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इंफाल, 1 अक्टूबर 2026: मणिपुर विश्वविद्यालय के डॉ. आंबेडकर सेंटर ऑफ एक्सीलेंस (DACE) ने भारत सरकार के सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय के अंतर्गत अपना 5वां स्थापना दिवस-सह-सम्मान समारोह विश्वविद्यालय ऑडिटोरियम में आयोजित किया। कार्यक्रम में विभिन्न सरकारी सेवाओं में स्थान हासिल करने और राष्ट्रीय स्तर की परीक्षाओं में सफलता प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों की उपलब्धियों का जश्न मनाया गया।
कार्यक्रम में मणिपुर विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. आर.के. हेमाकुमार सिंह मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। मणिपुर लोक सेवा आयोग के पूर्व अध्यक्ष लेफ्टिनेंट जनरल (सेवानिवृत्त) कोंसम हिमालय सिंह, मणिपुर सरकार के कला एवं संस्कृति विभाग के पूर्व आयुक्त आर.के. निमाई सिंह, IAS, मणिपुर विश्वविद्यालय के स्कूल ऑफ इंजीनियरिंग के डीन प्रो. एन. बसंता सिंह, स्कूल ऑफ लाइफ साइंसेज के डीन प्रो. एन. मोहिलाल मीतेई तथा इंफाल पश्चिम के उपायुक्त मायांगलंबम राजकुमार सिंह, IAS विशिष्ट अतिथि के रूप में शामिल हुए। कार्यक्रम की अध्यक्षता DACE के कार्यक्रम समन्वयक डॉ. सलाम शांतिकुमार सिंह ने की।
कुलपति प्रो. आर.के. हेमाकुमार सिंह ने अपने संबोधन में प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी में अनुशासन और ईमानदारी के महत्व पर जोर दिया। उन्होंने अभ्यर्थियों से अपनी ज्ञान संबंधी कमियों को पहचानने, विशेषज्ञों से मार्गदर्शन लेने और अनुमान के आधार पर तैयारी करने से बचने की अपील की। उन्होंने कहा कि समय की पाबंदी, नियमित उपस्थिति और समय का प्रभावी उपयोग गंभीर तैयारी के लिए आवश्यक हैं।
उन्होंने DACE के कार्यों और विद्यार्थियों की उपलब्धियों की सराहना करते हुए केंद्र को और मजबूत बनाने की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि अधिक अकादमिक सहयोग, विशेषज्ञों की भागीदारी और बेहतर अध्ययन वातावरण के माध्यम से केंद्र अभ्यर्थियों को विभिन्न स्तरों की प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए अधिक प्रभावी ढंग से तैयार कर सकता है।
इंफाल पश्चिम के उपायुक्त मायांगलंबम राजकुमार सिंह ने विद्यार्थियों से अपनी सफलताओं और असफलताओं को आत्ममंथन तथा विकास के अवसर के रूप में देखने का आग्रह किया। DACE में सिविल सेवा अभ्यर्थियों के साथ अपने पूर्व संवाद को याद करते हुए उन्होंने कहा कि सार्वजनिक सेवा में आने वाले युवाओं को मौजूदा व्यवस्थाओं को समझने और उन्हें बेहतर बनाने में योगदान देने के अवसर मिलते हैं।
उन्होंने सरकारी योजनाओं और जनसेवा वितरण के उदाहरण देते हुए विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं की व्यवस्थाओं की मजबूती और सीमाओं को समझने की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने शासन में तकनीक और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की बढ़ती भूमिका का भी उल्लेख किया। हालांकि, उन्होंने कहा कि तकनीक का उद्देश्य मानव निर्णय क्षमता को समाप्त करना नहीं, बल्कि व्यवस्था और जनसेवा को मजबूत करना होना चाहिए।
लेफ्टिनेंट जनरल (सेवानिवृत्त) कोंसम हिमालय सिंह ने सफल अभ्यर्थियों को बधाई देते हुए कहा कि सफलता को केवल किसी विशेष पद हासिल करने तक सीमित नहीं किया जाना चाहिए। उन्होंने वास्तविक उपलब्धि को जिम्मेदारी, विनम्रता, चरित्र और समाज की सेवा से जोड़ा।
उन्होंने कहा कि किसी परीक्षा में सफलता हासिल करना यात्रा का अंत नहीं, बल्कि एक लंबी यात्रा की शुरुआत है। उन्होंने विद्यार्थियों से समर्पण, अनुशासन और दृढ़ता के साथ चुनौतियों का सामना करने का आग्रह किया। DACE को मणिपुर की प्रतिभाओं के लिए “हीरा तराशने वाले केंद्र” के रूप में विकसित करने की संभावना बताते हुए उन्होंने गुणवत्तापूर्ण कोचिंग, विशेषज्ञ मार्गदर्शन और बेहतर बुनियादी ढांचे की आवश्यकता पर जोर दिया।
आर.के. निमाई सिंह ने बदलते शैक्षणिक वातावरण और युवा पीढ़ी के सामने बढ़ती प्रतिस्पर्धा पर विचार साझा किए। उन्होंने अपने छात्र जीवन के अनुभवों का उल्लेख करते हुए अनुशासन, व्यवस्थित तैयारी, समय प्रबंधन और पढ़ाई के साथ अन्य गतिविधियों के संतुलन को महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने विद्यार्थियों को समाज और उन संस्थानों के प्रति अपनी जिम्मेदारियों की भी याद दिलाई, जो उनके व्यक्तित्व और भविष्य को आकार देने में योगदान देते हैं।
स्कूल ऑफ इंजीनियरिंग के डीन प्रो. एन. बसंता सिंह ने सफल अभ्यर्थियों को बधाई दी और DACE के शिक्षकों तथा कर्मचारियों के योगदान की सराहना की। उन्होंने कहा कि प्रतियोगी परीक्षा में सफलता एक महत्वपूर्ण पड़ाव है, लेकिन इससे बड़ी जिम्मेदारियों की शुरुआत होती है। उन्होंने सफल अभ्यर्थियों से अपने कार्यक्षेत्र में ईमानदारी और निष्ठा बनाए रखने तथा समाज के लिए सार्थक योगदान देने का आग्रह किया।
प्रो. बसंता सिंह ने DACE के माध्यम से GATE कोचिंग शुरू करने की संभावनाओं का अध्ययन करने का प्रस्ताव भी रखा। उन्होंने बताया कि विभिन्न संस्थानों में भर्ती और अन्य अवसरों के लिए GATE स्कोर का उपयोग किया जाता है। ऐसे में GATE कोचिंग मणिपुर के इंजीनियरिंग विद्यार्थियों और अभ्यर्थियों के लिए एक महत्वपूर्ण अवसर बन सकती है।
स्कूल ऑफ लाइफ साइंसेज के डीन प्रो. एन. मोहिलाल मीतेई ने प्रतियोगी परीक्षाओं और जीवन की चुनौतियों का सामना करने में दृढ़ता और मानसिक तैयारी के महत्व पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि कठिनाइयां और निराशा विकास प्रक्रिया का हिस्सा हैं और सफलता काफी हद तक इस बात पर निर्भर करती है कि व्यक्ति विपरीत परिस्थितियों का सामना किस तरह करता है।
उन्होंने विद्यार्थियों से भय, चिंता या पिछली सीमाओं को अपनी क्षमता निर्धारित नहीं करने देने की अपील की। DACE की भूमिका का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि केंद्र को युवाओं का मार्गदर्शन करते हुए उन्हें बाधाओं से आगे बढ़ने और व्यापक अवसरों तक पहुंच बनाने के लिए तैयार करना चाहिए।
DACE की प्रगति और उपलब्धियों की रिपोर्ट प्रस्तुत करते हुए कार्यक्रम समन्वयक डॉ. सलाम शांतिकुमार सिंह ने बताया कि केंद्र के 27 विद्यार्थियों ने विभिन्न सरकारी सेवाओं में स्थान हासिल किया है, जबकि 16 विद्यार्थियों ने NET/JRF की परीक्षा उत्तीर्ण की है। उन्होंने कहा कि केंद्र ने सरकारी सेवाओं में चयनित विद्यार्थियों के साथ NET/JRF क्वालिफायर विद्यार्थियों को भी सम्मानित करने का निर्णय लिया, क्योंकि उनकी शैक्षणिक उपलब्धियां उच्च शिक्षा के क्षेत्र में आगे के अवसर खोल सकती हैं।
उन्होंने बताया कि DACE में प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए नियमित निगरानी, उपस्थिति की समीक्षा और विद्यार्थियों के साथ फॉलो-अप सहित एक व्यवस्थित कोचिंग कार्यक्रम संचालित किया जाता है। उन्होंने कहा कि योजना के तहत कोचिंग निःशुल्क उपलब्ध कराई जाती है, लेकिन विद्यार्थियों से अनुशासन, नियमित उपस्थिति और तैयारी के प्रति प्रतिबद्धता की अपेक्षा की जाती है।
डॉ. शांतिकुमार ने केंद्र की संस्थागत यात्रा का उल्लेख करते हुए बताया कि मणिपुर विश्वविद्यालय ने भारत सरकार के सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय के साथ निःशुल्क कोचिंग पहल के तहत जुड़कर कार्य शुरू किया था। उन्होंने कहा कि प्रदर्शन के आकलन के बाद केंद्र को अपनी गतिविधियां जारी रखने के लिए तीन वर्ष का अतिरिक्त विस्तार मिला है।
उन्होंने यह भी बताया कि DACE को सौंपे गए विभिन्न योजनाओं के तहत केंद्र अपनी कोचिंग गतिविधियों का विस्तार करेगा। इनमें पात्र दिव्यांग (PwD) अभ्यर्थियों के लिए कोचिंग कार्यक्रम भी शामिल हैं।
हालांकि, कार्यक्रम समन्वयक ने DACE के सामने मौजूद बुनियादी ढांचे से जुड़ी चुनौतियों की ओर भी ध्यान आकर्षित किया। उन्होंने बताया कि केंद्र के पास वर्तमान में केवल दो कक्षाएं हैं, जिनकी संयुक्त क्षमता लगभग 80 विद्यार्थियों की है। इससे प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले अधिक अभ्यर्थियों को शामिल करने में कठिनाई होती है। उन्होंने अतिरिक्त स्थान तथा स्वच्छता और जलापूर्ति जैसी बुनियादी सुविधाओं में सुधार के लिए विश्वविद्यालय से सहयोग मांगा।
इससे पहले DACE के संकाय सदस्य हेइग्रुजम प्रेमकुमार सिंह ने स्वागत भाषण दिया। उन्होंने अतिथियों, शिक्षकों, सफल अभ्यर्थियों, पूर्व विद्यार्थियों और वर्तमान विद्यार्थियों का स्वागत करते हुए कहा कि समारोह में मनाई जा रही उपलब्धियां वर्तमान अभ्यर्थियों को बड़े सपने देखने और अपने लक्ष्यों की दिशा में निरंतर मेहनत करने के लिए प्रेरित करेंगी।
सफल पूर्व विद्यार्थियों की ओर से मणिपुर सचिवालय सेवा (MSS) की एन. मलेमंगनबी चानू ने अपने अनुभव साझा किए। उन्होंने बताया कि वह सपने और उम्मीदों के साथ DACE में आई थीं, लेकिन उनके मन में कई संदेह और अनिश्चितताएं भी थीं। उन्होंने कहा कि केंद्र ने उन्हें केवल प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी और मार्गदर्शन ही नहीं दिया, बल्कि आगे बढ़ते रहने और सबसे महत्वपूर्ण रूप से खुद पर विश्वास करने का आत्मविश्वास भी दिया।
उन्होंने डॉ. सलाम शांतिकुमार सिंह, संकाय सदस्यों और मार्गदर्शकों के मार्गदर्शन, धैर्य और प्रोत्साहन के लिए आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि सम्मान समारोह उनके लिए केवल सम्मान नहीं, बल्कि यह याद दिलाने वाला अवसर भी है कि उनकी यात्रा कहां से शुरू हुई, वे कितनी दूर पहुंची हैं और किन लोगों ने इस यात्रा में उनकी मदद की।
कार्यक्रम के दौरान सफल अभ्यर्थियों को सम्मानित किया गया तथा केंद्र से जुड़े संकाय सदस्यों को भी उनके योगदान के लिए मान्यता दी गई। समारोह में समूह गीत और अन्य सांस्कृतिक कार्यक्रम भी प्रस्तुत किए गए।
इस अवसर पर “Success Story of Dr Ambedkar Centre of Excellence, Manipur University” शीर्षक वाली पुस्तिका का भी विमोचन किया गया। अरबिंद सलाम ने धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत किया।
DACE का पांचवां स्थापना दिवस समारोह एक ओर केंद्र द्वारा प्रतियोगी परीक्षाओं के अभ्यर्थियों को संरचित कोचिंग और अकादमिक सहयोग उपलब्ध कराने में निभाई जा रही भूमिका को रेखांकित करता है, वहीं दूसरी ओर मणिपुर के विद्यार्थियों के लिए बेहतर बुनियादी ढांचे और व्यापक कोचिंग अवसरों की आवश्यकता को भी सामने लाता है।

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