Article Body
इंफाल, 16 सितंबर 2026: मणिपुर यूनिवर्सिटी में बुधवार को “Leadership, Academic Administration and Legal Excellence in Higher Education” विषय पर दो सप्ताह के बहुविषयक रिफ्रेशर कोर्स की शुरुआत हुई। कार्यक्रम का आयोजन मणिपुर यूनिवर्सिटी के MIMS ऑडिटोरियम में किया गया।
यह रिफ्रेशर कोर्स 16 से 28 सितंबर तक चलेगा और इसका आयोजन भारत सरकार के शिक्षा मंत्रालय के तहत UGC-Malaviya Mission Teacher Training Centre (UGC-MMTTC), Manipur University द्वारा किया जा रहा है।
कोर्स में कुल 53 प्रतिभागी, जिनमें शिक्षक और प्रशासनिक अधिकारी शामिल हैं, हिस्सा ले रहे हैं। कार्यक्रम का उद्देश्य उच्च शिक्षा संस्थानों में नेतृत्व, अकादमिक प्रशासन और कानूनी पहलुओं की समझ को मजबूत करना है।
उद्घाटन समारोह में मणिपुर यूनिवर्सिटी के स्कूल ऑफ सोशल साइंसेज की डीन प्रो. मेमचा लोइतोंगबाम मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुईं। प्रो. आर.के. भुबोन सिंह, निदेशक, UGC-MMTTC, मणिपुर यूनिवर्सिटी ने समारोह की अध्यक्षता की, जबकि प्रो. च. इबोहल मीतेई, निदेशक, मणिपुर इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट स्टडीज (MIMS) विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित रहे।
उच्च शिक्षा में नेतृत्व की भूमिका पर जोर
स्वागत एवं परिचयात्मक संबोधन में प्रो. च. इबोहल मीतेई ने कहा कि UGC-MMTTC के निदेशक के साथ विस्तृत चर्चा के बाद इस कोर्स की रूपरेखा तैयार की गई है। उन्होंने कहा कि कार्यक्रम प्रतिभागियों को नेतृत्व के विभिन्न आयामों से परिचित कराएगा।
उन्होंने कहा कि नेतृत्व को केवल राजनीतिक संदर्भ में नहीं देखा जाना चाहिए। अकादमिक और प्रशासनिक संस्थानों में भी नेतृत्व की महत्वपूर्ण भूमिका होती है, जहां व्यक्तियों की क्षमता किसी संगठन की प्रगति और कार्यप्रणाली को प्रभावित करती है।
UGC-MMTTC के निदेशक प्रो. आर.के. भुबोन सिंह ने कहा कि प्रभावी नेतृत्व एक सफल उच्च शिक्षा संस्थान की बुनियाद है। उनके अनुसार, अकादमिक नेताओं को स्पष्ट दृष्टि विकसित करने, अकादमिक उत्कृष्टता को बढ़ावा देने, नवाचार को प्रोत्साहित करने तथा शिक्षण, सीखने, शोध और सामुदायिक सहभागिता के लिए अनुकूल वातावरण तैयार करने में भूमिका निभानी चाहिए।
उन्होंने कहा कि संस्थागत नेतृत्व में ईमानदारी, पारदर्शिता और जवाबदेही के साथ-साथ फैकल्टी, विद्यार्थियों और प्रशासनिक कर्मचारियों को प्रेरित करने की क्षमता भी आवश्यक है। उच्च शिक्षा के क्षेत्र में तकनीकी बदलावों और उभरती चुनौतियों के अनुरूप नेतृत्व को अनुकूलनशील होना भी जरूरी है।
शिक्षक और प्रशासनिक अधिकारियों को एक मंच पर लाया गया
मुख्य अतिथि प्रो. मेमचा लोइतोंगबाम ने शिक्षकों के साथ प्रशासनिक अधिकारियों को भी शामिल करते हुए रिफ्रेशर कोर्स तैयार करने के लिए प्रो. आर.के. भुबोन सिंह और प्रो. च. इबोहल मीतेई की सराहना की।
उन्होंने कहा कि आम तौर पर रिफ्रेशर कोर्स शिक्षकों के लिए आयोजित किए जाते हैं, जबकि वर्तमान कार्यक्रम में शिक्षकों और प्रशासनिक अधिकारियों को एक साथ लाकर नेतृत्व, अकादमिक प्रशासन और उच्च शिक्षा संस्थानों से जुड़े कानूनी मुद्दों पर चर्चा की जा रही है।
प्रो. मेमचा ने कहा कि प्रतिभागियों की मिश्रित संरचना से सीखने की प्रक्रिया को व्यापक बनाने में मदद मिलेगी। उन्होंने व्याख्यानों के साथ-साथ समूह चर्चा और केस आधारित अभ्यास को शामिल किए जाने की भी सराहना की।
उन्होंने कहा कि प्रशासनिक अधिकारियों के लिए पारंपरिक माइक्रो-टीचिंग अभ्यास आवश्यक नहीं होते, इसलिए केस डिस्कशन के माध्यम से वे संस्थानों के सामने आने वाली व्यावहारिक चुनौतियों को बेहतर तरीके से समझ सकते हैं।
उन्होंने प्रतिभागियों से सक्रिय रूप से संवाद करने, कोर्स के दौरान बेहतर प्रदर्शन करने और इस अवसर का अधिकतम लाभ उठाने का आह्वान किया। साथ ही उन्होंने प्रतिभागियों और आयोजकों को कार्यक्रम की सफल पूर्णता के लिए शुभकामनाएं दीं।
NEP 2020, AI और रिसर्च एथिक्स सहित कई विषय शामिल
दो सप्ताह के रिफ्रेशर कोर्स में उच्च शिक्षा से जुड़े कई महत्वपूर्ण विषयों को शामिल किया गया है। इनमें राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020, नेतृत्व के सिद्धांत और व्यवहार, गुणवत्तापूर्ण शिक्षण एवं शोध, संस्थागत रैंकिंग, शोध नवाचार एवं उद्यमिता, तनाव प्रबंधन और प्रभावी संचार प्रमुख हैं।
इसके अलावा उच्च शिक्षा संस्थानों में कानून और शासन, शोध नैतिकता, अकादमिक लेखन, भारतीय ज्ञान प्रणाली (Indian Knowledge Systems), डिजिटल परिवर्तन, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और संगठनात्मक टीम निर्माण जैसे विषयों पर भी प्रतिभागियों को जानकारी दी जाएगी।
कार्यक्रम में पारंपरिक तरीके से दीप प्रज्वलन भी किया गया। उद्घाटन कार्यक्रम के अंत में डॉ. फल्गुनी कोंजेंगबाम ने धन्यवाद ज्ञापन किया।
दो सप्ताह का यह बहुविषयक रिफ्रेशर कोर्स उच्च शिक्षा से जुड़े शिक्षकों और प्रशासनिक अधिकारियों को नेतृत्व, संस्थागत प्रशासन, शोध, तकनीकी बदलाव और शासन से संबंधित विभिन्न पहलुओं पर विचार-विमर्श एवं अनुभव साझा करने का अवसर प्रदान करेगा।

Comments