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इम्फाल, 15 अप्रैल: मणिपुर विश्वविद्यालय में बुधवार को महिला आरक्षण विधेयक 2023 (नारी शक्ति वंदन अधिनियम) के कार्यान्वयन पर एक विशेष कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य महिलाओं के सशक्तिकरण, लैंगिक समानता तथा राजनीति, शिक्षा, प्रशासन और राष्ट्र निर्माण में महिलाओं की भागीदारी को बढ़ावा देने के महत्व पर विचार-विमर्श करना था।
यह कार्यक्रम कुलपति सचिवालय के कोर्ट हॉल में आयोजित किया गया, जिसमें विश्वविद्यालय के शिक्षकों, अधिकारियों और कर्मचारियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।
कार्यक्रम के दौरान मणिपुर विश्वविद्यालय की कार्यवाहक कुलपति प्रो. सुमित्रा फंजौबम ने उपस्थित प्रतिभागियों को संविधान की प्रस्तावना, लैंगिक समानता और महिला सशक्तिकरण से संबंधित शपथ दिलाई। उन्होंने महिलाओं को समान अवसर प्रदान करने और समाज के सभी क्षेत्रों में उनकी प्रभावी भागीदारी सुनिश्चित करने की आवश्यकता पर बल दिया।
कार्यक्रम में मुख्य वक्ता के रूप में मणिपुर विश्वविद्यालय के विधि विभागाध्यक्ष प्रो. वाई. प्रेमानंद सिंह ने महिला सशक्तिकरण और समावेशी विकास में महिलाओं की भूमिका पर विस्तृत विचार प्रस्तुत किए। उन्होंने कहा कि विकसित भारत 2047 के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए महिलाओं की सक्रिय भागीदारी और नेतृत्व अत्यंत आवश्यक है।
प्रो. प्रेमानंद सिंह ने कहा कि विश्वविद्यालय सामाजिक परिवर्तन और जागरूकता के महत्वपूर्ण केंद्र होते हैं। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए सीटों का आरक्षण उनके सार्थक प्रतिनिधित्व और निर्णय-निर्माण प्रक्रियाओं में प्रभावी भागीदारी सुनिश्चित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
उन्होंने कहा कि महिलाओं की बढ़ती राजनीतिक भागीदारी न केवल लोकतंत्र को मजबूत करेगी, बल्कि समाज के विभिन्न वर्गों की आवश्यकताओं और आकांक्षाओं को भी बेहतर ढंग से प्रतिनिधित्व प्रदान करेगी।
कार्यक्रम में विश्वविद्यालय के कई वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे, जिनमें स्कूल ऑफ एजुकेशन की डीन प्रो. प्रेमलता मैसनाम, स्कूल ऑफ ह्यूमैनिटीज की डीन प्रो. तोइजाम ताम्फा देवी तथा कार्यवाहक कुलसचिव श्री टी. शांतिकुमार सिंह प्रमुख रूप से शामिल थे।
कार्यक्रम के दौरान शिक्षकों और कर्मचारियों ने महिलाओं के अधिकारों, समान अवसरों और नेतृत्व क्षमता को बढ़ावा देने के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई। प्रतिभागियों ने यह भी संकल्प लिया कि वे विश्वविद्यालय परिसर और समाज में समावेशी एवं समान प्रतिनिधित्व को प्रोत्साहित करने के लिए निरंतर प्रयास करेंगे।
मणिपुर विश्वविद्यालय द्वारा आयोजित यह कार्यक्रम महिला आरक्षण विधेयक के महत्व को समझने और महिलाओं को राष्ट्र निर्माण की मुख्यधारा में अधिक प्रभावी रूप से शामिल करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल के रूप में देखा जा रहा है। विश्वविद्यालय प्रशासन ने कहा कि वह भविष्य में भी लैंगिक समानता और समावेशी विकास से जुड़े ऐसे कार्यक्रमों का आयोजन करता रहेगा।
यह आयोजन महिलाओं की नेतृत्व क्षमता, राजनीतिक प्रतिनिधित्व और सामाजिक भागीदारी को बढ़ावा देने के प्रति मणिपुर विश्वविद्यालय की प्रतिबद्धता का प्रतीक माना जा रहा है।

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