Summary

मणिपुर यूनिवर्सिटी में आयोजित अंतरराष्ट्रीय सेमिनार में डॉ. आरके रंजन सिंह ने पूर्वोत्तर और दक्षिण पूर्व एशिया के बीच आर्थिक संबंध मजबूत करने में सांस्कृतिक जुड़ाव की भूमिका पर जोर दिया।

Article Body

पूर्वोत्तर- दक्षिण पूर्व एशिया आर्थिक संबंधों में सांस्कृतिक जुड़ाव जरूरी: डॉ. आरके रंजन सिंह
पूर्वोत्तर- दक्षिण पूर्व एशिया आर्थिक संबंधों में सांस्कृतिक जुड़ाव जरूरी: डॉ. आरके रंजन सिंह
 

इंफाल, 20 अगस्त 2026: भारत के दक्षिण पूर्व एशिया के साथ संबंधों में पूर्वोत्तर भारत को केंद्र में रखा जाना चाहिए और साझा धार्मिक एवं सांस्कृतिक परंपराओं को मजबूत आर्थिक सहयोग की नींव बनाया जाना चाहिए। यह बात मणिपुर यूनिवर्सिटी में आयोजित एक अंतरराष्ट्रीय सेमिनार में वक्ताओं ने कही।

“धार्मिक और सांस्कृतिक संबंधों के माध्यम से पूर्वोत्तर भारत और दक्षिण पूर्व एशिया के बीच आर्थिक संबंधों को बढ़ावा देना” विषय पर आयोजित दो दिवसीय सेमिनार को पूर्वोत्तर क्षेत्र विकास मंत्रालय (MDoNER), भारत सरकार के अधीन नॉर्थ ईस्टर्न काउंसिल, शिलांग द्वारा प्रायोजित किया गया है।

सेमिनार का संयुक्त आयोजन मणिपुर यूनिवर्सिटी के अर्थशास्त्र विभाग, कॉलेज डेवलपमेंट काउंसिल और इंटेलेक्चुअल फोरम ऑफ नॉर्थ ईस्ट–मणिपुर द्वारा किया गया। कार्यक्रम की शुरुआत मणिपुर यूनिवर्सिटी के आधिकारिक एंथम और राज्य गीत से हुई।

उद्घाटन समारोह में पूर्व केंद्रीय विदेश राज्य मंत्री एवं शिक्षा राज्य मंत्री डॉ. राजकुमार रंजन सिंह, मणिपुर यूनिवर्सिटी के कार्यवाहक कुलपति प्रो. आर.के. हेमाकुमार सिंह और हिमाचल प्रदेश केंद्रीय विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति प्रो. कुलदीप चंद अग्निहोत्री सहित कई प्रमुख शिक्षाविद, पूर्व नीति निर्माता, प्रशासक, शोधकर्ता और सांस्कृतिक विशेषज्ञ शामिल हुए।

स्कूल ऑफ सोशल साइंसेज की डीन प्रो. मेमचा लोइतोंगबाम तथा आयोजन समिति के अध्यक्ष और अर्थशास्त्र विभागाध्यक्ष प्रो. दामोदर नेप्राम भी उद्घाटन समारोह में मौजूद रहे।

पूर्वोत्तर से आगे बढ़नी चाहिए एक्ट ईस्ट नीति

मुख्य वक्ता के रूप में संबोधित करते हुए पूर्व केंद्रीय राज्य मंत्री डॉ. राजकुमार रंजन सिंह ने कहा कि भारत की एक्ट ईस्ट नीति दिल्ली से तैयार होकर पूर्वोत्तर तक पहुंचने वाली नीति नहीं होनी चाहिए, बल्कि इसकी दिशा पूर्वोत्तर से दक्षिण पूर्व एशिया की ओर होनी चाहिए।

उन्होंने कहा कि भारत की एक्ट ईस्ट नीति तभी सफल हो सकती है जब पूर्वोत्तर क्षेत्र उसकी नीति निर्माण प्रक्रिया का सक्रिय केंद्र बने।

डॉ. रंजन सिंह ने मोरेह-तामू सीमा को एक ही सांस्कृतिक निरंतरता के दो हिस्सों के बीच महत्वपूर्ण संपर्क बिंदु बताया। उन्होंने कहा कि आर्थिक संपर्क केवल व्यापार के आंकड़ों और परिवहन गलियारों के आधार पर विकसित नहीं किया जा सकता।

इसके लिए बौद्ध धर्म, वैष्णव धर्म, सनामाही परंपरा, मौखिक महाकाव्यों, वस्त्र परंपराओं तथा सदियों से चले आ रहे प्रवास और वैवाहिक संबंधों जैसी साझा सांस्कृतिक विरासत को आधार बनाना होगा।

उन्होंने यह भी कहा कि पूर्वोत्तर में शांति और जातीय सद्भाव किसी भी सार्थक क्षेत्रीय एकीकरण के लिए आवश्यक हैं।

सांस्कृतिक संबंधों से आर्थिक अवसर बढ़ेंगे: कुलपति

मणिपुर यूनिवर्सिटी के कार्यवाहक कुलपति प्रो. आर.के. हेमाकुमार सिंह ने कहा कि भारत और दक्षिण पूर्व एशिया के बीच धार्मिक एवं सांस्कृतिक केंद्र के रूप में पूर्वोत्तर की क्षमता का अभी पूरी तरह उपयोग नहीं हुआ है।

उन्होंने कहा कि मजबूत सांस्कृतिक संबंध आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा दे सकते हैं तथा तीर्थाटन और विरासत पर्यटन को प्रोत्साहित करने के साथ-साथ बुनियादी ढांचे में निवेश और प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर पैदा कर सकते हैं।

उन्होंने कहा कि हथकरघा, हस्तशिल्प, कृषि उत्पाद, आतिथ्य और परिवहन जैसे क्षेत्र स्थानीय उत्पादकों को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय बाजारों से जोड़कर विशेष रूप से लाभान्वित हो सकते हैं।

प्रो. हेमाकुमार ने उम्मीद जताई कि यह सेमिनार मणिपुर यूनिवर्सिटी को भारत, म्यांमार और दक्षिण पूर्व एशिया के बीच ज्ञान केंद्र और अकादमिक सेतु के रूप में स्थापित करने में मदद करेगा।

ऐतिहासिक सांस्कृतिक और तीर्थ सर्किट पुनर्जीवित करने का सुझाव

विशिष्ट अतिथि प्रो. कुलदीप चंद अग्निहोत्री, जो हरियाणा साहित्य एवं संस्कृति अकादमी के कार्यकारी उपाध्यक्ष और हिमाचल प्रदेश केंद्रीय विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति हैं, ने पूर्वोत्तर भारत को भारत और दक्षिण पूर्व एशिया के बीच ऐतिहासिक संपर्क का महत्वपूर्ण द्वार बताया।

उन्होंने कहा कि मोरेह मार्ग कभी भारत को व्यापक दक्षिण पूर्व एशियाई क्षेत्र से जोड़ता था। उन्होंने म्यांमार, थाईलैंड और कंबोडिया के बीच सांस्कृतिक एवं तीर्थ सर्किट को पुनर्जीवित करने का सुझाव दिया।

उन्होंने मोरेह को अंगकोर वाट से जोड़ने तथा मणिपुर के कैनना को वृंदावन से जोड़ने वाले सांस्कृतिक मार्ग विकसित करने का प्रस्ताव रखा।

प्रो. अग्निहोत्री ने कहा कि मणिपुर यूनिवर्सिटी अपनी रणनीतिक स्थिति के कारण क्षेत्र के बौद्धिक और सांस्कृतिक सेतु को फिर से मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।

जन-केंद्रित क्षेत्रीय एकीकरण पर जोर

स्कूल ऑफ सोशल साइंसेज की डीन प्रो. मेमचा लोइतोंगबाम ने कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए लोगों को केंद्र में रखकर क्षेत्रीय एकीकरण की आवश्यकता पर जोर दिया।

उन्होंने कारीगरों, उद्यमियों, महिला-नेतृत्व वाले व्यवसायों, युवा नवप्रवर्तकों और सांस्कृतिक संस्थानों को क्षेत्रीय आर्थिक एवं सांस्कृतिक जुड़ाव की प्रक्रिया में शामिल करने की आवश्यकता बताई।

अर्थशास्त्र विभागाध्यक्ष प्रो. दामोदर नेप्राम ने स्वागत भाषण दिया। कॉलेज डेवलपमेंट काउंसिल के निदेशक और सह-संयोजक प्रो. हंजाबम शुखदेबा शर्मा ने धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत किया।

सेमिनार के संयोजक प्रो. हंजाबम इस्वोरचंद्र शर्मा हैं, जबकि प्रो. सौग्रकपम धर्मेन सिंह सह-संयोजकों में शामिल हैं।

उद्घाटन समारोह का समापन वंदे मातरम् और राष्ट्रगान के साथ हुआ।

सेमिनार में शिक्षाविदों, शोधकर्ताओं और छात्रों ने भी भाग लिया। अकादमिक सत्रों में सुनील मोहंती, ख्वैराकपम राजेन सिंह, प्रो. एम.सी. अरुण कुमार, सोरोखैबम मंगलमजाओ सिंह, डॉ. नोंगथोंबम जितेन, डॉ. याइफाबा निंगथौजम, वांगम सोमोरजीत, डॉ. अनुराधा ओइनाम, प्रो. एल. सूरज सिंह, डॉ. थियाम भारत सिंह, थांगजाम अनिल, डॉ. एटम सुनील सिंह और डॉ. श्रीदा चोंगथाम सहित कई विशेषज्ञों ने विचार-विमर्श किया।

Comments

TOPICS MENTIONED IN THIS ARTICLE

About the Author(s)

  • Naorem Mohen photo

    Naorem Mohen

    Editor, MU Darpan

    Naorem Mohen is the Editor of MU Darpan. He covers news and updates on workshops, seminars, training programmes, academic and cultural events, research activities, and the achievements of students, faculty members, and alumni of Manipur University. His work focuses on highlighting developments in higher education, research, innovation, and the accomplishments of the university community.

    View all articles by Naorem Mohen

Published by · Editorial Policy

मू-दर्पण (MUDARPAN.IN) | मणिपुर विश्वविद्यालय की शैक्षणिक एवं शोध गतिविधियों का हिंदी अभिलेखागार — मणिपुर विश्वविद्यालय की शैक्षणिक, शोध एवं संस्थागत गतिविधियों का एक समर्पित हिंदी डिजिटल अभिलेखागार है, जो विश्वविद्यालय में आयोजित अकादमिक कार्यक्रमों, सम्मेलनों, संगोष्ठियों, कार्यशालाओं और महत्वपूर्ण आयोजनों का प्रामाणिक दस्तावेजीकरण प्रस्तुत करता है।