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मणिपुर विश्वविद्यालय ने अपना 46वां स्थापना एवं सम्मान दिवस समारोह भव्य रूप से मनाया। कार्यक्रम में शिक्षकों, शोधकर्ताओं और सेवानिवृत्त कर्मचारियों को सम्मानित किया गया तथा विश्वविद्यालय की उपलब्धियों को रेखांकित किया गया।

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मणिपुर विश्वविद्यालय ने मनाया 46वां स्थापना एवं सम्मान दिवस, शिक्षकों और कर्मचारियों को किया सम्मानित
मणिपुर विश्वविद्यालय ने मनाया 46वां स्थापना एवं सम्मान दिवस, शिक्षकों और कर्मचारियों को किया सम्मानित
 

इंफाल, 5 जून 2026: मणिपुर विश्वविद्यालय ने शुक्रवार को अपने 46वें स्थापना-सह-सम्‍मान दिवस (Foundation-cum-Commendation Day) का आयोजन विश्वविद्यालय के कोर्ट हॉल में गरिमामय एवं उत्साहपूर्ण वातावरण में किया। यह समारोह विश्वविद्यालय की चार दशक से अधिक की शैक्षणिक यात्रा, संस्थागत उपलब्धियों और समाज के प्रति उसके योगदान का उत्सव था। इस अवसर पर शिक्षकों एवं कर्मचारियों को शिक्षा, शोध, नवाचार, पेटेंट और संस्थान के प्रति उत्कृष्ट सेवा के लिए सम्मानित किया गया।

मणिपुर विश्वविद्यालय की स्थापना 5 जून 1980 को मणिपुर विश्वविद्यालय अधिनियम, 1980 के अंतर्गत मात्र 10 स्नातकोत्तर विभागों के साथ हुई थी। समय के साथ यह पूर्वोत्तर भारत के प्रमुख उच्च शिक्षण संस्थानों में से एक बनकर उभरा है। 13 अक्टूबर 2005 को इसे केंद्रीय विश्वविद्यालय का दर्जा प्राप्त हुआ। वर्तमान में विश्वविद्यालय में 9 स्कूल ऑफ स्टडीज, 47 विभाग, 7 केंद्र और 10 सेल कार्यरत हैं।

शैक्षणिक सत्र 2025-26 में विश्वविद्यालय में 6,453 विद्यार्थियों ने प्रवेश लिया है तथा इसके अधीन 129 संबद्ध महाविद्यालय संचालित हो रहे हैं। विश्वविद्यालय को NAAC द्वारा B+ ग्रेड प्राप्त है और यह NIRF रैंकिंग के 101-150 बैंड में शामिल है।

कार्यक्रम में कुलपति प्रो. सुमित्रा फंजौबम मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहीं, जबकि कुलसचिव प्रो. एम. प्रेमजीत सिंह विशिष्ट अतिथि थे। समारोह की अध्यक्षता स्कूल ऑफ इंजीनियरिंग के डीन प्रो. एन. बसंता सिंह ने की।

मणिपुर विश्वविद्यालय ने मनाया 46वां स्थापना एवं सम्मान दिवस, शिक्षकों और कर्मचारियों को किया सम्मानित

अपने संबोधन में कुलपति प्रो. सुमित्रा फंजौबम ने कहा कि विश्वविद्यालय की उपलब्धियां शिक्षकों, प्रशासनिक अधिकारियों और सहायक कर्मचारियों के सामूहिक प्रयासों का परिणाम हैं। उन्होंने कहा कि विभिन्न चुनौतियों के बावजूद विश्वविद्यालय ने विद्यार्थियों के समग्र विकास और संस्थागत प्रगति को सुनिश्चित किया है।

उन्होंने परीक्षा अनुभाग की सराहना करते हुए कहा कि परीक्षाओं का आयोजन शैक्षणिक कैलेंडर के अनुरूप सफलतापूर्वक किया गया। साथ ही वित्त एवं शैक्षणिक अनुभागों के सुचारु संचालन तथा विभागाध्यक्षों द्वारा शैक्षणिक नियमों के प्रभावी क्रियान्वयन की भी प्रशंसा की। उन्होंने विश्वविद्यालय समुदाय से उत्कृष्टता और सतत विकास की दिशा में मिलकर कार्य करते रहने का आह्वान किया।

कुलसचिव प्रो. एम. प्रेमजीत सिंह ने विश्वविद्यालय प्रशासन, शिक्षकों, कर्मचारियों और विद्यार्थियों को बधाई देते हुए कहा कि विश्वविद्यालय की प्रगति प्रशासन, शिक्षकों और विद्यार्थियों के समर्पण, त्याग और कठिन परिश्रम पर आधारित है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि इसी प्रतिबद्धता के साथ विश्वविद्यालय भविष्य में और भी ऊंचाइयों को प्राप्त करेगा।

कार्यक्रम का स्वागत एवं मुख्य भाषण आंतरिक गुणवत्ता आश्वासन प्रकोष्ठ (IQAC) के निदेशक प्रो. ए. राजमणि सिंघा ने दिया। उन्होंने विश्वविद्यालय की स्थापना से लेकर वर्तमान तक की विकास यात्रा और प्रमुख उपलब्धियों पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि शोध, प्रकाशन, नवाचार और पेटेंट किसी भी विश्वविद्यालय की राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय पहचान को मजबूत बनाते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि NAAC और NIRF जैसी रैंकिंग महत्वपूर्ण हैं, लेकिन किसी विश्वविद्यालय की वास्तविक शक्ति उसके शोध और ज्ञान सृजन में निहित होती है।

अध्यक्षीय संबोधन में प्रो. एन. बसंता सिंह ने शोध, नवाचार और शैक्षणिक उत्कृष्टता के लिए सम्मानित शिक्षकों को बधाई दी। साथ ही सेवानिवृत्त शिक्षकों और कर्मचारियों की दीर्घकालीन सेवाओं को स्मरण करते हुए उनके स्वस्थ एवं सुखद भविष्य की कामना की।

कार्यक्रम का समापन विश्वविद्यालय के वरिष्ठ सहायक कुलसचिव (फैकल्टी) अनिसुल आलम द्वारा प्रस्तुत धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ।

स्मारिका का विमोचन

समारोह के दौरान जनसंपर्क अधिकारी (PRO) कार्यालय द्वारा प्रकाशित एक स्मारिका का भी औपचारिक विमोचन किया गया। इस स्मारिका में विश्वविद्यालय की प्रमुख उपलब्धियों, महत्वपूर्ण मील के पत्थरों और शैक्षणिक प्रगति का विस्तृत विवरण शामिल है।

स्मारिका में उल्लेख किया गया है कि विश्वविद्यालय ने शैक्षणिक सत्र 2021-22 से राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 को अपनाने वाले अग्रणी संस्थानों में स्थान प्राप्त किया। लगभग 80 प्रतिशत विद्यार्थियों को Academic Bank of Credits (ABC) ढांचे के अंतर्गत पंजीकृत किया गया है। इसके अतिरिक्त चार वर्षीय स्नातक कार्यक्रम (FYUP) के सफल कार्यान्वयन, विभागीय उपलब्धियों, संकाय सदस्यों की सफलताओं, विद्यार्थियों की उपलब्धियों तथा विभिन्न शोध एवं नवाचार परियोजनाओं का भी उल्लेख किया गया है।

राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सम्मानित शिक्षकों का अभिनंदन

समारोह का एक प्रमुख आकर्षण उन शिक्षकों का सम्मान था जिन्हें वर्ष 2024-25 के दौरान राज्य, राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रतिष्ठित पुरस्कार, सम्मान और फेलोशिप प्राप्त हुईं।

सम्मानित शिक्षकों में शामिल हैं:

  • डॉ. रमेशोरी युमनाम (प्राणी विज्ञान विभाग) – Congress of Zoology Medal 2024 एवं Young Scientist Gold Medal Award 2025।
  • प्रो. डॉ. लैश्रम संतोष सिंह (शारीरिक शिक्षा एवं खेल विज्ञान विभाग) – Peace and Sports Award 2025 तथा International Imminence Award in Physical Education।
  • प्रो. डॉ. के. लाल बिहारी सिंघा (वनस्पति विज्ञान विभाग) – ESDA India Fellow तथा Lifetime Achievement Earth Saviour Award 2024।
  • डॉ. पुखरामबाम लीलाबती देवी (नृत्य एवं संगीत विभाग) – मणिपुर राज्य कला अकादमी युवा प्रतिभा पुरस्कार तथा प्रसार भारती द्वारा टॉप ग्रेड कलाकार के रूप में मान्यता।
  • डॉ. सलाम हिमिका देवी (प्राणी विज्ञान विभाग) – Excellence in Global Skill Training Award 2025।
  • प्रो. डॉ. केथेल्लाकपम सनातोम्बी (जैव प्रौद्योगिकी विभाग) – Women Leadership in STEM Award 2024।

पेटेंट और नवाचारों को भी मिला सम्मान

वर्ष 2024-25 के दौरान प्रकाशित अथवा स्वीकृत पेटेंटों के लिए कई शिक्षकों को सम्मानित किया गया।

इनमें प्रमुख रूप से:

  • प्रो. डॉ. लिसाम शंजुकुमार सिंह एवं डॉ. थांगजम डेविस सिंह – कैंसर रोधी संरचना (Anticancer Composition) पर पेटेंट।
  • प्रो. डॉ. के. लाल बिहारी सिंघा – कृषि अवशेषों से बायोचार एवं सिरका उत्पादन तथा बांस एवं लकड़ी आधारित पायरोलिसिस मशीन संबंधी दो पेटेंट।
  • प्रो. डॉ. लैश्रम संतोष सिंह – Neuromuscular Monitoring and Stimulating Headband।
  • डॉ. टी. दीपमांजुरी देवी – Histological Hard Tissue Bordering and Sealing System।
  • डॉ. सैकत मुखर्जी – PCR एवं Gel Electrophoresis Apparatus।

सेवानिवृत्त कर्मचारियों का सम्मान

कार्यक्रम के दौरान विश्वविद्यालय की दीर्घकालीन सेवा देने वाले सेवानिवृत्त शिक्षकों और गैर-शिक्षण कर्मचारियों को भी सम्मानित किया गया।

सम्मानित सेवानिवृत्त शिक्षकों में प्रोफेसर सोइबाम इमोबा सिंह (भाषाविज्ञान विभाग), डॉ. थ. तंगकेश्वर सिंह (कंप्यूटर विज्ञान विभाग) तथा प्रोफेसर कोईजाम शांतिबाला देवी (मणिपुरी विभाग) शामिल रहे।

इसके अतिरिक्त प्रशासनिक अधिकारियों, चपरासियों और सफाई कर्मचारियों सहित 12 सेवानिवृत्त गैर-शिक्षण कर्मचारियों को भी विश्वविद्यालय की प्रगति में उनके अमूल्य योगदान के लिए सम्मानित किया गया।

46वां स्थापना-सह-सम्‍मान दिवस समारोह गर्व, उपलब्धियों और भविष्य के प्रति आशावाद के साथ संपन्न हुआ। इस अवसर पर मणिपुर विश्वविद्यालय ने शिक्षा, शोध, नवाचार और राष्ट्र निर्माण के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को दोहराते हुए उन व्यक्तियों के योगदान को सम्मानित किया, जिन्होंने संस्थान की गौरवशाली विरासत को सशक्त बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

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    Naorem Mohen

    Editor, MU Darpan

    Naorem Mohen is the Editor of MU Darpan. He covers news and updates on workshops, seminars, training programmes, academic and cultural events, research activities, and the achievements of students, faculty members, and alumni of Manipur University. His work focuses on highlighting developments in higher education, research, innovation, and the accomplishments of the university community.

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मू-दर्पण (MUDARPAN.IN) | मणिपुर विश्वविद्यालय की शैक्षणिक एवं शोध गतिविधियों का हिंदी अभिलेखागार — मणिपुर विश्वविद्यालय की शैक्षणिक, शोध एवं संस्थागत गतिविधियों का एक समर्पित हिंदी डिजिटल अभिलेखागार है, जो विश्वविद्यालय में आयोजित अकादमिक कार्यक्रमों, सम्मेलनों, संगोष्ठियों, कार्यशालाओं और महत्वपूर्ण आयोजनों का प्रामाणिक दस्तावेजीकरण प्रस्तुत करता है।