Article Body
इंफाल, 15 सितंबर 2026: मणिपुर यूनिवर्सिटी हेल्थ सेंटर की मेडिकल ऑफिसर डॉ. लामाबम पिंकी देवी इंडियन एसोसिएशन ऑफ पेलिएटिव केयर (IAPC) के नवगठित नॉर्थ ईस्ट रीजनल चैप्टर की संस्थापक सदस्यों में शामिल हुईं। इस क्षेत्रीय चैप्टर का औपचारिक उद्घाटन 12 सितंबर 2026 को मेघालय स्थित पी.ए. संगमा मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल में किया गया।
नॉर्थ ईस्ट रीजनल चैप्टर का गठन पूर्वोत्तर के आठ राज्यों में पेलिएटिव केयर के क्षेत्र में सहयोग, पेशेवर क्षमता और स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच को मजबूत करने के उद्देश्य से किया गया है। इस मंच पर अरुणाचल प्रदेश, असम, मणिपुर, मेघालय, मिजोरम, नागालैंड, सिक्किम और त्रिपुरा के स्वास्थ्य पेशेवरों, शैक्षणिक संस्थानों, सामुदायिक संगठनों और अन्य हितधारकों को एक साथ लाया गया है।
क्षेत्रीय चैप्टर के औपचारिक उद्घाटन से पहले एक दिवसीय अकादमिक कार्यक्रम और नेतृत्व बैठक आयोजित की गई, जिसमें पूर्वोत्तर के सभी आठ राज्यों के स्वास्थ्य पेशेवरों और प्रतिनिधियों ने भाग लिया।
मणिपुर यूनिवर्सिटी हेल्थ सेंटर को मिलेगा अनुभव का लाभ
क्षेत्रीय चैप्टर की संस्थापक सदस्य के रूप में डॉ. पिंकी देवी की भागीदारी से मणिपुर यूनिवर्सिटी समुदाय को क्षेत्रीय मंच से प्राप्त ज्ञान, अनुभव और पेशेवर संपर्कों का लाभ मिलने की संभावना है।
इससे यूनिवर्सिटी हेल्थ सेंटर की स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों के प्रति संवेदनशील और प्रभावी प्रतिक्रिया देने की क्षमता को मजबूत करने में मदद मिल सकती है। इसमें विद्यार्थी, शोधार्थी, शिक्षक और विश्वविद्यालय के अन्य कर्मचारी शामिल हैं।
विद्यार्थियों और शोधार्थियों को अक्सर अकादमिक दबाव, आर्थिक कठिनाइयों, परिवार से दूरी और भविष्य को लेकर अनिश्चितता जैसी परिस्थितियों का सामना करना पड़ सकता है। इसी तरह फैकल्टी और अन्य कर्मचारी भी पेशेवर जिम्मेदारियों तथा व्यक्तिगत चिंताओं से उत्पन्न तनाव का अनुभव कर सकते हैं।
क्षेत्रीय नेटवर्क से प्राप्त अनुभव स्वास्थ्य जागरूकता बढ़ाने, संभावित समस्याओं की शुरुआती पहचान और आवश्यकता पड़ने पर योग्य मेडिकल या मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञों को उचित रेफरल उपलब्ध कराने में सहायक हो सकता है।
पेलिएटिव केयर में गरिमा और संवेदनशील संवाद पर जोर
पेलिएटिव केयर के व्यापक सिद्धांतों में गरिमा, संवेदनशील संवाद, पीड़ा से राहत और जीवन की गुणवत्ता में सुधार को महत्व दिया जाता है। पेलिएटिव केयर विशेष मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं का विकल्प नहीं है, लेकिन इसका व्यक्ति-केंद्रित दृष्टिकोण विश्वविद्यालय परिसर में अधिक सहयोगी और संवेदनशील स्वास्थ्य वातावरण विकसित करने में योगदान दे सकता है।
एक स्वस्थ और भावनात्मक रूप से सहयोगी कैंपस विद्यार्थियों को अपनी पढ़ाई में अधिक प्रभावी ढंग से भाग लेने, शोधार्थियों को अपने अकादमिक कार्य को बेहतर आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ाने तथा फैकल्टी और कर्मचारियों को अपनी जिम्मेदारियों के निर्वहन में सहायता कर सकता है।
ऐसा सहयोग अकादमिक प्रदर्शन, शोध उत्पादकता और मणिपुर यूनिवर्सिटी के समग्र संस्थागत परिणामों में योगदान दे सकता है।
इस दृष्टि से डॉ. पिंकी देवी की IAPC नॉर्थ ईस्ट रीजनल चैप्टर में भागीदारी मणिपुर यूनिवर्सिटी में संवेदनशील स्वास्थ्य सेवाओं और कल्याण की संस्कृति को मजबूत करने का अवसर प्रदान करती है।
पूर्वोत्तर में पेलिएटिव केयर के लिए सतत व्यवस्था पर चर्चा
कार्यक्रम का एक प्रमुख आकर्षण “Building a Sustainable Palliative Care Ecosystem in Northeast India: Capacity, Community, Institutions and Social Investment” विषय पर आयोजित पैनल चर्चा रही।
पैनल चर्चा में पूर्वोत्तर भारत में मौजूदा पेलिएटिव केयर सेवाओं और उपलब्ध स्वास्थ्यकर्मियों की स्थिति का आकलन, पेशेवर दक्षताओं को मजबूत करने, संस्थागत एवं सरकारी साझेदारी विकसित करने और आम लोगों में जागरूकता बढ़ाने पर विचार-विमर्श किया गया।
इसके अलावा समुदाय की भागीदारी बढ़ाने तथा पेलिएटिव और होम-बेस्ड केयर के लिए टिकाऊ वित्तीय व्यवस्था विकसित करने जैसे मुद्दों पर भी चर्चा हुई।
नवगठित IAPC नॉर्थ ईस्ट रीजनल चैप्टर के माध्यम से पूर्वोत्तर के आठ राज्यों में स्वास्थ्य पेशेवरों और संस्थानों के बीच सहयोग को बढ़ाने तथा पेलिएटिव केयर से जुड़े ज्ञान एवं अनुभव को साझा करने के लिए एक साझा मंच उपलब्ध हुआ है।

Comments