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मणिपुर विश्वविद्यालय में लोकतक झील की फुमदी बायोमास को हरित ऊर्जा, बायोचार और बायो-विनेगर में बदलने संबंधी MoEFCC समर्थित परियोजना की पहली परामर्श बैठक आयोजित हुई। विशेषज्ञों ने सतत आजीविका और पर्यावरण संरक्षण पर चर्चा की।

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मणिपुर विश्वविद्यालय में लोकतक फुमदी बायोमास को हरित ऊर्जा में बदलने पर राष्ट्रीय परियोजना की बैठक
मणिपुर विश्वविद्यालय में लोकतक फुमदी बायोमास को हरित ऊर्जा में बदलने पर राष्ट्रीय परियोजना की बैठक

इंफाल, 8 जून 2026। पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय (MoEFCC), भारत सरकार द्वारा प्रायोजित परियोजना “मणिपुर में आजीविका संवर्धन हेतु लोकतक झील की फुमदी बायोमास का हरित ऊर्जा, बायोचार और विनेगर में सतत रूपांतरण” के तहत पहली परामर्श बैठक सोमवार को मणिपुर विश्वविद्यालय, कंचीपुर में आयोजित की गई।

इस परियोजना का समन्वयन मणिपुर विश्वविद्यालय के वनस्पति विज्ञान विभाग के प्रोफेसर क्षे. लाल बिहारी द्वारा किया जा रहा है। परियोजना का उद्देश्य लोकतक झील में मौजूद फुमदी (तैरते जैविक द्वीपों) के वैज्ञानिक प्रबंधन के साथ-साथ उन्हें उपयोगी उत्पादों में परिवर्तित कर स्थानीय समुदायों के लिए सतत आजीविका के अवसर विकसित करना है।

कार्यक्रम में मणिपुर विश्वविद्यालय की कार्यवाहक कुलपति प्रो. सुमित्रा फंजौबम ने संरक्षक के रूप में भाग लिया। बिष्णुपुर जिले की उपायुक्त स्मृति पूजा एलांगबम (आईएएस) मुख्य अतिथि तथा लोकतक विकास प्राधिकरण के निदेशक एच. बालकृष्ण सिंह (एमसीएस) विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित रहे।

बैठक में जीवन विज्ञान संकाय के अधिष्ठाता प्रो. एन. मोहिलाल मेइतेई, विश्वविद्यालय के कुलसचिव प्रो. एम. प्रेमजीत सिंह, विश्वविद्यालय अभियंता, परियोजना अधिकारी, सह-अन्वेषक, कार्यान्वयन सहयोगी संस्थाओं के प्रतिनिधि तथा परियोजना कर्मियों ने भाग लिया।

परामर्श बैठक के दौरान पायलट परियोजना के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए विभिन्न रणनीतियों पर विस्तृत चर्चा की गई। प्रतिभागियों ने लोकतक झील के पारिस्थितिक संरक्षण के साथ-साथ फुमदी बायोमास के उत्पादक उपयोग के माध्यम से आजीविका सृजन को बढ़ावा देने के उपायों पर विचार-विमर्श किया। चर्चा में परिपत्र अर्थव्यवस्था (Circular Economy) की अवधारणा को परियोजना के केंद्र में रखने पर बल दिया गया।

परियोजना सलाहकार प्रो. बी.के. तिवारी सहित अन्य विशेषज्ञों और हितधारकों ने भी अपने सुझाव प्रस्तुत किए। वक्ताओं ने इस बात पर जोर दिया कि पर्यावरणीय चुनौतियों से निपटने और सतत विकास को बढ़ावा देने के लिए शैक्षणिक संस्थानों, सरकारी एजेंसियों तथा स्थानीय समुदायों के बीच सहयोग अत्यंत आवश्यक है।

यह परियोजना एक बहु-संस्थागत साझेदारी के तहत संचालित की जा रही है, जिसमें मणिपुर विश्वविद्यालय, राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान (NIT) नागालैंड, लोकतक विकास प्राधिकरण, कांगलेई एनवायरनमेंट एंड लाइवलीहुड फाउंडेशन तथा सोसाइटी फॉर ईको-रेस्टोरेशन एंड लाइवलीहुड शामिल हैं।

परियोजना के प्रधान अन्वेषक (PI) प्रो. क्षे. लाल बिहारी सिंघा हैं। सह-प्रधान अन्वेषकों में मणिपुर विश्वविद्यालय के पर्यावरण विज्ञान विभाग के डॉ. के. खेलचंद्र सिंह, एनआईटी नागालैंड के यांत्रिक अभियांत्रिकी विभाग के डॉ. थ. जैक्सन सिंह तथा आईसीएआर, इंफाल के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. टी. बसंता सिंह शामिल हैं। यह टीम पर्यावरण विज्ञान, इंजीनियरिंग, कृषि और सामुदायिक आजीविका विकास जैसे विविध क्षेत्रों की विशेषज्ञता को एक मंच पर ला रही है।

परियोजना से यह उम्मीद की जा रही है कि लोकतक झील के प्रबंधन में चुनौती मानी जाने वाली फुमदी को हरित ऊर्जा, बायोचार और बायो-विनेगर जैसे मूल्यवान उत्पादों में परिवर्तित कर पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ राज्य के सामाजिक और आर्थिक विकास में भी महत्वपूर्ण योगदान दिया जा सकेगा।

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    Naorem Mohen is the Editor of MU Darpan. He covers news and updates on workshops, seminars, training programmes, academic and cultural events, research activities, and the achievements of students, faculty members, and alumni of Manipur University. His work focuses on highlighting developments in higher education, research, innovation, and the accomplishments of the university community.

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