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इंफाल, 28 सितंबर 2026: मणिपुर विश्वविद्यालय की प्रोफेसर कीथेल्लकपम सनातोम्बी की शैक्षणिक और शोध यात्रा को IndiaBioscience की विशेष श्रृंखला ‘Resilience and Representation in Research’ में शामिल किया गया है। यह श्रृंखला भारत की महिला शोधकर्ताओं के अनुभवों, संघर्षों, उपलब्धियों और विज्ञान के क्षेत्र में उनके नेतृत्व को सामने लाती है।
इस श्रृंखला का उद्देश्य केवल महिला वैज्ञानिकों की उपलब्धियों का उत्सव मनाना नहीं है, बल्कि उनके करियर को आकार देने वाली चुनौतियों, मार्गदर्शन, सहयोग, पारिवारिक जिम्मेदारियों और सामाजिक अपेक्षाओं को भी सामने लाना है। इसकी शुरुआत वर्ष 2025 में भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (IIT) बॉम्बे में महिला शोधकर्ताओं के बीच हुए संवाद से हुई थी। यह पहल जीवन विज्ञान के क्षेत्र में लैंगिक समानता और नेतृत्व को बढ़ावा देने के लिए POWERBio–IndiaBioscience साझेदारी के तहत विकसित की गई है।
शिक्षण से जैव प्रौद्योगिकी अनुसंधान तक का सफर
प्रो. सनातोम्बी की प्रोफाइल में शिक्षण को करियर के रूप में चुनने से लेकर मणिपुर विश्वविद्यालय में जैव प्रौद्योगिकी अनुसंधान के क्षेत्र में अपनी पहचान स्थापित करने तक की यात्रा को रेखांकित किया गया है।
उन्होंने चंडीगढ़ के एमसीएम डीएवी कॉलेज से बीएससी और पंजाब विश्वविद्यालय से एमएससी की पढ़ाई पूरी की। इसके बाद उन्होंने CSIR-JRF हासिल किया और पीएचडी करने के लिए मणिपुर लौट आईं।
मणिपुर विश्वविद्यालय से जुड़ने के बाद उन्हें सीमित बुनियादी सुविधाओं के बीच एक नए विभाग को विकसित करने और अपना स्वतंत्र शोध कार्यक्रम स्थापित करने जैसी चुनौतियों का सामना करना पड़ा। इन परिस्थितियों के बावजूद उन्होंने अपने अनुसंधान कार्य को आगे बढ़ाया।
उन्हें बाद में SERB Fast Track Young Scientist अनुदान और DBT BioCARE-Women Scientist अनुदान प्राप्त हुआ, जिससे उन्हें अपनी प्रयोगशाला स्थापित करने में मदद मिली। वर्ष 2013 में प्राप्त जैव प्रौद्योगिकी विभाग (DBT) की कृषि जैव प्रौद्योगिकी परियोजना ने पादप कोशिका संवर्धन (Plant Cell Culture) के क्षेत्र में उनके शोध को और सहयोग दिया।
SWAYAM के माध्यम से हजारों विद्यार्थियों तक पहुंच
प्रो. सनातोम्बी का योगदान अनुसंधान के साथ-साथ डिजिटल शिक्षा के क्षेत्र में भी महत्वपूर्ण रहा है। वर्ष 2019 में उन्होंने SWAYAM मंच पर दो बड़े पैमाने के ऑनलाइन पाठ्यक्रम शुरू किए—‘Plant Biochemistry and Biotechnology’ और ‘Cell Biology’।
इन पाठ्यक्रमों में हर दूसरे सेमेस्टर में देशभर से लगभग 2,000 से 3,000 विद्यार्थी भाग लेते हैं। इस पहल के माध्यम से जैव रसायन, जैव प्रौद्योगिकी और कोशिका जीव विज्ञान जैसे विषयों की शिक्षा अधिक विद्यार्थियों तक पहुंच रही है।
STEM में महिला नेतृत्व कार्यक्रम के लिए चयन
प्रो. सनातोम्बी को वर्ष 2024 के Women Leadership in STEM Program के लिए चुना गया था। यह कार्यक्रम Biotechnology Industry Research Assistance Council (BIRAC) ने Grand Challenges India (GCI) और WomenLift Health के सहयोग से आयोजित किया।
इस कार्यक्रम ने उन्हें विज्ञान के क्षेत्र में नेतृत्व, पेशेवर नेटवर्किंग और चुनौतियों का सामना करने की क्षमता को मजबूत करने का अवसर दिया।
कार्यक्रम के अंतर्गत उन्होंने मणिपुर के स्कूलों और कॉलेजों में छात्राओं के बीच सतत विकास में जैव प्रौद्योगिकी की भूमिका के प्रति जागरूकता बढ़ाने के लिए एक विशेष आउटरीच पहल भी शुरू की। इसका उद्देश्य युवा छात्राओं को विज्ञान और जैव प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में उपलब्ध संभावनाओं से परिचित कराना था।
युवा शोधकर्ताओं का मार्गदर्शन प्राथमिकता
प्रो. सनातोम्बी के शैक्षणिक कार्य का एक महत्वपूर्ण हिस्सा युवा शोधकर्ताओं का मार्गदर्शन करना भी है। उनकी प्रयोगशाला में पीएचडी कर रहे अधिकांश शोधार्थी महिलाएं हैं और अब तक पांच शोधार्थी अपनी डॉक्टरेट की पढ़ाई पूरी कर चुकी हैं।
उनकी यह पहल विज्ञान के क्षेत्र में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने और अगली पीढ़ी की महिला शोधकर्ताओं को आगे बढ़ने के अवसर उपलब्ध कराने के महत्व को दर्शाती है।
अपनी यात्रा पर विचार व्यक्त करते हुए प्रो. सनातोम्बी ने शिक्षण को अत्यंत संतोषजनक कार्य बताया। उन्होंने महिला वैज्ञानिकों के विकास और नेतृत्व के लिए मार्गदर्शन, सहयोगी पेशेवर नेटवर्क और नेतृत्व के अवसरों को महत्वपूर्ण माना।
महिला शोधकर्ताओं के संघर्ष और उपलब्धियों को पहचानने की पहल
IndiaBioscience के अनुसार, ‘Resilience and Representation in Research’ श्रृंखला का उद्देश्य ऐसा मंच तैयार करना है, जहां महिला शोधकर्ताओं की उपलब्धियों के साथ-साथ उनकी यात्रा में आने वाली कठिनाइयों को भी समान महत्व दिया जाए।
प्रो. कीथेल्लकपम सनातोम्बी की कहानी शिक्षण, जैव प्रौद्योगिकी अनुसंधान, डिजिटल शिक्षा और महिला नेतृत्व के बीच उनके योगदान को सामने लाती है। उनकी यात्रा मणिपुर में शोध क्षमता विकसित करने, युवा वैज्ञानिकों को मार्गदर्शन देने और विज्ञान के क्षेत्र में महिलाओं की भागीदारी को प्रोत्साहित करने के महत्व को रेखांकित करती है।

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