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मणिपुर यूनिवर्सिटी में रिसर्च स्कॉलर्स मीट 2026 का आयोजन हुआ। Research Update जर्नल लॉन्च किया गया और शोध संस्कृति व अकादमिक उत्कृष्टता मजबूत करने पर जोर दिया गया।

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मणिपुर यूनिवर्सिटी रिसर्च स्कॉलर्स मीट 2026 में मजबूत रिसर्च कल्चर पर जोर
मणिपुर यूनिवर्सिटी रिसर्च स्कॉलर्स मीट 2026 में मजबूत रिसर्च कल्चर पर जोर
 

इंफाल, 2 सितंबर 2026: मणिपुर यूनिवर्सिटी में बुधवार को रिसर्च स्कॉलर्स मीट 2026 का आयोजन किया गया। विश्वविद्यालय के ऑडिटोरियम हॉल में आयोजित कार्यक्रम की थीम “Strengthening Research Culture for Academic Excellence” थी। रिसर्च क्लब, मणिपुर यूनिवर्सिटी ने MUSU 2025–26 के सहयोग से कार्यक्रम का आयोजन किया, जिसमें शोधार्थियों, शिक्षकों और विश्वविद्यालय के अधिकारियों ने हिस्सा लिया।

कार्यक्रम का उद्देश्य गुणवत्तापूर्ण शोध, अकादमिक सहयोग और विश्वविद्यालय परिसर में शोधार्थियों के बीच बौद्धिक एवं शैक्षणिक संवाद को बढ़ावा देना था।

मणिपुर यूनिवर्सिटी के प्रभारी कुलपति प्रो. आर.के. हेमाकुमार सिंह कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए, जबकि Nongpoknganba Yambem, अध्यक्ष, MUSU 2025–26 ने कार्यक्रम की अध्यक्षता की।

कार्यक्रम में प्रो. च. इबोहल सिंह, डीन, स्टूडेंट्स वेलफेयर; प्रो. एम.सी. अरुणकुमार, डीन, ह्यूमन एंड एनवायरनमेंटल साइंस तथा Research Update के एडिटर-इन-चीफ; और प्रो. अंगोम दिलीप कुमार सिंह, निदेशक, रिसर्च एंड डेवलपमेंट सेल, मणिपुर यूनिवर्सिटी विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित रहे।

Research Update जर्नल का विमोचन

कार्यक्रम का प्रमुख आकर्षण मणिपुर यूनिवर्सिटी के शोध जर्नल “Research Update” का विमोचन रहा। यह जर्नल शोधार्थियों को अपने शोध कार्य को प्रकाशित और प्रसारित करने तथा विश्वविद्यालय के अकादमिक विमर्श में योगदान देने के लिए एक मंच प्रदान करेगा।

इस अवसर पर विश्वविद्यालय के शोध समुदाय की उपलब्धियों को भी सम्मानित किया गया। पीएचडी की डिग्री प्राप्त करने वाले 18 शोधार्थियों, 22 पुरस्कार प्राप्तकर्ताओं, चार उपलब्धि हासिल करने वालों और Research Update में योगदान देने वाले आठ प्रतिभागियों को उनके अकादमिक एवं शोध कार्यों के लिए सम्मानित किया गया।

गुणवत्तापूर्ण शोध के लिए मजबूत अकादमिक माहौल जरूरी: कुलपति

मुख्य अतिथि के रूप में अपने संबोधन में प्रो. आर.के. हेमाकुमार सिंह ने कहा कि किसी अकादमिक संस्थान की गुणवत्ता काफी हद तक वहां दाखिला लेने वाले विद्यार्थियों की गुणवत्ता और विश्वविद्यालय से निकलने वाले अकादमिक परिणामों पर निर्भर करती है।

उन्होंने प्रवेश प्रक्रिया को “इनलेट” और परीक्षा एवं अकादमिक उपलब्धियों को “आउटलेट” से जोड़ते हुए कहा कि योग्य विद्यार्थियों को आकर्षित करना और उन्हें मजबूत अकादमिक वातावरण में तैयार करना विश्वविद्यालय की गुणवत्ता और प्रतिष्ठा के लिए महत्वपूर्ण है।

प्रो. हेमाकुमार ने विशेष रूप से मौजूदा सामाजिक परिस्थितियों और राज्य में जारी अशांति के बीच प्रवेश प्रक्रिया में मेरिट और पारदर्शिता के महत्व पर जोर दिया। उन्होंने अकादमिक प्रशासन में अपने अनुभव का उल्लेख करते हुए कहा कि उन्होंने प्रवेश के मामलों में मेरिट को प्राथमिकता देने की कोशिश की है, ताकि योग्य विद्यार्थियों को उनकी क्षमता के आधार पर अवसर मिल सके।

उन्होंने प्रवेश प्रक्रिया को सुचारु बनाने और योग्य विद्यार्थियों को विश्वविद्यालय की ओर आकर्षित करने में शिक्षकों, विभागाध्यक्षों, डीन, MUSU तथा छात्र प्रतिनिधियों के प्रयासों की सराहना की।

अधिक शोधार्थियों को आकर्षित करने की जरूरत

शोध के संबंध में कुलपति ने विश्वविद्यालय में शोधार्थियों, विशेषकर JRF और NET योग्य उम्मीदवारों की अपेक्षाकृत कम संख्या पर चिंता व्यक्त की। उन्होंने अधिक योग्य शोधार्थियों को विश्वविद्यालय की ओर आकर्षित करने और उपलब्ध शोध सीटों को भरने की संभावनाएं तलाशने की आवश्यकता पर जोर दिया।

उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय के अकादमिक भविष्य के लिए मजबूत शोधार्थी समुदाय जरूरी है।

प्रो. हेमाकुमार ने कहा कि सार्थक शोध और गुणवत्तापूर्ण प्रकाशन रातोंरात तैयार नहीं होते। उन्होंने शोधकर्ता के विकास की तुलना बीज से एक उत्पादक पौधे के बनने की प्रक्रिया से करते हुए कहा कि अच्छे शोध के लिए समय, अनुकूल अकादमिक वातावरण, निरंतर प्रयास और शोधार्थी एवं पर्यवेक्षक दोनों की प्रतिबद्धता जरूरी है।

उन्होंने सहयोगात्मक शोध को भी बढ़ावा देने की आवश्यकता बताई। उनके अनुसार, वर्तमान समय में शोधकर्ताओं और संस्थानों के लिए विशेषज्ञता, सुविधाओं और संसाधनों को साझा करना महत्वपूर्ण हो गया है।

समाज के लिए उपयोगी हो शोध

कुलपति ने कहा कि शोध केवल डिग्री हासिल करने या किसी शोधपत्र के प्रकाशन तक सीमित नहीं रहना चाहिए। शोध के परिणामों को गुणवत्तापूर्ण अकादमिक जर्नलों में स्थान मिलना चाहिए और उससे आगे समाज के लिए भी सार्थक योगदान होना चाहिए।

उन्होंने शोधार्थियों से अपने शोध काल का प्रभावी उपयोग करने और ऐसा अकादमिक कार्य विकसित करने का आह्वान किया, जिससे उनके व्यक्तिगत करियर के साथ-साथ मणिपुर यूनिवर्सिटी की अकादमिक प्रतिष्ठा को भी मजबूती मिले।

प्रो. हेमाकुमार ने विश्वविद्यालय में चार वर्षीय Integrated Teacher Education Programme (ITEP) से संबंधित प्रयासों का भी उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि इस संबंध में पहले गठित समिति के माध्यम से काफी प्रारंभिक कार्य किया जा चुका है और विश्वविद्यालय शेष प्रक्रिया को आगे बढ़ा रहा है।

उन्होंने कहा कि कार्यक्रम शुरू करने से पहले आवश्यक अध्यादेश, अकादमिक और नियामक आवश्यकताओं को अंतिम रूप देना होगा। इसके अलावा फैकल्टी, बुनियादी ढांचे और संस्थागत निरीक्षण से संबंधित निर्धारित मानकों को भी पूरा करना होगा। विश्वविद्यालय लागू मानकों का पालन सुनिश्चित करते हुए प्रक्रिया को जल्द पूरा करने की दिशा में काम कर रहा है।

कुलपति ने उम्मीद जताई कि Research Update के आगामी संस्करण गुणवत्ता और विस्तार दोनों के लिहाज से आगे बढ़ेंगे तथा मणिपुर यूनिवर्सिटी में किए जा रहे शोध को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय अकादमिक समुदाय के बीच अधिक पहचान मिलेगी।

Research Club के इतिहास पर चर्चा

प्रो. एम.सी. अरुणकुमार ने Research Club, Manipur University के इतिहास पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि इसकी शुरुआत लगभग 1990–91 के दौरान हुई थी, जब कुछ समान विचारधारा वाले शोधकर्ताओं ने विश्वविद्यालय में एक साझा अकादमिक मंच तैयार करने की पहल की थी।

उन्होंने बताया कि इस पहल की शुरुआत प्रसिद्ध लेखक और साहित्य अकादमी पुरस्कार विजेता युमलेम्बम इबोमचा सिंह तथा अन्य शोधकर्ताओं ने की थी। इसका उद्देश्य विश्वविद्यालय परिसर में शोधकर्ताओं के बीच बौद्धिक संवाद, विचारों के आदान-प्रदान और मजबूत शोध संस्कृति को प्रोत्साहित करना था।

प्रो. अरुणकुमार ने कहा कि बाद में Research Club ऐसा मंच बन गया जहां शोधार्थी अपने-अपने विषयों की सीमाओं से आगे जाकर अकादमिक संवाद कर सके। उन्होंने वर्तमान पीढ़ी के शोधार्थियों से इस भावना को आगे बढ़ाने तथा अकादमिक चर्चा, सहयोग और शोध प्रकाशन को मजबूत करने का आह्वान किया।

Research Update का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि यह जर्नल शोधकर्ताओं को अपने कार्यों को साझा और प्रसारित करने का महत्वपूर्ण मंच प्रदान करता है। उन्होंने युवा शोधार्थियों से तीन दशक से अधिक समय पहले शुरू किए गए शोध आंदोलन को आगे बढ़ाने और Research Club तथा उसके अकादमिक प्रकाशन को मजबूत करने की अपील की।

NEP 2020 के तहत शोध प्रशिक्षण पर जोर

रिसर्च एंड डेवलपमेंट सेल के निदेशक प्रो. अंगोम दिलीप कुमार सिंह ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 के तहत स्नातकोत्तर शिक्षा के बदलते स्वरूप और पाठ्यक्रम में शोध के बढ़ते एकीकरण पर प्रकाश डाला।

उन्होंने विशेष रूप से स्नातकोत्तर कार्यक्रमों के चौथे सेमेस्टर में शोध घटक का उल्लेख करते हुए प्रोजेक्ट आधारित शोध को मजबूत करने और बदलते क्रेडिट ढांचे में उसे उचित अकादमिक महत्व देने की आवश्यकता बताई।

उन्होंने कहा कि स्नातकोत्तर स्तर पर शोध को केवल क्रेडिट हासिल करने के लिए पूरा किए जाने वाले प्रोजेक्ट के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। विद्यार्थियों को समस्या की पहचान, शोध डिजाइन, पद्धति, डेटा संग्रह और विश्लेषण, अकादमिक लेखन तथा प्रकाशन उन्मुख शोध की व्यवस्थित जानकारी मिलनी चाहिए।

उनके अनुसार, स्नातकोत्तर स्तर पर शोध प्रशिक्षण मजबूत होने से पीएचडी और अन्य उन्नत शोध कार्यक्रमों में प्रवेश लेने वाले शोधार्थियों की तैयारी बेहतर हो सकती है तथा विश्वविद्यालय के शोध पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत करने में मदद मिल सकती है।

प्रो. दिलीप कुमार सिंह ने शोध नैतिकता और अकादमिक ईमानदारी के महत्व पर भी जोर दिया। उन्होंने शोधार्थियों से शोध और प्रकाशन की पूरी प्रक्रिया में जिम्मेदार शोध व्यवहार तथा नैतिक मानकों का पालन करने का आह्वान किया।

बहुविषयक शोध को बढ़ावा देने की अपील

डीन, स्टूडेंट्स वेलफेयर प्रो. च. इबोहल सिंह ने विश्वविद्यालय की अकादमिक स्थिति को मजबूत करने में शोधार्थियों की महत्वपूर्ण भूमिका पर प्रकाश डाला। उन्होंने युवा शोधकर्ताओं से अनुशासन, प्रतिबद्धता और बौद्धिक जिज्ञासा के साथ शोध करने तथा अपने अकादमिक कार्य को समाज की व्यापक जरूरतों से जोड़ने का आह्वान किया।

उन्होंने शोधार्थियों, शोध पर्यवेक्षकों, शिक्षकों और विश्वविद्यालय प्रशासन के बीच सहयोग को एक जीवंत शोध संस्कृति के लिए आवश्यक बताया।

प्रो. इबोहल सिंह ने बहुविषयक शोध के बढ़ते महत्व पर भी जोर दिया। उन्होंने शोधार्थियों से विषयगत सीमाओं से आगे बढ़कर विभिन्न क्षेत्रों के ज्ञान और दृष्टिकोण का उपयोग करने की अपील की, ताकि जटिल शोध समस्याओं का अध्ययन व्यापक तरीके से किया जा सके।

इससे पहले चिंगखेइहुन्बा हाओबम, रिसर्च स्कॉलर प्रतिनिधि, MUSU 2025–26 ने स्वागत एवं मुख्य वक्तव्य दिया।

MUSU 2025–26 के अध्यक्ष Nongpoknganba Yambem ने अपने अध्यक्षीय संबोधन में गणमान्य अतिथियों, शिक्षकों, शोधार्थियों, पुरस्कार प्राप्तकर्ताओं, उपलब्धि हासिल करने वालों, जर्नल में योगदान देने वालों, आयोजकों और कार्यक्रम की सफलता में सहयोग करने वाले सभी लोगों के प्रति आभार व्यक्त किया।

कार्यक्रम में थांग-टा का विशेष प्रदर्शन भी हुआ, जिसने अकादमिक कार्यक्रम में सांस्कृतिक आयाम जोड़ा। मणिपुर यूनिवर्सिटी के PESS के शोधार्थी मोइरांगथेम डेविड सिंह ने धन्यवाद ज्ञापन किया।

रिसर्च स्कॉलर्स मीट 2026 का समापन मणिपुर यूनिवर्सिटी में अधिक जीवंत, सहयोगात्मक और सामाजिक रूप से प्रासंगिक शोध संस्कृति विकसित करने के आह्वान के साथ हुआ। कार्यक्रम में युवा शोधार्थियों को ईमानदारी, दृढ़ता और अकादमिक उत्कृष्टता के साथ ऐसे ज्ञान के निर्माण के लिए प्रोत्साहित किया गया, जिससे समाज को लाभ मिल सके।

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    Naorem Mohen

    Editor, MU Darpan

    Naorem Mohen is the Editor of MU Darpan. He covers news and updates on workshops, seminars, training programmes, academic and cultural events, research activities, and the achievements of students, faculty members, and alumni of Manipur University. His work focuses on highlighting developments in higher education, research, innovation, and the accomplishments of the university community.

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मू-दर्पण (MUDARPAN.IN) | मणिपुर विश्वविद्यालय की शैक्षणिक एवं शोध गतिविधियों का हिंदी अभिलेखागार — मणिपुर विश्वविद्यालय की शैक्षणिक, शोध एवं संस्थागत गतिविधियों का एक समर्पित हिंदी डिजिटल अभिलेखागार है, जो विश्वविद्यालय में आयोजित अकादमिक कार्यक्रमों, सम्मेलनों, संगोष्ठियों, कार्यशालाओं और महत्वपूर्ण आयोजनों का प्रामाणिक दस्तावेजीकरण प्रस्तुत करता है।