isSelectedEnd">प्रो. अरुणकुमार ने कहा कि अस्वीकृति के बाद लगातार किसी व्यक्ति पर ध्यान देना प्रेम या स्नेह नहीं समझा जाना चाहिए। भावनात्मक परिपक्वता, स्पष्ट संवाद और अस्वीकृति को सम्मानपूर्वक स्वीकार करने की क्षमता महत्वपूर्ण है, ताकि पारस्परिक गलतफहमियां स्टॉकिंग के व्यवहार में न बदलें।</p>
<p class="isSelectedEnd">उन्होंने सामान्य संयोगवश होने वाली मुलाकातों और लगातार अवांछित व्यवहार के बीच अंतर समझने तथा किसी स्पष्ट पैटर्न के सामने आने पर सतर्क रहने की जरूरत पर भी जोर दिया।</p>
<h3>Zero FIR और शिकायत दर्ज करने के तरीकों की जानकारी</h3>
<p class="isSelectedEnd">दूसरे तकनीकी सत्र में <strong>1st Battalion Manipur Rifles की कमांडिंग ऑफिसर खोइसनाम सरमा, IPS</strong> ने <strong>&ldquo;रिपोर्टिंग और शिकायत तंत्र&rdquo;</strong> विषय पर जानकारी दी।</p>
<p class="isSelectedEnd">उन्होंने शारीरिक और ऑनलाइन दोनों प्रकार की स्टॉकिंग के मामलों में उपलब्ध शिकायत तंत्र के बारे में बताया। उन्होंने कहा कि पीड़ित संबंधित पुलिस थाने में शिकायत दर्ज करा सकते हैं।</p>
<p class="isSelectedEnd">उन्होंने <strong>Zero FIR</strong> के प्रावधान की भी जानकारी दी, जिसके तहत पीड़ित क्षेत्राधिकार की परवाह किए बिना किसी भी पुलिस थाने में संपर्क कर सकता है। बाद में मामले को संबंधित क्षेत्र के पुलिस थाने में स्थानांतरित किया जा सकता है।</p>
<p class="isSelectedEnd">उन्होंने राष्ट्रीय महिला आयोग के माध्यम से उपलब्ध शिकायत और सहायता तंत्र का भी उल्लेख किया और कहा कि पीड़ितों को यह जानकारी होनी चाहिए कि सहायता के लिए <strong>कहां और कैसे संपर्क करना है</strong>, ताकि शिकायत प्रक्रिया को लेकर अनिश्चितता के कारण वे चुप न रहें।</p>
<h3>कानून और महिला अधिकारों पर चर्चा</h3>
<p class="isSelectedEnd">अधिवक्ता <strong>राजकिशोर थियाम</strong> ने <strong>&ldquo;स्टॉकिंग, महिला सुरक्षा: कानून, अधिकार और रोकथाम&rdquo;</strong> विषय पर प्रतिभागियों को संबोधित किया। उन्होंने स्टॉकिंग और महिला सुरक्षा के कानूनी, अधिकार-आधारित और निवारक पहलुओं पर जानकारी दी।</p>
<p class="isSelectedEnd">तकनीकी सत्रों के बाद संवाद सत्र आयोजित किए गए, जिसमें विद्यार्थियों को विशेषज्ञों से सीधे सवाल पूछने और स्टॉकिंग, साइबर सुरक्षा, रोकथाम तथा शिकायत तंत्र से संबंधित अपनी शंकाओं का समाधान प्राप्त करने का अवसर मिला।</p>
<h3>विश्वविद्यालय के दो शिक्षकों ने किया समन्वय</h3>
<p class="isSelectedEnd">कार्यक्रम का मणिपुर यूनिवर्सिटी की ओर से समन्वय <strong>समाजशास्त्र विभाग की सहायक प्रोफेसर डॉ. ताखेल्लम्बम दीपामंजुरी देवी</strong> और <strong>मानवशास्त्र विभाग के सहायक प्रोफेसर डॉ. हुइद्रोम सूरज सिंह</strong> ने किया।</p>
<p class="isSelectedEnd">कार्यक्रम का समापन डॉ. ताखेल्लम्बम दीपामंजुरी देवी के धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ।</p>
<p>कार्यक्रम के माध्यम से विद्यार्थियों को स्टॉकिंग के विभिन्न रूपों की पहचान, साइबर सुरक्षा, उपलब्ध कानूनी अधिकारों और शिकायत दर्ज करने के तंत्र के बारे में व्यावहारिक जानकारी देने के साथ-साथ सुरक्षित और जागरूक कैंपस वातावरण को बढ़ावा देने पर जोर दिया गया।</p>]]></content:encoded>
    </item>
    <item>
      <title><![CDATA[मणिपुर यूनिवर्सिटी में Khelo India संवाद, पीएम मोदी ने आधुनिक खेल इकोसिस्टम पर दिया जोर]]></title>
      <description><![CDATA[<a href="https://www.mudarpan.in/news/manipur-university-khelo-india-samvaad-pm-modi-modern-sports-ecosystem"><img alt="मणिपुर यूनिवर्सिटी में Khelo India संवाद, पीएम मोदी ने आधुनिक खेल इकोसिस्टम पर दिया जोर" border="0" src="https://www.mudarpan.in/view/aug-2026/khelo-india-samvaad-held-in-mu.jpg"></a><p>मणिपुर यूनिवर्सिटी में राष्ट्रीय खेल दिवस 2026 पर Khelo India संवाद आयोजित हुआ। पीएम मोदी ने आधुनिक खेल इकोसिस्टम और युवा प्रतिभाओं को बढ़ावा देने पर जोर दिया।</p>]]></description>
      <link><![CDATA[https://www.mudarpan.in/news/manipur-university-khelo-india-samvaad-pm-modi-modern-sports-ecosystem]]></link>
      <pubDate>Mon, 31 Aug 2026 06:24:19 GMT</pubDate>
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      <dc:creator><![CDATA[Naorem Mohen]]></dc:creator>
      <category><![CDATA[मणपर यनवरसट]]></category>
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      <content:encoded><![CDATA[<p class="isSelectedEnd"><strong><img src="https://www.mudarpan.in/view/aug-2026/khelo-india-samvaad-held-in-mu.jpg"> इंफाल, 27 अगस्त 2026:</strong> राष्ट्रीय खेल दिवस 2026 के अवसर पर मणिपुर यूनिवर्सिटी के NSS सेल और MY Bharat, इम्फाल वेस्ट जिला के संयुक्त तत्वावधान में गुरुवार को विश्वविद्यालय के कोर्ट हॉल में <strong>Khelo India Dialogue&mdash;&ldquo;Khel Ki Baat PM Modi Ke Sath&rdquo; (Khelo India Samvaad)</strong> आयोजित किया गया।</p>
<p class="isSelectedEnd">कार्यक्रम का आयोजन भारत सरकार के युवा मामले एवं खेल मंत्रालय के तत्वावधान में किया गया। देशभर के करीब <strong>450 कॉलेजों और विश्वविद्यालयों</strong> ने इस राष्ट्रव्यापी कार्यक्रम में भाग लिया। मणिपुर से 11 कॉलेजों और मणिपुर यूनिवर्सिटी ने कार्यक्रम में हिस्सा लिया।</p>
<h3>पीएम मोदी ने आधुनिक खेल इकोसिस्टम पर दिया जोर</h3>
<p class="isSelectedEnd">कार्यक्रम की शुरुआत प्रधानमंत्री <strong>नरेंद्र मोदी</strong> के वर्चुअल संबोधन से हुई। प्रधानमंत्री ने कहा कि सरकार 21वीं सदी के भारत के लिए एक आधुनिक खेल इकोसिस्टम विकसित करने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।</p>
<p class="isSelectedEnd">उन्होंने कहा कि स्पोर्ट्स यूनिवर्सिटी से लेकर अत्याधुनिक प्रशिक्षण केंद्रों तक ऐसा व्यापक तंत्र विकसित किया जा रहा है, जिसमें खिलाड़ियों और खेल प्रतिभाओं को हर स्तर पर आवश्यक सहयोग मिल सके।</p>
<p class="isSelectedEnd">प्रधानमंत्री ने कहा कि खेल केवल पदक जीतने तक सीमित नहीं हैं, बल्कि यह भारत की खेल प्रतिभा और युवा शक्ति को एकजुट कर विकसित राष्ट्र के निर्माण में योगदान देने का माध्यम भी हैं। उन्होंने कहा कि देश का प्रत्येक जिला वैश्विक खेल मानचित्र पर अपनी जगह बनाने की क्षमता रखता है।</p>
<p class="isSelectedEnd">उन्होंने 5 से 15 वर्ष की आयु के बच्चों की खेल प्रतिभा की पहचान के लिए प्रस्तावित राष्ट्रव्यापी पहल का भी उल्लेख किया। प्रधानमंत्री ने कहा कि केवल बच्चे की पसंद के खेल को देखना पर्याप्त नहीं है, बल्कि यह भी पहचानना जरूरी है कि वह किस खेल के लिए सबसे अधिक उपयुक्त है।</p>
<p class="isSelectedEnd">पीएम मोदी ने कहा कि भारत में खेल अब एक महत्वपूर्ण करियर और पेशे के रूप में उभर रहे हैं। उन्होंने Khelo India Samvaad को युवाओं के विचारों और सुझावों के माध्यम से देश की खेल नीति और दृष्टि को नई दिशा देने वाला मंच बताया।</p>
<h3>मणिपुर के खिलाड़ियों की समस्याओं पर चर्चा</h3>
<p class="isSelectedEnd">कार्यक्रम में लांगथाबल विधानसभा क्षेत्र के विधायक <strong>करम श्याम सिंह</strong> मुख्य अतिथि रहे, जबकि मणिपुर यूनिवर्सिटी के कार्यवाहक कुलपति <strong>प्रो. आर.के. हेमकुमार सिंह</strong> ने कार्यक्रम की अध्यक्षता की।</p>
<p class="isSelectedEnd">करम श्याम सिंह ने अपने करीब 25 वर्षों के सार्वजनिक जीवन के अनुभव का उल्लेख करते हुए कहा कि उन्होंने आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों से आने वाले खिलाड़ियों की अनेक कठिनाइयों को करीब से देखा है। कई प्रतिभाशाली खिलाड़ी राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं के लिए चयनित होने के बावजूद उचित खेल उपकरण, पौष्टिक भोजन, कोचिंग और यात्रा खर्च वहन करने में कठिनाई का सामना करते हैं।</p>
<p class="isSelectedEnd">उन्होंने कहा कि समाज अक्सर खिलाड़ियों को पदक जीतने के बाद ही सम्मान देता है, जबकि प्रशिक्षण और संघर्ष के कठिन वर्षों में बहुत कम लोग उनका साथ देते हैं। इसलिए Khelo India Dialogue जैसे मंचों पर खिलाड़ियों की समस्याओं और अनुभवों को सुना जाना आवश्यक है, ताकि नीति निर्माता और खेल प्रशासक उनकी वास्तविक जरूरतों को समझ सकें।</p>
<p class="isSelectedEnd">करम श्याम ने कहा कि अपेक्षाकृत कम आबादी के बावजूद मणिपुर ने <strong>19 ओलंपियन</strong> दिए हैं। खिलाड़ियों का दृढ़ संकल्प, परिवारों का त्याग, प्रशिक्षकों का मार्गदर्शन और स्थानीय समुदायों का सहयोग इसके पीछे महत्वपूर्ण रहा है। उन्होंने कहा कि खेलों ने मणिपुर को दुनिया के सामने पहचान दिलाई है और यह राज्य की पहचान की मजबूत अभिव्यक्तियों में से एक बन गया है।</p>
<p class="isSelectedEnd">उन्होंने गांव और स्कूल स्तर पर प्रतिभाशाली बच्चों की शुरुआती पहचान, वैज्ञानिक प्रशिक्षण, योग्य कोचिंग, खेल उपकरण, पोषण और नियमित प्रतियोगिता के अवसर उपलब्ध कराने की जरूरत पर जोर दिया। साथ ही खेल योजनाओं के पारदर्शी क्रियान्वयन और राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं के लिए चयनित खिलाड़ियों को समय पर आर्थिक सहायता देने की मांग की।</p>
<h3>मणिपुर यूनिवर्सिटी खिलाड़ियों को देगा संस्थागत सहयोग</h3>
<p class="isSelectedEnd">कुलपति प्रो. आर.के. हेमकुमार सिंह ने कहा कि शारीरिक रूप से स्वस्थ आबादी और अनुशासित खेल संस्कृति देश की प्रगति के लिए आवश्यक हैं। उन्होंने कार्यक्रम को स्वस्थ, अनुशासित और विकसित भारत के व्यापक लक्ष्य का हिस्सा बताया।</p>
<p class="isSelectedEnd">युवा खिलाड़ियों का उत्साह बढ़ाते हुए उन्होंने कहा कि अवसरों को दृढ़ संकल्प, आत्मविश्वास और सही दृष्टिकोण के साथ पहचानना और उनका लाभ उठाना चाहिए। उन्होंने कहा कि किसी खिलाड़ी का एक पदक भी उसके माता-पिता, शिक्षकों, संस्थान, राज्य और देश के लिए गर्व का विषय बन सकता है।</p>
<p class="isSelectedEnd">प्रो. हेमकुमार ने खिलाड़ियों को आश्वासन दिया कि <strong>मणिपुर यूनिवर्सिटी अपने खेल विभाग के माध्यम से हर संभव संस्थागत सहयोग</strong> प्रदान करेगी। उन्होंने NSS सेल और MY Bharat, इम्फाल वेस्ट जिला की भी सराहना की, जिन्होंने विद्यार्थियों और खिलाड़ियों को संवाद के लिए विश्वविद्यालय में एकत्र किया।</p>
<h3>Khelo India 3.0 में खेल ढांचे को मजबूत करने की योजना</h3>
<p class="isSelectedEnd">कार्यक्रम में मणिपुर सरकार के युवा मामले एवं खेल विभाग के सचिव <strong>नाओरेम प्रवीण सिंह, IAS</strong> विशेष आमंत्रित के रूप में शामिल हुए। इससे राज्य सरकार, शैक्षणिक संस्थानों, खेल संगठनों और खिलाड़ियों के बीच बेहतर समन्वय की आवश्यकता रेखांकित हुई।</p>
<p class="isSelectedEnd">इंटरैक्टिव सत्र का संचालन युवा मामले एवं खेल विभाग के निदेशक <strong>डॉ. मयेंगबाम वेटो सिंह</strong>, भारतीय खेल प्राधिकरण (SAI), टाकिएल के क्षेत्रीय निदेशक प्रभारी <strong>धंडपानी सी.</strong>, Khelo India के सहायक निदेशक <strong>लैशराम समृत्या सिंह</strong> और मणिपुर यूनिवर्सिटी के सहायक खेल निदेशक <strong>डॉ. च. प्रदीप सिंह</strong> ने किया।</p>
<p class="isSelectedEnd">धंडपानी सी. ने प्रस्तावित <strong>Khelo India 3.0 योजना (2026&ndash;2031)</strong> की प्रमुख विशेषताओं की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि संशोधित कार्यक्रम का उद्देश्य राज्य सरकारों, शैक्षणिक संस्थानों, खेल महासंघों, निजी अकादमियों, खिलाड़ियों, प्रशिक्षकों और सपोर्ट स्टाफ सहित पूरे खेल इकोसिस्टम को मजबूत करना है।</p>
<p class="isSelectedEnd">उन्होंने खेल बुनियादी ढांचे के विस्तार, मौजूदा सुविधाओं के आधुनिकीकरण, फीडर स्कूल स्थापित करने, कोचों के उन्नयन और जमीनी स्तर से पोडियम तक एकीकृत मार्ग तैयार करने के प्रस्तावों पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि पूर्वोत्तर के लिए प्रस्तावित <strong>Khelo India Utkrisht Vidyalaya</strong> केंद्रों में से एक मणिपुर में स्थापित हो सकता है।</p>
<p class="isSelectedEnd">उन्होंने यह भी बताया कि संशोधित ढांचे में लगभग <strong>₹10,000 मासिक आउट-ऑफ-पॉकेट भत्ते</strong> को करीब 3,000 Khelo India खिलाड़ियों से बढ़ाकर लगभग 30,000 स्थापित और उभरते खिलाड़ियों तक पहुंचाने का प्रस्ताव है। यह सहायता पात्र खिलाड़ियों को उपकरण, पोषण, बोर्डिंग, आवास और प्रतियोगिताओं में भागीदारी से जुड़े खर्चों में मदद करेगी।</p>
<h3>AIU पंजीकरण को लेकर खिलाड़ियों को जानकारी</h3>
<p class="isSelectedEnd">मणिपुर यूनिवर्सिटी के सहायक खेल निदेशक डॉ. च. प्रदीप सिंह ने 2026&ndash;27 शैक्षणिक सत्र के लिए टूर्नामेंट और चयन ट्रायल की पंजीकरण प्रक्रिया में महत्वपूर्ण बदलाव की जानकारी दी।</p>
<p class="isSelectedEnd">Association of Indian Universities (AIU) के तहत प्रतियोगिताओं और चयन ट्रायल में हिस्सा लेने वाले खिलाड़ियों को अब AIU पोर्टल पर <strong>व्यक्तिगत रूप से पंजीकरण</strong> कराना होगा और विश्वविद्यालय से सत्यापन के बाद AIU पहचान पत्र प्राप्त करना होगा।</p>
<p class="isSelectedEnd">उन्होंने खिलाड़ियों और संबद्ध कॉलेजों से समय रहते पंजीकरण पूरा करने की अपील की, ताकि अधूरे दस्तावेजों के कारण किसी योग्य खिलाड़ी का अवसर न छूटे। उन्होंने बताया कि मणिपुर यूनिवर्सिटी के इंटर-कॉलेज टूर्नामेंट और चयन ट्रायल <strong>10 सितंबर</strong> से शुरू होने की उम्मीद है। विस्तृत कार्यक्रम अलग से जारी किया जाएगा।</p>
<h3>बेमबेम देवी ने युवा खिलाड़ियों को दिया संदेश</h3>
<p class="isSelectedEnd">पद्मश्री और अर्जुन पुरस्कार से सम्मानित तथा भारतीय महिला राष्ट्रीय फुटबॉल टीम की पूर्व कप्तान <strong>ओइनम बेमबेम देवी</strong> ने अपने अनुभव साझा करते हुए युवा खिलाड़ियों को अपने चुने हुए खेल पर ध्यान केंद्रित रखने के लिए प्रेरित किया।</p>
<p class="isSelectedEnd">उन्होंने खिलाड़ियों को सोशल मीडिया की लोकप्रियता से प्रशिक्षण और प्रदर्शन से विचलित न होने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि तकनीक और सोशल मीडिया का सकारात्मक इस्तेमाल किया जा सकता है, लेकिन सार्वजनिक पहचान खेल उपलब्धि के बाद मिलनी चाहिए और वह प्रदर्शन का विकल्प नहीं बन सकती।</p>
<p class="isSelectedEnd">उन्होंने अपने दौर के खिलाड़ियों की कठिनाइयों को याद करते हुए लंबी सड़क और रेल यात्राओं, सीमित सुविधाओं और उच्च स्तर पर प्रतिस्पर्धा के लिए किए गए त्याग का उल्लेख किया। उन्होंने युवा खिलाड़ियों से कोचों का सम्मान करने, अनुशासन बनाए रखने, फिटनेस और पोषण का ध्यान रखने तथा विनम्र बने रहने की अपील की।</p>
<h3>खेल हस्तियों और युवा खिलाड़ियों का सम्मान</h3>
<p class="isSelectedEnd">कार्यक्रम में प्रमुख खेल हस्तियों को विशेष रूप से सम्मानित किया गया। इनमें <strong>ओइनम बेमबेम देवी</strong>, <strong>अर्जुन पुरस्कार विजेता एवं अंतरराष्ट्रीय हॉकी खिलाड़ी चिंगलेनसाना सिंह कांगुजम</strong>, <strong>अंतरराष्ट्रीय वेटलिफ्टर एवं 2010 राष्ट्रमंडल खेलों की रजत पदक विजेता थिंगबाइजाम सोनिया चानू</strong>, <strong>अंतरराष्ट्रीय जुडोका एवं ओलंपियन लिकमाबाम सुशीला देवी</strong> और <strong>2011 विश्व थांग-टा चैंपियनशिप के स्वर्ण पदक विजेता ओकराम बोबी सिंह</strong> शामिल रहे।</p>
<p class="isSelectedEnd">इसके अलावा उभरते युवा खेल प्रतिभाओं <strong>सोरोकहैबम मेलोडी देवी</strong> (राष्ट्रीय स्तर की तीरंदाज), <strong>एम. संजना चानू</strong> (राष्ट्रीय स्तर की फुटबॉलर), <strong>एल. लमंगनबा</strong> (राष्ट्रीय स्तर के मुक्केबाज), <strong>एल. विल्सन सिंह</strong> (राष्ट्रीय स्तर के वेटलिफ्टर) और <strong>विक्टोरिया हुइरेम</strong> (उभरती साइकिलिस्ट) को भी सम्मानित एवं प्रोत्साहित किया गया।</p>
<p class="isSelectedEnd">NSS सेल के कार्यक्रम समन्वयक <strong>प्रो. लैशराम संतोष सिंह</strong> ने स्वागत भाषण में कहा कि कार्यक्रम का उद्देश्य युवाओं को संगठित और सशक्त बनाना, स्वस्थ जीवनशैली को बढ़ावा देना, खेलों में भागीदारी को प्रोत्साहित करना और राष्ट्र निर्माण तथा <strong>Viksit Bharat 2047</strong> में युवाओं के योगदान को मजबूत करना है।</p>
<p class="isSelectedEnd">कार्यक्रम में मणिपुर यूनिवर्सिटी के डांस एंड म्यूजिक विभाग के विद्यार्थियों ने सांस्कृतिक नृत्य प्रस्तुति दी। इसके अलावा पारंपरिक <strong>लेंग्यान फी</strong> से अतिथियों का सम्मान, दीप प्रज्वलन, मुख्य अतिथि द्वारा शपथ और युवा प्रतिभागियों, खेल हस्तियों तथा खेल प्रशासकों के बीच संवाद भी आयोजित किया गया।</p>
<p>कार्यक्रम का समापन MY Bharat Manipur की स्टेट डायरेक्टर <strong>डब्ल्यू. पॉलिना मोनसांग</strong> के धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ। उन्होंने कार्यक्रम को सफल बनाने में योगदान देने वाले अतिथियों, वक्ताओं, खेल हस्तियों, संस्थानों, आयोजकों, स्वयंसेवकों, खिलाड़ियों, अभिभावकों, शिक्षकों और मीडिया प्रतिनिधियों के प्रति आभार व्यक्त किया।</p>]]></content:encoded>
    </item>
    <item>
      <title><![CDATA[मणिपुर यूनिवर्सिटी ने शुरू किया ‘टीबी मुक्त भारत अभियान’ जागरूकता कार्यक्रम]]></title>
      <description><![CDATA[<a href="https://www.mudarpan.in/news/manipur-university-launches-tb-mukt-bharat-abhiyan-awareness-programme"><img alt="मणिपुर यूनिवर्सिटी ने शुरू किया ‘टीबी मुक्त भारत अभियान’ जागरूकता कार्यक्रम" border="0" src="https://www.mudarpan.in/view/aug-2026/manipur-university-launches-tb-mukt-bharat-abhiyan-awareness-programme.jpg"></a><p>मणिपुर यूनिवर्सिटी ने ‘टीबी मुक्त भारत अभियान’ के तहत जागरूकता कार्यक्रम शुरू किया। विश्वविद्यालय के 47 विभागों में चरणबद्ध टीबी जागरूकता सत्र आयोजित किए जाएंगे।</p>]]></description>
      <link><![CDATA[https://www.mudarpan.in/news/manipur-university-launches-tb-mukt-bharat-abhiyan-awareness-programme]]></link>
      <pubDate>Mon, 31 Aug 2026 06:02:35 GMT</pubDate>
      <guid isPermaLink="true">https://www.mudarpan.in/news/manipur-university-launches-tb-mukt-bharat-abhiyan-awareness-programme</guid>
      <dc:creator><![CDATA[Naorem Mohen]]></dc:creator>
      <category><![CDATA[मणपर यनवरसट]]></category>
      <category><![CDATA[टब मकत भरत अभयन]]></category>
      <category><![CDATA[TB Mukt Bharat Abhiyan]]></category>
      <category><![CDATA[टब जगरकत]]></category>
      <category><![CDATA[कषय रग]]></category>
      <category><![CDATA[tuberculosis awareness]]></category>
      <category><![CDATA[मणपर यनवरसट हलथ सटर]]></category>
      <category><![CDATA[UGC Chetna Series]]></category>
      <category><![CDATA[नकषय मतर]]></category>
      <category><![CDATA[TB Free India]]></category>
      <category><![CDATA[सवसथय जगरकत]]></category>
      <category><![CDATA[मणपर समचर]]></category>
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      <content:encoded><![CDATA[<p><img src="https://www.mudarpan.in/view/aug-2026/manipur-university-launches-tb-mukt-bharat-abhiyan-awareness-programme.jpg">&nbsp;</p>
<p class="isSelectedEnd"><strong>इंफाल, 25 अगस्त 2026:</strong> मणिपुर यूनिवर्सिटी ने मंगलवार को विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) की ऑनलाइन <strong>&lsquo;चेतना सीरीज लेक्चर&rsquo;</strong> में भाग लेकर <strong>&lsquo;टीबी मुक्त भारत अभियान&rsquo;</strong> के तहत अपने जागरूकता कार्यक्रम की शुरुआत की। कार्यक्रम का विषय <strong>&ldquo;टीबी मुक्त भारत अभियान&mdash;टीबी मुक्त भारत के लिए जागरूकता का निर्माण&rdquo;</strong> था।</p>
<p class="isSelectedEnd">शिक्षा मंत्रालय, भारत सरकार के तहत आयोजित UGC के इस ऑनलाइन कार्यक्रम का उद्देश्य तपेदिक (टीबी) की रोकथाम, समय पर पहचान, जांच, निदान और उपचार के बारे में जागरूकता बढ़ाना था। साथ ही, टीबी मुक्त भारत के राष्ट्रीय लक्ष्य को हासिल करने में उच्च शिक्षण संस्थानों की सक्रिय भागीदारी को प्रोत्साहित करना भी इसका उद्देश्य रहा।</p>
<h3>विश्वविद्यालय समुदाय ने ऑनलाइन कार्यक्रम में लिया हिस्सा</h3>
<p class="isSelectedEnd">मणिपुर यूनिवर्सिटी के कार्यवाहक कुलपति <strong>प्रो. आर.के. हेमकुमार सिंह</strong>, रजिस्ट्रार <strong>प्रो. एम. प्रेमजीत सिंह</strong>, मणिपुर इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी के डीन <strong>प्रो. एन. बसंता</strong>, डीन ऑफ स्टूडेंट्स वेलफेयर <strong>प्रो. च. इबोहाल सिंह</strong>, रसायन विज्ञान विभाग के <strong>प्रो. एन. राजेन सिंह</strong>, यूनिवर्सिटी इंजीनियर <strong>एन. थोइबा सिंह</strong>, NSS कार्यक्रम समन्वयक <strong>प्रो. एल. संतोष सिंह</strong>, मणिपुर यूनिवर्सिटी हेल्थ सेंटर की मेडिकल ऑफिसर <strong>डॉ. लामाबम पिंकी देवी</strong>, जनसंपर्क अधिकारी <strong>डॉ. सकीला नोंगमेइकापम</strong> सहित विश्वविद्यालय समुदाय के अन्य सदस्यों ने ऑनलाइन कार्यक्रम में भाग लिया।</p>
<p class="isSelectedEnd">लाइव कार्यक्रम के दौरान UGC की सचिव <strong>प्रो. श्यामा रथ</strong> और स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के केंद्रीय टीबी प्रभाग की उप महानिदेशक <strong>डॉ. शोबिनी राजन</strong> ने उच्च शिक्षण संस्थानों के प्रतिभागियों को संबोधित किया।</p>
<p class="isSelectedEnd">वक्ताओं ने टीबी उन्मूलन के लिए निरंतर जन-जागरूकता, समय पर जांच एवं निदान, उचित उपचार और सामुदायिक भागीदारी के महत्व पर जोर दिया।</p>
<h3>टीबी से जुड़े भ्रम और कलंक दूर करने पर जोर</h3>
<p class="isSelectedEnd">वक्ताओं ने कहा कि टीबी के खिलाफ लड़ाई में विश्वविद्यालयों, विद्यार्थियों और शिक्षकों की महत्वपूर्ण भूमिका है। उच्च शिक्षण संस्थानों से टीबी से संबंधित गलत सूचनाओं और सामाजिक कलंक का मुकाबला करने तथा <strong>&lsquo;टीबी मुक्त भारत अभियान&rsquo;</strong> का संदेश व्यापक समुदाय तक पहुंचाने की अपील की गई।</p>
<p class="isSelectedEnd">यह पहल उच्च शिक्षण संस्थानों में <strong>टीबी मुक्त भारत अभियान के संयुक्त कार्ययोजना</strong> का हिस्सा है। इस योजना में विश्वविद्यालयों और कॉलेजों को जन-जागरूकता, सामुदायिक भागीदारी और युवाओं की सक्रिय भागीदारी के माध्यम से टीबी के खिलाफ अभियान को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका दी गई है।</p>
<h3>&lsquo;नि-क्षय मित्र&rsquo; बनने के लिए प्रोत्साहन</h3>
<p class="isSelectedEnd">अभियान के तहत उच्च शिक्षण संस्थानों को <strong>नि-क्षय मित्र</strong> के रूप में पंजीकरण कराने के लिए प्रोत्साहित किया गया है। साथ ही शिक्षकों, विद्यार्थियों, पूर्व छात्रों और अन्य हितधारकों को टीबी से प्रभावित लोगों की सहायता के लिए प्रेरित करने पर जोर दिया गया है।</p>
<p class="isSelectedEnd">संस्थानों से छात्र सहभागिता और सामुदायिक आउटरीच कार्यक्रमों में टीबी जागरूकता को शामिल करने तथा संस्थागत वेबसाइटों, डिजिटल प्लेटफॉर्म और सोशल मीडिया के माध्यम से टीबी की रोकथाम से संबंधित सत्यापित जानकारी प्रसारित करने का भी आह्वान किया गया है।</p>
<p class="isSelectedEnd">विद्यार्थियों और कर्मचारियों को रैलियों, नुक्कड़ नाटकों, पोस्टर अभियानों और सामुदायिक जागरूकता कार्यक्रमों के माध्यम से टीबी से जुड़े मिथकों, गलत सूचनाओं और सामाजिक कलंक को दूर करने के प्रयासों में भाग लेने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा।</p>
<h3>मणिपुर यूनिवर्सिटी के सभी 47 विभागों में होंगे जागरूकता सत्र</h3>
<p class="isSelectedEnd">संस्थागत स्तर पर आगे की कार्रवाई के तहत <strong>मणिपुर यूनिवर्सिटी हेल्थ सेंटर</strong> स्वास्थ्य विभाग की <strong>स्टेट टीबी यूनिट</strong> के सहयोग से विश्वविद्यालय के सभी <strong>47 विभागों में विभागवार टीबी जागरूकता सत्र</strong> आयोजित करने की योजना बना रहा है।</p>
<p class="isSelectedEnd">प्रस्तावित योजना के अनुसार, हर सप्ताह दो विभागों को कवर किया जाएगा और प्रत्येक जागरूकता सत्र लगभग <strong>30 से 40 मिनट</strong> का होगा। इस चरणबद्ध कार्यक्रम के तहत करीब <strong>24 सप्ताह</strong> में विश्वविद्यालय के सभी विभागों को कवर किए जाने की उम्मीद है।</p>
<h3>टीबी के लक्षण, रोकथाम और उपचार की दी जाएगी जानकारी</h3>
<p class="isSelectedEnd">जागरूकता सत्रों में टीबी के बारे में बुनियादी जानकारी, इसके संकेत एवं लक्षण, संक्रमण के तरीके, बचाव के उपाय, जांच एवं उपचार की उपलब्धता और निर्धारित उपचार का पूरा कोर्स पूरा करने के महत्व पर जानकारी दी जाएगी।</p>
<p class="isSelectedEnd">इसके अलावा टीबी से जुड़े मिथकों और सामाजिक कलंक पर भी चर्चा की जाएगी। स्वस्थ जीवनशैली को बढ़ावा देने के साथ-साथ <strong>नि-क्षय मित्रों</strong> और टीबी से प्रभावित लोगों के लिए उपलब्ध सहायता के बारे में भी जानकारी दी जाएगी।</p>
<p class="isSelectedEnd">संबंधित विभागों के विद्यार्थी, शिक्षक और कर्मचारी इन सत्रों में भाग लेंगे। विश्वविद्यालय हेल्थ सेंटर कार्यक्रम के समन्वय के साथ-साथ इसके दस्तावेजीकरण और रिपोर्टिंग के लिए रिकॉर्ड भी रखेगा।</p>
<p>मणिपुर यूनिवर्सिटी के अनुसार, इस पहल का उद्देश्य विश्वविद्यालय परिसर में स्वास्थ्य संबंधी जागरूकता को मजबूत करना और <strong>टीबी मुक्त भारत</strong> के राष्ट्रीय प्रयास में योगदान देना है।</p>]]></content:encoded>
    </item>
    <item>
      <title><![CDATA[मणिपुर यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर पवन कुमार यादवली को सिंगापुर में अंतरराष्ट्रीय शोध पुरस्कार]]></title>
      <description><![CDATA[<a href="https://www.mudarpan.in/news/manipur-university-professor-pavan-kumar-yadavalli-international-research-award-singapore"><img alt="मणिपुर यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर पवन कुमार यादवली को सिंगापुर में अंतरराष्ट्रीय शोध पुरस्कार" border="0" src="https://www.mudarpan.in/view/aug-2026/mu-prof-wins-awards-in-singapore.jpg"></a><p>मणिपुर यूनिवर्सिटी के प्रो. पवन कुमार यादवली को सिंगापुर में ICESS-2026 के दौरान ‘Research Era Excellent Paper Award’ से सम्मानित किया गया।</p>]]></description>
      <link><![CDATA[https://www.mudarpan.in/news/manipur-university-professor-pavan-kumar-yadavalli-international-research-award-singapore]]></link>
      <pubDate>Mon, 31 Aug 2026 05:28:51 GMT</pubDate>
      <guid isPermaLink="true">https://www.mudarpan.in/news/manipur-university-professor-pavan-kumar-yadavalli-international-research-award-singapore</guid>
      <dc:creator><![CDATA[Naorem Mohen]]></dc:creator>
      <category><![CDATA[मणपर यनवरसट]]></category>
      <category><![CDATA[परफसर पवन कमर यदवल]]></category>
      <category><![CDATA[पवन कमर यदवल]]></category>
      <category><![CDATA[अतररषटरय शध परसकर]]></category>
      <category><![CDATA[Research Era Excellent Paper Award]]></category>
      <category><![CDATA[ICESS 2026]]></category>
      <category><![CDATA[सगपर शकष सममलन]]></category>
      <category><![CDATA[समवश शकष]]></category>
      <category><![CDATA[Inclusive Education]]></category>
      <category><![CDATA[शकषक शकष]]></category>
      <category><![CDATA[Manipur University]]></category>
      <category><![CDATA[अतररषटरय शध]]></category>
      <category><![CDATA[दवयग वदयरथ]]></category>
      <category><![CDATA[SDG 4]]></category>
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      <content:encoded><![CDATA[<p><img src="https://www.mudarpan.in/view/aug-2026/mu-prof-wins-awards-in-singapore.jpg"> &nbsp;</p>
<p class="PDq2pG_selectionAnchorContainer" data-start="774" data-end="1133"><strong data-start="774" data-end="799">इंफाल, 22 अगस्त 2026:</strong> मणिपुर यूनिवर्सिटी के शिक्षक शिक्षा विभाग के प्रोफेसर एवं प्रमुख <strong data-start="865" data-end="889">डॉ. पवन कुमार यादवली</strong> को सिंगापुर में आयोजित <strong data-start="913" data-end="976">इंटरनेशनल कॉन्फ्रेंस ऑन एजुकेशन एंड सोशल साइंस (ICESS-2026)</strong> में प्रतिष्ठित <strong data-start="992" data-end="1032">&lsquo;Research Era Excellent Paper Award&rsquo;</strong> से सम्मानित किया गया। यह पुरस्कार 21 अगस्त को आयोजित अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन के दौरान प्रदान किया गया।</p>
<p data-start="1135" data-end="1500">डॉ. यादवली ने सम्मेलन में <strong data-start="1161" data-end="1283">&ldquo;Transforming Inclusive Education for Learners with Multiple Disabilities: Emerging Innovations and Future Directions&rdquo;</strong> विषय पर शोध-पत्र प्रस्तुत किया। ICESS-2026 में विभिन्न देशों के शिक्षाविदों, शोधकर्ताओं, शिक्षक-प्रशिक्षकों, नीति निर्माताओं और शिक्षा क्षेत्र से जुड़े विशेषज्ञों ने हिस्सा लिया।</p>
<h3 data-section-id="1y21ou9" data-start="1502" data-end="1542">समावेशी शिक्षा में नई तकनीकों पर जोर</h3>
<p data-start="1544" data-end="1884">डॉ. यादवली के शोध में कई प्रकार की दिव्यांगताओं वाले विद्यार्थियों के लिए समावेशी शिक्षा को अधिक प्रभावी बनाने के आधुनिक तरीकों पर प्रकाश डाला गया। शोध में <strong data-start="1700" data-end="1861">सहायक तकनीक, यूनिवर्सल डिजाइन फॉर लर्निंग (UDL), आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित शैक्षिक सहायता प्रणाली, शिक्षक क्षमता विकास और साक्ष्य-आधारित शिक्षण पद्धतियों</strong> पर विशेष जोर दिया गया।</p>
<p data-start="1886" data-end="2096">शोध-पत्र में ऐसे <strong data-start="1903" data-end="1956">समान, सुलभ और विद्यार्थी-केंद्रित शैक्षिक वातावरण</strong> विकसित करने की वकालत की गई, जिससे अनेक प्रकार की दिव्यांगताओं वाले बच्चों की सार्थक भागीदारी और बेहतर शैक्षिक परिणाम सुनिश्चित किए जा सकें।</p>
<p data-start="2098" data-end="2388">शोध में शिक्षक शिक्षा कार्यक्रमों को मजबूत करने, विभिन्न विषयों के विशेषज्ञों के बीच सहयोग बढ़ाने और प्रगतिशील नीतिगत पहलों की आवश्यकता पर भी जोर दिया गया। यह दृष्टिकोण संयुक्त राष्ट्र के <strong data-start="2286" data-end="2316">सतत विकास लक्ष्य-4 (SDG 4)</strong> के अनुरूप समावेशी और समान गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के उद्देश्य से जुड़ा है।</p>
<h3 data-section-id="gke7un" data-start="2390" data-end="2450">&lsquo;Best Presentation and Content&rsquo; श्रेणी में मिला पुरस्कार</h3>
<p data-start="2452" data-end="2636">शोध की अकादमिक गुणवत्ता, मौलिकता और व्यावहारिक प्रासंगिकता को देखते हुए डॉ. यादवली को <strong data-start="2538" data-end="2573">&lsquo;Best Presentation and Content&rsquo;</strong> श्रेणी में Research Era Excellent Paper Award प्रदान किया गया।</p>
<p data-start="2638" data-end="2771">यह पुरस्कार <strong data-start="2650" data-end="2688">LIGS University की डॉ. अमिला गमागे</strong>, जो सिंगापुर स्थित Raffles Educational Institute की निदेशक भी हैं, ने प्रदान किया।</p>
<p data-start="2773" data-end="3023">डॉ. यादवली की प्रस्तुति के बाद अंतरराष्ट्रीय प्रतिभागियों के बीच समावेशी शिक्षा की मौजूदा चुनौतियों, नवाचारों और भविष्य की संभावनाओं पर अकादमिक चर्चा हुई। इससे मणिपुर यूनिवर्सिटी की अंतरराष्ट्रीय शोध एवं अकादमिक मंचों पर बढ़ती भागीदारी को भी बल मिला।</p>
<h3 data-section-id="1f0whdb" data-start="3025" data-end="3086">विदेशी विश्वविद्यालयों के साथ सहयोग की संभावनाओं पर चर्चा</h3>
<p data-start="3088" data-end="3317">ICESS-2026 से इतर डॉ. यादवली ने <strong data-start="3120" data-end="3225">यूनाइटेड किंगडम, दक्षिण कोरिया की कांगवोन नेशनल यूनिवर्सिटी और ताइवान की नेशनल त्सिंग हुआ यूनिवर्सिटी</strong> के शैक्षणिक संस्थानों एवं संगठनों के प्रतिनिधियों के साथ भी संभावित सहयोग को लेकर चर्चा की।</p>
<p data-start="3319" data-end="3513">इन चर्चाओं में <strong data-start="3334" data-end="3474">संयुक्त शोध परियोजनाओं, सहयोगात्मक प्रकाशनों, शिक्षकों एवं शोधकर्ताओं के नेटवर्क, क्षमता निर्माण कार्यक्रमों और अन्य अकादमिक साझेदारियों</strong> की संभावनाओं पर विचार-विमर्श किया गया।</p>
<p data-start="3515" data-end="3661">इन संभावित साझेदारियों का उद्देश्य मणिपुर यूनिवर्सिटी की शोध एवं विकास गतिविधियों को मजबूत करना और उसके वैश्विक अकादमिक जुड़ाव का विस्तार करना है।</p>
<h3 data-section-id="14bnfnk" data-start="3663" data-end="3711">मणिपुर यूनिवर्सिटी के लिए महत्वपूर्ण उपलब्धि</h3>
<p data-start="3713" data-end="3914">ICESS-2026 में डॉ. पवन कुमार यादवली की भागीदारी और अंतरराष्ट्रीय सम्मान ने <strong data-start="3788" data-end="3898">मणिपुर यूनिवर्सिटी के शोध योगदान और संस्थागत क्षमताओं को अंतरराष्ट्रीय मंच पर प्रदर्शित करने का एक और अवसर</strong> प्रदान किया है।</p>
<p data-start="3916" data-end="4071">यह उपलब्धि शिक्षक शिक्षा, समावेशी शिक्षा और संबंधित क्षेत्रों में विश्वविद्यालय के लिए व्यापक अंतरराष्ट्रीय अकादमिक सहयोग की संभावनाओं को भी मजबूत करती है।</p>]]></content:encoded>
    </item>
    <item>
      <title><![CDATA[मणिपुर यूनिवर्सिटी की डॉ. लीलाबती देवी राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार 2026 के लिए चयनित]]></title>
      <description><![CDATA[<a href="https://www.mudarpan.in/news/manipur-university-dr-pukhrambam-lilabati-devi-national-award-to-teachers-2026"><img alt="मणिपुर यूनिवर्सिटी की डॉ. लीलाबती देवी राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार 2026 के लिए चयनित" border="0" src="https://www.mudarpan.in/view/aug-2026/dr-pukhrambam-lilabati-devi-on-selection-for-national-award-to-teachers-2026.jpg"></a><p>मणिपुर यूनिवर्सिटी की डॉ. पुख्रम्बम लीलाबती देवी राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार 2026 के लिए चयनित हुई हैं। कुलपति प्रो. आर.के. हेमकुमार सिंह ने उनका अभिनंदन किया।</p>]]></description>
      <link><![CDATA[https://www.mudarpan.in/news/manipur-university-dr-pukhrambam-lilabati-devi-national-award-to-teachers-2026]]></link>
      <pubDate>Mon, 31 Aug 2026 05:24:05 GMT</pubDate>
      <guid isPermaLink="true">https://www.mudarpan.in/news/manipur-university-dr-pukhrambam-lilabati-devi-national-award-to-teachers-2026</guid>
      <dc:creator><![CDATA[Naorem Mohen]]></dc:creator>
      <category><![CDATA[मणपर यनवरसट]]></category>
      <category><![CDATA[ड पखरमबम ललबत दव]]></category>
      <category><![CDATA[रषटरय शकषक परसकर 2026]]></category>
      <category><![CDATA[National Award to Teachers 2026]]></category>
      <category><![CDATA[मणपर शकषक परसकर]]></category>
      <category><![CDATA[मणपर नतय]]></category>
      <category><![CDATA[भरतनटयम]]></category>
      <category><![CDATA[मणपर यनवरसट समचर]]></category>
      <category><![CDATA[पर आरक हमकमर सह]]></category>
      <category><![CDATA[उचच शकष]]></category>
      <category><![CDATA[शकष मतरलय]]></category>
      <category><![CDATA[मणपर क उपलबध]]></category>
      <media:content xmlns:media="http://search.yahoo.com/mrss/" url="https://www.mudarpan.in/view/aug-2026/dr-pukhrambam-lilabati-devi-on-selection-for-national-award-to-teachers-2026.jpg" medium="image" width="1200" height="675" />
      <content:encoded><![CDATA[<p><img src="https://www.mudarpan.in/view/aug-2026/dr-pukhrambam-lilabati-devi-on-selection-for-national-award-to-teachers-2026.jpg">&nbsp;</p>
<p class="PDq2pG_selectionAnchorContainer" data-start="851" data-end="1122"><strong data-start="851" data-end="876">इंफाल, 24 अगस्त 2026:</strong> मणिपुर यूनिवर्सिटी के डांस एंड म्यूजिक विभाग की सहायक प्रोफेसर <strong data-start="940" data-end="970">डॉ. पुख्रम्बम लीलाबती देवी</strong> के राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार 2026 के लिए चयनित होने पर विश्वविद्यालय के कार्यवाहक कुलपति <strong data-start="1060" data-end="1090">प्रो. आर.के. हेमकुमार सिंह</strong> ने सोमवार को उनका अभिनंदन किया।</p>
<p data-start="1124" data-end="1431">डॉ. लीलाबती देवी को यह प्रतिष्ठित सम्मान <strong data-start="1165" data-end="1219">भारत सरकार के शिक्षा मंत्रालय के उच्च शिक्षा विभाग</strong> द्वारा प्रदान किया जाएगा। कुलपति कार्यालय में आयोजित सम्मान समारोह में प्रो. हेमकुमार सिंह ने उन्हें पारंपरिक <strong data-start="1330" data-end="1342">लेंग्यान</strong> भेंट कर सम्मानित किया और विश्वविद्यालय को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने के लिए बधाई दी।</p>
<h3 data-section-id="g4l9e7" data-start="1433" data-end="1496">मणिपुर यूनिवर्सिटी से पहली राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार विजेता</h3>
<p data-start="1498" data-end="1725">डॉ. लीलाबती देवी <strong data-start="1515" data-end="1623">मणिपुर यूनिवर्सिटी की पहली ऐसी शिक्षिका हैं, जिन्हें राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार के लिए चयनित किया गया है।</strong> प्रो. हेमकुमार सिंह ने इसे मणिपुर यूनिवर्सिटी के साथ-साथ पूरे मणिपुर राज्य के लिए गौरव का क्षण बताया।</p>
<p data-start="1727" data-end="1919">उन्होंने विश्वास जताया कि डॉ. लीलाबती देवी की उपलब्धि विश्वविद्यालय के अन्य शिक्षकों और शोधकर्ताओं को शिक्षण, शोध और अपने-अपने अकादमिक क्षेत्रों में उत्कृष्टता हासिल करने के लिए प्रेरित करेगी।</p>
<p data-start="1921" data-end="2187">कुलपति ने कहा कि <strong data-start="1938" data-end="1955">5 सितंबर 2026</strong> मणिपुर यूनिवर्सिटी के लिए एक यादगार दिन होगा, जब डॉ. लीलाबती देवी को शिक्षक दिवस के अवसर पर नई दिल्ली के विज्ञान भवन में आयोजित राष्ट्रीय पुरस्कार समारोह में <strong data-start="2114" data-end="2159">भारत की राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मू</strong> द्वारा सम्मानित किया जाएगा।</p>
<p data-start="2189" data-end="2313">उन्होंने विश्वविद्यालय समुदाय से मिलकर उच्च शिक्षा के क्षेत्र में मणिपुर यूनिवर्सिटी के योगदान को मजबूत करने का आह्वान किया।</p>
<h3 data-section-id="jxqh0u" data-start="2315" data-end="2369">अकादमिक उत्कृष्टता के लिए सामूहिक प्रयास का आह्वान</h3>
<p data-start="2371" data-end="2544">प्रो. हेमकुमार सिंह ने विश्वविद्यालय के शिक्षकों, शोधकर्ताओं, विद्यार्थियों और पूर्व छात्रों से विश्वविद्यालय के निरंतर विकास के लिए रचनात्मक विचार और सुझाव देने की अपील की।</p>
<p data-start="2546" data-end="2804">उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय समुदाय के किसी सदस्य को मिलने वाला राष्ट्रीय सम्मान केवल व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं होना चाहिए, बल्कि इससे <strong data-start="2679" data-end="2741">अकादमिक उत्कृष्टता, शोध, नवाचार और उच्च शिक्षा की गुणवत्ता</strong> को बेहतर बनाने के लिए सामूहिक प्रयासों को प्रेरणा मिलनी चाहिए।</p>
<h3 data-section-id="1px1524" data-start="2806" data-end="2846">देशभर के 21 शिक्षकों में डॉ. लीलाबती</h3>
<p data-start="2848" data-end="3145">डॉ. लीलाबती देवी देशभर के उच्च शिक्षण संस्थानों और पॉलिटेक्निक से चयनित <strong data-start="2920" data-end="2935">21 शिक्षकों</strong> में शामिल हैं। वह पूर्वोत्तर भारत से राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार 2026 के लिए चुने गए केवल <strong data-start="3024" data-end="3048">दो पुरस्कार विजेताओं</strong> में से एक हैं। दूसरे पुरस्कार विजेता असम स्थित गौहाटी यूनिवर्सिटी के <strong data-start="3118" data-end="3140">प्रो. अंकुरण दत्ता</strong> हैं।</p>
<p data-start="3147" data-end="3256">राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार के तहत <strong data-start="3180" data-end="3235">प्रशस्ति प्रमाणपत्र, ₹50,000 की नकद राशि और रजत पदक</strong> प्रदान किया जाता है।</p>
<h3 data-section-id="13ir08h" data-start="3258" data-end="3310">मणिपुरी नृत्य और भरतनाट्यम के क्षेत्र में योगदान</h3>
<p data-start="3312" data-end="3512">डॉ. लीलाबती देवी ने अपने अकादमिक और कलात्मक करियर को <strong data-start="3365" data-end="3422">मणिपुरी नृत्य और भरतनाट्यम के शिक्षण, शोध और प्रदर्शन</strong> के लिए समर्पित किया है। उन्हें शोध, शिक्षण और अकादमिक सेवा का लगभग 15 वर्षों का अनुभव है।</p>
<p data-start="3514" data-end="3728">उनकी शिक्षण पद्धति में पारंपरिक ज्ञान, व्यावहारिक प्रशिक्षण, रचनात्मकता, शोध और नवीन शिक्षण तकनीकों का समन्वय शामिल है। इसके माध्यम से वह विद्यार्थियों की कलात्मक और अकादमिक क्षमताओं को विकसित करने पर जोर देती हैं।</p>
<p data-start="3730" data-end="3946">उन्होंने कोरिया, कजाकिस्तान, ट्यूनीशिया और म्यांमार में अंतरराष्ट्रीय प्रस्तुतियों, अकादमिक कार्यक्रमों और सांस्कृतिक गतिविधियों के माध्यम से <strong data-start="3872" data-end="3923">मणिपुरी संस्कृति को वैश्विक स्तर पर बढ़ावा देने</strong> में भी योगदान दिया है।</p>
<h3 data-section-id="hhk3mk" data-start="3948" data-end="3998">शोध और सांस्कृतिक विरासत में महत्वपूर्ण योगदान</h3>
<p data-start="4000" data-end="4205">डॉ. लीलाबती देवी ने डांस में <strong data-start="4029" data-end="4039">पीएचडी</strong> की है और उनकी कई पुस्तकें तथा UGC शोध प्रकाशन प्रकाशित हो चुके हैं। उन्होंने नई दिल्ली स्थित UGC STRIDE&ndash;Component-1 के तहत <strong data-start="4163" data-end="4188">मेजर रिसर्च प्रोजेक्ट</strong> भी पूरा किया है।</p>
<p data-start="4207" data-end="4493">वह राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय कार्यक्रमों में संसाधन व्यक्ति, शोध-पत्र प्रस्तुतकर्ता और समन्वयक के रूप में भी योगदान दे चुकी हैं। उनकी उपलब्धियों में <strong data-start="4357" data-end="4402">मणिपुर स्टेट कला अकादमी यंग टैलेंट अवॉर्ड</strong> और प्रसार भारती द्वारा <strong data-start="4426" data-end="4464">मणिपुरी नृत्य में टॉप ग्रेड कलाकार</strong> के रूप में मान्यता शामिल है।</p>
<p data-start="4495" data-end="4609">उनका कार्य शोध, शिक्षण, आउटरीच और भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण के क्षेत्र में योगदान को दर्शाता है।</p>
<h3 data-section-id="1e3phml" data-start="4611" data-end="4640">पहले भी हो चुका है सम्मान</h3>
<p data-start="4642" data-end="4915">मणिपुर यूनिवर्सिटी ने इससे पहले भी अपने <strong data-start="4682" data-end="4715">46वें स्थापना-सह-प्रशंसा दिवस</strong> के अवसर पर डॉ. लीलाबती देवी को मणिपुर स्टेट कला अकादमी यंग टैलेंट अवॉर्ड प्राप्त करने और प्रसार भारती द्वारा मणिपुरी शास्त्रीय नृत्य में टॉप ग्रेड कलाकार के रूप में मान्यता मिलने पर सम्मानित किया था।</p>
<p data-start="4917" data-end="5179">राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार 2026 के लिए उनका चयन <strong data-start="4964" data-end="5052">डांस एंड म्यूजिक विभाग, मणिपुर यूनिवर्सिटी और मणिपुर की समृद्ध प्रदर्शन कला परंपराओं</strong> के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। यह सम्मान उच्च शिक्षा में पूर्वोत्तर भारत के योगदान को भी राष्ट्रीय स्तर पर रेखांकित करता है।</p>
<p data-start="5181" data-end="5399">मणिपुर यूनिवर्सिटी समुदाय ने डॉ. पुख्रम्बम लीलाबती देवी को इस उपलब्धि के लिए बधाई देते हुए उनके शिक्षण, शोध और मणिपुर की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण एवं प्रचार-प्रसार के क्षेत्र में निरंतर सफलता की कामना की है।</p>]]></content:encoded>
    </item>
    <item>
      <title><![CDATA[मणिपुर यूनिवर्सिटी में जातीय संघर्ष, भूमि और विकास पर छह दिवसीय कार्यक्रम शुरू]]></title>
      <description><![CDATA[<a href="https://www.mudarpan.in/news/manipur-university-six-day-capacity-building-programme-ethnic-conflict-land-resources-development"><img alt="मणिपुर यूनिवर्सिटी में जातीय संघर्ष, भूमि और विकास पर छह दिवसीय कार्यक्रम शुरू" border="0" src="https://www.mudarpan.in/view/aug-2026/six-day-capacity-building-in-mu.jpg"></a><p>मणिपुर यूनिवर्सिटी में जातीय संघर्ष, भूमि, संसाधन और विकास पर छह दिवसीय क्षमता निर्माण कार्यक्रम शुरू हुआ। विशेषज्ञों ने शांति, सुशासन और सतत विकास पर चर्चा की।</p>]]></description>
      <link><![CDATA[https://www.mudarpan.in/news/manipur-university-six-day-capacity-building-programme-ethnic-conflict-land-resources-development]]></link>
      <pubDate>Mon, 31 Aug 2026 05:19:36 GMT</pubDate>
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      <dc:creator><![CDATA[Naorem Mohen]]></dc:creator>
      <category><![CDATA[मणपर यनवरसट]]></category>
      <category><![CDATA[जतय सघरष]]></category>
      <category><![CDATA[मणपर सकट]]></category>
      <category><![CDATA[भम और ससधन]]></category>
      <category><![CDATA[परवततर भरत]]></category>
      <category><![CDATA[कषमत नरमण करयकरम]]></category>
      <category><![CDATA[MMTTC मणपर यनवरसट]]></category>
      <category><![CDATA[शत नरमण]]></category>
      <category><![CDATA[सतत वकस]]></category>
      <category><![CDATA[वसथपन]]></category>
      <category><![CDATA[जनसखयकय बदलव]]></category>
      <category><![CDATA[सशसन]]></category>
      <category><![CDATA[मणपर समचर]]></category>
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      <content:encoded><![CDATA[<p><img src="https://www.mudarpan.in/view/aug-2026/six-day-capacity-building-in-mu.jpg">&nbsp;</p>
<p class="PDq2pG_selectionAnchorContainer" data-start="905" data-end="1353"><strong data-start="905" data-end="930">इंफाल, 24 अगस्त 2026:</strong> मणिपुर यूनिवर्सिटी में सोमवार को <strong data-start="964" data-end="1026">&ldquo;उत्तर-पूर्व भारत में जातीय संघर्ष, भूमि, संसाधन और विकास&rdquo;</strong> विषय पर छह दिवसीय क्षमता निर्माण कार्यक्रम शुरू हुआ। कार्यक्रम में विभिन्न विषयों के शिक्षाविदों, शोधकर्ताओं और विशेषज्ञों ने हिस्सा लिया। इसमें संघर्ष, पहचान, भूमि, जनसांख्यिकीय बदलाव, शासन, शांति निर्माण और सतत विकास जैसे मुद्दों पर विशेष रूप से मणिपुर के संदर्भ में चर्चा की जा रही है।</p>
<p data-start="1355" data-end="1651">यह कार्यक्रम <strong data-start="1368" data-end="1435">मालवीय मिशन शिक्षक प्रशिक्षण केंद्र (MMTTC), मणिपुर यूनिवर्सिटी</strong> द्वारा शिक्षा मंत्रालय, भारत सरकार के तहत आयोजित किया जा रहा है। कार्यक्रम 24 से 29 अगस्त 2026 तक विश्वविद्यालय के मानवशास्त्र विभाग के कॉन्फ्रेंस हॉल में आयोजित किया जा रहा है।</p>
<p data-start="1653" data-end="2062">कार्यक्रम के उद्घाटन सत्र में मणिपुर यूनिवर्सिटी के कार्यवाहक कुलपति <strong data-start="1722" data-end="1752">प्रो. आर.के. हेमकुमार सिंह</strong> मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। स्कूल ऑफ ह्यूमन एंड एनवायरनमेंटल साइंसेज के डीन <strong data-start="1835" data-end="1861">प्रो. एम.सी. अरुणकुमार</strong> और मानवशास्त्र विभाग के प्रमुख <strong data-start="1893" data-end="1927">प्रो. हाओबिजाम वोकेन्द्रो सिंह</strong> सम्मानित अतिथि रहे। कार्यक्रम की अध्यक्षता MMTTC-MU के निदेशक <strong data-start="1990" data-end="2017">प्रो. आर.के. भुबोन सिंह</strong> ने की।</p>
<h3 data-section-id="jp9k0i" data-start="2064" data-end="2106">अकादमिक विमर्श को संरक्षित करने पर जोर</h3>
<p data-start="2108" data-end="2433">अपने संबोधन में प्रो. आर.के. हेमकुमार सिंह ने कार्यक्रम के विषय को वर्तमान परिस्थितियों में अत्यंत प्रासंगिक बताया। उन्होंने कहा कि छह दिवसीय कार्यक्रम मणिपुर और पूरे पूर्वोत्तर क्षेत्र के सामने मौजूद चुनौतियों पर विशेषज्ञों के बीच गंभीर अकादमिक चर्चा के लिए महत्वपूर्ण मंच प्रदान करेगा।</p>
<p data-start="2435" data-end="2846">उन्होंने कहा कि मणिपुर करीब तीन वर्षों से लंबे संकट का सामना कर रहा है। ऐसे में अकादमिक चर्चाओं के निष्कर्षों को भविष्य के संदर्भ के लिए सुरक्षित रखना जरूरी है। उन्होंने आयोजकों और संसाधन व्यक्तियों से चर्चाओं की एक संक्षिप्त रिपोर्ट तैयार करने तथा कार्यवाही को विश्वविद्यालय पुस्तकालय में संरक्षित करने का आग्रह किया। संभव होने पर इसे ऑनलाइन उपलब्ध कराने की भी बात कही गई।</p>
<h3 data-section-id="edow3e" data-start="2848" data-end="2900">सुरक्षा-केंद्रित दृष्टिकोण से आगे बढ़ने की जरूरत</h3>
<p data-start="2902" data-end="3093">MMTTC-MU के निदेशक प्रो. आर.के. भुबोन सिंह ने कहा कि यह कार्यक्रम पूर्वोत्तर में जारी जातीय तनाव और पहचान, भूमि, संसाधन, शासन तथा विकास के बीच जटिल संबंधों की पृष्ठभूमि में तैयार किया गया है।</p>
<p data-start="3095" data-end="3393">उन्होंने मणिपुर में जारी हिंसा के संदर्भ में ऐतिहासिक शिकायतों, भूमि और राजनीतिक स्थान को लेकर परस्पर दावों, सामाजिक-आर्थिक असमानताओं, उग्रवाद, शासन संबंधी कमियों और सीमा-पार गतिविधियों को गंभीर अकादमिक अध्ययन की आवश्यकता वाले मुद्दों के रूप में रेखांकित किया।</p>
<p data-start="3395" data-end="3683">प्रो. भुबोन सिंह ने कहा कि जातीय संघर्ष का स्थायी समाधान केवल सुरक्षा-केंद्रित दृष्टिकोण तक सीमित नहीं होना चाहिए। इसके लिए <strong data-start="3519" data-end="3622">शांति निर्माण, मेल-मिलाप, समान विकास, प्रभावी शासन और विभिन्न समुदायों की पहचान व अनुभवों के सम्मान</strong> पर भी ध्यान देना होगा।</p>
<p data-start="3685" data-end="3969">उन्होंने बताया कि छह दिवसीय कार्यक्रम में प्रस्तुत किए जाने वाले शोध-पत्रों को संकलित कर पुस्तक के रूप में प्रकाशित करने की योजना है, ताकि इन अकादमिक चर्चाओं को शोधकर्ताओं और आने वाली पीढ़ियों के लिए संदर्भ सामग्री के रूप में उपलब्ध कराया जा सके।</p>
<h3 data-section-id="10sd0u1" data-start="3971" data-end="4011">भूमि, पहचान और विकास पर व्यापक चर्चा</h3>
<p data-start="4013" data-end="4222">प्रो. एम.सी. अरुणकुमार ने कहा कि <strong data-start="4046" data-end="4082">राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020</strong> में शिक्षकों को शिक्षा प्रक्रिया के केंद्र में रखा गया है और इसलिए शिक्षकों के लिए अपने ज्ञान, कौशल और समझ को लगातार अद्यतन करना आवश्यक है।</p>
<p data-start="4224" data-end="4583">उन्होंने प्रतिभागियों से जातीयता, जातीय संघर्ष, स्वदेशी समुदाय, स्थानीय समुदाय, भूमि अधिकार और विकास जैसे विषयों पर आलोचनात्मक ढंग से विचार करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि अकादमिक संस्थानों की जिम्मेदारी है कि राजनीतिक विमर्श में इस्तेमाल होने वाली अवधारणाओं और प्रमाण-आधारित अकादमिक समझ के बीच अंतर स्पष्ट किया जाए।</p>
<p data-start="4585" data-end="5048">मानवशास्त्र विभाग के प्रमुख प्रो. हाओबिजाम वोकेन्द्रो सिंह ने बताया कि कार्यक्रम में विभिन्न क्षेत्रों के विशेषज्ञों को शामिल किया गया है और उन्हें अपनी विशेषज्ञता के अनुसार व्यापक विषयों के भीतर स्वतंत्र रूप से विषय चुनने का अवसर दिया गया है। कार्यक्रम में भूमि, सीमा सुरक्षा, जनसांख्यिकीय बदलाव, संघवाद, जातीय संबंध, शासन, इतिहास, सांस्कृतिक विरासत और मणिपुर के विभिन्न समुदायों के बीच संबंधों जैसे मुद्दों पर चर्चा होगी।</p>
<h3 data-section-id="1kez3ik" data-start="5050" data-end="5097">छह दिनों में विभिन्न विषयों पर प्रस्तुतियां</h3>
<p data-start="5099" data-end="5398">कार्यक्रम के दौरान विद्वान, विशेषज्ञ, पत्रकार और विभिन्न क्षेत्रों से जुड़े पेशेवर जातीय संघर्ष, विस्थापन, जनसांख्यिकीय बदलाव, भूमि एवं प्राकृतिक संसाधन, सीमा सुरक्षा, शासन, संघवाद, इतिहास, सांस्कृतिक विरासत और शांति निर्माण जैसे विषयों पर प्रस्तुतियां देंगे।</p>
<p data-start="5400" data-end="5705">24 अगस्त को <strong data-start="5412" data-end="5433">डॉ. एल. मुहिंद्रो</strong> आंतरिक रूप से विस्थापित लोगों की स्थिति और जातीय संघर्ष पर प्रस्तुति देंगे, जबकि <strong data-start="5515" data-end="5537">प्रो. रेना लैस्राम</strong> उत्तर-पूर्व भारत में शांति निर्माण में इतिहास की भूमिका पर चर्चा करेंगी। <strong data-start="5611" data-end="5626">डॉ. थ. भारत</strong> संघर्ष और विस्थापन पर प्रस्तुति देंगे।</p>
<p data-start="5707" data-end="6025">25 अगस्त को पत्रकार <strong data-start="5727" data-end="5744">प्रदीप फंजौबम</strong> मणिपुर में जातीय हिंसा के कारणों और परिणामों तथा आगे की राह पर बोलेंगे। इसके अलावा मोरेह और भारत की एक्ट ईस्ट नीति, असममित शक्ति-साझाकरण, तथा संघर्ष की परिस्थितियों में महिलाओं, युवाओं और कमजोर समूहों की भूमिका जैसे विषयों पर भी चर्चा होगी।</p>
<p data-start="6027" data-end="6281">26 अगस्त के सत्रों में अवैध प्रवासन और जनसांख्यिकीय बदलाव, उत्तर-पूर्व भारत में भूमि-संसाधन एवं संपर्क की भू-राजनीति, जल एवं आर्द्रभूमि, पर्यावरणीय न्याय तथा मणिपुर में संघवाद और स्वायत्तता जैसे मुद्दे शामिल होंगे।</p>
<p data-start="6283" data-end="6544">27 अगस्त को उत्तर-पूर्व भारत की रणनीतिक चुनौतियों, मणिपुर संकट और स्थायी सुरक्षा एवं शांति, पहाड़ी और घाटी के जातीय समुदायों की साझा उत्पत्ति, जनसांख्यिकीय बदलाव तथा संघर्ष परिवर्तन और शांति निर्माण पर प्रस्तुतियां होंगी।</p>
<p data-start="6546" data-end="6766">28 अगस्त को मणिपुर की आदिवासी जनजातियों, भारत-म्यांमार संबंधों, सामुदायिक पहचान और सांस्कृतिक विरासत में संग्रहालयों की भूमिका पर चर्चा होगी। कार्यक्रम में MCQ सत्र भी शामिल रहेगा।</p>
<p data-start="6768" data-end="7090">29 अगस्त को लेफ्टिनेंट जनरल (डॉ.) <strong data-start="6802" data-end="6818">कोंसम हिमालय</strong> उत्तर-पूर्व भारत में सीमा क्षेत्र, सुरक्षा और शासन पर प्रस्तुति देंगे। इसके अलावा मणिपुर में शांति निर्माण की चुनौतियों तथा सशस्त्र संघर्ष, छोटे हथियार और मादक पदार्थों की तस्करी जैसे विषयों पर चर्चा के साथ कार्यक्रम का समापन होगा।</p>
<p data-start="7092" data-end="7547">आयोजकों के अनुसार, कार्यक्रम का उद्देश्य मानवशास्त्र, इतिहास, जनसांख्यिकी, अंतरराष्ट्रीय संबंध, सुरक्षा अध्ययन, पर्यावरण अध्ययन, शासन, सांस्कृतिक अध्ययन, पत्रकारिता और शांति निर्माण जैसे विभिन्न क्षेत्रों के दृष्टिकोणों को एक मंच पर लाना है। अकादमिक चर्चाओं और शोध-पत्रों के दस्तावेजीकरण से भविष्य के शोध और मणिपुर तथा पूर्वोत्तर में संघर्ष, मेल-मिलाप और सतत विकास पर informed discourse को बढ़ावा देने की उम्मीद है।</p>]]></content:encoded>
    </item>
    <item>
      <title><![CDATA[मणिपुर यूनिवर्सिटी के 9 छात्र SLEE पहल के तहत जापान में पाएंगे नौकरी]]></title>
      <description><![CDATA[<a href="https://www.mudarpan.in/news/manipur-university-9-students-japan-jobs-slee-initiative"><img alt="मणिपुर यूनिवर्सिटी के 9 छात्र SLEE पहल के तहत जापान में पाएंगे नौकरी" border="0" src="https://www.mudarpan.in/view/aug-2026/manipur-university-students-set-for-jobs-in-japan.jpg"></a><p>मणिपुर यूनिवर्सिटी के 9 पूर्व छात्रों समेत राज्य के 16 युवा SLEE पहल के तहत जापान में रोजगार पाएंगे। छात्रों का चयन टोक्यो, होक्काइडो और ओकिनावा में हुआ है।</p>]]></description>
      <link><![CDATA[https://www.mudarpan.in/news/manipur-university-9-students-japan-jobs-slee-initiative]]></link>
      <pubDate>Fri, 21 Aug 2026 10:58:52 GMT</pubDate>
      <guid isPermaLink="true">https://www.mudarpan.in/news/manipur-university-9-students-japan-jobs-slee-initiative</guid>
      <dc:creator><![CDATA[Naorem Mohen]]></dc:creator>
      <category><![CDATA[मणपर यनवरसट]]></category>
      <category><![CDATA[जपन म नकर]]></category>
      <category><![CDATA[मणपर क छतर]]></category>
      <category><![CDATA[SLEE पहल]]></category>
      <category><![CDATA[State Livelihood Empowerment and Entrepreneurship]]></category>
      <category><![CDATA[मणपर जपन रजगर]]></category>
      <category><![CDATA[कशल वकस]]></category>
      <category><![CDATA[वदश म रजगर]]></category>
      <category><![CDATA[जपन रजगर अवसर]]></category>
      <category><![CDATA[DVSSD मणपर यनवरसट]]></category>
      <category><![CDATA[NSDC]]></category>
      <category><![CDATA[SBI]]></category>
      <category><![CDATA[टकय हटल एड रसरटस]]></category>
      <category><![CDATA[मणपर समचर]]></category>
      <category><![CDATA[मणपर यनवरसट समचर]]></category>
      <category><![CDATA[यव रजगर]]></category>
      <category><![CDATA[वयवसयक शकष]]></category>
      <category><![CDATA[कशल आधरत शकष]]></category>
      <category><![CDATA[वशव उदयमत दवस 2026]]></category>
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      <content:encoded><![CDATA[<p><img src="https://www.mudarpan.in/view/aug-2026/manipur-university-students-set-for-jobs-in-japan.jpg">&nbsp;</p>
<p class="isSelectedEnd"><strong>इंफाल, 21 अगस्त 2026:</strong> मणिपुर यूनिवर्सिटी के नौ छात्रों समेत राज्य के <strong>16 युवा जापान में रोजगार</strong> हासिल करने जा रहे हैं। यह अवसर राज्य सरकार की <strong>स्टेट लाइवलीहुड एम्पावरमेंट एंड एंटरप्रेन्योरशिप (SLEE)</strong> पहल के तहत मिला है। यह पहल मणिपुर में कौशल आधारित शिक्षा को अंतरराष्ट्रीय रोजगार के अवसरों से जोड़ने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।</p>
<p class="isSelectedEnd">मुख्यमंत्री <strong>युमनाम खेमचंद सिंह</strong> ने शुक्रवार को इंफाल स्थित मुख्यमंत्री आवास में आयोजित कार्यक्रम में जापान जाने वाले 16 उम्मीदवारों को रवाना किया। कार्यक्रम में मणिपुर यूनिवर्सिटी के कार्यवाहक कुलपति <strong>प्रो. आर.के. हेमाकुमार सिंह</strong> के साथ राज्य सरकार, भारतीय स्टेट बैंक (SBI), नेशनल स्किल डेवलपमेंट कॉरपोरेशन (NSDC) और मणिपुर यूनिवर्सिटी के प्रतिनिधि मौजूद रहे।</p>
<p class="isSelectedEnd">राज्य के 16 चयनित उम्मीदवारों में से <strong>नौ मणिपुर यूनिवर्सिटी के पूर्व छात्र</strong> हैं, जो विश्वविद्यालय के डिपार्टमेंट ऑफ वोकेशनल स्टडीज एंड स्किल डेवलपमेंट (DVSSD) से जुड़े रहे हैं। इनमें <strong>मुतुम लेशिलेंबी चानू, हेसलीन मैसम, धनप्रिया तेंसुबम, येंगखोम रोहित सिंह, टिमोथी डाइम, अरिबाम तेजेशोरी, नोंगमैथेम बिद्यालक्ष्मी, अंगोम अंजू चानू और निंगथौजम डाइना</strong> शामिल हैं।</p>
<p class="isSelectedEnd">इन नौ युवाओं को जापान की <strong>Tokyu Hotel &amp; Resorts Co., Ltd.</strong> में रोजगार मिला है। इससे मणिपुर यूनिवर्सिटी में व्यावसायिक एवं कौशल आधारित शिक्षा और अंतरराष्ट्रीय रोजगार बाजार के बीच बढ़ते जुड़ाव का पता चलता है।</p>
<p class="isSelectedEnd">मुख्यमंत्री खेमचंद ने जापान जाने वाले उम्मीदवारों को संबोधित करते हुए उनसे अपनी जड़ों से जुड़े रहने और विदेश में करियर बनाते हुए मणिपुरी पहचान पर गर्व करने का आग्रह किया।</p>
<p class="isSelectedEnd">सांस्कृतिक विरासत से जुड़े रहने के प्रतीक के रूप में मुख्यमंत्री ने प्रत्येक उम्मीदवार को मणिपुर के पारंपरिक स्वदेशी वाद्य यंत्र <strong>पेना</strong> की प्रतिकृति भेंट की। उन्होंने कहा कि युवा जापान में एक नई संस्कृति, परंपरा और विकसित तकनीकी वातावरण का अनुभव करेंगे, लेकिन उन्हें मणिपुर और अपनी सांस्कृतिक पहचान से अपना संबंध कभी नहीं तोड़ना चाहिए।</p>
<p class="isSelectedEnd">मुख्यमंत्री ने सिंगापुर का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां लोग अपनी राष्ट्रीय पहचान पर गर्व करते हैं। उन्होंने मणिपुर में कुछ लोगों द्वारा अपनी पहचान बताने में झिझक पर चिंता जताई और युवाओं से अपनी पहचान को आत्मविश्वास के साथ आगे ले जाने का आह्वान किया।</p>
<h3>युवाओं को बदलती कौशल जरूरतों के अनुरूप तैयार होने की सलाह</h3>
<p class="isSelectedEnd">मणिपुर यूनिवर्सिटी के कुलपति <strong>प्रो. आर.के. हेमाकुमार सिंह</strong> ने छात्रों और युवाओं से कौशल, तकनीक, उद्यमिता और रोजगार के क्षेत्र में बदलते रुझानों के साथ कदम मिलाकर चलने का आग्रह किया।</p>
<p class="isSelectedEnd">उन्होंने प्रासंगिक कौशल हासिल करने, बदलती पेशेवर आवश्यकताओं के अनुरूप खुद को ढालने और राज्य तथा देश से बाहर उपलब्ध रोजगार अवसरों के लिए खुले रहने के महत्व पर जोर दिया।</p>
<p class="isSelectedEnd">उन्होंने युवाओं को व्यापक पेशेवर अनुभव हासिल करने के साथ-साथ अपनी जड़ों और सांस्कृतिक मूल्यों से जुड़े रहने के लिए भी प्रेरित किया।</p>
<p class="isSelectedEnd">जापान के ओकिनावा स्थित <strong>Miyakojima Tokyu Hotel and Resort</strong> में रोजगार पाने वाली <strong>धनप्रिया तेंसुबम</strong> ने अवसर उपलब्ध कराने के लिए मुख्यमंत्री और इससे जुड़े संस्थानों के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि वह जापान में अपनी पेशेवर जिम्मेदारियों को पूरी निष्ठा से निभाते हुए अपनी मणिपुरी जड़ों पर गर्व बनाए रखेंगी।</p>
<h3>SBI और SLEE के बीच समझौता</h3>
<p class="isSelectedEnd">कार्यक्रम का एक महत्वपूर्ण हिस्सा <strong>भारतीय स्टेट बैंक (SBI) और SLEE के बीच समझौता ज्ञापन (MoU)</strong> पर हस्ताक्षर रहा। इसका उद्देश्य विदेश में कौशल विकास और रोजगार के अवसर तलाशने वाले उम्मीदवारों को वित्तीय सहायता उपलब्ध कराना है।</p>
<p class="isSelectedEnd">पहल के तहत जापानी भाषा का प्रशिक्षण ले रहे पांच उम्मीदवारों को SBI से <strong>स्किल लोन</strong> भी मिला है। इनमें <strong>दीपा नोंगमैथेम, युमनाम लिंथोइंगांबी देवी, होंगशा मोइतुंगशेल, चुइंगामला शिंगलाई और होनलेफी काशुंग</strong> शामिल हैं।</p>
<p class="isSelectedEnd">चयनित उम्मीदवारों ने <strong>NSDC International Academy</strong> में जापानी भाषा का प्रशिक्षण लिया है और जापान के विभिन्न हिस्सों में रोजगार हासिल किया है। इनमें टोक्यो, होक्काइडो और ओकिनावा शामिल हैं। अधिकांश रोजगार अवसर स्वास्थ्य सेवा और हॉस्पिटैलिटी क्षेत्रों में हैं।</p>
<p class="isSelectedEnd">जापान के लिए अगस्त और सितंबर 2026 में रवाना होने वाले उम्मीदवार मणिपुर के विभिन्न जिलों, जिनमें इंफाल ईस्ट, इंफाल वेस्ट, काकचिंग और बिष्णुपुर शामिल हैं, से हैं।</p>
<h3>विश्व उद्यमिता दिवस पर रोजगार और उद्यमिता पर जोर</h3>
<p class="isSelectedEnd">जापान में रोजगार के लिए युवाओं की रवानगी के साथ ही मणिपुर यूनिवर्सिटी के <strong>डिपार्टमेंट ऑफ वोकेशनल स्टडीज एंड स्किल डेवलपमेंट (DVSSD)</strong> ने 21 अगस्त को विभाग के ट्रेनिंग हॉल में <strong>विश्व उद्यमिता दिवस 2026</strong> भी मनाया। कार्यक्रम की थीम <strong>&ldquo;सस्टेनेबल इनोवेशन एंड इन्क्लूसिव ग्रोथ के लिए उद्यमिता&rdquo;</strong> थी।</p>
<p class="isSelectedEnd">कार्यक्रम में नवाचार, नेटवर्किंग, सीखने, उद्यम निर्माण और सामाजिक प्रभाव पर चर्चा की गई। छात्रों को पारंपरिक रोजगार से आगे बढ़कर उद्यमिता, व्यावसायिक कौशल और उभरते आर्थिक अवसरों को तलाशने के लिए प्रोत्साहित किया गया।</p>
<p class="isSelectedEnd">DVSSD के प्रमुख <strong>डॉ. नाम्ब्राम अमुलकुमार</strong> ने छात्रों के लिए संबंधित SBI और बैंक ऑफ बड़ौदा से छात्र ऋण की सुविधा उपलब्ध कराने में मणिपुर यूनिवर्सिटी के वित्त अधिकारी के सहयोग का उल्लेख किया। उन्होंने अभिभावकों से भी अपने बच्चों को ऐसे अवसरों का लाभ उठाने के लिए प्रोत्साहित करने का आग्रह किया।</p>
<p class="isSelectedEnd">डॉ. अमुलकुमार ने आम लोगों से विश्वविद्यालय द्वारा संचालित विभिन्न पाठ्यक्रमों का लाभ उठाने की अपील की और कहा कि ये पाठ्यक्रम रोजगारोन्मुख शिक्षा की तलाश कर रहे छात्रों के लिए महत्वपूर्ण अवसर प्रदान करते हैं।</p>
<p class="isSelectedEnd">मणिपुर यूनिवर्सिटी के नौ पूर्व छात्रों का जापान जाने वाले 16 उम्मीदवारों में शामिल होना और इसी अवसर पर विश्व उद्यमिता दिवस का आयोजन विश्वविद्यालय के कौशल विकास, व्यावसायिक शिक्षा, भाषा प्रशिक्षण, उद्यमिता और अंतरराष्ट्रीय अनुभव को जोड़ने के प्रयासों को दर्शाता है।</p>
<p class="isSelectedEnd">कार्यक्रम में राज्य सरकार, मणिपुर यूनिवर्सिटी, SBI और NSDC के प्रतिनिधियों ने भाग लिया। इनमें विधायक <strong>ख. जॉयकिशन सिंह</strong>, प्रो. आर.के. हेमाकुमार सिंह, SLEE की सचिव <strong>नोंगमैथेम बंदना देवी</strong>, डॉ. नाम्ब्राम अमुलकुमार, डॉ. एच. जितेनकुमार सिंह, SBI शिलांग के DGM <strong>एजाज अहमद</strong>, SBI के क्षेत्रीय प्रबंधक एवं AGM <strong>इरेंगबाम प्रियोकुमार सिंह</strong>, डॉ. मेइत्रम उत्तम लुवांग और NSDC की स्टेट एंगेजमेंट ऑफिसर <strong>मासोतमी जिमिक</strong> शामिल रहे।</p>
<p>यह पहल मणिपुर के युवाओं को बदलते वैश्विक रोजगार बाजार के लिए तैयार करने और उच्च शिक्षा को कौशल, उद्यमिता तथा अंतरराष्ट्रीय रोजगार अवसरों से जोड़ने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।</p>]]></content:encoded>
    </item>
    <item>
      <title><![CDATA[पूर्वोत्तर- दक्षिण पूर्व एशिया आर्थिक संबंधों में सांस्कृतिक जुड़ाव जरूरी: डॉ. आरके रंजन सिंह]]></title>
      <description><![CDATA[<a href="https://www.mudarpan.in/news/northeast-southeast-asia-economic-linkages-cultural-ties-rk-ranjan-singh"><img alt="पूर्वोत्तर- दक्षिण पूर्व एशिया आर्थिक संबंधों में सांस्कृतिक जुड़ाव जरूरी: डॉ. आरके रंजन सिंह" border="0" src="https://www.mudarpan.in/view/aug-2026/two-day-seminar-fostering-economic-linkages-between-north-east-india-and-south-east-asia.jpg"></a><p>मणिपुर यूनिवर्सिटी में आयोजित अंतरराष्ट्रीय सेमिनार में डॉ. आरके रंजन सिंह ने पूर्वोत्तर और दक्षिण पूर्व एशिया के बीच आर्थिक संबंध मजबूत करने में सांस्कृतिक जुड़ाव की भूमिका पर जोर दिया।</p>]]></description>
      <link><![CDATA[https://www.mudarpan.in/news/northeast-southeast-asia-economic-linkages-cultural-ties-rk-ranjan-singh]]></link>
      <pubDate>Fri, 21 Aug 2026 10:55:43 GMT</pubDate>
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      <dc:creator><![CDATA[Naorem Mohen]]></dc:creator>
      <category><![CDATA[मणपर यनवरसट]]></category>
      <category><![CDATA[ड आरक रजन सह]]></category>
      <category><![CDATA[परवततर भरत]]></category>
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      <category><![CDATA[ससकतक सबध]]></category>
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      <category><![CDATA[परवततर आरथक वकस]]></category>
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      <content:encoded><![CDATA[<p><img src="https://www.mudarpan.in/view/aug-2026/two-day-seminar-fostering-economic-linkages-between-north-east-india-and-south-east-asia.jpg">&nbsp;</p>
<p class="isSelectedEnd"><strong>इंफाल, 20 अगस्त 2026:</strong> भारत के दक्षिण पूर्व एशिया के साथ संबंधों में <strong>पूर्वोत्तर भारत को केंद्र में रखा जाना चाहिए</strong> और साझा धार्मिक एवं सांस्कृतिक परंपराओं को मजबूत आर्थिक सहयोग की नींव बनाया जाना चाहिए। यह बात मणिपुर यूनिवर्सिटी में आयोजित एक अंतरराष्ट्रीय सेमिनार में वक्ताओं ने कही।</p>
<p class="isSelectedEnd"><strong>&ldquo;धार्मिक और सांस्कृतिक संबंधों के माध्यम से पूर्वोत्तर भारत और दक्षिण पूर्व एशिया के बीच आर्थिक संबंधों को बढ़ावा देना&rdquo;</strong> विषय पर आयोजित दो दिवसीय सेमिनार को पूर्वोत्तर क्षेत्र विकास मंत्रालय (MDoNER), भारत सरकार के अधीन नॉर्थ ईस्टर्न काउंसिल, शिलांग द्वारा प्रायोजित किया गया है।</p>
<p class="isSelectedEnd">सेमिनार का संयुक्त आयोजन मणिपुर यूनिवर्सिटी के <strong>अर्थशास्त्र विभाग</strong>, कॉलेज डेवलपमेंट काउंसिल और इंटेलेक्चुअल फोरम ऑफ नॉर्थ ईस्ट&ndash;मणिपुर द्वारा किया गया। कार्यक्रम की शुरुआत मणिपुर यूनिवर्सिटी के आधिकारिक एंथम और राज्य गीत से हुई।</p>
<p class="isSelectedEnd">उद्घाटन समारोह में पूर्व केंद्रीय विदेश राज्य मंत्री एवं शिक्षा राज्य मंत्री <strong>डॉ. राजकुमार रंजन सिंह</strong>, मणिपुर यूनिवर्सिटी के कार्यवाहक कुलपति <strong>प्रो. आर.के. हेमाकुमार सिंह</strong> और हिमाचल प्रदेश केंद्रीय विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति <strong>प्रो. कुलदीप चंद अग्निहोत्री</strong> सहित कई प्रमुख शिक्षाविद, पूर्व नीति निर्माता, प्रशासक, शोधकर्ता और सांस्कृतिक विशेषज्ञ शामिल हुए।</p>
<p class="isSelectedEnd">स्कूल ऑफ सोशल साइंसेज की डीन <strong>प्रो. मेमचा लोइतोंगबाम</strong> तथा आयोजन समिति के अध्यक्ष और अर्थशास्त्र विभागाध्यक्ष <strong>प्रो. दामोदर नेप्राम</strong> भी उद्घाटन समारोह में मौजूद रहे।</p>
<h3>पूर्वोत्तर से आगे बढ़नी चाहिए एक्ट ईस्ट नीति</h3>
<p class="isSelectedEnd">मुख्य वक्ता के रूप में संबोधित करते हुए पूर्व केंद्रीय राज्य मंत्री <strong>डॉ. राजकुमार रंजन सिंह</strong> ने कहा कि भारत की <strong>एक्ट ईस्ट नीति</strong> दिल्ली से तैयार होकर पूर्वोत्तर तक पहुंचने वाली नीति नहीं होनी चाहिए, बल्कि इसकी दिशा पूर्वोत्तर से दक्षिण पूर्व एशिया की ओर होनी चाहिए।</p>
<p class="isSelectedEnd">उन्होंने कहा कि भारत की एक्ट ईस्ट नीति तभी सफल हो सकती है जब पूर्वोत्तर क्षेत्र उसकी नीति निर्माण प्रक्रिया का सक्रिय केंद्र बने।</p>
<p class="isSelectedEnd">डॉ. रंजन सिंह ने <strong>मोरेह-तामू सीमा</strong> को एक ही सांस्कृतिक निरंतरता के दो हिस्सों के बीच महत्वपूर्ण संपर्क बिंदु बताया। उन्होंने कहा कि आर्थिक संपर्क केवल व्यापार के आंकड़ों और परिवहन गलियारों के आधार पर विकसित नहीं किया जा सकता।</p>
<p class="isSelectedEnd">इसके लिए बौद्ध धर्म, वैष्णव धर्म, सनामाही परंपरा, मौखिक महाकाव्यों, वस्त्र परंपराओं तथा सदियों से चले आ रहे प्रवास और वैवाहिक संबंधों जैसी साझा सांस्कृतिक विरासत को आधार बनाना होगा।</p>
<p class="isSelectedEnd">उन्होंने यह भी कहा कि पूर्वोत्तर में शांति और जातीय सद्भाव किसी भी सार्थक क्षेत्रीय एकीकरण के लिए आवश्यक हैं।</p>
<h3>सांस्कृतिक संबंधों से आर्थिक अवसर बढ़ेंगे: कुलपति</h3>
<p class="isSelectedEnd">मणिपुर यूनिवर्सिटी के कार्यवाहक कुलपति <strong>प्रो. आर.के. हेमाकुमार सिंह</strong> ने कहा कि भारत और दक्षिण पूर्व एशिया के बीच धार्मिक एवं सांस्कृतिक केंद्र के रूप में पूर्वोत्तर की क्षमता का अभी पूरी तरह उपयोग नहीं हुआ है।</p>
<p class="isSelectedEnd">उन्होंने कहा कि मजबूत सांस्कृतिक संबंध आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा दे सकते हैं तथा तीर्थाटन और विरासत पर्यटन को प्रोत्साहित करने के साथ-साथ बुनियादी ढांचे में निवेश और प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर पैदा कर सकते हैं।</p>
<p class="isSelectedEnd">उन्होंने कहा कि हथकरघा, हस्तशिल्प, कृषि उत्पाद, आतिथ्य और परिवहन जैसे क्षेत्र स्थानीय उत्पादकों को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय बाजारों से जोड़कर विशेष रूप से लाभान्वित हो सकते हैं।</p>
<p class="isSelectedEnd">प्रो. हेमाकुमार ने उम्मीद जताई कि यह सेमिनार मणिपुर यूनिवर्सिटी को भारत, म्यांमार और दक्षिण पूर्व एशिया के बीच <strong>ज्ञान केंद्र और अकादमिक सेतु</strong> के रूप में स्थापित करने में मदद करेगा।</p>
<h3>ऐतिहासिक सांस्कृतिक और तीर्थ सर्किट पुनर्जीवित करने का सुझाव</h3>
<p class="isSelectedEnd">विशिष्ट अतिथि <strong>प्रो. कुलदीप चंद अग्निहोत्री</strong>, जो हरियाणा साहित्य एवं संस्कृति अकादमी के कार्यकारी उपाध्यक्ष और हिमाचल प्रदेश केंद्रीय विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति हैं, ने पूर्वोत्तर भारत को भारत और दक्षिण पूर्व एशिया के बीच ऐतिहासिक संपर्क का महत्वपूर्ण द्वार बताया।</p>
<p class="isSelectedEnd">उन्होंने कहा कि <strong>मोरेह मार्ग</strong> कभी भारत को व्यापक दक्षिण पूर्व एशियाई क्षेत्र से जोड़ता था। उन्होंने म्यांमार, थाईलैंड और कंबोडिया के बीच सांस्कृतिक एवं तीर्थ सर्किट को पुनर्जीवित करने का सुझाव दिया।</p>
<p class="isSelectedEnd">उन्होंने मोरेह को <strong>अंगकोर वाट</strong> से जोड़ने तथा मणिपुर के <strong>कैनना</strong> को वृंदावन से जोड़ने वाले सांस्कृतिक मार्ग विकसित करने का प्रस्ताव रखा।</p>
<p class="isSelectedEnd">प्रो. अग्निहोत्री ने कहा कि मणिपुर यूनिवर्सिटी अपनी रणनीतिक स्थिति के कारण क्षेत्र के बौद्धिक और सांस्कृतिक सेतु को फिर से मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।</p>
<h3>जन-केंद्रित क्षेत्रीय एकीकरण पर जोर</h3>
<p class="isSelectedEnd">स्कूल ऑफ सोशल साइंसेज की डीन <strong>प्रो. मेमचा लोइतोंगबाम</strong> ने कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए लोगों को केंद्र में रखकर क्षेत्रीय एकीकरण की आवश्यकता पर जोर दिया।</p>
<p class="isSelectedEnd">उन्होंने कारीगरों, उद्यमियों, महिला-नेतृत्व वाले व्यवसायों, युवा नवप्रवर्तकों और सांस्कृतिक संस्थानों को क्षेत्रीय आर्थिक एवं सांस्कृतिक जुड़ाव की प्रक्रिया में शामिल करने की आवश्यकता बताई।</p>
<p class="isSelectedEnd">अर्थशास्त्र विभागाध्यक्ष <strong>प्रो. दामोदर नेप्राम</strong> ने स्वागत भाषण दिया। कॉलेज डेवलपमेंट काउंसिल के निदेशक और सह-संयोजक <strong>प्रो. हंजाबम शुखदेबा शर्मा</strong> ने धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत किया।</p>
<p class="isSelectedEnd">सेमिनार के संयोजक <strong>प्रो. हंजाबम इस्वोरचंद्र शर्मा</strong> हैं, जबकि <strong>प्रो. सौग्रकपम धर्मेन सिंह</strong> सह-संयोजकों में शामिल हैं।</p>
<p class="isSelectedEnd">उद्घाटन समारोह का समापन <strong>वंदे मातरम्</strong> और राष्ट्रगान के साथ हुआ।</p>
<p>सेमिनार में शिक्षाविदों, शोधकर्ताओं और छात्रों ने भी भाग लिया। अकादमिक सत्रों में सुनील मोहंती, ख्वैराकपम राजेन सिंह, प्रो. एम.सी. अरुण कुमार, सोरोखैबम मंगलमजाओ सिंह, डॉ. नोंगथोंबम जितेन, डॉ. याइफाबा निंगथौजम, वांगम सोमोरजीत, डॉ. अनुराधा ओइनाम, प्रो. एल. सूरज सिंह, डॉ. थियाम भारत सिंह, थांगजाम अनिल, डॉ. एटम सुनील सिंह और डॉ. श्रीदा चोंगथाम सहित कई विशेषज्ञों ने विचार-विमर्श किया।</p>]]></content:encoded>
    </item>
    <item>
      <title><![CDATA[मणिपुर यूनिवर्सिटी में विकसित भारत युवा नेता संवाद 2026, 100 से अधिक छात्रों ने कराया पंजीकरण]]></title>
      <description><![CDATA[<a href="https://www.mudarpan.in/news/manipur-university-viksit-bharat-young-leaders-dialogue-2026"><img alt="मणिपुर यूनिवर्सिटी में विकसित भारत युवा नेता संवाद 2026, 100 से अधिक छात्रों ने कराया पंजीकरण" border="0" src="https://www.mudarpan.in/view/aug-2026/viksit-bharat-young-leaders-dialogue-2026-at-manipur-university.jpg"></a><p>मणिपुर यूनिवर्सिटी में विकसित भारत युवा नेता संवाद 2026 का आयोजन हुआ, जिसमें 100 से अधिक छात्रों ने पंजीकरण कराया। कार्यक्रम में युवा नेतृत्व और राष्ट्र निर्माण पर चर्चा हुई।</p>]]></description>
      <link><![CDATA[https://www.mudarpan.in/news/manipur-university-viksit-bharat-young-leaders-dialogue-2026]]></link>
      <pubDate>Fri, 21 Aug 2026 10:52:44 GMT</pubDate>
      <guid isPermaLink="true">https://www.mudarpan.in/news/manipur-university-viksit-bharat-young-leaders-dialogue-2026</guid>
      <dc:creator><![CDATA[Naorem Mohen]]></dc:creator>
      <category><![CDATA[मणपर यनवरसट]]></category>
      <category><![CDATA[वकसत भरत यव नत सवद 2026]]></category>
      <category><![CDATA[Viksit Bharat Young Leaders Dialogue 2026]]></category>
      <category><![CDATA[यव नत सवद]]></category>
      <category><![CDATA[वकसत भरत 2047]]></category>
      <category><![CDATA[यव नततव]]></category>
      <category><![CDATA[यव सशकतकरण]]></category>
      <category><![CDATA[MY Bharat]]></category>
      <category><![CDATA[NSS सल मणपर यनवरसट]]></category>
      <category><![CDATA[यव ममल एव खल मतरलय]]></category>
      <category><![CDATA[मणपर समचर]]></category>
      <category><![CDATA[मणपर यनवरसट समचर]]></category>
      <category><![CDATA[यव परफशनल रउडटबल]]></category>
      <category><![CDATA[रषटर नरमण]]></category>
      <category><![CDATA[छतर सवद]]></category>
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      <content:encoded><![CDATA[<p><img src="https://www.mudarpan.in/view/aug-2026/viksit-bharat-young-leaders-dialogue-2026-at-manipur-university.jpg">&nbsp;</p>
<p class="isSelectedEnd"><strong>इंफाल, 20 अगस्त 2026:</strong> मणिपुर यूनिवर्सिटी में <strong>विकसित भारत यंग लीडर्स डायलॉग 2026 &ndash; यंग प्रोफेशनल राउंडटेबल</strong> के लिए 100 से अधिक छात्रों ने पंजीकरण कराया। कार्यक्रम का आयोजन मणिपुर यूनिवर्सिटी के एनएसएस सेल और MY Bharat, इंफाल पश्चिम जिला के संयुक्त तत्वावधान में डिपार्टमेंट ऑफ अर्थ साइंसेज के सीनेट हॉल में किया गया।</p>
<p class="isSelectedEnd">युवा मामले एवं खेल मंत्रालय, भारत सरकार के तत्वावधान में आयोजित कार्यक्रम का उद्देश्य युवाओं में नेतृत्व क्षमता, नागरिक जिम्मेदारी और राष्ट्र निर्माण में सक्रिय भागीदारी को बढ़ावा देना तथा <strong>विकसित भारत 2047</strong> के विजन में उनके योगदान को प्रोत्साहित करना था।</p>
<p class="isSelectedEnd">कार्यक्रम की शुरुआत आधिकारिक एनएसएस गीत के बाद <strong>वंदे मातरम्</strong> और राष्ट्रगान से हुई।</p>
<p class="isSelectedEnd">मणिपुर यूनिवर्सिटी के कार्यवाहक कुलपति <strong>प्रो. आर.के. हेमाकुमार सिंह</strong> उद्घाटन सत्र में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। MY Bharat मणिपुर की राज्य निदेशक <strong>डब्ल्यू. पॉलिना मोनसांग</strong> ने कार्यक्रम की अध्यक्षता की। विश्वविद्यालय के रजिस्ट्रार <strong>प्रो. एम. प्रेमजीत सिंह</strong> और एनएसएस सेल के कार्यक्रम समन्वयक <strong>प्रो. एल. संतोष सिंह</strong> विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित रहे।</p>
<p class="isSelectedEnd">प्रतिभागियों को संबोधित करते हुए प्रो. आर.के. हेमाकुमार सिंह ने कहा कि इस तरह के कार्यक्रम का वास्तविक महत्व केवल पुरस्कार जीतने या पहचान हासिल करने में नहीं है, बल्कि ज्ञान प्राप्त करने, मूल्यों को विकसित करने और जीवन के विभिन्न चरणों में आने वाली चुनौतियों का सामना करना सीखने में है।</p>
<p class="isSelectedEnd">उन्होंने युवा प्रतिभागियों से विशेषज्ञ पैनलिस्टों के अनुभव और विचारों का अधिकतम लाभ उठाने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि सार्थक संवाद केवल सवाल पूछने तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि इससे प्रतिभागियों को मुद्दों को गहराई से समझने और कार्यक्रम से अधिक ज्ञान एवं संतुष्टि के साथ लौटने का अवसर मिलना चाहिए।</p>
<p class="isSelectedEnd">रजिस्ट्रार प्रो. एम. प्रेमजीत सिंह ने युवाओं की बदलती भूमिका पर प्रकाश डालते हुए कहा कि <strong>&ldquo;युवा कल के नेता हैं&rdquo;</strong> जैसी पारंपरिक धारणा अब पर्याप्त नहीं है। जलवायु परिवर्तन, सामाजिक अन्याय और अन्य समकालीन चुनौतियों के दौर में युवाओं को आज से ही जिम्मेदारी संभालनी होगी।</p>
<p class="isSelectedEnd">उन्होंने कहा कि डिजिटल युग में युवा दुनिया के किसी भी हिस्से में होने वाली घटनाओं और अन्याय के बारे में बहुत कम समय में जागरूकता फैला सकते हैं। इसलिए उन्हें अपनी क्षमता का जिम्मेदारीपूर्वक इस्तेमाल करना चाहिए।</p>
<p class="isSelectedEnd">प्रो. प्रेमजीत ने नेतृत्व की अवधारणा पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि नेतृत्व का अर्थ दूसरों पर किसी व्यक्ति के विचार थोपना नहीं है। एक सफल नेता को विभिन्न विचारों को सुनना चाहिए, लोगों को अपनी राय व्यक्त करने का अवसर देना चाहिए और सभी दृष्टिकोणों को साथ लेकर सर्वोत्तम निर्णय तक पहुंचना चाहिए।</p>
<p class="isSelectedEnd">अध्यक्षीय संबोधन में MY Bharat मणिपुर की राज्य निदेशक डब्ल्यू. पॉलिना मोनसांग ने प्रतिभागियों से पुरस्कार और प्रतियोगिता से आगे बढ़कर ज्ञान, चरित्र और चुनौतियों का सामना करने की क्षमता के महत्व को समझने का आग्रह किया।</p>
<p class="isSelectedEnd">उन्होंने कहा कि मणिपुर और देश के सामने मौजूद जटिल सामाजिक चुनौतियों के समय युवा नेताओं को प्रोत्साहित करना बेहद जरूरी है। उन्होंने छात्रों से संवाद में सक्रिय रूप से भाग लेने, सवाल पूछने और विशेषज्ञों के साथ बातचीत के माध्यम से अपनी समझ विकसित करने का आह्वान किया।</p>
<p class="isSelectedEnd">इससे पहले प्रतिभागियों और अतिथियों का स्वागत करते हुए एनएसएस सेल के कार्यक्रम समन्वयक <strong>प्रो. एल. संतोष सिंह</strong> ने बताया कि विकसित भारत यंग लीडर्स डायलॉग और यंग प्रोफेशनल राउंडटेबल की शुरुआत युवा मामले एवं खेल मंत्रालय द्वारा भारत के युवाओं को संगठित करने, उनमें मूल्यों को बढ़ावा देने और राष्ट्र निर्माण में उनकी सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करने के उद्देश्य से की गई है।</p>
<p class="isSelectedEnd">उन्होंने कहा कि कार्यक्रम का उद्देश्य युवा नागरिकों को 2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य को साकार करने में सार्थक योगदान देने के लिए प्रेरित करना है।</p>
<p class="isSelectedEnd">कार्यक्रम में <strong>Dr Sapam Dilipkumar Singh</strong>, सहायक प्रोफेसर, विधि विभाग, मणिपुर यूनिवर्सिटी और <strong>Prof Nameirakpam Bijen Meetei</strong>, पूर्व विभागाध्यक्ष, राजनीति विज्ञान विभाग, मणिपुर यूनिवर्सिटी ने पैनलिस्ट के रूप में हिस्सा लिया।</p>
<p class="isSelectedEnd">पैनल चर्चा के दौरान विशेषज्ञों ने युवाओं के साथ नेतृत्व, लोकतांत्रिक भागीदारी, सार्वजनिक जिम्मेदारी और समकालीन चुनौतियों से निपटने में युवाओं की भूमिका पर विचार-विमर्श किया। छात्रों को अपने विचार व्यक्त करने, सवाल पूछने और रचनात्मक संवाद में भाग लेने के लिए प्रोत्साहित किया गया।</p>
<p>कार्यक्रम में उद्घाटन सत्र, युवा संवाद, राउंडटेबल चर्चा और प्रतिभागियों को प्रमाणपत्र वितरण शामिल रहा। कार्यक्रम का समापन समापन संबोधन और धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ।</p>]]></content:encoded>
    </item>
    <item>
      <title><![CDATA[मणिपुर यूनिवर्सिटी में देशभक्ति के साथ मनाया गया 80वां स्वतंत्रता दिवस]]></title>
      <description><![CDATA[<a href="https://www.mudarpan.in/news/manipur-university-celebrates-80th-independence-day"><img alt="मणिपुर यूनिवर्सिटी में देशभक्ति के साथ मनाया गया 80वां स्वतंत्रता दिवस" border="0" src="https://www.mudarpan.in/view/aug-2026/mu-independence-day.jpg"></a><p>मणिपुर यूनिवर्सिटी के कैंचीपुर परिसर में 80वां स्वतंत्रता दिवस देशभक्ति के साथ मनाया गया। विश्वविद्यालय ने राष्ट्रीय एकता, प्रगति और राष्ट्र निर्माण के प्रति प्रतिबद्धता दोहराई।</p>]]></description>
      <link><![CDATA[https://www.mudarpan.in/news/manipur-university-celebrates-80th-independence-day]]></link>
      <pubDate>Fri, 21 Aug 2026 10:44:15 GMT</pubDate>
      <guid isPermaLink="true">https://www.mudarpan.in/news/manipur-university-celebrates-80th-independence-day</guid>
      <dc:creator><![CDATA[Naorem Mohen]]></dc:creator>
      <category><![CDATA[मणपर यनवरसट]]></category>
      <category><![CDATA[80व सवततरत दवस]]></category>
      <category><![CDATA[सवततरत दवस 2026]]></category>
      <category><![CDATA[मणपर यनवरसट सवततरत दवस]]></category>
      <category><![CDATA[कचपर]]></category>
      <category><![CDATA[मणपर समचर]]></category>
      <category><![CDATA[सवततरत दवस समरह]]></category>
      <category><![CDATA[रषटरय एकत]]></category>
      <category><![CDATA[रषटर नरमण]]></category>
      <category><![CDATA[तरग]]></category>
      <category><![CDATA[मणपर यनवरसट समचर]]></category>
      <category><![CDATA[पर आरक हमकमर सह]]></category>
      <category><![CDATA[पर एम परमजत सह]]></category>
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      <content:encoded><![CDATA[<p><img src="https://www.mudarpan.in/view/aug-2026/mu-independence-day.jpg">&nbsp;</p>
<p class="isSelectedEnd"><strong>इंफाल, 15 अगस्त 2026:</strong> मणिपुर यूनिवर्सिटी के कैंचीपुर परिसर में शनिवार को भारत का <strong>80वां स्वतंत्रता दिवस</strong> देशभक्ति और उत्साह के साथ मनाया गया। इस अवसर पर विश्वविद्यालय समुदाय ने राष्ट्रीय एकता, प्रगति और शिक्षा के माध्यम से राष्ट्र निर्माण के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई।</p>
<p class="isSelectedEnd">मणिपुर यूनिवर्सिटी के कार्यवाहक कुलपति <strong>प्रो. आर.के. हेमाकुमार सिंह</strong> ने स्वतंत्रता दिवस समारोह का नेतृत्व किया। रजिस्ट्रार <strong>प्रो. एम. प्रेमजीत सिंह</strong> भी कार्यक्रम में उपस्थित रहे।</p>
<p class="isSelectedEnd">इस अवसर पर स्कूल ऑफ इंजीनियरिंग के डीन <strong>प्रो. एन. बसंत सिंह</strong>, स्कूल ऑफ लाइफ साइंसेज के डीन <strong>प्रो. एन. मोहिलाल मेइतेई</strong>, डीन ऑफ स्टूडेंट्स वेलफेयर <strong>प्रो. च. इबोहाल सिंह</strong>, रसायन विज्ञान विभाग के पूर्व विभागाध्यक्ष <strong>प्रो. नोंगमैथेम राजेन सिंह</strong> और सुरक्षा अधिकारी <strong>डॉ. वाई. शांतकुमार सिंह</strong> सहित विश्वविद्यालय के कई अधिकारी मौजूद रहे।</p>
<p class="isSelectedEnd">विश्वविद्यालय के विभिन्न विभागों के विभागाध्यक्ष, शिक्षक, मणिपुर यूनिवर्सिटी टीचर्स एसोसिएशन के प्रतिनिधि, विश्वविद्यालय अधिकारी, सुरक्षा कर्मी और अन्य कर्मचारी भी समारोह में शामिल हुए।</p>
<p class="isSelectedEnd"><strong>तिरंगा फहराए जाने</strong> के साथ विश्वविद्यालय समुदाय ने स्वतंत्रता, एकता और प्रगति के संवैधानिक मूल्यों के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई। इस दौरान भारत के स्वतंत्रता संग्राम में अपने प्राणों का बलिदान देने वाले वीरों को श्रद्धांजलि भी अर्पित की गई।</p>
<p class="isSelectedEnd">स्वतंत्रता दिवस समारोह में राष्ट्र निर्माण में विश्वविद्यालयों की महत्वपूर्ण भूमिका को रेखांकित किया गया। शिक्षा, शोध, जनसेवा और जागरूक एवं जिम्मेदार नागरिकों के निर्माण के माध्यम से विश्वविद्यालय देश की प्रगति में महत्वपूर्ण योगदान दे सकते हैं।</p>
<p>कार्यक्रम के समापन पर विश्वविद्यालय समुदाय ने राष्ट्रीय ध्वज में निहित मूल्यों को बनाए रखने तथा एक शांतिपूर्ण, समावेशी और प्रगतिशील भारत के निर्माण में योगदान देने का सामूहिक संकल्प लिया।</p>
<p>&nbsp; &nbsp;&nbsp;</p>]]></content:encoded>
    </item>
    <item>
      <title><![CDATA[मणिपुर यूनिवर्सिटी में विकसित भारत युवा कनेक्ट फेज-2 का आयोजन]]></title>
      <description><![CDATA[<a href="https://www.mudarpan.in/news/manipur-university-viksit-bharat-yuva-connect-phase-2"><img alt="मणिपुर यूनिवर्सिटी में विकसित भारत युवा कनेक्ट फेज-2 का आयोजन" border="0" src="https://www.mudarpan.in/view/aug-2026/viksit-bharat-yuva-connect-phase-2-held-at-manipur-university.jpg"></a><p>मणिपुर यूनिवर्सिटी में विकसित भारत युवा कनेक्ट फेज-2 का आयोजन हुआ। युवाओं को विकसित भारत 2047, जिम्मेदार नागरिकता और नशामुक्त समाज के लिए प्रेरित किया गया।</p>]]></description>
      <link><![CDATA[https://www.mudarpan.in/news/manipur-university-viksit-bharat-yuva-connect-phase-2]]></link>
      <pubDate>Fri, 21 Aug 2026 10:39:01 GMT</pubDate>
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      <dc:creator><![CDATA[Naorem Mohen]]></dc:creator>
      <category><![CDATA[मणपर यनवरसट]]></category>
      <category><![CDATA[वकसत भरत यव कनकट]]></category>
      <category><![CDATA[वकसत भरत यव कनकट फज2]]></category>
      <category><![CDATA[वकसत भरत 2047]]></category>
      <category><![CDATA[NSS मणपर यनवरसट]]></category>
      <category><![CDATA[रषटरय सव यजन]]></category>
      <category><![CDATA[नशमकत भरत]]></category>
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      <category><![CDATA[MY Bharat]]></category>
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      <content:encoded><![CDATA[<p><img src="https://www.mudarpan.in/view/aug-2026/viksit-bharat-yuva-connect-phase-2-held-at-manipur-university.jpg">&nbsp;</p>
<p class="isSelectedEnd"><strong>इंफाल, 12 अगस्त 2026:</strong> मणिपुर यूनिवर्सिटी के राष्ट्रीय सेवा योजना (NSS) सेल ने युवा मामले एवं खेल मंत्रालय, भारत सरकार के तत्वावधान में 12 अगस्त को कैंचीपुर स्थित विश्वविद्यालय के कोर्ट हॉल में <strong>&lsquo;विकसित भारत युवा कनेक्ट फेज-2&rsquo;</strong> कार्यक्रम का आयोजन किया। कार्यक्रम का उद्देश्य युवाओं को <strong>विकसित भारत 2047</strong> के विजन से जोड़ना तथा उन्हें जिम्मेदार, अनुशासित और सामाजिक रूप से जागरूक नागरिक बनने के लिए प्रेरित करना था। कार्यक्रम में नशामुक्त समाज के निर्माण पर भी जोर दिया गया।</p>
<p class="isSelectedEnd">कार्यक्रम की शुरुआत आधिकारिक एनएसएस गीत के बाद <strong>वंदे मातरम्</strong> और राष्ट्रगान से हुई।</p>
<p class="isSelectedEnd">मणिपुर यूनिवर्सिटी के कार्यवाहक कुलपति <strong>प्रो. आर.के. हेमाकुमार सिंह</strong> कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। डीन ऑफ स्टूडेंट्स वेलफेयर <strong>प्रो. च. इबोहाल सिंह</strong> ने कार्यक्रम की अध्यक्षता की। यूथ आइकन <strong>पिनुबाला लैशराम</strong> और एनएसएस सेल के कार्यक्रम समन्वयक <strong>प्रो. लैशराम संतोष सिंह</strong> विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित रहे।</p>
<p class="isSelectedEnd">कार्यक्रम में करीब <strong>150 प्रतिभागियों</strong> ने हिस्सा लिया। इनमें MY Bharat, इंफाल ईस्ट जिला की सहायक निदेशक एवं यूथ ऑफिसर <strong>प्रिंसी गुप्ता</strong>, मणिपुर यूनिवर्सिटी से संबद्ध कॉलेजों के एनएसएस कार्यक्रम अधिकारी, समन्वयक, एनएसएस स्वयंसेवक, आमंत्रित अतिथि और अन्य गणमान्य लोग शामिल थे।</p>
<p class="isSelectedEnd">अपने उद्घाटन संबोधन में प्रो. लैशराम संतोष सिंह ने कहा कि <strong>विकसित भारत युवा कनेक्ट फेज-2</strong> युवा मामले एवं खेल मंत्रालय की पहल है, जिसके तहत 1 से 15 अगस्त 2026 तक देशभर में विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं।</p>
<p class="isSelectedEnd">उन्होंने बताया कि मणिपुर यूनिवर्सिटी राज्य में इस कार्यक्रम के आयोजन के लिए चयनित संस्थानों में शामिल है। विश्वविद्यालय का एनएसएस सेल युवाओं को विकसित भारत के व्यापक राष्ट्रीय विजन से जोड़ने की दिशा में पहल कर रहा है।</p>
<p class="isSelectedEnd">प्रो. संतोष ने कहा कि कार्यक्रम का उद्देश्य विकसित भारत 2047 के विजन को जमीनी स्तर तक पहुंचाना और युवाओं को अनुशासित, समर्पित तथा सामाजिक रूप से जिम्मेदार नागरिक बनने के लिए प्रेरित करना है। उन्होंने कहा कि 2047 तक भारत की विकास यात्रा को सफल बनाने के लिए युवाओं की सक्रिय भागीदारी और सामूहिक प्रयास आवश्यक होंगे।</p>
<p class="isSelectedEnd">कार्यक्रम के दौरान कार्यवाहक कुलपति <strong>प्रो. आर.के. हेमाकुमार सिंह</strong> ने प्रतिभागियों को <strong>विकसित भारत की शपथ</strong> दिलाई। शपथ के माध्यम से प्रतिभागियों ने जिम्मेदार नागरिकता, राष्ट्र निर्माण और विकसित भारत 2047 के विजन के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई।</p>
<p class="isSelectedEnd">अपने संबोधन में प्रो. हेमाकुमार ने कहा कि 2047 तक विकसित भारत का लक्ष्य केवल सरकारी प्रयासों से हासिल नहीं किया जा सकता। इसके लिए देश के युवाओं की सक्रिय भागीदारी, अनुशासन और प्रतिबद्धता जरूरी है।</p>
<p class="isSelectedEnd">उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विकसित भारत 2047 के विजन में युवा भारत के परिवर्तन के केंद्र में हैं और देश की विकास आकांक्षाओं को पूरा करने में उनकी भूमिका महत्वपूर्ण होगी।</p>
<p class="isSelectedEnd">उन्होंने कहा कि विकसित भारत युवा कनेक्ट जैसे कार्यक्रम केवल जागरूकता तक सीमित नहीं रहने चाहिए, बल्कि युवाओं को अपने संस्थानों, समुदायों और देश के प्रति अधिक जिम्मेदारी निभाने के लिए प्रेरित करना चाहिए।</p>
<p class="isSelectedEnd">कुलपति ने नशे के दुरुपयोग, लत और अवैध मादक पदार्थों की तस्करी से उत्पन्न चुनौतियों पर भी चिंता व्यक्त की। उन्होंने स्वस्थ, केंद्रित और सामाजिक रूप से जिम्मेदार युवा पीढ़ी के महत्व पर जोर दिया।</p>
<p class="isSelectedEnd">मणिपुर यूनिवर्सिटी के प्लास्टिक-मुक्त परिसर की दिशा में किए जा रहे प्रयासों का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि केवल प्लास्टिक कचरे के संग्रह और निपटान की व्यवस्था करना पर्याप्त नहीं है। छात्रों, कर्मचारियों और विश्वविद्यालय समुदाय के अन्य सदस्यों को भी जिम्मेदारी से इन सुविधाओं का उपयोग करते हुए परिसर को स्वच्छ रखने में सामूहिक योगदान देना होगा।</p>
<p class="isSelectedEnd">इसी तरह उन्होंने विश्वविद्यालय को नशामुक्त परिसर बनाने के प्रयासों में भी सामूहिक जिम्मेदारी की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय प्रशासन द्वारा शुरू की गई पहल तभी प्रभावी होंगी, जब छात्र और विश्वविद्यालय समुदाय के अन्य सदस्य सक्रिय रूप से सहयोग करें।</p>
<p class="isSelectedEnd">अध्यक्षीय संबोधन में डीन ऑफ स्टूडेंट्स वेलफेयर <strong>प्रो. च. इबोहाल सिंह</strong> ने विकसित भारत युवा कनेक्ट फेज-2 को 2047 में स्वतंत्रता की शताब्दी की ओर बढ़ रहे भारत के लिए महत्वपूर्ण पहल बताया।</p>
<p class="isSelectedEnd">उन्होंने कहा कि भारत की विशाल युवा आबादी देश की सबसे बड़ी शक्तियों में से एक है और युवा राष्ट्र के भविष्य को आकार देने में निर्णायक भूमिका निभाएंगे।</p>
<p class="isSelectedEnd">राष्ट्रीय सेवा योजना के महत्व पर प्रकाश डालते हुए प्रो. इबोहाल ने कहा कि NSS सामाजिक रूप से संवेदनशील और जिम्मेदार नागरिक तैयार करने के लिए एक प्रभावी संस्थागत मंच है। उन्होंने विशेष रूप से गोद लिए गए गांवों के माध्यम से विश्वविद्यालय परिसर और समुदायों के बीच संबंध मजबूत करने की आवश्यकता पर जोर दिया।</p>
<p class="isSelectedEnd">उन्होंने कहा कि नशामुक्त भारत जैसे अभियान केवल विश्वविद्यालयों और कॉलेज परिसरों तक सीमित नहीं रहने चाहिए। इन्हें एनएसएस स्वयंसेवकों की सक्रिय भागीदारी के माध्यम से समुदायों और गोद लिए गए गांवों तक पहुंचाया जाना चाहिए।</p>
<p class="isSelectedEnd">विशिष्ट अतिथि और यूथ आइकन <strong>पिनुबाला लैशराम</strong> ने विकसित भारत के निर्माण में युवाओं की भूमिका पर प्रकाश डालते हुए नशे और लत की गंभीर चुनौतियों पर चर्चा की।</p>
<p class="isSelectedEnd">उन्होंने कहा कि भारत की युवा आबादी देश की बड़ी ताकत है, लेकिन युवा तभी राष्ट्र निर्माण में प्रभावी योगदान दे सकते हैं जब वे शारीरिक और मानसिक रूप से स्वस्थ रहें।</p>
<p class="isSelectedEnd">उन्होंने बताया कि नशे की लत व्यक्ति के शारीरिक स्वास्थ्य के साथ-साथ उसके मानसिक स्वास्थ्य, व्यवहार, शिक्षा, करियर, पारिवारिक संबंधों और सामाजिक जीवन को भी प्रभावित कर सकती है। उन्होंने युवाओं को नशे से दूर रहने और जरूरत पड़ने पर परिवार, मित्रों, शिक्षकों, काउंसलर तथा भरोसेमंद लोगों से सहायता लेने के लिए प्रोत्साहित किया।</p>
<p class="isSelectedEnd">पिनुबाला ने <strong>नशा मुक्त भारत अभियान</strong> का उल्लेख करते हुए कहा कि नशे की समस्या से निपटने के लिए सरकार के साथ परिवारों, शिक्षण संस्थानों, समुदायों और युवाओं की सक्रिय भागीदारी जरूरी है।</p>
<p class="isSelectedEnd">उन्होंने डिजिटल और स्मार्टफोन की लत जैसे उभरते मुद्दों की ओर भी ध्यान आकर्षित किया। उन्होंने कहा कि ऐसी समस्याओं का सामना कर रहे युवाओं को इसे स्वीकार करने और सहायता लेने में संकोच नहीं करना चाहिए। मदद मांगना शर्म की बात नहीं है।</p>
<p class="isSelectedEnd">कार्यक्रम की एक प्रमुख विशेषता <strong>नॉर्थ ईस्ट NSS फेस्टिवल 2026</strong> में मणिपुर यूनिवर्सिटी का प्रतिनिधित्व करने वाले एनएसएस स्वयंसेवकों का सम्मान रहा। यह महोत्सव 23 से 27 जुलाई 2026 तक असम एग्रीकल्चरल यूनिवर्सिटी, जोरहाट में आयोजित हुआ था।</p>
<p class="isSelectedEnd">मणिपुर यूनिवर्सिटी की टीम ने महोत्सव के दौरान कई गतिविधियों में पहचान बनाई। टीम को <strong>बेस्ट डिसिप्लिन</strong> का सम्मान मिला, जबकि सांस्कृतिक कार्यक्रम में दूसरा स्थान हासिल किया गया और पोस्टर मेकिंग प्रतियोगिता में भी पहचान मिली।</p>
<p class="isSelectedEnd">विश्वविद्यालय का प्रतिनिधित्व करने वाले एनएसएस स्वयंसेवकों को अनुशासन, रचनात्मकता, सांस्कृतिक सहभागिता और सामाजिक सेवा की भावना प्रदर्शित करने के लिए सम्मानित किया गया।</p>
<p>कार्यक्रम ने इस बात को रेखांकित किया कि <strong>विकसित भारत 2047</strong> का लक्ष्य केवल आर्थिक और तकनीकी प्रगति पर निर्भर नहीं करेगा, बल्कि युवाओं के स्वास्थ्य, चरित्र, अनुशासन, सामाजिक जिम्मेदारी और राष्ट्र निर्माण में उनकी सक्रिय भागीदारी भी उतनी ही महत्वपूर्ण होगी।</p>]]></content:encoded>
    </item>
    <item>
      <title><![CDATA[मणिपुर यूनिवर्सिटी में 33 असम राइफल्स का पाइप बैंड प्रदर्शन, निकली हर घर तिरंगा यात्रा]]></title>
      <description><![CDATA[<a href="https://www.mudarpan.in/news/manipur-university-33-assam-rifles-pipe-band-har-ghar-tiranga-yatra"><img alt="मणिपुर यूनिवर्सिटी में 33 असम राइफल्स का पाइप बैंड प्रदर्शन, निकली हर घर तिरंगा यात्रा" border="0" src="https://www.mudarpan.in/view/aug-2026/har-ghar-tiranga-yatra-in-manipur-university.jpg"></a><p>मणिपुर यूनिवर्सिटी में 33 असम राइफल्स ने देशभक्ति से ओतप्रोत पाइप बैंड प्रदर्शन किया। इससे पहले विश्वविद्यालय समुदाय ने हर घर तिरंगा यात्रा निकाली।</p>]]></description>
      <link><![CDATA[https://www.mudarpan.in/news/manipur-university-33-assam-rifles-pipe-band-har-ghar-tiranga-yatra]]></link>
      <pubDate>Fri, 21 Aug 2026 10:35:31 GMT</pubDate>
      <guid isPermaLink="true">https://www.mudarpan.in/news/manipur-university-33-assam-rifles-pipe-band-har-ghar-tiranga-yatra</guid>
      <dc:creator><![CDATA[Naorem Mohen]]></dc:creator>
      <category><![CDATA[मणपर यनवरसट]]></category>
      <category><![CDATA[33 असम रइफलस]]></category>
      <category><![CDATA[पइप बड परदरशन]]></category>
      <category><![CDATA[हर घर तरग यतर]]></category>
      <category><![CDATA[हर घर तरग]]></category>
      <category><![CDATA[मणपर समचर]]></category>
      <category><![CDATA[मणपर यनवरसट समचर]]></category>
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      <category><![CDATA[दशभकत करयकरम]]></category>
      <category><![CDATA[रषटरय एकत]]></category>
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      <category><![CDATA[मणपर समचर हद]]></category>
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      <content:encoded><![CDATA[<p><img src="https://www.mudarpan.in/view/aug-2026/har-ghar-tiranga-yatra-in-manipur-university.jpg">&nbsp;</p>
<p class="isSelectedEnd"><strong>इंफाल, 12 अगस्त 2026:</strong> मणिपुर यूनिवर्सिटी में बुधवार को 33 असम राइफल्स की ओर से बायोडायवर्सिटी पार्क, सेंचुरी हॉल के पास आयोजित पाइप बैंड प्रदर्शन में विश्वविद्यालय समुदाय ने भाग लिया। कार्यक्रम ने देशभक्ति, राष्ट्रीय एकता और सशस्त्र बलों के प्रति सम्मान की भावना को मजबूत किया।</p>
<p class="isSelectedEnd">कार्यक्रम से पहले मणिपुर यूनिवर्सिटी के अधिकारियों, शिक्षकों, कर्मचारियों और एनएसएस स्वयंसेवकों ने प्रशासनिक ब्लॉक से <strong>हर घर तिरंगा यात्रा</strong> निकाली। हाथों में तिरंगा लेकर प्रतिभागी बायोडायवर्सिटी पार्क पहुंचे। इस दौरान पूरे परिसर में राष्ट्रीय गौरव और उत्साह का माहौल देखने को मिला।</p>
<p class="isSelectedEnd">कार्यक्रम में मणिपुर यूनिवर्सिटी के कार्यवाहक कुलपति <strong>प्रो. आर.के. हेमाकुमार सिंह</strong>, रजिस्ट्रार <strong>प्रो. एम. प्रेमजीत सिंह</strong>, 33 असम राइफल्स के कमांडेंट <strong>कर्नल राधा कृष्ण</strong>, डीन ऑफ स्टूडेंट्स वेलफेयर <strong>प्रो. च. इबोहाल सिंह</strong> तथा एनएसएस सेल के कार्यक्रम समन्वयक <strong>प्रो. लैशराम संतोष सिंह</strong> सहित विश्वविद्यालय के कई अधिकारी और शिक्षक मौजूद रहे।</p>
<p class="isSelectedEnd">विश्वविद्यालय की ओर से सुरक्षा अधिकारी <strong>Y. Santikumar Singh</strong>, जनसंपर्क अधिकारी <strong>Dr Sakila Nongmeikapam</strong>, चिकित्सा अधिकारी <strong>Dr Lamabam Pinky</strong> और जूलॉजी विभागाध्यक्ष <strong>Kshetrimayum Birla Singh</strong> भी कार्यक्रम में शामिल हुए। एनएसएस स्वयंसेवकों और विश्वविद्यालय समुदाय के अन्य सदस्यों ने भी उत्साहपूर्वक भाग लिया।</p>
<p class="isSelectedEnd">33 असम राइफल्स के पाइप बैंड ने कई देशभक्ति और सैन्य धुनों की प्रस्तुति दी। इनमें <strong>&ldquo;कदम कदम बढ़ाए जा&rdquo;</strong>, <strong>&ldquo;जय जन्मभूमि&rdquo;</strong>, <strong>&ldquo;विजय भारत&rdquo;</strong>, <strong>&ldquo;ऐ वतन ऐ वतन&rdquo;</strong>, <strong>&ldquo;देशों का सरताज भारत&rdquo;</strong> और <strong>&ldquo;सारे जहां से अच्छा हिंदुस्तान हमारा&rdquo;</strong> जैसी प्रस्तुतियां शामिल थीं।</p>
<p class="isSelectedEnd">&ldquo;कदम कदम बढ़ाए जा&rdquo; की प्रस्तुति ने भारतीय सैनिकों के साहस, दृढ़ संकल्प और राष्ट्रसेवा की भावना को उजागर किया। वहीं &ldquo;जय जन्मभूमि&rdquo; ने मातृभूमि के प्रति भावनात्मक जुड़ाव और साझा राष्ट्रीय पहचान का संदेश दिया।</p>
<p class="isSelectedEnd">&ldquo;विजय भारत&rdquo; के माध्यम से भारतीय सशस्त्र बलों के साहस और बलिदान को नमन किया गया। कार्यक्रम में यह संदेश भी दिया गया कि देश में नागरिकों को मिलने वाली शांति और सुरक्षा सैनिकों की प्रतिबद्धता और सतर्कता से गहराई से जुड़ी है।</p>
<p class="isSelectedEnd">पाइप बैंड की प्रस्तुतियों ने अनुशासन, समन्वय और सैन्य संगीत की समृद्ध परंपरा को भी प्रदर्शित किया। कार्यक्रम में प्रभावशाली <strong>ड्रम रोल</strong> प्रस्तुति भी हुई।</p>
<p class="isSelectedEnd"><strong>&ldquo;सारे जहां से अच्छा हिंदुस्तान हमारा&rdquo;</strong> की प्रस्तुति ने भाषा, क्षेत्र और संस्कृति की विविधताओं के बावजूद देशवासियों के बीच एकता और साझा भावना का संदेश दिया।</p>
<p class="isSelectedEnd">कार्यक्रम के दौरान इस बात पर जोर दिया गया कि देशभक्ति केवल नारों या औपचारिक आयोजनों तक सीमित नहीं होनी चाहिए। राष्ट्र के प्रति प्रेम जिम्मेदार आचरण, सकारात्मक सोच, सामाजिक भागीदारी और राष्ट्र निर्माण में योगदान के माध्यम से भी व्यक्त होना चाहिए।</p>
<p class="isSelectedEnd">कार्यक्रम ने विशेष रूप से युवाओं को अनुशासन, साहस, जिम्मेदारी, एकता और सेवा जैसे मूल्यों को अपनाने के लिए प्रेरित किया। साथ ही देश की सुरक्षा और अखंडता के लिए विभिन्न पीढ़ियों के सैनिकों द्वारा दिए गए बलिदानों को याद किया गया।</p>
<p class="isSelectedEnd">कार्यक्रम का समापन <strong>&ldquo;वंदे मातरम्&rdquo;</strong> और उसके बाद राष्ट्रगान के साथ हुआ। असम राइफल्स के जवानों और मणिपुर यूनिवर्सिटी समुदाय के सदस्यों ने एक साथ राष्ट्रीय गौरव और सम्मान की भावना व्यक्त की।</p>
<p>हर घर तिरंगा यात्रा और पाइप बैंड प्रदर्शन ने मणिपुर यूनिवर्सिटी समुदाय को तिरंगे की भावना का उत्सव मनाने तथा राष्ट्रीय एकता, अखंडता और जिम्मेदार नागरिकता के मूल्यों के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराने का अवसर दिया।</p>]]></content:encoded>
    </item>
    <item>
      <title><![CDATA[मणिपुर यूनिवर्सिटी में फिजिकल एजुकेशन, स्पोर्ट्स साइंस और योग पर राष्ट्रीय रिफ्रेशर कोर्स शुरू]]></title>
      <description><![CDATA[<a href="https://www.mudarpan.in/news/manipur-university-national-refresher-course-physical-education-sports-sciences-yoga"><img alt="मणिपुर यूनिवर्सिटी में फिजिकल एजुकेशन, स्पोर्ट्स साइंस और योग पर राष्ट्रीय रिफ्रेशर कोर्स शुरू" border="0" src="https://www.mudarpan.in/view/aug-2026/manipur-university-national-refresher-course-physical-education-sports-sciences-yoga.jpg"></a><p>मणिपुर यूनिवर्सिटी में 10 से 22 अगस्त तक फिजिकल एजुकेशन, स्पोर्ट्स साइंस और योग पर दो सप्ताह का राष्ट्रीय रिफ्रेशर कोर्स शुरू हुआ। 18 राज्यों के 113 प्रतिभागी शामिल।</p>]]></description>
      <link><![CDATA[https://www.mudarpan.in/news/manipur-university-national-refresher-course-physical-education-sports-sciences-yoga]]></link>
      <pubDate>Tue, 11 Aug 2026 08:38:19 GMT</pubDate>
      <guid isPermaLink="true">https://www.mudarpan.in/news/manipur-university-national-refresher-course-physical-education-sports-sciences-yoga</guid>
      <dc:creator><![CDATA[Naorem Mohen]]></dc:creator>
      <category><![CDATA[मणपर यनवरसट]]></category>
      <category><![CDATA[मणपर वशववदयलय]]></category>
      <category><![CDATA[Manipur University]]></category>
      <category><![CDATA[रफरशर करस]]></category>
      <category><![CDATA[फजकल एजकशन]]></category>
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      <content:encoded><![CDATA[<p>&nbsp;<img src="https://www.mudarpan.in/view/aug-2026/manipur-university-national-refresher-course-physical-education-sports-sciences-yoga.jpg">&nbsp;</p>
<p class="isSelectedEnd"><strong>इंफाल, 10 अगस्त 2026:</strong> मणिपुर यूनिवर्सिटी में सोमवार को <strong>&ldquo;Advances in Physical Education, Sports Sciences, and Yoga&rdquo;</strong> विषय पर दो सप्ताह के राष्ट्रीय रिफ्रेशर कोर्स का शुभारंभ हुआ। उद्घाटन अवसर पर मणिपुर यूनिवर्सिटी के कुलपति (प्रभारी) <strong>प्रो. आर.के. हेमकुमार सिंह</strong> ने फिजिकल एजुकेशन, स्पोर्ट्स साइंस और योग के तेजी से बदलते क्षेत्रों में वैज्ञानिक ज्ञान, शोध क्षमता और निरंतर व्यावसायिक विकास को मजबूत करने की आवश्यकता पर जोर दिया।</p>
<p class="isSelectedEnd">इस कार्यक्रम का आयोजन <strong>UGC&ndash;Malaviya Mission Teacher Training Centre (UGC-MMTTC), मणिपुर यूनिवर्सिटी</strong> द्वारा किया जा रहा है। यह रिफ्रेशर कोर्स <strong>10 से 22 अगस्त</strong> तक चलेगा और इसमें देश के <strong>18 राज्यों के 113 प्रतिभागी</strong> हिस्सा ले रहे हैं। प्रतिभागियों की व्यापक भागीदारी ने कार्यक्रम को राष्ट्रीय स्वरूप प्रदान किया है।</p>
<p class="isSelectedEnd">उद्घाटन समारोह के मुख्य अतिथि प्रो. आर.के. हेमकुमार सिंह ने कहा कि फिजिकल एजुकेशन, स्पोर्ट्स साइंस और योग के क्षेत्र में पिछले वर्षों में महत्वपूर्ण बदलाव हुए हैं और अब ये विषय बहुविषयक, वैज्ञानिक तथा साक्ष्य-आधारित अध्ययन एवं पेशेवर अभ्यास के महत्वपूर्ण क्षेत्र बन चुके हैं।</p>
<p class="isSelectedEnd">उन्होंने कहा कि इन क्षेत्रों में वर्तमान विकास का संबंध <strong>एक्सरसाइज फिजियोलॉजी, बायोमैकेनिक्स, स्पोर्ट्स साइकोलॉजी, न्यूट्रिशन, स्पोर्ट्स मेडिसिन, स्ट्रेंथ एंड कंडीशनिंग, डेटा एनालिटिक्स और उभरती तकनीकों</strong> से तेजी से जुड़ रहा है। ऐसे बदलते शैक्षणिक और पेशेवर वातावरण में शिक्षकों, शोधकर्ताओं, प्रशिक्षकों और अन्य पेशेवरों के लिए निरंतर सीखना और व्यावसायिक विकास बेहद जरूरी है।</p>
<p class="isSelectedEnd">प्रो. हेमकुमार ने कहा कि इस तरह के रिफ्रेशर कोर्स प्रतिभागियों को अपने ज्ञान को अपडेट करने, अनुभवों का आदान-प्रदान करने, शोध कौशल को मजबूत करने और फिजिकल एजुकेशन, स्पोर्ट्स साइंस एवं योग में हो रहे नए विकास को समझने के लिए महत्वपूर्ण अकादमिक मंच प्रदान करते हैं।</p>
<p class="isSelectedEnd">उन्होंने प्रतिभागियों से दो सप्ताह के अकादमिक कार्यक्रम का अधिकतम लाभ उठाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि प्रतिभागियों को संसाधन व्यक्तियों के साथ सक्रिय संवाद करना चाहिए, अपने अनुभव साझा करने चाहिए, शोध संबंधी चुनौतियों पर चर्चा करनी चाहिए और सार्थक अकादमिक एवं पेशेवर सहयोग विकसित करना चाहिए।</p>
<p class="isSelectedEnd">शिक्षक प्रशिक्षण और फैकल्टी डेवलपमेंट कार्यक्रमों के महत्व को रेखांकित करते हुए कुलपति (प्रभारी) ने कहा कि ऐसे कार्यक्रमों का प्रभाव केवल औपचारिक भागीदारी और प्रमाणपत्र प्राप्त करने तक सीमित नहीं होना चाहिए। उन्होंने कहा कि रिफ्रेशर कोर्स की वास्तविक सफलता इस बात से तय होती है कि इसमें प्राप्त ज्ञान, कौशल और विचारों को शिक्षण, शोध, प्रशिक्षण और पेशेवर अभ्यास में कितनी प्रभावी ढंग से लागू किया जाता है।</p>
<p class="isSelectedEnd">प्रो. हेमकुमार ने फिजिकल एजुकेशन, स्पोर्ट्स साइंस और योग के व्यापक सामाजिक महत्व पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि इन विषयों की भूमिका <strong>स्वास्थ्य, शारीरिक फिटनेस, खेल उत्कृष्टता, मानसिक कल्याण और समग्र विकास</strong> को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण है।</p>
<p class="isSelectedEnd">उन्होंने शिक्षकों और पेशेवरों से वैज्ञानिक ज्ञान, स्वस्थ जीवनशैली, शोध उत्कृष्टता और मानव कल्याण को बढ़ावा देने के लिए सामूहिक रूप से काम करने का आह्वान किया। साथ ही उन्होंने कार्यक्रम के आयोजन में UGC-MMTTC, आयोजन समिति और संसाधन व्यक्तियों के प्रयासों की सराहना की।</p>
<p class="isSelectedEnd">कार्यक्रम के कोर्स कोऑर्डिनेटर एवं मणिपुर यूनिवर्सिटी के फिजिकल एजुकेशन एंड स्पोर्ट्स साइंसेज विभाग के <strong>प्रो. लाइशराम संतोष सिंह</strong> ने कार्यक्रम के राष्ट्रीय स्वरूप की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि रिफ्रेशर कोर्स में देश के <strong>18 राज्यों से 113 प्रतिभागियों</strong> ने पंजीकरण कराया है।</p>
<p class="isSelectedEnd">प्रो. संतोष सिंह ने कहा कि विभिन्न भौगोलिक क्षेत्रों और अलग-अलग शैक्षणिक वातावरण से आए शिक्षकों एवं पेशेवरों की भागीदारी से ज्ञान, अनुभव और दृष्टिकोण के आदान-प्रदान का बेहतर अवसर मिलेगा। उन्होंने संसाधन व्यक्तियों और प्रतिभागियों का स्वागत करते हुए कार्यक्रम के लिए अकादमिक मंच और संस्थागत सहयोग उपलब्ध कराने के लिए UGC-MMTTC, मणिपुर यूनिवर्सिटी का आभार व्यक्त किया।</p>
<p class="isSelectedEnd">उन्होंने बताया कि दो सप्ताह के दौरान देश के विभिन्न संस्थानों से आए संसाधन व्यक्ति फिजिकल एजुकेशन, स्पोर्ट्स साइंसेज और योग के समकालीन मुद्दों एवं विकास पर प्रतिभागियों के साथ संवाद करेंगे।</p>
<p class="isSelectedEnd">कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए UGC-MMTTC, मणिपुर यूनिवर्सिटी के निदेशक <strong>प्रो. राजकुमार भुबोन सिंह</strong> ने उच्च शिक्षा में उभरते विचारों और नए दृष्टिकोणों से शिक्षकों को परिचित कराने में रिफ्रेशर कोर्स की महत्वपूर्ण भूमिका पर प्रकाश डाला। उन्होंने प्रतिभागियों से संसाधन व्यक्तियों के अनुभवों से सीखने और पूरे कार्यक्रम के दौरान अकादमिक संवाद में सक्रिय रूप से भाग लेने का आग्रह किया।</p>
<p class="isSelectedEnd">प्रो. आर.के. भुबोन सिंह ने <strong>राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020</strong> के क्रियान्वयन के संदर्भ में भी इस पाठ्यक्रम की प्रासंगिकता पर प्रकाश डाला। उन्होंने गुणवत्तापूर्ण शिक्षण, समानता, तकनीक-सक्षम एवं ऑनलाइन शिक्षा, भारतीय भाषाओं के प्रोत्साहन और बहुविषयक शिक्षा पर NEP 2020 के जोर का उल्लेख किया।</p>
<p class="isSelectedEnd">उद्घाटन दिवस पर विभिन्न संस्थानों के संसाधन व्यक्तियों द्वारा चार तकनीकी सत्र आयोजित किए गए।</p>
<p class="isSelectedEnd">हैदराबाद की <strong>डॉ. अंकिता जैन</strong> ने <strong>&ldquo;Sports Mental Training for Athletes&rdquo;</strong> विषय पर सत्र लिया और खेल प्रदर्शन में मनोवैज्ञानिक पक्ष के महत्व पर चर्चा की।</p>
<p class="isSelectedEnd">उत्तर प्रदेश स्थित बनारस हिंदू विश्वविद्यालय के <strong>प्रो. भुवन चंद्र कपरी</strong> ने <strong>&ldquo;Research Methodology: Foundation and Framework&rdquo;</strong> विषय पर व्याख्यान दिया। उन्होंने अकादमिक और वैज्ञानिक शोध के लिए आवश्यक शोध पद्धति की मूल अवधारणाओं और आधारभूत ढांचे पर चर्चा की।</p>
<p class="isSelectedEnd">पंजाब की पंजाबी यूनिवर्सिटी के <strong>प्रो. निशान सिंह देओल</strong> ने <strong>&ldquo;AI Transforming Sports&rdquo;</strong> विषय पर सत्र लिया। उन्होंने खेल के क्षेत्र में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और तकनीकी नवाचार की उभरती भूमिका पर प्रकाश डाला।</p>
<p class="isSelectedEnd">मणिपुर यूनिवर्सिटी के <strong>टी. इनाओबी सिंह</strong> ने <strong>&ldquo;Physical Education in the Era of NEP 2020: Opportunities, Innovation and Future Directions&rdquo;</strong> विषय पर व्याख्यान दिया। उन्होंने राष्ट्रीय शिक्षा नीति के तहत फिजिकल एजुकेशन के बदलते स्वरूप और भविष्य की संभावनाओं पर चर्चा की।</p>
<p class="isSelectedEnd">उद्घाटन कार्यक्रम की शुरुआत सुबह 10 बजे अतिथियों के स्वागत और सम्मान के साथ हुई। मणिपुर यूनिवर्सिटी के फिजिकल एजुकेशन एंड स्पोर्ट्स साइंस विभाग के एसोसिएट प्रोफेसर <strong>डॉ. वाई. शांतकुमार सिंह</strong> ने स्वागत भाषण दिया, जबकि मणिपुर यूनिवर्सिटी के योग विभाग के प्रमुख <strong>डॉ. एन. नीलकमल सिंह</strong> ने धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत किया। वर्चुअल सत्रों के तकनीकी संचालन की जिम्मेदारी मणिपुर यूनिवर्सिटी के प्रोग्रामर <strong>डॉ. इरेंगबाम तिलोकचान</strong> ने संभाली।</p>
<p>दो सप्ताह का यह रिफ्रेशर कोर्स <strong>22 अगस्त</strong> तक चलेगा। इस दौरान प्रतिभागियों को समकालीन शोध, उभरती तकनीकों, नवाचारी शिक्षण पद्धतियों तथा फिजिकल एजुकेशन, स्पोर्ट्स साइंसेज और योग के क्षेत्र में हो रहे बहुविषयक विकास से परिचित कराया जाएगा।</p>]]></content:encoded>
    </item>
    <item>
      <title><![CDATA[मणिपुर यूनिवर्सिटी ने संघर्ष और विस्थापन पर विशेष शोध जर्नल जारी किया]]></title>
      <description><![CDATA[<a href="https://www.mudarpan.in/news/manipur-university-special-journal-conflict-displacement-evidence-based-research"><img alt="मणिपुर यूनिवर्सिटी ने संघर्ष और विस्थापन पर विशेष शोध जर्नल जारी किया" border="0" src="https://www.mudarpan.in/view/aug-2026/manipur-university-special-journal-conflict-displacement-evidence-based-research.jpg"></a><p>मणिपुर यूनिवर्सिटी के मानवशास्त्र विभाग ने संघर्ष, विस्थापन और निराशा पर आधारित SAAN का विशेष अंक जारी किया। अंक में तथ्य-आधारित अकादमिक शोध शामिल हैं।</p>]]></description>
      <link><![CDATA[https://www.mudarpan.in/news/manipur-university-special-journal-conflict-displacement-evidence-based-research]]></link>
      <pubDate>Tue, 11 Aug 2026 08:33:45 GMT</pubDate>
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      <dc:creator><![CDATA[Naorem Mohen]]></dc:creator>
      <category><![CDATA[मणपर यनवरसट]]></category>
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      <category><![CDATA[Unsettling Manipur]]></category>
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      <category><![CDATA[मनवशसतर वभग]]></category>
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      <category><![CDATA[अकदमक शध]]></category>
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      <content:encoded><![CDATA[<p><img src="https://www.mudarpan.in/view/aug-2026/manipur-university-special-journal-conflict-displacement-evidence-based-research.jpg">&nbsp;</p>
<p class="isSelectedEnd"><strong>इंफाल, 7 अगस्त 2026:</strong> मणिपुर यूनिवर्सिटी के मानवशास्त्र विभाग ने शुक्रवार को <em>South Asian Anthropologist (SAAN)</em> के विशेष अंक <strong>&ldquo;Unsettling Manipur: Conflict, Displacement and Despair&rdquo;</strong> का विमोचन किया। विशेष अंक में मणिपुर में जारी संकट के विभिन्न पहलुओं पर तथ्य एवं साक्ष्य आधारित अकादमिक शोध प्रस्तुत किए गए हैं।</p>
<p class="isSelectedEnd">जर्नल का विमोचन मानवशास्त्र विभाग के कॉन्फ्रेंस हॉल में आयोजित कार्यक्रम में किया गया। इस अवसर पर मणिपुर यूनिवर्सिटी के कुलपति (प्रभारी) <strong>प्रो. आर.के. हेमकुमार सिंह</strong>, स्कूल ऑफ ह्यूमन एंड एनवायरनमेंटल साइंसेज के डीन <strong>प्रो. एम.सी. अरुणकुमार</strong>, रिसर्च एंड डेवलपमेंट सेल के चेयरमैन <strong>प्रो. एस. जिबोनकुमार सिंह</strong>, मानवशास्त्र विभाग के प्रमुख <strong>प्रो. हाओबिजाम वोकेन्द्र सिंह</strong>, शिक्षक, शोधार्थी और विद्यार्थी मौजूद रहे।</p>
<p class="isSelectedEnd">कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कुलपति (प्रभारी) प्रो. आर.के. हेमकुमार सिंह ने कहा कि जटिल सामाजिक मुद्दों को समझने में मदद करने वाले वस्तुनिष्ठ अकादमिक शोध तैयार करना विश्वविद्यालयों की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है। उन्होंने मणिपुर में जारी संकट पर केंद्रित इस समयानुकूल विशेष अंक के प्रकाशन के लिए मानवशास्त्र विभाग की सराहना की और उम्मीद जताई कि इसमें शामिल शोध राज्य से बाहर भी सूचित अकादमिक विमर्श को बढ़ावा देंगे।</p>
<p class="isSelectedEnd">मुख्य वक्तव्य देते हुए मानवशास्त्र विभाग के प्रमुख प्रो. हाओबिजाम वोकेन्द्र सिंह ने कहा कि विशेष अंक का उद्देश्य मणिपुर से जुड़े विमर्श को अटकलों और गलत सूचनाओं से हटाकर <strong>साक्ष्य आधारित अकादमिक अध्ययन</strong> की ओर ले जाना है।</p>
<p class="isSelectedEnd">उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया नैरेटिव और AI-जनित सामग्री के बढ़ते प्रभाव के दौर में यह अंक काल्पनिक या अनुमान आधारित सामग्री के बजाय अनुभवजन्य निष्कर्षों पर आधारित एक गंभीर अकादमिक प्रयास है। उन्होंने इस प्रकाशन को एक &ldquo;लाइटहाउस&rdquo; बताते हुए कहा कि इसमें सावधानीपूर्वक चयनित शोध के माध्यम से विश्वसनीय ज्ञान और अपुष्ट कथनों के बीच अंतर स्पष्ट करने का प्रयास किया गया है।</p>
<p class="isSelectedEnd">प्रो. वोकेन्द्र सिंह के अनुसार, विशेष अंक में मणिपुर के जातीय संघर्ष से संबंधित <strong>मीडिया नैरेटिव</strong>, वर्ष <strong>2015 से 2024</strong> तक के आंकड़ों के पूर्वव्यापी विश्लेषण के आधार पर मादक पदार्थों की तस्करी में शामिल लोगों की जनसांख्यिकीय प्रोफाइल तथा आंतरिक रूप से विस्थापित लोगों (IDPs) की मनोवैज्ञानिक और शारीरिक स्वास्थ्य स्थितियों से जुड़े अध्ययन शामिल हैं।</p>
<p class="isSelectedEnd">एक शोधपत्र में यह अध्ययन किया गया है कि मीडिया के कुछ वर्गों द्वारा घटनाओं को चयनित तरीके से प्रस्तुत किए जाने से जनधारणा किस प्रकार प्रभावित हो सकती है। वहीं, एक अन्य अध्ययन में मादक पदार्थों से संबंधित गिरफ्तारियों के दस वर्षों के आंकड़ों का विश्लेषण कर जनसांख्यिकीय पैटर्न को समझने का प्रयास किया गया है।</p>
<p class="isSelectedEnd">एक अन्य शोध में आंतरिक रूप से विस्थापित लोगों और गैर-विस्थापित लोगों के तनाव स्तर तथा स्वास्थ्य संकेतकों की तुलना की गई है। इसके निष्कर्ष मनोवैज्ञानिकों और स्वास्थ्य पेशेवरों को उपयुक्त हस्तक्षेप की योजना बनाने में मदद कर सकते हैं।</p>
<p class="isSelectedEnd">कार्यक्रम के विशिष्ट अतिथि प्रो. एम.सी. अरुणकुमार ने कहा कि यह प्रकाशन प्रतिस्पर्धी नैरेटिव और अटकलों के बजाय वैज्ञानिक एवं साक्ष्य आधारित दृष्टिकोण से मणिपुर की मौजूदा स्थिति का अध्ययन करने के शुरुआती संगठित अकादमिक प्रयासों में से एक है। उन्होंने कहा कि इन अध्ययनों से संकट के कारणों, प्रभावों और दीर्घकालिक परिणामों पर अंतर-विषयक शोध के नए रास्ते खुल सकते हैं।</p>
<p class="isSelectedEnd">रिसर्च एंड डेवलपमेंट सेल के चेयरमैन प्रो. एस. जिबोनकुमार सिंह ने बताया कि <em>South Asian Anthropologist</em> का प्रकाशन पहली बार <strong>1980</strong> में हुआ था और यह भारत की सबसे पुराने मानवशास्त्र संबंधी जर्नलों में से एक है। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालयों का दायित्व केवल ज्ञान का संरक्षण करना नहीं, बल्कि समाज के सामने मौजूद गंभीर चुनौतियों पर अकादमिक ईमानदारी, वैज्ञानिक कठोरता और सत्य के प्रति प्रतिबद्धता के साथ शोध तैयार करना भी है।</p>
<p>वक्ताओं ने कहा कि लंबे समय से जारी संकट ने मणिपुर के लोगों पर सामाजिक, शैक्षणिक, आर्थिक और मनोवैज्ञानिक स्तर पर गहरा प्रभाव डाला है। उन्होंने उम्मीद जताई कि विशेष अंक समसामयिक चुनौतियों पर अधिक सूचित सार्वजनिक विमर्श को बढ़ावा देगा और मणिपुर से जुड़े मुद्दों पर आगे के <strong>साक्ष्य आधारित शोध</strong> को प्रोत्साहित करेगा।</p>]]></content:encoded>
    </item>
    <item>
      <title><![CDATA[मणिपुर यूनिवर्सिटी में मुफ्त मल्टी-स्पेशियलिटी हेल्थ कैंप, 300 से अधिक लाभान्वित]]></title>
      <description><![CDATA[<a href="https://www.mudarpan.in/news/manipur-university-free-multi-speciality-health-camp-300-beneficiaries"><img alt="मणिपुर यूनिवर्सिटी में मुफ्त मल्टी-स्पेशियलिटी हेल्थ कैंप, 300 से अधिक लाभान्वित" border="0" src="https://www.mudarpan.in/view/aug-2026/manipur-university-free-multi-speciality-health-camp-300-beneficiaries.jpg"></a><p>मणिपुर यूनिवर्सिटी हेल्थ सेंटर में आयोजित मुफ्त मल्टी-स्पेशियलिटी हेल्थ कैंप में 300 से अधिक छात्रों, शिक्षकों, कर्मचारियों और स्थानीय लोगों ने स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ लिया।</p>]]></description>
      <link><![CDATA[https://www.mudarpan.in/news/manipur-university-free-multi-speciality-health-camp-300-beneficiaries]]></link>
      <pubDate>Tue, 11 Aug 2026 08:30:58 GMT</pubDate>
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      <category><![CDATA[णपर यनवरसट]]></category>
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      <category><![CDATA[मलट सपशयलट हलथ कप]]></category>
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      <content:encoded><![CDATA[<p><img src="https://www.mudarpan.in/view/aug-2026/manipur-university-free-multi-speciality-health-camp-300-beneficiaries.jpg">&nbsp;</p>
<p class="isSelectedEnd"><strong>इंफाल, 7 अगस्त 2026:</strong> मणिपुर यूनिवर्सिटी में स्वास्थ्य सेवाओं को बढ़ावा देने और निवारक स्वास्थ्य देखभाल के प्रति जागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से शुक्रवार को मुफ्त मल्टी-स्पेशियलिटी हेल्थ कैंप का आयोजन किया गया। मणिपुर यूनिवर्सिटी हेल्थ सेंटर (MUHC) में आयोजित इस शिविर से विश्वविद्यालय के <strong>300 से अधिक छात्रों, शिक्षकों, अधिकारियों, कर्मचारियों, शोधार्थियों और स्थानीय निवासियों</strong> ने स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ उठाया।</p>
<p class="isSelectedEnd">इस स्वास्थ्य शिविर का संयुक्त आयोजन <strong>मणिपुर यूनिवर्सिटी हेल्थ सेंटर (MUHC), मणिपुर यूनिवर्सिटी स्टूडेंट्स यूनियन (MUSU) और शिजा हॉस्पिटल्स एंड रिसर्च इंस्टीट्यूट, लांगोल</strong> के सहयोग से किया गया।</p>
<p class="isSelectedEnd">शिविर में शिजा हॉस्पिटल्स की <strong>25 सदस्यीय मेडिकल टीम</strong> ने सेवाएं प्रदान कीं। टीम में मेडिसिन, ईएनटी, स्त्री रोग, मनोरोग, त्वचा रोग और नेत्र रोग सहित विभिन्न क्षेत्रों के <strong>आठ विशेषज्ञ चिकित्सक</strong> शामिल थे। इनके अलावा नर्सिंग अधिकारी, ऑप्टोमेट्रिस्ट, काउंसलर, इंटर्न और अन्य स्वास्थ्यकर्मी भी मौजूद रहे। इससे प्रतिभागियों को एक ही स्थान पर विभिन्न विशेषज्ञों से स्वास्थ्य परामर्श प्राप्त करने की सुविधा मिली।</p>
<p class="isSelectedEnd">शिविर के संचालन में मणिपुर यूनिवर्सिटी हेल्थ सेंटर की <strong>12 सदस्यीय टीम</strong> ने भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। टीम में मेडिकल ऑफिसर, डेंटल सर्जन, फिजियोथेरेपिस्ट, फार्मासिस्ट, स्टाफ नर्स, मेडिकल अटेंडेंट, एंबुलेंस चालक और अन्य स्वास्थ्यकर्मी शामिल थे।</p>
<p class="isSelectedEnd">मणिपुर यूनिवर्सिटी के <strong>कुलपति (प्रभारी) प्रो. आर.के. हेमकुमार सिंह</strong> ने स्वास्थ्य शिविर का दौरा किया और चिकित्सकों, स्वास्थ्यकर्मियों तथा लाभार्थियों से बातचीत की। उन्होंने इस सहयोगात्मक पहल की सराहना करते हुए मणिपुर यूनिवर्सिटी हेल्थ सेंटर, MUSU और शिजा हॉस्पिटल्स एंड रिसर्च इंस्टीट्यूट को बधाई दी।</p>
<p class="isSelectedEnd">प्रो. हेमकुमार सिंह ने कहा कि इस तरह की पहल निवारक स्वास्थ्य देखभाल को बढ़ावा देने और स्वस्थ कैंपस वातावरण तैयार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। उन्होंने कहा कि छात्रों, शिक्षकों और कर्मचारियों का स्वास्थ्य एवं कल्याण विश्वविद्यालय की शैक्षणिक प्रगति और समग्र विकास के लिए आवश्यक है।</p>
<p class="isSelectedEnd">मणिपुर यूनिवर्सिटी हेल्थ सेंटर की मेडिकल ऑफिसर <strong>डॉ. लामाबम पिंकी देवी</strong> ने कहा कि यह पहल विश्वविद्यालय समुदाय के समग्र स्वास्थ्य और कल्याण को सुनिश्चित करने की प्रतिबद्धता को दर्शाती है।</p>
<p class="isSelectedEnd">उन्होंने कहा, &ldquo;स्वस्थ कैंपस विश्वविद्यालय के सुचारू संचालन, शैक्षणिक उत्कृष्टता और समग्र विकास के लिए आवश्यक है। ऐसे स्वास्थ्य शिविरों के माध्यम से हमारा उद्देश्य गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराना, निवारक स्वास्थ्य जागरूकता को बढ़ावा देना और स्वस्थ शैक्षणिक वातावरण तैयार करना है।&rdquo;</p>
<p class="isSelectedEnd">MUSU के एक प्रतिनिधि ने विश्वविद्यालय प्रशासन और शिजा हॉस्पिटल्स का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि कैंपस में विशेषज्ञ स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध होने से विशेष रूप से छात्र समुदाय को काफी लाभ मिला है।</p>
<p class="isSelectedEnd">शिविर में शामिल शिक्षकों, अधिकारियों, कर्मचारियों और शोधार्थियों ने भी आयोजन की सराहना की। उन्होंने कहा कि कैंपस में अनुभवी विशेषज्ञ चिकित्सकों से परामर्श मिलने से समय और खर्च दोनों की बचत हुई तथा नियमित स्वास्थ्य जांच के प्रति भी प्रोत्साहन मिला। प्रतिभागियों ने भविष्य में ऐसे स्वास्थ्य शिविर नियमित रूप से आयोजित किए जाने की उम्मीद जताई।</p>
<p>मणिपुर यूनिवर्सिटी और शिजा हॉस्पिटल्स के बीच इस सहयोग ने संस्थागत साझेदारी के माध्यम से स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच मजबूत करने और विश्वविद्यालय समुदाय को अधिक स्वस्थ एवं उत्पादक बनाने के महत्व को रेखांकित किया।</p>]]></content:encoded>
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