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मणिपुर यूनिवर्सिटी में 20वां राष्ट्रीय सांख्यिकी दिवस मनाया गया। कार्यक्रम में प्रो. पी.सी. महालनोबिस को श्रद्धांजलि दी गई और प्रशासनिक डेटा, सांख्यिकी शिक्षा तथा नीति निर्माण में आंकड़ों की भूमिका पर चर्चा हुई।

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मणिपुर यूनिवर्सिटी में मनाया गया 20वां राष्ट्रीय सांख्यिकी दिवस, प्रशासनिक डेटा की क्षमता पर जोर
मणिपुर यूनिवर्सिटी में मनाया गया 20वां राष्ट्रीय सांख्यिकी दिवस, प्रशासनिक डेटा की क्षमता पर जोर
 

इम्फाल, 29 जून। मणिपुर यूनिवर्सिटी के सांख्यिकी विभाग द्वारा सोमवार को विश्वविद्यालय परिसर में 20वां राष्ट्रीय सांख्यिकी दिवस मनाया गया। इस वर्ष कार्यक्रम की थीम "प्रशासनिक डेटा की क्षमता को अनलॉक करना (Unlocking the Potential of Administrative Data)" रही। कार्यक्रम का उद्देश्य प्रशासन, सार्वजनिक नीति, विकास योजना और शिक्षा के क्षेत्र में सांख्यिकी के बढ़ते महत्व को रेखांकित करना था।

राष्ट्रीय सांख्यिकी दिवस का आयोजन भारतीय सांख्यिकी के जनक माने जाने वाले प्रो. पी.सी. महालनोबिस की जयंती के अवसर पर किया जाता है। इस अवसर पर उनके देश की सांख्यिकीय प्रणाली के विकास में दिए गए महत्वपूर्ण योगदान को याद किया गया।

कार्यक्रम में मणिपुर यूनिवर्सिटी की कार्यवाहक कुलपति प्रो. सुमित्रा फांजौबम मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुईं। वहीं, स्कूल ऑफ मैथमेटिकल एंड फिजिकल साइंसेज के डीन प्रो. आर.के. हेमाकुमार सिंह विशिष्ट अतिथि रहे। कार्यक्रम की अध्यक्षता सांख्यिकी विभाग के अध्यक्ष प्रो. सलाम ओपेंद्र सिंह ने की।

इस अवसर पर इम्फाल कॉलेज के सांख्यिकी विभाग के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. पी. जशवंता सिंह ने "स्नातक स्तर पर सांख्यिकी में कम नामांकन के कारण और नामांकन बढ़ाने के उपाय" विषय पर विशेष व्याख्यान दिया।

उन्होंने बताया कि स्नातक स्तर पर सांख्यिकी विषय में छात्रों की कम रुचि एक गंभीर चुनौती बनी हुई है। उन्होंने छात्रों को इस विषय की ओर आकर्षित करने के लिए जागरूकता बढ़ाने, बेहतर करियर अवसरों की जानकारी देने और आधुनिक डेटा आधारित शिक्षा को बढ़ावा देने की आवश्यकता पर बल दिया।

कार्यक्रम में वक्ताओं ने कहा कि आज के दौर में डेटा साक्षरता (Data Literacy) शासन, अनुसंधान, प्रशासन और रोजगार के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण हो गई है। ऐसे में सांख्यिकी शिक्षा को मजबूत करना समय की मांग है।

इस वर्ष की थीम के तहत प्रशासनिक डेटा को साक्ष्य-आधारित निर्णय लेने का महत्वपूर्ण आधार बताया गया। सरकारी विभागों, सार्वजनिक संस्थानों और सेवा वितरण प्रणालियों से प्राप्त आंकड़े विकास योजनाओं के बेहतर क्रियान्वयन, निगरानी और कल्याणकारी योजनाओं की प्रभावशीलता बढ़ाने में अहम भूमिका निभा सकते हैं।

कार्यक्रम के दौरान यह भी कहा गया कि मणिपुर जैसे राज्य में जनसंख्या, शिक्षा, स्वास्थ्य, आजीविका, पर्यावरण और विकास से जुड़े विश्वसनीय आंकड़ों की उपलब्धता प्रभावी नीति निर्माण के लिए बेहद जरूरी है। इसलिए सांख्यिकी की भूमिका केवल कक्षाओं तक सीमित नहीं है, बल्कि यह शासन और सामाजिक विकास का महत्वपूर्ण आधार बन चुकी है।

वक्ताओं ने छात्रों के बीच सांख्यिकी के व्यावहारिक महत्व के प्रति जागरूकता बढ़ाने और शैक्षणिक संस्थानों में डेटा विश्लेषण संबंधी कौशल विकसित करने पर भी जोर दिया।

गौरतलब है कि राष्ट्रीय सांख्यिकी दिवस हर वर्ष 29 जून को प्रो. पी.सी. महालनोबिस की जयंती के उपलक्ष्य में मनाया जाता है। उनके कार्यों ने भारत की आधुनिक सांख्यिकीय प्रणाली और विकास योजनाओं की मजबूत नींव रखी, जिसका प्रभाव आज भी देश की नीति निर्माण और अनुसंधान संस्थाओं में देखा जाता है।

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    Naorem Mohen is the Editor of MU Darpan. He covers news and updates on workshops, seminars, training programmes, academic and cultural events, research activities, and the achievements of students, faculty members, and alumni of Manipur University. His work focuses on highlighting developments in higher education, research, innovation, and the accomplishments of the university community.

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