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इंफाल, 18 सितंबर 2026: मणिपुर यूनिवर्सिटी में आयोजित हिंदी पखवाड़ा 2026 का शुक्रवार को समापन हो गया। विश्वविद्यालय के राजभाषा प्रकोष्ठ (Official Language Cell) की ओर से कोर्ट हॉल में आयोजित समापन समारोह में विश्वविद्यालय के अधिकारियों और कर्मचारियों को दैनिक प्रशासनिक कार्यों में सरल, सहज और व्यावहारिक हिंदी के प्रयोग के लिए प्रोत्साहित किया गया।
समारोह में मणिपुर यूनिवर्सिटी के कुलपति प्रो. आर.के. हेमाकुमार सिंह मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। धनमंजुरी यूनिवर्सिटी के स्कूल ऑफ ह्यूमैनिटीज के डीन प्रो. सागोलसेम लानचेनबा मीतेई विशेष अतिथि थे। वहीं मणिपुर यूनिवर्सिटी के रजिस्ट्रार प्रो. मोइरांगथेम प्रेमजीत सिंह और फाइनेंस ऑफिसर प्रो. लैश्राम राजेंद्रकुमार सिंह सम्मानित अतिथि के रूप में मौजूद रहे। समारोह की अध्यक्षता मणिपुर यूनिवर्सिटी के स्कूल ऑफ ह्यूमन एंड एनवायरनमेंटल साइंसेज के पूर्व डीन प्रो. सोइबाम जिबोनकुमार सिंह ने की।
सरल और व्यावहारिक हिंदी के प्रयोग पर जोर
समारोह का स्वागत भाषण देते हुए राजभाषा प्रकोष्ठ की असिस्टेंट डायरेक्टर डॉ. बिनिता अकोइजम ने कहा कि हिंदी पखवाड़े का उद्देश्य विश्वविद्यालय के अधिकारियों और कर्मचारियों को अपने दैनिक आधिकारिक कार्यों में धीरे-धीरे हिंदी का प्रयोग बढ़ाने के लिए प्रोत्साहित करना है।
उन्होंने स्पष्ट किया कि हिंदी को बढ़ावा देने का अर्थ अंग्रेजी को हटाना या किसी एक भाषा के अनिवार्य एवं एकमात्र प्रयोग पर जोर देना नहीं है। इसका उद्देश्य जहां संभव हो, वहां सरल और आम तौर पर समझी जाने वाली हिंदी के प्रयोग को बढ़ावा देना है, ताकि भारत सरकार द्वारा निर्धारित राजभाषा लक्ष्यों को पूरा किया जा सके।
डॉ. बिनिता ने बताया कि गृह मंत्रालय ने अपने प्रशासनिक नियंत्रण के अधीन मंत्रालयों और संगठनों को सितंबर को हिंदी माह के रूप में मनाने का निर्देश दिया है। यह निर्देश विश्वविद्यालय द्वारा कार्यक्रम जारी किए जाने के बाद प्राप्त हुआ था। इसलिए इस वर्ष 1 से 15 सितंबर तक निर्धारित गतिविधियों को हिंदी पखवाड़े के रूप में आयोजित किया गया। उन्होंने कहा कि आने वाले वर्षों में विश्वविद्यालय नए निर्देशों के अनुरूप हिंदी माह मनाने का प्रयास करेगा।
हिंदी प्रतियोगिताओं में 30 प्रतिभागियों ने लिया हिस्सा
हिंदी पखवाड़ा 2026 के दौरान विश्वविद्यालय में विभिन्न प्रतियोगिताओं का आयोजन किया गया। इनमें स्वरचित हिंदी कविता पाठ, आशुभाषण, श्रुतिलेख, सुलेख और हिंदी दक्षता प्रतियोगिताएं शामिल थीं।
इन प्रतियोगिताओं में कुल 30 प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया। इसके अलावा 17 प्रतिभागियों का चयन सांत्वना पुरस्कारों के लिए किया गया।
राजभाषा प्रकोष्ठ ने वित्तीय वर्ष 2025-26 के दौरान आधिकारिक नोटिंग और ड्राफ्टिंग में हिंदी के प्रयोग का भी अलग से मूल्यांकन किया। इस श्रेणी में छह प्रविष्टियां प्राप्त हुईं। इनमें शीर्ष तीन प्रदर्शन करने वाले प्रतिभागियों को पुरस्कार प्रदान किए गए, जबकि अन्य प्रतिभागियों को सांत्वना पुरस्कार दिए गए।
हिंदी के लिए संदर्भ पुस्तिका जारी
डॉ. बिनिता अकोइजम ने विश्वविद्यालय के कर्मचारियों से अपील की कि वे अपने आधिकारिक कार्यों में हिंदी के प्रयोग की शुरुआत छोटे स्तर से करें। उन्होंने कहा कि व्यक्तिगत स्तर पर किए गए ऐसे प्रयास धीरे-धीरे मंत्रालय को भेजी जाने वाली त्रैमासिक राजभाषा रिपोर्ट में विश्वविद्यालय के प्रदर्शन को बेहतर बनाने में योगदान देंगे।
उन्होंने यह भी बताया कि प्रशासनिक कार्यों में हिंदी के शब्दों और अभिव्यक्तियों के प्रयोग में सहायता के लिए राजभाषा प्रकोष्ठ द्वारा तैयार संदर्भ सामग्री उपलब्ध है।
समारोह के दौरान विश्वविद्यालय के आधिकारिक कार्यों में हिंदी के प्रयोग को सरल और सुविधाजनक बनाने के उद्देश्य से तैयार एक संदर्भ पुस्तिका का भी अतिथियों द्वारा विमोचन किया गया।
दैनिक कार्यों में भाषा के स्वाभाविक प्रयोग पर जोर
समारोह को संबोधित करते हुए कुलपति प्रो. आर.के. हेमाकुमार सिंह ने कहा कि किसी भाषा का वास्तविक विकास तभी संभव है जब उसका प्रयोग केवल औपचारिक समारोहों तक सीमित न रहे, बल्कि वह दैनिक संवाद और आधिकारिक कार्यों का स्वाभाविक हिस्सा बने।
उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय प्रशासन में सरल, स्पष्ट और आसानी से समझी जाने वाली हिंदी के प्रयोग से आधिकारिक संचार की दक्षता और प्रभावशीलता में सुधार हो सकता है।
कुलपति ने हिंदी पखवाड़े के आयोजन के लिए राजभाषा प्रकोष्ठ को बधाई दी तथा प्रतियोगिताओं में भाग लेने वाले प्रतिभागियों और पुरस्कार विजेताओं को शुभकामनाएं दीं।
हिंदी बोलने में झिझक न करने की अपील
विशेष अतिथि प्रो. सागोलसेम लानचेनबा मीतेई ने कर्मचारियों और विद्यार्थियों से हिंदी बोलने में व्याकरण या उच्चारण को लेकर झिझक नहीं करने की अपील की। उन्होंने कहा कि किसी भी भाषा को नियमित प्रयोग के माध्यम से ही बेहतर ढंग से सीखा जा सकता है।
उन्होंने कहा कि हिंदी बोलने के दौरान क्षेत्रीय प्रभाव या उच्चारण की भिन्नता को संचार में बाधा नहीं बनने देना चाहिए। मणिपुर से बाहर यात्रा करने और देश के विभिन्न हिस्सों के लोगों के साथ संवाद के दौरान हिंदी की व्यावहारिक उपयोगिता का उल्लेख करते हुए उन्होंने विश्वविद्यालय समुदाय से अधिक आत्मविश्वास के साथ हिंदी का प्रयोग करने का आग्रह किया।
उन्होंने आधिकारिक कार्यों में उल्लेखनीय रूप से हिंदी का प्रयोग करने वाले कर्मचारियों के लिए वार्षिक पुरस्कार शुरू करने का सुझाव भी दिया।
हिंदी पखवाड़ा प्रशासनिक कार्यों की समीक्षा का अवसर
रजिस्ट्रार प्रो. मोइरांगथेम प्रेमजीत सिंह ने कहा कि हिंदी पखवाड़ा केवल भाषा से जुड़े कार्यक्रम आयोजित करने का अवसर नहीं है, बल्कि यह आधिकारिक कार्यों में हिंदी के वर्तमान प्रयोग की समीक्षा करने और उसे आगे बढ़ाने के उपायों पर विचार करने का अवसर भी है।
उन्होंने कहा कि पत्रों, कार्यालय आदेशों, नोटिस, आधिकारिक टिप्पणियों और अन्य दस्तावेजों में सरल एवं परिचित हिंदी के प्रयोग से विश्वविद्यालय को गृह मंत्रालय के राजभाषा विभाग के निर्देशों का अधिक प्रभावी ढंग से पालन करने में मदद मिलेगी।
उन्होंने राजभाषा प्रकोष्ठ के प्रयासों की सराहना की और सभी प्रतिभागियों एवं पुरस्कार विजेताओं को बधाई दी।
भाषा को बताया विभिन्न क्षेत्रों के बीच सेतु
फाइनेंस ऑफिसर प्रो. लैश्राम राजेंद्रकुमार सिंह ने कहा कि भाषा विभिन्न क्षेत्रों और भाषाई पृष्ठभूमि के लोगों को जोड़ने का माध्यम है। अनेक भाषाओं वाले देश में हिंदी विभिन्न क्षेत्रों के लोगों के बीच संवाद स्थापित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
उन्होंने कहा कि सरल भाषा का प्रयोग आधिकारिक संचार को अधिक आसान और सुलभ बना सकता है। उन्होंने हिंदी पखवाड़े के दौरान विभिन्न गतिविधियों के सफल आयोजन के लिए राजभाषा प्रकोष्ठ की सराहना की और कर्मचारियों से औपचारिक आयोजन समाप्त होने के बाद भी हिंदी के प्रयोग को जारी रखने का आग्रह किया।
‘वर्किंग हिंदी’ को बताया उपयोगी
समारोह की अध्यक्षता करते हुए प्रो. सोइबाम जिबोनकुमार सिंह ने अनौपचारिक और संवादात्मक अंदाज में अपने विचार रखे। उन्होंने कहा कि हिंदी बोलने के लिए पूर्ण व्याकरणिक शुद्धता या धाराप्रवाह बोलना अनिवार्य नहीं होना चाहिए।
उन्होंने कहा कि यदि लोग एक-दूसरे की बात समझ पा रहे हैं, तो कार्यात्मक या ‘वर्किंग हिंदी’ भी संवाद के उद्देश्य को पूरा करती है। उन्होंने हिंदी सीखने और इसके प्रयोग से जुड़े अपने अनुभव साझा करते हुए कहा कि मणिपुर से देश के दूसरे हिस्सों की यात्रा करने वाले लोगों के लिए हिंदी का ज्ञान विशेष रूप से उपयोगी हो सकता है।
उन्होंने आधिकारिक कार्यों में अधिक हिंदी का प्रयोग करने वाले कर्मचारियों को सम्मानित करने के प्रस्ताव का समर्थन किया और सभी विजेताओं एवं प्रतिभागियों को बधाई दी।
विजेताओं और प्रतिभागियों को पुरस्कार व प्रमाणपत्र
समापन समारोह के दौरान विभिन्न प्रतियोगिताओं के विजेताओं और प्रतिभागियों को पुरस्कार एवं प्रमाणपत्र प्रदान किए गए। वक्ताओं ने विश्वविद्यालय के अधिकारियों, शिक्षकों और कर्मचारियों की सक्रिय भागीदारी की सराहना की।
उन्होंने उम्मीद जताई कि हिंदी पखवाड़े के दौरान पैदा हुई रुचि विश्वविद्यालय के नियमित प्रशासनिक कार्यों में हिंदी के निरंतर प्रयोग के रूप में दिखाई देगी।
3 सितंबर को हुआ था उद्घाटन
मणिपुर यूनिवर्सिटी में हिंदी पखवाड़ा 2026 का उद्घाटन 3 सितंबर को किया गया था। उद्घाटन कार्यक्रम के दौरान एक तकनीकी सत्र भी आयोजित हुआ, जिसमें मणिपुर यूनिवर्सिटी के प्रोग्रामर डॉ. इरेन्गबाम तिलोकचंद सिंह ने हिंदी और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) विषय पर व्याख्यान दिया था।
इस प्रकार हिंदी पखवाड़े के दौरान प्रतियोगिताओं, तकनीकी सत्रों और प्रशासनिक कार्यों में हिंदी के प्रयोग को लेकर जागरूकता गतिविधियों के माध्यम से विश्वविद्यालय समुदाय को हिंदी के व्यावहारिक उपयोग के लिए प्रोत्साहित किया गया।

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