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इंफाल, 5 जुलाई: मणिपुर विश्वविद्यालय के राष्ट्रीय सेवा योजना (एनएसएस) सेल ने रविवार को विश्वविद्यालय के मानव विज्ञान (एंथ्रोपोलॉजी) विभाग के सम्मेलन कक्ष में “मणिपुर: विवादित विविधता, हिंसा और विकास” विषय पर एक दिवसीय पैनल चर्चा का आयोजन किया।
इस कार्यक्रम में शिक्षाविदों, शोधकर्ताओं, विद्यार्थियों तथा नागरिक समाज के प्रतिनिधियों ने भाग लिया। चर्चा का उद्देश्य मणिपुर में लंबे समय से जारी संघर्ष से उत्पन्न चुनौतियों पर अकादमिक विमर्श करना तथा शांति, समावेशी विकास और सामाजिक सौहार्द के मार्ग तलाशना था।
कार्यक्रम का आयोजन मणिपुर विश्वविद्यालय के एचआरडीसी (HRDC) के निदेशक एवं रसायन विज्ञान विभागाध्यक्ष प्रो. राजकुमार भुबोन सिंह के मार्गदर्शन में किया गया। कार्यक्रम के संयोजक डॉ. थियाम भारत सिंह (CSSI) थे, जबकि अध्यक्षता विश्वविद्यालय के एनएसएस सेल के समन्वयक प्रो. एल. संतोष सिंह ने की।
कार्यक्रम में बोलते हुए डॉ. थियाम भारत सिंह ने कहा कि इस पैनल का उद्देश्य मणिपुर में विविधता, हिंसा और विकास से जुड़े मुद्दों पर अकादमिक चर्चा को बढ़ावा देना था। उन्होंने कहा कि बहु-जातीय समाज में ‘विविधता में एकता’ से प्रगति की अपेक्षा की जाती है, लेकिन मणिपुर के संदर्भ में यह विविधता कई बार संघर्ष का कारण भी बन जाती है।
उन्होंने यह भी कहा कि विभिन्न समुदायों के बीच पहचान की राजनीति (आइडेंटिटी पॉलिटिक्स) ने विकास की प्रक्रिया को प्रभावित किया है और आम जनता को कठिनाइयों का सामना करना पड़ा है। उन्होंने इन मुद्दों पर गहन और समाधान-उन्मुख अकादमिक विमर्श की आवश्यकता पर बल दिया। यह चर्चा दो सत्रों में आयोजित की गई, जिसमें इन समस्याओं के विश्लेषण और संभावित समाधान पर विस्तार से विचार-विमर्श हुआ।
इस अवसर पर डॉ. मलेम निंगथौजा (सहायक प्रोफेसर, दानामंजुरी विश्वविद्यालय) और डॉ. सपम दिलीपकुमार सिंह (सहायक प्रोफेसर, विधि विभाग, मणिपुर विश्वविद्यालय) भी उपस्थित रहे। अन्य प्रतिभागियों ने भी राज्य में सामाजिक समरसता, शिक्षा की भूमिका और विकास की चुनौतियों पर अपने विचार रखे।
कार्यक्रम में वरिष्ठ पत्रकार एवं विशिष्ट वक्ता प्रदीप फनजौबम भी शामिल हुए। उन्होंने अपने संबोधन में नागा और मिजो राष्ट्रवाद, इन क्षेत्रों में ईसाई धर्म के सामाजिक-ऐतिहासिक प्रसार तथा क्षेत्रीय समाजों के ऐतिहासिक विकास पर चर्चा की। उन्होंने कुछ ऐतिहासिक सामाजिक संरचनाओं के संदर्भों का उल्लेख करते हुए विविध समुदायों के बीच संबंधों और उनके ऐतिहासिक अनुभवों पर विचार साझा किए।
वक्ताओं ने इस बात पर जोर दिया कि शैक्षणिक संस्थानों की भूमिका केवल शिक्षा तक सीमित नहीं है, बल्कि वे सामाजिक जागरूकता, जिम्मेदार नागरिकता और रचनात्मक संवाद को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
कार्यक्रम के अंत में एक संवादात्मक सत्र आयोजित किया गया, जिसमें प्रतिभागियों ने अपने विचार साझा किए और मणिपुर में शांति, एकता तथा सतत विकास को बढ़ावा देने के लिए सुझाव प्रस्तुत किए।

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