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मणिपुर विश्वविद्यालय की पीएचडी शोधार्थी और युवा उद्यमी संजू अकोइजम को राष्ट्रपति भवन में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से मिलने का सम्मान मिला। 3000 रुपये से शुरू किया गया उनका कूना शिल्प आधारित व्यवसाय आज 3 करोड़ रुपये के अनुमानित टर्नओवर तक पहुंच चुका है।

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राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से मिलीं मणिपुर विश्वविद्यालय की शोधार्थी संजू अकोइजम, 3000 रुपये से खड़ा किया 3 करोड़ का उद्यम
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से मिलीं मणिपुर विश्वविद्यालय की शोधार्थी संजू अकोइजम, 3000 रुपये से खड़ा किया 3 करोड़ का उद्यम
 

मणिपुर विश्वविद्यालय की पीएचडी शोधार्थी और युवा उद्यमी Droupadi Murmu से मिलने का दुर्लभ अवसर प्राप्त करने वाली संजू अकोइजम इन दिनों चर्चा में हैं। 19 मई 2026 को राष्ट्रपति भवन में आयोजित एक विशेष कार्यक्रम में देशभर से आमंत्रित कारीगरों और बुनकरों के बीच उन्हें सम्मानित किया गया।

कार्यक्रम के दौरान राष्ट्रपति भवन में आमंत्रित सभी कारीगरों को पश्मीना शॉल भेंट कर सम्मानित किया गया। उन्हें राष्ट्रपति आवास का गाइडेड टूर कराया गया तथा दोपहर भोज भी आयोजित किया गया। इस अवसर को जीवन का प्रेरणादायक अनुभव बताते हुए संजू अकोइजम ने कहा कि इससे स्वदेशी हस्तशिल्पों के संरक्षण, संवर्धन और उनके माध्यम से स्थायी आजीविका सृजन के प्रति उनकी प्रतिबद्धता और मजबूत हुई है।

विशेष बात यह रही कि पूर्वोत्तर भारत से आमंत्रित प्रमुख कारीगरों और बुनकरों के समूह में संजू अकोइजम मणिपुर की एकमात्र महिला प्रतिनिधि थीं। इससे पहले गणतंत्र दिवस 2026 के अवसर पर आयोजित राष्ट्रपति के ‘एट होम’ समारोह में भी उन्होंने कूना (कौना घास) शिल्प और पारंपरिक हस्तनिर्मित उत्पादों के माध्यम से पूर्वोत्तर भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत का प्रदर्शन किया था।

वाइस चांसलर ने किया सम्मानित

मणिपुर विश्वविद्यालय के वाइस चांसलर (इन-चार्ज) प्रो. गंगा प्रसाद प्रसैन ने अपने कार्यालय में आयोजित एक सम्मान समारोह में संजू अकोइजम को सम्मानित किया। उन्होंने कहा कि संजू की उपलब्धियां न केवल विश्वविद्यालय बल्कि पूरे मणिपुर के लिए गौरव का विषय हैं। उनकी सफलता युवाओं को नवाचार, शोध और उद्यमिता की दिशा में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करती है।

प्रो. प्रसैन ने संजू की मेंटर प्रो. हंजाबम इश्वोरचंद्र शर्मा के योगदान की भी सराहना करते हुए कहा कि विश्वविद्यालय अकादमिक उत्कृष्टता, पारंपरिक ज्ञान, नवाचार और उद्यमिता के बीच मजबूत सेतु बनाने के लिए प्रतिबद्ध है।

3000 रुपये से शुरू होकर 3 करोड़ तक पहुंचा कारोबार

इम्फाल पूर्व जिले के सिंजामेई मखा ओइनाम थिंगेल की निवासी संजू अकोइजम ‘एच.आई. स्टोर, इम्फाल’ की संस्थापक हैं। उनका ऑनलाइन उद्यम कूना घास से बने हस्तनिर्मित उत्पादों, सूखे फूलों की सजावट और पूर्वोत्तर भारत के पारंपरिक उपहारों के लिए जाना जाता है।

सिर्फ 3000 रुपये की शुरुआती पूंजी से शुरू किया गया यह व्यवसाय आज लगभग 3 करोड़ रुपये के अनुमानित टर्नओवर तक पहुंच चुका है। उनकी इस उपलब्धि को देखते हुए उत्तरी पूर्वी परिषद (NEC) की NEEDP योजना के तहत उन्हें शीर्ष 20 प्रदर्शनकर्ताओं में शामिल किया गया और 7 लाख रुपये का अनुदान भी प्रदान किया गया।

मेंटर्स और संस्थाओं का जताया आभार

संजू अकोइजम ने अपनी सफलता का श्रेय अपने दोनों मेंटर्स प्रो. हंजाबम इश्वोरचंद्र शर्मा और डॉ. सोरोखैबाम केशोरजित सिंह को दिया। उन्होंने कहा कि दोनों शिक्षकों ने उनके पारंपरिक शिल्प ज्ञान को एक सफल और टिकाऊ व्यवसाय मॉडल में बदलने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

उन्होंने डीओएनईआर मंत्रालय के अंतर्गत कार्यरत North Eastern Handicrafts and Handlooms Development Corporation का भी आभार व्यक्त किया। उनके अनुसार संस्था द्वारा उपलब्ध कराए गए बाजार संपर्क, मार्गदर्शन और निरंतर सहयोग ने उनके उद्यम को छोटी शुरुआत से राष्ट्रीय पहचान तक पहुंचाने में अहम योगदान दिया।

संजू अकोइजम की यह यात्रा दर्शाती है कि पारंपरिक ज्ञान, नवाचार, शोध और दृढ़ संकल्प के माध्यम से स्थानीय संसाधनों को वैश्विक अवसरों में बदला जा सकता है। उनकी सफलता मणिपुर और पूरे पूर्वोत्तर भारत के युवाओं के लिए एक प्रेरणादायक उदाहरण बनकर उभरी है।

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    Naorem Mohen

    Editor, MU Darpan

    Naorem Mohen is the Editor of MU Darpan. He covers news and updates on workshops, seminars, training programmes, academic and cultural events, research activities, and the achievements of students, faculty members, and alumni of Manipur University. His work focuses on highlighting developments in higher education, research, innovation, and the accomplishments of the university community.

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मू-दर्पण (MUDARPAN.IN) | मणिपुर विश्वविद्यालय की शैक्षणिक एवं शोध गतिविधियों का हिंदी अभिलेखागार — मणिपुर विश्वविद्यालय की शैक्षणिक, शोध एवं संस्थागत गतिविधियों का एक समर्पित हिंदी डिजिटल अभिलेखागार है, जो विश्वविद्यालय में आयोजित अकादमिक कार्यक्रमों, सम्मेलनों, संगोष्ठियों, कार्यशालाओं और महत्वपूर्ण आयोजनों का प्रामाणिक दस्तावेजीकरण प्रस्तुत करता है।