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इंफाल, 15 जुलाई 2026: मणिपुर विश्वविद्यालय के व्यावसायिक अध्ययन एवं कौशल विकास विभाग (DVSSD) ने बुधवार को न्यू सोशल साइंस ब्लॉक स्थित विभाग के प्रशिक्षण कक्ष में विश्व युवा कौशल दिवस 2026 का आयोजन किया।
“साझा भविष्य के लिए कौशल” विषय पर आयोजित इस कार्यक्रम में युवाओं को तेजी से बदलती और प्रौद्योगिकी आधारित दुनिया की आवश्यकताओं के अनुरूप ज्ञान, कौशल और व्यावसायिक दक्षताओं से सशक्त बनाने पर जोर दिया गया।
यह कार्यक्रम विभाग की वार्षिक गतिविधियों का हिस्सा था। इसमें विश्वविद्यालय के विभिन्न विभागों के संकाय सदस्य, DVSSD के शिक्षक, विद्यार्थी, उद्योग क्षेत्र के प्रतिनिधि और आमंत्रित गणमान्य व्यक्ति शामिल हुए।
कार्यक्रम सुबह 11 बजे अतिथियों के स्वागत के साथ शुरू हुआ। इसके बाद औपचारिक कार्यक्रम आयोजित किया गया।
DVSSD की संकाय सदस्य डॉ. कंगजाम मुखरा देवी ने स्वागत भाषण दिया। उन्होंने विश्व युवा कौशल दिवस के महत्व और इस वर्ष के विषय “साझा भविष्य के लिए कौशल” की प्रासंगिकता पर प्रकाश डाला।
AI भविष्य के रोजगार को बदल रहा: हाओबम जॉयरेम्बा
क्यूबटेन टेक्नोलॉजीज प्राइवेट लिमिटेड के निदेशक हाओबम जॉयरेम्बा ने मुख्य वक्तव्य देते हुए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के परिवर्तनकारी प्रभाव और भविष्य के रोजगार क्षेत्र पर इसके बढ़ते प्रभाव की चर्चा की।
उन्होंने कहा कि दुनिया एक नई बौद्धिक और तकनीकी क्रांति के दौर से गुजर रही है। ऐसे समय में युवाओं के लिए लगातार सीखना, पुरानी धारणाओं को छोड़ना और नए ज्ञान को अपनाना आवश्यक है।
उन्होंने विद्यार्थियों से जिज्ञासा, अनुकूलन क्षमता और उभरती हुई प्रौद्योगिकियों को समझने की इच्छा विकसित करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि भविष्य में सफलता के लिए केवल शैक्षणिक योग्यता पर्याप्त नहीं होगी, बल्कि बदलती परिस्थितियों के अनुसार स्वयं को तैयार करना भी जरूरी होगा।
रचनात्मकता, संवाद और सहयोग को बताया जरूरी
मणिपुर विश्वविद्यालय के आंतरिक गुणवत्ता आश्वासन प्रकोष्ठ के निदेशक प्रो. ए. राजमणि सिंघा ने 21वीं सदी के लिए तीन प्रमुख कौशलों पर जोर दिया। उन्होंने इन्हें रचनात्मकता, संवाद और सहयोग के रूप में रेखांकित किया।
उन्होंने कहा कि तकनीकी दक्षता अपने आप में पर्याप्त नहीं है। विद्यार्थियों को व्यक्तिगत और व्यावसायिक चुनौतियों का सामना करने के लिए जीवन कौशल, आत्म जागरूकता और प्रभावी संवाद क्षमता भी विकसित करनी चाहिए।
उन्होंने शिक्षण संस्थानों से विद्यार्थियों के समग्र विकास पर ध्यान देने और उन्हें बदलते रोजगार क्षेत्र के अनुरूप तैयार करने का आह्वान किया।
कक्षा और उद्योग के बीच की दूरी कम करने की जरूरत
कार्यक्रम की मुख्य अतिथि और मणिपुर विश्वविद्यालय के सामाजिक विज्ञान संकाय की डीन प्रो. मेमचा लोइतोंगबाम ने संरचित प्रशिक्षण कार्यक्रमों और उद्योग क्षेत्र के व्यावहारिक अनुभव के माध्यम से कौशल बढ़ाने की आवश्यकता पर जोर दिया।
उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों की रोजगार क्षमता बढ़ाने के लिए कक्षा में दी जाने वाली शिक्षा और उद्योगों की वास्तविक आवश्यकताओं के बीच की दूरी को कम करना जरूरी है।
उन्होंने युवाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए व्यावहारिक प्रशिक्षण और बाजार की मांग के अनुरूप व्यावसायिक शिक्षा को महत्वपूर्ण बताया।
प्रो. लोइतोंगबाम ने समकालीन रोजगार बाजार की जरूरतों के अनुसार व्यावसायिक शिक्षा और प्रशिक्षण उपलब्ध कराने के लिए विभाग के प्रयासों की सराहना की।
नौकरी तलाशने वाले नहीं, रोजगार देने वाले बनें युवा
अध्यक्षीय संबोधन में DVSSD के विभागाध्यक्ष डॉ. नामब्रम अमुलकुमार ने कौशल विकास के व्यापक उद्देश्य और युवाओं में उद्यमिता को बढ़ावा देने के लिए विभाग द्वारा की जा रही पहलों की जानकारी दी।
उन्होंने कहा कि युवाओं को केवल नौकरी प्राप्त करने के उद्देश्य से कौशल नहीं सीखना चाहिए। उन्हें ऐसे कौशल विकसित करने चाहिए, जिनके माध्यम से वे स्वयं उद्यम स्थापित कर सकें और दूसरों के लिए रोजगार के अवसर पैदा कर सकें।
उन्होंने विद्यार्थियों को नौकरी तलाशने वाले के बजाय रोजगार देने वाला बनने के लिए प्रेरित किया।
डॉ. अमुलकुमार ने भारत और विदेश में विद्यार्थियों को रोजगार दिलाने और प्लेसमेंट की सुविधा उपलब्ध कराने में योगदान देने वाले विभाग के संकाय सदस्यों को भी बधाई दी।
30 शिक्षकों ने लिया फैकल्टी एनरिचमेंट प्रोग्राम में हिस्सा
विश्व युवा कौशल दिवस के कार्यक्रम के बाद विभाग ने अपने संकाय सदस्यों के लिए “शिक्षण, अधिगम और मूल्यांकन प्रक्रिया” विषय पर फैकल्टी एनरिचमेंट प्रोग्राम का आयोजन किया।
इस कार्यक्रम में 30 संकाय सदस्यों ने भाग लिया। कार्यक्रम के दौरान समकालीन शिक्षण पद्धतियों, अकादमिक योजना, प्रश्नपत्र तैयार करने की प्रक्रिया और शिक्षण व्यवस्था को अधिक प्रभावी बनाने से जुड़े विभिन्न विषयों पर चर्चा हुई।
संकाय सदस्यों ने शिक्षण, अधिगम और मूल्यांकन से जुड़ी चुनौतियों और सुधार की संभावनाओं पर भी विचार साझा किए।
विश्व युवा कौशल दिवस के आयोजन ने विद्यार्थियों, शिक्षकों, उद्योग क्षेत्र के विशेषज्ञों और अकादमिक नेतृत्व को बदलते कौशल परिवेश तथा भविष्य की आवश्यकताओं पर विचार करने के लिए एक साझा मंच प्रदान किया।
कार्यक्रम में अनुकूलन क्षमता, रचनात्मकता, संवाद, सहयोग, आत्म जागरूकता और उद्यमशील सोच को युवाओं के भविष्य के लिए आवश्यक कौशल के रूप में रेखांकित किया गया।
फैकल्टी एनरिचमेंट प्रोग्राम ने शिक्षण, अधिगम और मूल्यांकन के क्षेत्र में निरंतर सुधार तथा अकादमिक उत्कृष्टता के प्रति विभाग की प्रतिबद्धता को भी मजबूत किया।

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