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मणिपुर विश्वविद्यालय और ICAR-राष्ट्रीय मत्स्य आनुवंशिक संसाधन ब्यूरो, लखनऊ के सहयोग से लाइव जर्मप्लाज्म रिसोर्स सेंटर का शुभारंभ किया गया। यह केंद्र पूर्वोत्तर क्षेत्र की स्वदेशी मछली प्रजातियों के संरक्षण, अनुसंधान और सतत मत्स्य पालन को बढ़ावा देगा।

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मणिपुर विश्वविद्यालय में लाइव जर्मप्लाज्म रिसोर्स सेंटर का शुभारंभ, जलीय जैव विविधता संरक्षण को मिलेगा बढ़ावा
मणिपुर विश्वविद्यालय में लाइव जर्मप्लाज्म रिसोर्स सेंटर का शुभारंभ, जलीय जैव विविधता संरक्षण को मिलेगा बढ़ावा
 

इम्फाल, 6 मई: मणिपुर विश्वविद्यालय के प्राणी विज्ञान विभाग ने भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) के राष्ट्रीय मत्स्य आनुवंशिक संसाधन ब्यूरो (NBFGR), लखनऊ के सहयोग से मणिपुर में लाइव जर्मप्लाज्म रिसोर्स सेंटर के स्थापना कार्यक्रम का आयोजन किया। कार्यक्रम बुधवार सुबह विश्वविद्यालय परिसर के पश्चिमी क्षेत्र स्थित माहसीर हैचरी के निकट आयोजित किया गया।

इस पहल का समन्वयन मणिपुर विश्वविद्यालय के प्राणी विज्ञान विभाग की सहायक प्रोफेसर डॉ. रमेशोरी युमनाम ने किया, जो लाइव जर्मप्लाज्म रिसोर्स सेंटर परियोजना की समन्वयक भी हैं। कार्यक्रम में मणिपुर विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. नाओरेम लोकेन्द्र सिंह मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे।

लाइव जर्मप्लाज्म रिसोर्स सेंटर का उद्देश्य मणिपुर और पूर्वोत्तर भारत के जलीय आनुवंशिक संसाधनों के संरक्षण, विकास और वैज्ञानिक प्रबंधन को सुदृढ़ करना है। विशेष रूप से यह केंद्र क्षेत्र की स्थानिक (Endemic) और स्वदेशी मछली प्रजातियों के संरक्षण तथा संवर्धन पर ध्यान केंद्रित करेगा।

अपने संबोधन में कुलपति प्रो. नाओरेम लोकेन्द्र सिंह ने कहा कि मणिपुर झीलों और जल निकायों से समृद्ध प्रदेश है, जहां मत्स्य पालन की एक लंबी परंपरा रही है। उन्होंने कहा कि राज्य के लोगों के पास मत्स्य पालन से जुड़ा समृद्ध पारंपरिक ज्ञान और अनुभव मौजूद है, जिसने इस क्षेत्र को लंबे समय से जीवंत बनाए रखा है।

उन्होंने कहा, “मणिपुर जैव विविधता के दृष्टिकोण से अत्यंत समृद्ध क्षेत्र है और यहां अनेक प्रकार की स्वदेशी मछली प्रजातियां पाई जाती हैं। ऐसे में लाइव जर्मप्लाज्म रिसोर्स सेंटर की स्थापना हमारी जलीय जैव विविधता के संरक्षण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। यह पहल न केवल दुर्लभ और स्वदेशी प्रजातियों के संरक्षण में सहायक होगी, बल्कि मत्स्य क्षेत्र के विकास को भी गति देगी, जिससे राज्य की अर्थव्यवस्था और समग्र विकास को मजबूती मिलेगी।”

उन्होंने यह भी कहा कि भविष्य में यह केंद्र शोध, प्रशिक्षण और वैज्ञानिक सहयोग का एक महत्वपूर्ण मंच बनेगा, जिससे जलीय संसाधनों के सतत उपयोग और संरक्षण के नए अवसर विकसित होंगे।

यह केंद्र जैव विविधता संरक्षण, सतत मत्स्य पालन (Sustainable Aquaculture), उन्नत अनुसंधान तथा जलीय संसाधन प्रबंधन में क्षमता निर्माण को बढ़ावा देने के उद्देश्य से स्थापित किया गया है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह पहल पूर्वोत्तर भारत की समृद्ध जलीय जैव विविधता को संरक्षित करने के साथ-साथ वैज्ञानिक अनुसंधान और स्थानीय समुदायों की आजीविका को भी सशक्त बनाएगी।

मणिपुर विश्वविद्यालय और ICAR-NBFGR के बीच यह सहयोग जलीय आनुवंशिक संसाधनों के संरक्षण और वैज्ञानिक प्रबंधन के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है। इससे न केवल शोध गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा, बल्कि राज्य और क्षेत्र में मत्स्य क्षेत्र के दीर्घकालिक विकास का मार्ग भी प्रशस्त होगा।

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    Naorem Mohen

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    Naorem Mohen is the Editor of MU Darpan. He covers news and updates on workshops, seminars, training programmes, academic and cultural events, research activities, and the achievements of students, faculty members, and alumni of Manipur University. His work focuses on highlighting developments in higher education, research, innovation, and the accomplishments of the university community.

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