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इंफाल, 22 जुलाई: मणिपुर विश्वविद्यालय, कांचीपुर स्थित DBT-BUILDER Instrumentation Facility ने मंगलवार को मायई लांबी कॉलेज, मणिपुर के बीएससी 8वें सेमेस्टर के विद्यार्थियों के लिए Laboratory Tour and Exposure Programme का आयोजन किया।
यह कार्यक्रम भारत सरकार के जैव प्रौद्योगिकी विभाग, DBT, के वित्तीय सहयोग से आयोजित किया गया। इसका उद्देश्य विद्यार्थियों को उन्नत शोध सुविधाओं, आधुनिक वैज्ञानिक उपकरणों और प्रयोगशाला आधारित अध्ययन की प्रत्यक्ष जानकारी उपलब्ध कराना था।
कार्यक्रम के दौरान विद्यार्थियों को जैविक विज्ञान और अंतर विषयक शोध में उपयोग किए जाने वाले विभिन्न उन्नत उपकरणों से परिचित कराया गया। विशेषज्ञों ने उपकरणों के सिद्धांत, कार्य प्रणाली और उनके व्यावहारिक उपयोगों की जानकारी दी।
विशेषज्ञों ने प्रयोगशाला सुरक्षा प्रोटोकॉल, मानक संचालन प्रक्रिया और अच्छी प्रयोगशाला पद्धतियों के महत्व पर भी प्रकाश डाला। विद्यार्थियों को बताया गया कि वैज्ञानिक शोध में अनुशासन, सावधानी और तकनीकी समझ अत्यंत आवश्यक हैं।
कार्यक्रम में शामिल विद्यार्थियों ने वैज्ञानिकों और तकनीकी कर्मचारियों से संवाद भी किया। इस बातचीत के माध्यम से उन्हें शोध पद्धति, प्रयोगशाला प्रबंधन और विज्ञान तथा शोध क्षेत्र में उपलब्ध करियर अवसरों के बारे में उपयोगी जानकारी मिली।
मणिपुर विश्वविद्यालय की DBT-BUILDER Instrumentation Facility पिछले कुछ वर्षों में क्षेत्र की एक महत्वपूर्ण उन्नत शोध प्रशिक्षण सुविधा के रूप में उभरी है। विशेष रूप से जैविक विज्ञान के क्षेत्र में यह सुविधा विद्यार्थियों, शोधार्थियों और शिक्षकों के लिए महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।
पिछले पांच वर्षों में इस सुविधा के माध्यम से 950 से अधिक संकाय सदस्यों, पीएचडी शोधार्थियों, स्नातकोत्तर और स्नातक विद्यार्थियों के साथ-साथ उच्चतर माध्यमिक स्तर के विद्यार्थियों को प्रयोगशाला प्रशिक्षण, कार्यशालाओं और एक्सपोजर कार्यक्रमों के जरिए प्रशिक्षित किया गया है।
इस सुविधा का समन्वय मणिपुर विश्वविद्यालय के प्राणी विज्ञान और वनस्पति विज्ञान विभागों के प्रो. जी.ए. शांतिबाला देवी, प्रो. क्ष. बिरला सिंह और प्रो. थ. बिनॉय सिंह द्वारा किया जा रहा है।
सुविधा के नियमित संचालन में चार समर्पित परियोजना कर्मचारी सहयोग कर रहे हैं। वे प्रयोगशाला के सुचारू संचालन और शैक्षणिक तथा शोध गतिविधियों के सफल क्रियान्वयन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
इस तरह के कार्यक्रमों से विद्यार्थियों को कक्षा आधारित अध्ययन और वास्तविक शोध वातावरण के बीच संबंध समझने में मदद मिलती है। यह पहल मणिपुर में विज्ञान शिक्षा और शोध संस्कृति को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।

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